माहवारी को यौवन की शुरुआत कहा जाता है. महिलाएं इस का अनुभव किशोरावस्था से ले कर मध्य आयु तक करती हैं. फिर भी अभी तक हमारे समाज में इस के बारे में खुल कर बात नहीं की जाती है. यहां तक कि कुछ लोगों की तो मान्यता है कि माहवारी के समय महिलाएं बीमार और अछूत हो जाती हैं.

इस तरह की बातें दकियानूसी होती हैं. माहवारी कोई बीमारी नहीं है. माहवारी महिलाओं को प्रकृति का एक अनमोल तोहफा है, जो महिलाओं को पूर्ण बनाता है. महिलाओं को माहवारी के दौरान शर्म की जगह गर्व महसूस करना चाहिए, क्योंकि वे पूर्ण हैं.

जानकारी जरूरी

हर लड़की को माहवारी की समस्या से जूझना पड़ता है. लेकिन यह समस्या तब और बड़ी लगने लगती है जब बिना किसी जानकारी के इस से निबटना पड़े. अकसर लड़कियां झिझक के कारण किसी से माहवारी के विषय में बात नहीं करतीं. नतीजा यह होता है कि अचानक पीरियड्स शुरू हो जाते हैं और वे घबरा जाती हैं. इस घबराहट में वे अपनी तबीयत खराब कर लेती हैं. जबकि उन्हें पहले से ही माहवारी की जानकारी हो तो इस स्थिति से निबटना उन के लिए आसान हो जाता है.

सभी मांओं को अपनी बेटियों को उन के शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों के बारे में पहले से बताना चाहिए. ऐसा करने से मांएं अपनी बेटियों को बेवजह तनाव का शिकार बनने से रोक पाएंगी.

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