रीना औफिस से थकीहारी आई थी. आज औफिस में लंबी मीटिंग चली. अभी कपड़े बदल कर सोफे पर बैठी ही थी और सोच रही थी कि डिनर में कुछ हलका-फुलका बना ले तभी निखिल ने घर में घुसते ही ऐलान किया कि आज रात का खाना बाहर खाएंगे.
रीना झुंझला उठी. दिनभर की थकी-मांदी, डेढ़ घंटा मेट्रो की भीड़ में खड़े-खड़े सफर करके घर पहुंची है. अभी-अभी कपड़े बदले हैं और अब बाहर जाने के लिए फिर से तैयार हो?
रहने दो, मैं घर में ही कुछ सदा सा बना लेती हूं, उसने निखिल को मना करना चाहा.
निखिल थोड़ा नाराज हो गया, बोला, ‘‘मैं तो तुम्हारे लिए ही कह रहा था. थकी हुई दिख रही हो. अब किचन में घुसोगी. आधे घंटे में उबला सा खाना बनाओगी और डेढ़ घंटा किचन साफ करने में लगाओगी.’’
