रमा जब औफिस पहुंची तो उस का मूड उखड़ा हुआ था. चेहरे पर शिकनें साफ दिखाई दे रही थीं. वह गुस्से में कीबोर्ड पर उंगलियां कुछ ज्यादा ही तेज चला रही थी.
रमा की बगल वाली कुरसी पर बैठी सुमिता ने जब रमा से उस की परेशानी की वजह जाननी चाही तो वह भावुक हो उठी, ‘‘आज फिर ओम से झगड़ा हो गया. बात छोटी सी थी, पर बहस बढ़ती चली गई. तंग आ गई हूं मैं इस रोजरोज के झगड़े से.’’
‘‘झगड़ा तो हर पतिपत्नी के बीच होता है. इस में मूड इतना खराब करने की क्या बात है? अगर इस बात को ले कर एकदूसरे से बातचीत करना बंद कर दें या घर में कलह का माहौल बन जाए, तो अवश्य ही रिश्ते में दरार आ सकती है. वैसे तो थोड़ीबहुत तकरार आम बात होती है,’’ सुमिता ने उसे समझाते हुए कहा. ‘‘कह तो तू सही रही है, क्योंकि हमारे झगड़े की वजह कुछ नहीं होती और शाम को जब हम दोनों घर पहुंचते हैं, तो सब कुछ सामान्य भी हो जाता है. पर सुबह तकरार हो जाए तो मूड खराब हो ही जाता है,’’ रमा बोली.
इस से पहले कि सुमिता कोई जवाब देती, रमा का मोबाइल बज उठा. उस के बात करने के अंदाज से सुमिता समझ गई कि उस के पति ओम का फोन है. बात करने के बाद रमा का मूड एकदम ठीक हो गया और वह सुमिता को देख कर मुसकराई.
