किशोरावस्था मनुष्य के जीवनकाल का वह समय है, जब न तो बचपन रहता है और न ही जवानी आई होती है. यह दौर किशोरों में शारीरिक व मानसिक परिवर्तन व विकास का होता है. बदलावों के इस दौर से गुजर रहे किशोरों में क्रश के भाव उपजना आम बात है. क्रश एक तरह का आकर्षण है, जो उस के साथ पढ़ने वाले किशोर या किशोरी किसी के प्रति भी उपज सकता है.
क्रश को ज्यादातर लोग प्यार की श्रेणी में ही रख कर देखते हैं, लेकिन यह प्यार से एकदम अलग होता है, क्योंकि प्यार एक बार हो गया तो यह जीवन भर बना रहता है. किशोरों में होने वाला क्रश जनून की हद तक जा सकता है. क्लास में एकदूसरे के हावभाव, बौडी लैंग्वेज, पढ़ाई में तेजतर्रार होने, अलग पहनावा व हेयरस्टाइल, बनसंवर कर रहने के चलते भी हो सकता है. कभीकभी किसी की मासूमियत देख कर भी क्रश हो सकता है.
किशोरावस्था में होने वाले क्रश के दौर में अगर सावधानी न बरती जाए तो यह कैरियर व पढ़ाई को तो बरबाद करता ही है साथ ही जिस के प्रति आकर्षण है उस की पढ़ाई व कैरियर भी चौपट हो सकता है. ऐसे में क्रश विपरीत लिंग के प्रति मात्र आकर्षण ही नहीं बढ़ाता बल्कि जिम्मेदारी का एहसास कराने की पहली सीढ़ी भी माना जाना चाहिए. अगर आप के किशोर मन में किसी के प्रति आकर्षण है तो उस के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभा कर उस की नजर में अच्छे बन सकते हैं.
