अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है, तो ये लेख अंत तक जरूर पढ़ें…

सवाल-

विवाह को 18 साल हो चुके हैं. 2 किशोरवय के बच्चे हैं. मेरे पति प्रशासनिक अधिकारी हैं. घर में हर तरह की सुखसुविधा है. बावजूद इस के मैं अपने पति की कामुक प्रवृत्ति के चलते परेशान हूं. मैं ने एजेंसी से एक लड़की बच्चों की देखरेख व घर के कामकाज के लिए रखी थी पर मेरे पति उस से भी छेड़छाड़ करने से बाज नहीं आए. मजबूरन मुझे उसे हटाना पड़ा. घर में बेटी है, इसलिए नौकर नहीं रख सकती. घर का सारा काम इन दिनों मुझे करना पड़ता है, जिस से मैं बेहद थक जाती हूं. बताएं क्या करूं?

जवाब-

आप ने अच्छा किया कि अपनी मेड को हटा दिया. घर के कामकाज के लिए फुल टाइम मेड न रख कर सुबहशाम साफसफाई व बरतन आदि के लिए बाई रख लें, जो काम करने के बाद लौट जाए. इस से आप को मदद भी मिल जाएगी और पति की ओर से भी आशंकित नहीं रहेंगी.

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कालेज के दिनों में मैं ज्यादातर 2 सहेलियों के बीच बैठा मिलता था. रूपसी रिया मेरे एक तरफ और सिंपल संगीता दूसरी तरफ होती. संगीता मुझे प्यार भरी नजरों से देखती रहती और मैं रिया को. रही रूपसी रिया की बात तो वह हर वक्त यह नोट करती रहती कि कालेज का कौन सा लड़का उसे आंखें फाड़ कर ललचाई नजरों से देख रहा है. कालेज की सब से सुंदर लड़की को पटाना आसान काम नहीं था, पर उस से भी ज्यादा मुश्किल था उसे अपने प्रेमजाल में फंसाए रखना. बिलकुल तेज रफ्तार से कार चलाने जैसा मामला था. सावधानी हटी दुर्घटना घटी. मतलब यह कि आप ने जरा सी लापरवाही बरती नहीं कि कोई दूसरा आप की रूपसी को ले उड़ेगा.

मैं ने रिया के प्रेमी का दर्जा पाने के लिए बहुत पापड़ बेले थे. उसे खिलानेपिलाने, घुमाने और मौकेबेमौके उपहार देने का खर्चा उतना ही हो जाता था जितना एक आम आदमी महीनेभर में अपने परिवार पर खर्च करता होगा. ‘‘रिया, देखो न सामने शोकेस में कितना सुंदर टौप लगा है. तुम पर यह बहुत फबेगा,’’ रिया को ललचाने के लिए मैं ऐसी आ बैल मुझे मार टाइप बातें करता तो मेरी पौकेट मनी का पहले हफ्ते में ही सफाया हो जाता.

मगर यह अपना स्पैशल स्टाइल था रिया को इंप्रैस करने का. यह बात जुदा है कि बाद में पापा से सचझूठ बोल कर रुपए निकलवाने पड़ते. मां की चमचागिरी करनी पड़ती. दोस्तों से उधार लेना आम बात होती. अगर संगीता ने मेरे पीछे पड़पड़ कर मुझे पढ़ने को मजबूर न किया होता तो मैं हर साल फेल होता. मैं पढ़ने में आनाकानी करता तो वह झगड़ा करने पर उतर आती. मेरे पापा से मेरी शिकायत करने से भी नहीं चूकती थी.

 

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