मेरी उम्र 38 साल है. मैं टीबी का मरीज हूं. 6 महीनों से मेरी पीठ के निचले हिस्से में बहुत तेज दर्द होता है. एक्सरे कराने पर आर्थ्राइटिस का पता चला, लेकिन दवाइयों के बाद भी बिलकुल राहत नहीं है. बुखार भी जल्दीजल्दी आता है. कृपया कोई समाधान बताएं?
आप ने जिस प्रकार अपनी समस्या का जिक्र किया है उस के वास्तविक कारण की पुष्टि केवल सीटी स्कैन या एमआरआई से ही संभव है. हालांकि आप के द्वारा बताए गए लक्षणों से यह साफ पता चलता है कि यह सिर्फ आर्थ्राइटिस तो नहीं है क्योंकि इस समस्या में सोते वक्त मरीज को दर्द में राहत मिलती है जबकि आप के साथ उलटा है. इस के अनुसार आप को रीढ़ की टीबी हो सकती है जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल कर उन्हें प्रभावित करती है संभवत: आप के साथ भी यही हुआ है. जल्द से जल्द एमआरआई करा के उचित इलाज लें.
मेरी उम्र 25 साल है. मेरा काम लैपटौप पर होता है. मेरी पीठ में दर्द होने लगा है. ऐसे में काम करने में मुश्किल होती है. बताएं मैं क्या करूं?
गतिहीन जीवनशैली, गलत मुद्रा में बैठना, लेट कर लैपटौप पर काम करना, लगातार एक ही मुद्रा में काम करना और उठनेबैठने के गलत तरीकों के कारण घर से काम कर रहे लोगों में रीढ़ की समस्याएं विकसित हो रही हैं. ये सभी फैक्टर रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों पर तेज दबाव बनाते हैं. सर्वाइकल पेन भी इसी से संबंधित एक समस्या है जो गरदन से शुरू होता है. ऐसे में रोज ऐक्सरसाइज करना, बौडी स्ट्रैच, सही तरीके से उठनाबैठना, सही तरीके से झुकना और शरीर को सीधा रखना आदि चीजें जरूरी हैं. पोषणयुक्त डाइट लें, जिस में प्रोटीन, सलाद, फल और हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में मौजूद हों. शरीर में विटामिन डी की कमी न हो इसलिए रोज थोड़ी देर धूप में बैठना जरूरी है.
मेरी उम्र 43 है. कई दिनों से मेरी हड्डियों में बहुत दर्द हो रहा है. कमजोरी महसूस होती है जिस के कारण मैं कहीं भी गिर जाती हूं. मुझे एक और समस्या है कि मेरे एक घुटने का जोड़ बारबार टूट जाता है. ऐसा क्यों हो रहा है और इस का समाधान क्या है?
हमारी हड्डियां कैल्सियम, फास्फोरस और प्रोटीन के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स से बनी होती हैं. बढ़ती उम्र के साथ खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है वरना हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. गलत खानपान, बदलता लाइफस्टाइल, व्यायाम की कमी, शराब का अत्यधिक सेवन, शरीर में कैल्सियम, विटामिन डी और प्रोटीन की कमी आदि के कारण भी हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं जिस के कारण इस प्रकार की समस्या होती हैं. ऐसी घटनाओं में, कूल्हे व जोड़ों की हड्डियों के टूटने की संभावना अधिक होती है. बीमारी से छुटकारा पाने के लिए जल्द से जल्द इलाज शुरू करें, खानपान सही रखें, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और हड्डियों की नियमित मालिश कराएं. बीमारी ज्यादा गंभीर होने पर हिप या नी रिप्लेसमैंट की जरूरत पड़ सकती है.
मेरी उम्र 28 साल है. 1-2 महीनों से पीठ के दर्द ने परेशान कर रखा है. घर का काम करने और झुकने में अब बहुत मुश्किल होती है. कृपया बताएं इस से कैसे छुटकारा पाऊं?
इस प्रकार का पीठ का दर्द रीढ़ की हड्डी में आए खिंचाव और दबाव के कारण होता है. मरहम लगाने और आराम करने से दर्द में राहत मिलेगी. एक सक्रिय जीवनशैली के साथ संतुलित आहार और बैठने, चलने और ?ाकने के दौरान सतर्कता के साथ इस दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है. रीढ़ को प्रभावित होने से रोकना चाहती हैं तो एक मुद्रा में बहुत देर तक खड़ी या बैठी न रहें. प्रैस करने, बरतन धोने व खाना बनाने आदि कामों के लिए पीठ और गरदन झुकानी पड़ती है, इसलिए अपने शरीर के पोस्चर पर ध्यान दें. यदि यह दर्द गंभीर है और आराम के बाद भी ठीक न हो या बारबार दर्द की शिकायत हो तो जांच अवश्य कराएं. समय पर इलाज से समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी.
मेरी उम्र 42 साल है. कई दिनों से मेरी पीठ और हाथों में अचानक दर्द होने लगता है. पीठ के दर्द की तीव्रता हर बार अलग होती है. मलमूत्र में भी समस्या हो रही है और कभीकभी पैरों में भी दर्द होता है. क्या ये किसी बीमारी के लक्षण हैं या कोई सामान्य समस्या है? दर्द से कैसे छुटकारा पाऊं?
आप के द्वारा बताए गए सभी लक्षण स्पाइनल इन्फैक्शन की ओर इशारा करते हैं. हालांकि समस्या कोई और भी हो सकती है, इसलिए एमआरआई करवा के सही समस्या की पुष्टि करें. इस में रीढ़ का आकार खराब हो सकता है, इसलिए इलाज में देरी बिलकुल न करें. स्पाइनल संक्रमण का सब से सामान्य उपचार इंट्रावीनस ऐंटीबायोटिक दवाइयों के सेवन, ब्रेहेसग और शरीर को पूरी तरह आराम देने के साथ शुरू होता है. वर्टिब्रल डिस्क में रक्तप्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है, इसलिए जब बैक्टीरिया अटैक करता है तो शरीर की इम्यून कोशिकाओं और ऐंटीबायोटिक दवाइयों को संक्रमण के स्थान तक पहुंचने में मुश्किल होती है. वहीं ब्रेसिंग संक्रमण के उपचार के दौरान रीढ़ को सही आकार में रखने में मदद करती है. 7-8 हफ्तों के लिए ऐंटीबायोटिक्स का सेवन करने के लिए कहा जाता है, साथ ही ब्रेसिंग की जाती है जो संक्रमण के ठीक होने तक रीढ़ को सही आकार में रखने में मदद करती है. इस का दूसरा इलाज सर्जरी है, जिस की सलाह तब दी जाती है जब संक्रमण पर मैडिकेशन का कोई असर नहीं पड़ता है.
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