सवाल

मेरी बहन और जीजाजी की कोरोना के कारण मृत्यु हो गई है. उन का 14 वर्षीय बेटा, जो उस वक्त उन के साथ ही था, उस ने 1 सप्ताह के भीतर अपने माता और पिता दोनों का अंतिम संस्कार किया. हालांकि हम उस बच्चे को अपने साथ अपने परिवार में ले आए हैं, लेकिन आज मेरा भतीजा पूरी तरह से शांत हो गया है. वह न ही किसी से बात करता है और न ही ठीक से पढ़ाई कर पाता है और खेल भी नहीं पाता. वह हाथपैर में दर्द बताता है और उस को एंग्जाइटी अटैक्स भी आते हैं. हम ने हर तरह से उस की डाक्टरी जांच करवाई है, लेकिन उस की हालत में कोई सुधार नहीं आ पा रहा है. क्या करें?

जवाब-

इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा सदमा बरदाश्त करना बेहद मुश्किल होता है. यकीनन बच्चा सीवियर डिप्रैशन और ऐंग्जाइटी का मरीज है. इस स्थिति से उबरने में आप के प्यार और सहयोग की बेहद जरूरत है. उसे किसी साइकोलौजिकल काउंसलर से काउंसलिंग जरूर दिलवाएं क्योंकि जब तक वह खुद इस स्थिति को ऐक्सैप्ट कर के उस से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करेगा दवा भी ज्यादा असर नहीं कर पाएगी. काउंसलिंग के बाद जल्दी उपचार के लिए आप ट्रांस्क्रैनिअल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन की मदद ले सकती हैं.

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काउंसलर रवि कुमार सरदाना बताते हैं कि वर्तमान समय  में बच्चों के अंदर पनप रहे तनाव, अवसाद व डर को दूर करने के लिए अभिभावकों की जिम्मेदारी अपने बच्चों के प्रति कई गुणा बढ़ गई है. उन्हें बच्चों को क्वालिटी टाइम देने के लिए गैजेट्स से थोड़ी दूरी बना कर चलना होगा, तभी वे बच्चों को समझ पाएंगे व उन्हें अपनी तरफ खींच पाएंगे. आप को बच्चा बन कर उन के साथ बच्चों जैसे खेल खेलने होंगे. चाइल्ड साइकोलौजी को समझना होगा. वे बड़ों के साथ न तो ज्यादा खेलना पसंद करते हैं और न ही उन से अपनी कोई बात साझा करना चाहते हैं. ऐसे में आप को उन को समझने के लिए उन जैसा बनना होगा, उन की चीजों में दिलचस्पी लेनी होगी. बच्चों को स्ट्रैस से दूर रखने के लिए उन्हें उन सब चीजों में इन्वौल्व करें, जिन में उन की रुचि हो क्योंकि मनपसंद चीज मिलने से वे खुश रहने लगेंगे, जो उन्हें तनाव से भी दूर रखेगा और साथ ही उन की कला को भी उभारने का काम करेगा.

कोरोना के टाइम में बच्चे घरों में बंद हैं. किसी से भी नहीं मिल पा रहे हैं. दोस्तों से खुले रूप में मिलनेजुलने  पर पाबंदियां जो हैं. खुद को हर समय चारदीवारी के पीछे पा कर अकेलापन महसूस कर रहे हैं. हर समय सब के घर में रहने के कारण घर का माहौल भी काफी तनावपूर्ण होता जा रहा है. घर में छोटीछोटी बातों पर नोकझोंक बच्चों के मन पर बहुत गहरा प्रभाव डाल रही है. ऐसे में इस नए बदलाव से उन्हें बाहर निकालने की जिम्मेदारी पेरैंट्स की है ताकि यह अकेलापन उन के मन पर इतना हावी न हो जाए कि आप के लिए बाद में उन्हें संभालना मुश्किल हो जाए. इसलिए समय रहते संभल जाएं और अपने बच्चों को भी संभालें.

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