सवाल-

मेरी उम्र 27 साल है. मु झे हैवी वर्कआउट करना पसंद है. लेकिन ठंड में रनिंग के दौरान मु झे घुटनों के नीचे बहुत ज्यादा दर्द होता है, जिस के कारण ठीक से वर्कआउट नहीं कर पाता हूं. मु झे बताएं कि ऐसा क्यों होता है और इस से कैसे छुटकारा पाया जाए?

जवाब-

चूंकि आप हैवी वर्कआउट करते हैं, इसलिए आप के घुटनों के नीचे वाले लिगामैंट पर इस का प्रभाव पड़ता है. अपने वर्कआउट को थोड़ा कम करने की कोशिश करें. अगर आप वर्कआउट जिम में करते हैं तो ऐसा विटामिन डी की कमी से भी हो सकता है, जो धूप न सेंकने के कारण होता है. यदि आप धूप में रनिंग करेंगे तो आप के लिगामैंट मैं दर्द होना बंद हो जाएगा.

वर्कआउट के दौरान अच्छी कंपनी के जूते पहनें, जिन में आप कंफर्टेबल महसूस करें और आप के पैरों में किसी प्रकार का दबाव या दर्द न महसूस हो. इस के अलावा अपना आहार भी ऐसा रखें, जिस में सभी जरूरी मिनरल्स के साथसाथ विटामिन डी भी भरपूर मात्रा में हो. दौड़ने के बाद कुनकुने पानी से सिंकाई करने की आदत डालें. इस से भी दर्द से राहत मिलेगी.

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फरीदाबाद, हरियाणा के एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंसैस के सीनियर कंसल्टैंट और और्थोपैडिक्स विभाग के प्रमुख डा. मृणाल शर्मा का कहना है कि युवतियों को समस्याओं पर गौर करना चाहिए ताकि वे स्वस्थ जिंदगी जी सकें.

मीनोपौज की मार

आमतौर पर दुनियाभर में महिलाओं को मीनोपौज 45 से 55 वर्ष की उम्र में होता है, लेकिन हाल ही में द इंस्टिट्यूट फौर सोशल ऐंड इकोनौमिक चेंज के सर्वे से पता चला है कि करीब 4 फीसदी भारतीय महिलाओं को मीनोपौज 29 से 34 साल की उम्र में ही हो जाता है, वहीं जीवनशैली मेें बदलाव के चलते 35 से 39 साल के बीच की महिलाओं का आंकड़ा 8 फीसदी है.

एस्ट्रोजन हार्मोन महिलापुरुष दोनों में पाया जाता है और यह हड्डियों को बनाने वाले औस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं की गतिविधियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मीनोपौज के दौरान महिलाओं का एस्ट्रोजन स्तर गिर जाता है, जिस से औस्टियोब्लास्ट कोशिकाएं प्रभावित होती हैं. इस से महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं.

शरीर में एस्ट्रोजन की कमी से कैल्शियम सोखने की क्षमता कम हो जाती है और हड्डियों का घनत्व गिरने लगता है. इस से महिलाओं को औस्टियोपोरोसिस और औस्टियोआर्थ्राइटिस जैसी हड्डियों से जुड़ी बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है.

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