Inspiring Story :  जोधपुर की अनीता शेखावत उन के लिए प्रेरणा है, जो हारने के बाद हताश हो जाती हैं. मीठी सी शक्लोसूरत की अनीता का जन्म आर्मी बैकग्राउंड की फैमिली में हुआ था इसलिए बचपन में ही अनुशासन से गहरी दोस्ती हो गई थी. बड़े होकर अपनी एक अलग पहचान बनानी थी इसलिए कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद प्रतियाेगी परीक्षाएं देनी शुरू की. काफी मेहनत करती रहीं, इस बीच शादी हो गई हालांकि उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. 

अनीता बताती हैं, “मैंने कई सारे एग्जाम्स दिए जैसे आईएएस, राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज, पीओ  लेकिन फिर मैं थक गई और बुरी तरह से हताश हो गई. तब मैं खुद से इतनी निराश हो गई थी कि मन ही मन यह सोच लिया था कि अब मुझे कुछ नहीं करना है. लेकिन कुछ महीनों में ही मन की यह सोच ने हार मान लिया और कुछ करगुजरने के इरादे ने सिर उठा लिया. मैंने एक नई शुरुआत करनी चाही. खुद को एकऔर मौका देने की ठानी.” 

जहां जिंदगी ने खुशनुमा मोड़ लिया 

अनीता के अनुसार, “इन दिनों मैं एक ट्रेनिंग प्रोग्राम का विज्ञापन देखा और उसे जॉइन कर लिया.  यही से मेरी जिंदगी बदल गई.  ट्रेनिंग के ये दिन मेरी जिंदगी का टर्निंग पौइंट था, इस ट्रे निंग में मेरी कई ऐसी महिलाओं से मुलाकात हुई जिसमें से हर कोई बिजनेस कर रही थी जबकि इसके ठीक विपरीत मैं किसी व्यवसायिक घराने से ताल्लुक नहीं रखती थी, दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो मेरी फैमिली में दूरदूर तक किसी का बिजनेस से कोई लेनादेना नहीं था. मेरे लिए यह दुनिया बहुत ही अलग थी.”

बिजनेस का गणित समझना आसान नहीं था
पंद्रह दिनों की ट्रैनिंग के दौरान अनीता की मुलाकात कई ऐसी महिलाओं से हुई जो बिजनेस कर रही थी जबकि इसके ठीक विपरीत अनीता किसी व्यवसायिक घराने से ताल्लुक नहीं रखती थी, दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो उनकी फैमिली में दूरदूर तक किसी का बिजनेस से कोई लेनादेना नहीं था. उनके लिए यह दुनिया बहुत ही अलग थी. फिर भी वह इसमें जाने को आतुर थी, रिस्क लेने को तैयार थी लेकिन अभी भी एक सवाल उनके सामने मुंह बाये खड़ा था.

.अनीता बताती हैं, “मैंने बिजनेस में हाथ आजमाना चाहा लेकिन तब भी एक प्रश्न था कि किस बिजनेस में हाथ आजमाया जाए और आखिरकार काफी सोचने और रिसर्च करने के बाद मैंने टेक्सटाइल की विशाल दुनिया में अपने लिए छोटी जगह तलाशने की मुहिम शुरू कर दी. इसके लिए मैंने फैशन डिजाइनिंग करने की सोची और इसका डिप्लोमा कोर्स किया.”  

महिला होने का सच 

अब भी अनीता शेखावत के पास कई चैलेंज थे, वह शादीशुदा थी, एक पारंपरिक राजपूत फैमिली की बहू थी इसलिए ससुरालवालों को इस नई शुरुआत के लिए मनाना टेढ़ी खीर था. अनीता इस बात पर जोर देती है कि इस वक्त केवल मेरे साइंटिस्ट हसबैंड का साथ था.  अनीता के लिए बिजनेस शुरू करने के रास्ते में एक और बाधा थी और वह थी व्यापार के लिए पूंजी कहां से आएगी, स्वाभिमानी अनीता किसी से पैसे नहीं लेना चाहती थी इसलिए उन्होंने जीरो से ही शुरुआत करने की ठानी. 

शुरुआत के वे दिन

उन दिनों को याद करते हुए अनीता बताती हैं कि फाइनैंस की बात तो दूर है मोरल सपोर्ट तक नहीं मिल पा रहा था, हर किसी की बातें निराश करने वाली थी. सदियों से महिलाओं पर जो बंदिशें डाली गई है या समाज के नाम पर स्त्रियों के सपनों को जिन बेड़ियों में बांधा गया है, उसे तोड़ना आसान नहीं था लेकिन इस बार उनका इरादा पक्का था,  जिद पक्की थी. इसी जिद ने उनके क्लोदिंग ब्रांड की महारानीसा डिजाइन की नींव रखी. उन्होंने राजपूताना पंरपराओं को अपने क्लाेदिंग ब्रांड के प्रोडक्ट्स में पेश किया. पत्ते, फूल, पंछी के मोटिफ्स में गोल्डन, सिल्वर जरी, चटक रंगों से इमोशन्स भरा और एक से बढ़ कर एक डिजाइन की रचना कर डाली. 

ढूढ़िंए, अपने अंदर की अनीता को

उन दिनों को याद करते हुए अनीता ने सुनाया कि चुनौतियां आज भी है, महिला होने की वजह से पारिवारिक जिम्मेदारियां अधिक है, बिजनेसवुमन होने की वजह से मार्केट की व्यवस्था को लेकर भी प्रेशर होता है. करीब आठ साल हो गए हैं बिजनेस को शुरू किए हुए लेकिन आज भी मेरी ऊर्जा उस दिन की तरह है जब मैंने इसे शुरू किया था. 

अनीता शेखावत की आज अलग पहचान है. वह एक सफल बिजनेसवुमन बन गई हैं. आज बिजनेस से जुड़े इवेंट्स का अहम हिस्सा बन चुकी हैं. आज ढेरों महिलाओं को वह सफल बिजनेस व होने के गुर बताती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें सुननेवाली हर महिला में एक अनीता शेखावत छिपी है, सफलता जिसकी राह देख रही है.

 

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...