Friendship advice for adults : प्रिया  की सहेली पूजा की न शक्ल वैभव को पसंद है न ही अकल. फिर भी पूजा के हर फंक्शन में वैभव को जाना तो पड़ता ही है और फिर वहां उस की तारीफ भी करनी पड़ती है. आखिर पूजा वैभव की बीवी प्रिया की बैस्टी जो है.

आप से ऐसे बहुत से और लोग जुड़ ही जाते हैं, जिन की मौजूदगी आप को पसंद भी नहीं होती, फिर भी आप को उन का साथ निभाना पड़ता है. उन्ही अनचाहे लोगों की लिस्ट में आते हैं आप के पार्टनर के दोस्त. सभी नहीं लेकिन कुछ तो ऐसे निकल ही आते हैं जो आप को पसंद नहीं होते.

अपने रिश्ते को पहली महत्ता दें: पतिपत्नी का रिश्ता एक नाजुक रिश्ता होता है. छोटी सी बात हुई नहीं कि तिल का ताड़ बन जाता है. इसलिए अगर कुछ देर के लिए अपने पार्टनर के अनचाहे दोस्तों से कभीकभार मिलने से, साथ आनेजाने से परेशान न हों. देखिए उन के दोस्त, सहेली उन की लाइफ का एक हिस्सा ही हैं, जिस तरह आप के दोस्त आप की लाइफ के हैं. तो जब अपने दोस्तों के अपने पति या आप अपनी पत्नी को उन से हिलानामिलाना चाहते हैं तो आप उन के दोस्तों से मिलने पर एतराज न करें.

आप की उपेक्षा कहीं आप के साथी को परेशानी न दे दे. इसलिए उन के मन के लिए

ही कभीकभार उन के दोस्तों के बीच शामिल

होने में कोई हरज नहीं बल्कि आप की सहमित आप दोनों के रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाएगी.

एक दायरा बनाएं: दोस्तों के बीच हर तरह की खिंचाई, हंसीमजाक व व्यंग्यबाजी चलती रहती है. लेकिन यह सारी क्रिया और उस पर की प्रतिक्रिया अपने पार्टनर के ऊपर नहीं की जा सकती. इसलिए अच्छा हो कि जब आप के साथी आप के साथ हों तो एक दायरे में रह कर ही कोई खेल क्रिया करें.

कुछ कौमन अर्थात सामान्य पसंद चुनें: पार्टनर के जिन दोस्तों या दोस्त से आप की नहीं जमती उन के और आप के बीच कोई एक कौमन इंटरैस्ट या कोई ऐक्टिविटी देखें. कोई एक कौमन इंटरैस्ट भी आप दोनों को एकदूसरे के साथ बैठने और समय बिताने के लिए अच्छा जरीया बन सकता है. इस से आप दोनों को एकदूसरे की कंपनी ज्यादा नहीं खलेगी.

सैंसिटिव टौपिक न छेड़ें: कुछ विषय ऐसे भी होते हैं जिन पर बात करना अकसर बहस करने को जन्म दे देता है जैसे धर्म, राजनीतिक मुद्दे, भाषा, पसंदीदा कलाकार आदि. तो कोशिश करें कि इन पर छिड़ी बात अगर किसी विवाद का रूप ले सकती है तो उसे वहीं रोक दें. किसी और विषय की बात छेड़ दें और यदि विवाद हो ही गया है तो उसे शांति से निपटाएं.

बीच की पकड़ बनें न कि अलगाव: चाहे दोस्त पति के हो या पत्नी के याद रहे कि अपने दोस्तों और अपने पार्टनर के बीच की कड़ी आप ही हैं. आप ही दोनों को एकसाथ किसी मौके पर साथ लातेमिलाते हैं. इसलिए दोनों के बीच संतुलन भी आप को ही रखना है. यह न हो कि किसी एक का पक्ष लेते आप किसी एक के लिए विपक्ष बन जाएं.

साथी की मानमर्यादा का ध्यान रखें: यारदोस्तों के बीच या सहेली के बीच इतना आवश्य ध्यान रखें कि उन के मुंह से या आप के मुंह से कुछ ऐसा न निकल जाए जो आप के पार्टनर की मां को ठेस पहुंचा सके.

अगर किसी बात पर असहमति हो भी या कोई

बात गलत भी लगे तो सभी के सामने कोई भी तीखी प्रतिक्रिया देने से बचें. मना वहां सब आप के अपने ही हैं लेकिन एक पतिपत्नी के रिश्ते

में कोई भी व्यक्ति एक तीसरा शख्स ही कहलाता है. भले वह कितना भी घनिष्ठ या नर्सरी से दोस्त हो. वह पतिपत्नी के बीच हमेशा एक तीसरा ही रहेगा. तो किसी भी तीसरे के आगे अपने पति या पत्नी की मानमर्यादा का ध्यान रखना आप का ही फर्ज है.

सहमति और असहमति दोनों को अपनाएं: आप की राय पर हरकोई सहमति तो नहीं दिखा सकता और न हरकोई असहमति ही दिखाएगा. इसलिए आप को दोनों के लिए ही तैयर रहना चाहिए. अगर कोई आप से सहमत नहीं तो उसे तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय उस के मत को स्वीकार करें. अन्यथा एक संवाद एक विवाद में बदल जाएगा.

खुलेपन पर चरित्र को ना आंकें: यार दोस्तों और सहेलियों के बीच हरकोई खुला हो कर बातव्यवहार करता है. ऊंचनीच का या औपचारिकता का इतना ध्यान नहीं रखता. इसलिए ऐसे अवसरों पर अपने पार्टनर के दोस्तों या सहेलियों के खुले संवाद या व्यवहार पर उन के चरित्र या शिष्टाचार का आंकलन न करें.

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