Social Media : स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म्स ने जहां लोगों के जीवन को आसान बनाया है वहीं इस के दुरुपयोग से कई तरह की विकृतियां भी उत्पन्न हुई हैं.
स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, औनलाइन गेम्स की लत किसी नशे की लत की तरह लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रही है. इस का सब से बुरा असर पतिपत्नी के रिश्तों पर पड़ा है. डिजिटल लत के कारण पतिपत्नी के बीच संवाद के कम होने से रिश्ते को खालीपन से भर दिया है. उन के बीच भावनात्मक और शारीरिक दूरी बढ़ी है. उन के बीच क्वालिटी टाइम की जगह डिवाइस ने ले ली है, जिस से पतिपत्नी का रिश्ता कमजोर पड़ रहा है. एकदूसरे के प्रति प्रेम और विश्वास की जगह बेवजह के शक तथा ?ागड़े एवं तनाव ने ले ली है. इस के अनेक उदाहरण आए दिन समाज में देखने को मिल रहे हैं.
यूपी के हापुड़ जिले में एक पत्नी अपने पति के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराने सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि उस के इंस्टाग्राम पर
2 फौलोअर्स कम हो गए थे. महिला का आरोप था कि उस के पति के कहने पर उसे बरतन धोने जैसे घर के काम करने पड़े, जिस से उसे इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने का समय नहीं मिला और उस के 2 फौलोअर्स कम हो गए, जबकि पति का यह आरोप था कि पत्नी इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने में ही व्यस्त रहती है और घर के काम नहीं करती.
4 घंटे की काउंसलिंग के बाद पतिपत्नी के बीच समझौता हुआ. यह घटना इस बात की सुबूत है कि सोशल मीडिया की प्राथमिकता पतिपत्नी के रिश्तों पर किस प्रकार भारी पड़ रही है.
जीवन में असंतोष
सोशल मीडिया पर दूसरों की परफैक्ट जिंदगी देख कर लोग अपने रिश्तों की तुलना करने लगते हैं, जिस से उन के जीवन में असंतोष और निराशा की वृद्धि होने लगती है. दिनरात इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट करने तथा अपने फौलोअर्स को चैक करने की प्रवृत्ति लोगों के निजी रिश्तों में तनाव पैदा करती है. सोशल मीडिया पर फौलोअर्स की संख्या बढ़ने से सामाजिक लोकप्रियता और स्वीकृति का एहसास होता है तो दूसरी ओर लगातार अच्छे गुणवत्ता वाली सामग्री पोस्ट करने का दबाव भी बढ़ता है. इस से एक तरह का मानसिक तनाव उत्पन्न होता है. इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर आदि पर दूसरों के फौलोअर्स की संख्या से यूजर्स अपने फौलोअर्स की बढ़ती या घटती संख्या की तुलना करते हैं. यदि फौलोअर्स की संख्या घट रही हो तब असंतोष की भावना बढ़ती है. फौलोअर्स की संख्या कम होने से इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर आदि के उपयोगकर्ता को लगता है कि उस की सामग्री अच्छी नहीं है जिस से उस का आत्मसम्मान प्रभावित होता है. लगातार फौलोअर्स की कमी होने से अस्वीकृति का डर या सामाजिक मूल्यांकन की चिंता होती है जोकि सीधेसीधे मानसिक और भावनात्मक थकान को जन्म देता है और जिस का असर निजी रिश्तों पर भी दिखता है.
मानसिक आघात
हापुड़ की घटना में पत्नी ने फौलोअर्स की संख्या कम होने को अपने आत्मसम्मान से जोड़ कर देखा जिस से उसे मानसिक आघात पहुंचा और इस का असर पतिपत्नी के रिश्तों पर दिखा.
रांची की अशोक नगर कालोनी की रहने वाली 55 वर्षीय सुमित्रा अपने पति के व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर पर देर रात तक लगे रहने की लत से परेशान हो कर अपने पति को छोड़ कर अपने मायके लालपुर रहने चली गई. दरअसल, सुमित्रा का पति देर रात तक सोशल मीडिया पर लगा रहता था, जिस के कारण उन के बीच आए दिन ?ागड़े और विवाद होते थे. अति तो तब हो गई जब सुमित्रा के पति की इस आदत के कारण उन दोनों की फ्लाइट मिस हो गई. इस बात से सुमित्रा इतनी नाराज हुई कि उस ने अपने पति को छोड़ कर मायके रहने का फैसला कर लिया.
सवाल उठता है कि आखिर लोग अपने निजी रिश्तों, विशेष कर पतिपत्नी के रिश्ते को नजरअंदाज कर के सोशल मीडिया को विशेष महत्त्व क्यों देने लगे हैं?
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफौर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक या टिकटौक डोपामिन के त्वरित उत्सर्जन को बढ़ावा देते हैं. डोपामिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क में रासायनिक संदेश वाहक के रूप में कार्य करता है. यह तंत्रिका तंत्र में संकेतों को एक न्यूरान से दूसरे तक पहुंचाने में मदद करता है. इस का मुख्य कार्य मस्तिष्क के इनाम और आनंद केंद्रों को नियंत्रित करना है जोकि प्रेरणा खुशी और पुरस्कार से संबंधित व्यवहारों को प्रभावित करता है. आसान शब्दों में कहें तो मस्तिष्क में एक तरह का आनंद का रसायन है.
लाइक्स, कमैंट्स और शेयर जैसी चीजें तुरंत खुशी का एहसास देती हैं. यह रिश्तो में मिलने वाली दीर्घकालिक संतुष्टि से अधिक तीव्र और त्वरित होती है. रिश्तों में आनंद, गहरा भावनात्मक जुड़ाव, विश्वास और साथ बिताए समय से आता है खासकर पतिपत्नी के रिश्तों में यह प्रक्रिया धीमी और मेहनत वाली होती है. आपसी सम?ा और समर्पण की जरूरत होती है. यहां सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम, फेसबुक की तरह तुरंत परिणाम की प्राप्ति नहीं होती, जबकि सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, फेसबुक आदि में तुरंत आनंद की प्राप्ति होती है, साथ ही कम मेहनत की आवश्यकता पड़ती है.
सोशल मीडिया भी कम जिम्मेदार नहीं
रिश्तों में ऐल्गोरिदम नहीं होते जो हमें लगातार बांधे रखें. यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो धीमी चलती है, जबकि सोशल मीडिया प्लेटफौर्म व्यक्तिगत डेटा जैसे किसी की पसंद, देखने का समय, इंटरैक्शन का उपयोग कर के कंटैंट को इस तरह से क्यूरेट करता है कि उपयोगकर्ता अधिक समय तक स्क्रीन पर बने रहने के लिए बाध्य हो जाता है. यहां ऐल्गोरिदम व्यक्ति की रुचियों को सम?ा कर बेहद आकर्षक और भावनात्मक रूप से उत्तेजक सामग्री ‘वीडियो, पोस्ट’ दिखाते हैं जो उस के ध्यान, आकर्षण क्षमता को बांधे रखता है. गेम्स में रिवौर्ड लूप (पुरस्कार चक्र) का उपयोग होता है, छोटेछोटे पुरस्कार मिलते हैं ताकि व्यक्ति गेम में और अधिक समय बिताए. एल्गोरिदम मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम को उत्तेजित करता है, जिस से लत लगने की संभावना बढ़ती है. ये दोनों ही तकनीकें उपयोग करने वालों को ‘फ्लो स्टे’ में ले जाती हैं, जहां समय का ध्यान नहीं रहता और वास्तविक दुनिया की जिम्मेदारियां और रिश्ते पीछे छूट जाते हैं.
जिम्मेदार कौन
ऊपर की घटना में रांची की रहने वाली सुमित्रा के पति द्वारा सोशल मीडिया पर इस कदर व्यस्त हो जाना कि समय का ध्यान ही नहीं रहा और फ्लाइट मिस हो गई को इसी ‘फ्लो स्टे’ के उदाहरण के रूप में समझा जा सकता है.
डिजिटल टूल्स के कारण पत्नी के बीच बढ़ते विवाद का मुख्य कारण मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग है. स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल रिश्तों में दूरी का कारण बन रहा है. लोग अपने जीवनसाथी के साथ समय बिताने की जगह फोन पर चैटिंग अथवा सोशल मीडिया या गेम्स में व्यस्त रहते हैं.
रिश्तों में दूरी की वजह
आगरा में एक दंपती के बीच विवाद तब बढ़ गया जब पति देर रात तक व्हाट्सएप पर चैटिंग करता था. पत्नी ने शक के चलते उस का व्हाट्सऐप हैक किया, जिस से विवाद पुलिस तक पहुंचा. काउंसलिंग के बाद ही सुलह हुई.
एक अध्ययन के अनुसार 67% लोग अपने जीवनसाथी के साथ समय बिताते हुए भी फोन पर व्यस्त रहते हैं, जिस से रिश्तों में खटास आती है.
एक खबर के अनुसार दिल्ली में एक 26 वर्षीय महिला ने अपने पति पर शक के चलते एक फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाया. महिला को संदेह था कि उस के पति का किसी अन्य महिला के साथ अफेयर चल रहा है. उस ने उस अन्य महिला की तसवीर चुरा कर एक फर्जी अकाउंट बनाया और उस का उपयोग अपने पति की जांच करने के लिए किया. उस ने इस फर्जी अकाउंट से अपने पति को मैसेज भेजे ताकि यह देख सके कि वह जवाब देता है या नहीं. इस के अलावा उस ने उस महिला के दोस्तों और सहकर्मियों को भी परेशान करने वाले मैसेज भेजे. जब पीडि़ता ने शिकायत दर्ज की तो पुलिस ने छापेमारी कर आरोपी महिला को गिरफ्तार किया. उस के पास से वह मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुआ, जिस का उपयोग अपराध में किया गया था. पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि उस ने यह सब अपने पति का किसी अन्य महिला के साथ प्रेम संबंध होने के शक में किया.
पुलिस तक मामला
इस घटना में पत्नी ने मोबाइल फोन का दुरुपयोग कर पति की जासूसी की जिस से न केवल पतिपत्नी के नाजुक रिश्ते को धक्का लगा बल्कि कानूनी काररवाई के कारण सामाजिक मानप्रतिष्ठा की भी क्षति हुई.
आगरा में हरीपर्वत क्षेत्र के एक दंपती की शादी को 1 साल हुआ था. पति एक थोक व्यापारी था और शाम को घर आने के बाद देर रात तक व्हाट्सऐप पर चैटिंग करता रहता था. पत्नी को पति की इस आदत पर शक हुआ और उस ने पति का व्हाट्सऐप अकाउंट हैक कर लिया. जब उस ने चैट्स पढ़े और पति से सवाल किया तो विवाद बढ़ गया. पति को लगा कि उस की निजता का उल्लंघन हुआ है. जबकि पत्नी का कहना था कि वह सिर्फ सच जानना चाहती थी. मामला इतना गंभीर हो गया कि दोनों पुलिस परिवार परामर्श केंद्र पहुंचे. वहां काउंसलर ने दोनों को बैठा कर बातचीत के जरीए गलतफहमी दूर की. यह घटना दिखाती है कि सोशल मीडिया पर चैटिंग ने कैसे छोटी सी शक की चिनगारी को बड़ा विवाद बना दिया.
स्थान बिठुर, घटना जून, 2021 की है. वट सावित्री पूजा के बाद एक महिला ने अपने पति से सैल्फी लेने के लिए उस का मोबाइल मांगा, फोटो खींचने के बाद उस ने गलती से फोन की गैलरी खोल ली. जहां उसे पति की अन्य महिलाओं के साथ अश्लील तसवीरें मिलीं. हैरान और आहत हो कर उस ने पति से इस बारे में सवाल किया जिस के बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई. मामला थाने तक पहुंच गया. यह घटना पतिपत्नी के रिश्ते में गहरी दरार का कारण बनी.
स्मार्टफोन में डाटा सुरक्षित रखना न केवल तकनीकी आवश्यकता है बल्कि यह निजी जिंदगी की गोपनीयता को भी सुरक्षित रखने के लिए सुविधा प्रदान करता है. पतिपत्नी में से कोई एक जब इस का इस्तेमाल अपनी गोपनीयता को सुरक्षित रखने के लिए करता है तो डाटा लीक होने पर उस के वैवाहिक रिश्ते को नुकसान भी पहुंचा जाता है.
खतरनाक अंजाम
यह घटना मुंबई के मलाड ईस्ट, 2024 की है. नितिन जामधे नाम के एक शख्स ने अपनी पत्नी कोमल की चाकू मार कर हत्या कर दी. दोनों की शादी के बाद से ही विवाद चल रहे थे. सुहागरात के दिन भी उन की लड़ाई हुई थी. इस के बाद कोमल अलग रहने लगी थी. नितिन को शक था कि कोमल का किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध है. नितिन ने कोमल की प्राइवेट तसवीर वायरल कर दी जिस के कारण कोमल ने 2023 में उस के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की थी. इस के बावजूद नितिन बारबार कोमल को अपने साथ रहने के लिए कहता था और जब कोमल पैसे मांगती थी तो वह और नाराज हो जाता था. अंतत उस ने कोमल को अपने दोस्त के घर बुला कर उस की हत्या कर दी.
यह मामला मोबाइल से खींची गई तसवीर के दुरुपयोग के साथ ही पतिपत्नी के रिश्ते में बढ़ते अविश्वास और असुरक्षा का एक अत्यंत दुखद उदाहरण भी है.
एक अन्य घटना मेरठ की 2025 की है. मेरठ के गौरव शर्मा ने अपनी पत्नी के कुछ अश्लील वीडियो और तसवीरें मीडिया कर्मियों के साथ शेयर कर दावा किया कि उस की पत्नी के कई पुरुष मित्रों के साथ संबंध हैं और वह उन के साथ घर में ऐयाशी करती है. गौरव का कहना था कि जब उस ने इस का विरोध किया तो पत्नी ने उस के पीछे गुंडे लगा दिए. जिस से उस की जान को खतरा है. यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया.
ये मामले बताते हैं कि व्हाट्सऐप, फेसबुक और अन्य प्लेटफौर्म पर चैटिंग या तसवीरें शेयर करना किस तरह शक का प्रमुख कारण बन रही हैं. पासवर्ड से लौक फोन या गुप्त चैट्स से पार्टनर में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है. एक छोटा सा संदेह भी जैसे देर रात तक चैटिंग या अनजान नंबरों पर बातचीत अकसर बड़े विवादों को जन्म दे रही है.
पतिपत्नी में से किसी एक या दोनों की ही देर रात तक चैटिंग की आदत या किसी अनजान नंबर पर देर रात तक बातचीत पतिपत्नी के नाजुक रिश्ते में शक की गुंजाइश को बढ़ाती है, साथ ही असुरक्षा की भावना भी पनपती है और तब पतिपत्नी का यह रिश्ता एकदूसरे के फोन को चेक करने या हैक करने की स्थिति तक पहुंच जाती है, जिस से पतिपत्नी का रिश्ता सिर्फ टूटता ही नहीं बल्कि हिंसा और कानूनी काररवाई तक भी बात पहुंच जाती है.
फोन बना जी का जंजाल
रतलाम में एक पति ने पत्नी द्वारा दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद अपनी पत्नी की अश्लील तसवीर सोशल मीडिया पर डाल दी, जिस से दोनों के बीच काफी विवाद बढ़ गया. मोबाइल फोन का दुरुपयोग पतिपत्नी के रिश्ते की निजता के उल्लंघन के रूप में भी किया जाने लगा है जोकि बेहद शर्मनाक और निंदनीय है.
जीवनसाथी का मोबाइल चैक करना, पासवर्ड मांगना या निजी चैट्स पढ़ना रिश्तों में तनाव पैदा कर रहा है.
एक ऐसा ही मामला देखनेसुनने को मिला जहां आधुनिक स्मार्टफोन या टच स्क्रीन फोन की मांग पूरी न होने पर पतिपत्नी के बीच विवाद हो गया. आगरा में एक पत्नी ने अपने पति से टच स्क्रीन फोन की मांग की लेकिन पति की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह इसे पूरा नहीं कर सका. इस कारण दोनों के बीच विवाद यहां तक बढ़ गया कि दोनों के बीच मारपीट हो गई जिस से नाराज पत्नी भाग कर मायके चली गई. मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा.
महंगे से महंगा फोन रखने की चाहत और प्रतिस्पर्धा पतिपत्नी के रिश्ते में न सिर्फ तनाव पैदा कर सकती है बल्कि तलाक तक की नौबत भी आ जाती है.
हैदराबाद में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के अंतरंग पलों को बिना उस की जानकारी के रिकौर्ड किया और इसे पोर्न वैबसाइट पर लाइव स्ट्रीम किया. यह कार्य उस ने पैसे कमाने के लिए किया. इस घटना ने पत्नी को मानसिक रूप से आघात पहुंचाया और वह लंबे समय तक अवसाद में रही. डिजिटल टूल्स ने निजी पलों को रिकौर्ड और साझा करने की सुविधा दी, जिस से निजता का गंभीर उल्लंघन हुआ. पति का पैसे के लिए इस तरह का कृत्य करना नैतिक पतन और लालच को दर्शाता है जो डिजिटल टूल्स के करण आसानी से संभव हुआ.
रोहतक में मगन नाम के एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली जब उस की पत्नी दिव्या ने अपने प्रेमी, पुलिस इंस्पैक्टर दीपक के साथ अश्लील वीडियो बना कर उसे भेजा. यह घटना भी पतिपत्नी के रिश्तों में डिजिटल टूल्स के दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ते प्रभाव को दर्शाती है.
डिजिटल टूल्स विशेषरूप से सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स ने रिश्तों में अविश्वास को बढ़ाया है. पतिपत्नी द्वारा एकदूसरे के फोन की जांच करना, चैट्स पढ़ना और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखना आम हो गया है. यह व्यवहार असुरक्षा, नियंत्रण की इच्छा और कम आत्मसम्मान का परिणाम होता है.
स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत ने पतिपत्नी के बीच संवाद को कम किया है. वे एकदूसरे से बात करने के बजाय अपने फोन में व्यस्त रहते हैं, जिस से भावनात्मक दूरी बढ़ी है. मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यह लत डोपामिन रिलीज से जुड़ी है जो सोशल मीडिया प्रयोग से मिलने वाली तत्काल संतुष्टि के कारण उत्पन्न होती है. इस से रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव कम होता है, जिस के परिणामस्वरूप गलतफहमियां और विवाद बढ़ते हैं.
डिजिटल टूल्स का अत्यधिक उपयोग न केवल अविश्वास को बढ़ाता है बल्कि यह मानसिक और शारीरिक हिंसा का कारण भी बन रहा है. हैदराबाद में पति द्वारा पत्नी के अंतरंग पलों को औनलाइन सा?ा करना या रोहतक में पत्नी द्वारा अश्लील वीडियो भेजना मानसिक क्रूरता के गंभीर उदाहरण हैं. दूसरी तरफ सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स ने वर्चुअल रिलेशनशिप और ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स को आसान बना दिया है. ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स अकसर भावनात्मक रिक्ता और पतिपत्नी के रिश्तों में संतुष्टि की कमी के कारण ही उत्पन्न होते हैं. डिजिटल प्लेटफौर्म की गोपनीयता और पहुंच ने इस तरह के रिश्तों को बढ़ावा दिया है.
