लेखिका : निकिता सक्सेना

Wild Wild Women: ‘‘अच्छा, रिकौर्डिंग चालू हो गई है,’’ मैं ने जैसे ही अपना रिकौर्डर औन किया, तब 7 युवा महिलाओं में से एक ने बाकियों को सावधान किया. अब बोलते समय जरा संभलना होगा, उन्होंने मुसकराते हुए कहा. सब इस नकली चेतावनी पर हंसने लगीं. उन की हंसी हमारे चारों ओर प्लेटों की खनखनाहट के शोर में घुल गई.

मैं मध्य दिल्ली के एक रेस्तरां में वाइल्ड वाइल्ड वीमन की सदस्यों से बात कर रही थी. यह मुंबई स्थित 8 परफौर्म्स का एक समूह है जो खुद को भारत का पहला आल फीमेल हिप-हौप क्लैक्टिव कहता है. इंटरव्यू अभी शुरू ही हुआ था कि उन्होंने कहानी की दिशा तय कर दी. एक ऐसा देश, जहां ‘अच्छी औरत’ कहलाने की पहली शर्त अकसर खामोशी होती है, वहां इन युवा महिलाओं का विरोध उन की बुलंद आवाजें हैं.

अक्तूबर की शुरुआत की एक कड़क दोपहर में जब मैं उन से मिली, तब उन्होंने अपना साउंड चैक खत्म ही किया था. उस शाम वे दिल्ली के सुंदर नर्सरी में प्रदर्शन करने वाली थीं, जो एक 16वीं सदी का ऐतिहासिक बाग है. वे उन 10 कलाकार समूहों में शामिल थीं, जो किरण नाडर म्यूजियम औफ आर्ट्स के म्यूजिक फैस्टिवल ‘वौइसेज औफ डाइवर्सिटी’ में प्रदर्शन कर रहे थे. फैस्टिवल को कर्नाटिक गायक, लेखक और ऐक्टिविस्ट टी.एम. कृष्णा ने क्यूरेट किया था.

जब ये महिलाएं थोड़ी देर आराम करने के लिए घास पर बैठीं तब हम ने एकदूसरे से परिचय किया. इस दौरान उन का आपसी अपनापन नजरअंदाज करना मुश्किल था. उन में से एक ने शिकायत करते हुए कहा, ‘‘बहुत गरमी है यार,’’ दूसरी लड़की ने चिढ़ाते हुए कहा, ‘‘इतनी बूजी (नाजुक) मत बन.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन में 5 रैपर्स शामिल हैं. इन में से 2 समूह की सहसंस्थापक हैं: अश्विनी हिरेमठ, जिन का स्टेज नाम क्रांतिनारी है और प्रीति एन. सुतार, जिन्हें हैशटैगप्रीति के नाम से जाना जाता है. बाकी सदस्य हैं जैक्विलिन लुकास, जिन्हें जे क्वीन कहा जाता है: प्रतिका इवैंजेलिन प्रभुणे, जो प्रतिका के नाम से परफौर्म करती हैं और श्रुति राऊत या एमसी महिला. साथ ही इस समूह में शामिल हैं डांसर दीपा सिंह या फ्ला-रा, मुग्धा मांडोकर जिन्हें बीगल एमजीके कहा जाता है, स्केटबोर्डर श्रुति भोसले और ग्रैफिटी आर्टिस्ट गौरी गणपत दाबोलकर. ये सभी अपनी 20वें या 30वें दशक की शुरुआत में हैं.

2020 में अपनी स्थापना के बाद से इस समूह ने 5 सिंगल ट्रैक्स जारी किए हैं और 3 अन्य कलाकारों के साथ सहयोग में प्रस्तुत किए हैं. अपनी परफौर्मैंस के दौरान ये महिलाएं अकसर साड़ी में मंच पर आती हैं और कभीकभी लुंगी में भी. वे पूरे आत्मविश्वास और लगन के साथ मंच पर गतिमान होती हैं. इन के गाने अंगरेजी, मराठी, तमिल, कन्नड़ और हिंदी में होते हैं. इन में व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों ही तरह की सोच शामिल होती है.

सामाजिक मान्यताओं को चुनौती

हाल ही में दिल्ली में आयोजित संगीत और फूड फैस्टिवल ‘साउथ साइड स्टोरी’ में जब ऐंकर ने वाइल्ड वाइल्ड वीमन बैंड के नाम की घोषणा की, ‘तब पूरा स्टेडियम जबरदस्त शोर से गूंज उठा,’ ‘उन के प्रदर्शन ने मंच को उत्सव में तबदील कर दिया. बेझिझक,’ ‘फुल पावर’ परफौर्मैंस ने दर्शकों को लगातार बांधे रखा. लेखक अरन्या पडिल ने आउटलुक पत्रिका में लिखा.

इस समूह की पंक्तियां प्रभावशाली हैं क्योंकि वे पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र में फिट नहीं होतीं बल्कि ‘‘वे मुंबई का स्लैंग और अपनी पहचान से जुड़ी स्थानीय भाषाई अभिव्यक्तियों का प्रयोग करती हैं,’’ वाइल्ड वाइल्ड वीमन रूपक और पौप संस्कृति से जुड़े संदर्भ उन के संगीत को उन वास्तविक अनुभवों से जोड़ते हैं, जिन्हें युवा पीढ़ी आसानी से सम झ और महसूस कर सकती है. अरन्या आगे लिखते हैं.

संगीत और पौप संस्कृति की प्रकाशन रोलिंग स्टोन इंडिया में पत्रकार अनुराग टगट लिखते है, ‘‘वाइल्ड वाइल्ड वीमन की विशिष्टता उन के गानों में होती है, जो एकता में शक्ति ढूंढ़ने, शरीर के प्रति सकारात्मक सोच को अपनाने और महिला के तौर पर अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरीए सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देने तथा अपनी जीत का उत्सव मनाने पर केंद्रित होते हैं.’’

उन की विशिष्टता उन के अनुभवों की विविधता में निहित है. ‘‘क्योंकि हम इतने सारे हैं, हर कोई अपनेअपने परिवेश, अपनेअपने नजरिए या अपनीअपनी समस्याओं से जुड़ा है,’’ क्रांतीनारी ने मु झे बताया, ‘‘यह संदर्भ के हिसाब से बहुत महत्त्वपूर्ण है, राजनीतिक रूप से भी बहुत माने रखता है, लेकिन हमारे लिए यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा भी है.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन का संगीत दोनों करता है: एक तरफ पारंपरिक सोच को चुनौती देता है, तो दूसरी तरफ खुशी और जश्न की लहरें भी फैलाता है, ‘‘खुले घूमें, चीरफाड़ ऐसी बातें, बिना रुकावटें, आसमान छूते रास्ते, वाइल्ड वाइल्ड वीमन नाम से हमें जानते,’’ यह उन के टाइटल ट्रैक की पंक्तियां हैं. ‘समाज में थे  झुकते, अब चलते सीना तान के,’ एमसी महिला वाइल्ड वाइल्ड वीमन के एक और गाने ‘गेम फ्लिप,’ में रैप करती हैं. इस गीत का कोरस रूढि़यों और जजमैंट्स से मुक्त होने के संदेश से गूंजता है.

‘‘कभीकभी आप देखते हैं कि दर्शकों में कुछ लड़के मजे ले रहे हैं और नाच रहे हैं और आप सोचते हैं कि क्या उन्हें सम झ आ रहा है कि ये गीत उन के ही दोषों की ओर इशारा कर रहे हैं,’’ हैशटैगप्रीति व्यंग्य में मुसकराते हुए कहती हैं. पहले इस समूह को हिप-हौप समुदाय के कुछ पुरुषों द्वारा तवज्जो न मिलने का डर रहता था. ‘‘यह सवाल कभी हम सभी के दिमाग में रहता था- क्या वे हमें देखते हैं, क्या हम स्वीकार किए जाते हैं,’’ प्रतिका कहती हैं. अब उन्होंने कहा, समूह को इस की रत्तीभर भी परवाह नहीं है.

एमसी महिला ने वाइल्ड वाइल्ड वीमन के संगीत को संक्षेप में यों बयां किया, ‘‘यह महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा और महिलाओं का ही है.’’

पिछले कुछ वर्षों से वाइल्ड वाइल्ड वीमन की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. अकेले 2024 में ही बताया जाता है कि इस गु्रप ने पूरे भारत में 75 से ज्यादा शो किए हैं. इस साल की शुरुआत में उन्होंने जरमनी में एक फैस्टिवल में हिस्सा ले कर अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू भी किया. केरला के एक शो में, ‘‘हम नहीं देख पा रहे थे कि लोगों का हुजूम खत्म कहां हुआ,’’ एमसी महिला याद करती हैं. हाल ही में उन्होंने हेयर सीरम ब्रैंड लिवौन और फैशन ब्रैंड्स जूडियो तथा ट्रूब्राउनज के साथ मार्केटिंग सहयोग भी किया है.

Courtesy : Wild Wild Women/Youtube

अनोखी कहानी

वाइल्ड वाइल्ड वीमन के एक गाने गेम फ्लिप की छोटी सी इंस्टाग्राम रील को 1.55 करोड़ से अधिक व्यूज और 12 लाख से ज्यादा लाइक्स मिले. जब जे क्वीन की मुलाकात संगीत जगत के दिग्गजों ए.आर. रहमान और संतोष नारायणन से हुई, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने भी वह रील देखी है. ‘‘मैं ने सोचा, ‘वाह क्या बात है,’’’ जे क्वीन ने याद करते हुए कहा. मार्च में इस समूह ने औस्कर विजेता म्यूजिक कंपोजर एम.एम. कीरवाणी के साथ एक कौंसर्ट में हिस्सा लिया, जो उन के संगीत में योगदान का सम्मान करने के लिए आयोजित किया गया था.

मंच के बाहर ये महिलाएं सहज आत्मीयता बिखेरती हैं. महत्त्वाकांक्षी होने के साथ इन में आत्मविश्वास भी भरा हुआ है. इन की ताकत इन के विविध अनुभवों में समाहित है. इन में से कई युवा महिलाएं आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक विरोध और सामाजिक तौर पर पिछड़नेपन से लड़ कर यहां तक पहुंची हैं. मुंबई के अलगअलग हिस्सों में पलीबढ़ीं ये युवा महिलाएं अपने शहर की अपनी अनोखी कहानी व्यक्त करती हैं. इन की राजनीतिक सम झ अभी भी विकसित हो रही है. ये हमेशा एकदूसरे से सहमत नहीं होतीं. लेकिन इस के बावजूद इन्होंने अपनी सामूहिकता में एकजुटता और अपनापन पाया है.

डांसर बीगल एमजीके पहले किसी दूसरे हिप-हौप समूह का हिस्सा थीं, जिसे उन्होंने अपने विकास में मदद करने के लिए श्रेय दिया. लेकिन उन्होंने वाइल्ड वाइल्ड वीमन से जुड़ कर यह पाया कि ‘यहां मैं अपनेआप को ज्यादा सुरक्षित और अभिव्यक्त महसूस करती हूं.’ ग्रैफिटी कलाकार गौरी भी पहले एक दूसरे हिप-हौप कलैक्टिव के साथ काम कर चुकी थीं, जिस में ज्यादातर पुरुष थे. ‘‘यहां मु झे अपनी असली पहचान के साथ खुल कर खुद होने की आजादी है,’’ वे कहती हैं.

‘‘यहां पर हम साथ में नाचे हैं, गाए हैं, रोए हैं,  झगड़ा किए हैं- सबकुछ किए हैं,’’ जे क्वीन कहती हैं, ‘‘अगर किसी को कुछ भी प्रौब्लम होती है तो हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हम एकदूसरे को कंधा दें- यह वह जगह है जहां कोई भी किसी को जज नहीं करता.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन के बनने की शुरुआत होती है 2020 में, जब सर्दियों में इस की 2 संस्थापक सदस्य- क्रांतिनारी और हैशटैगप्रीति की मुलाकात हिप-हौप कलाकारों के लिए आयोजित एक अनौपचारिक जैम सैशन में हुई. पहली ही मुलाकात के तुरंत बाद वे एकदूसरे के साथ घुलमिल गईं. ‘‘ऐसा लगा जैसे हम एकदूसरे को बहुत पहले से जानते हों- यह एक पलभर में महसूस होने वाला बहनाना रिश्ता था,’’ हैशटैगप्रीति ने याद करते हुए बताया. वे वहां मौजूद कुछ गिनीचुनी महिलाओं में से थीं और यह कोई असामान्य बात नहीं थी.

पुरुषों को चुनौती

इस दौरान हिप-हौप भारत में तेजी से असली गति पकड़ चुका था और यह अब उन पारंपरिक रूढि़यों से आगे बढ़ रहा था जो अकसर स्त्री विरोध, शराबखोरी और पैसे की अंधी दौड़ का महिमामंडन करती थीं. देशभर के रैपर जिन में से कई हाशिए पर मौजूद समुदायों से आते थे हिप-हौप को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे थे. उन का संगीत बुद्धिमत्तापूर्ण, आकर्षक और प्रयोगात्मक था, जिस के जरीए वे सामाजिक असमानताओं और सत्ता केंद्रों को चुनौती देने से भी नहीं डरते थे.

इस के बावजूद हिप-हौप ग्रुप्स को बड़े पैमाने पर पुरुषों की दुनिया माना जाता था. क्रांतिनारी बताती हैं, ‘‘लड़कों के ग्रुप्स ऐसे थे जिन में में कुछ लड़कियां होती थीं और हिप-हौप भी करना चाहती थीं, लेकिन वे लोग उन्हें अपने समूह का हिस्सा नहीं मानते थे. उन का मानना था कि यह तुम्हारा कैरियर नहीं बनेगा, आखिर में तुम्हें शादी ही करनी है.’’

ऐसा नहीं था कि पुरुष कलाकार अपनी महिला साथियों की मदद करने को तैयार नहीं थे. लेकिन पहले से ही यह मान लिया जाता था कि ज्यादातर महिलाएं हिप-हौप को एक अस्थाई शौक सम झती हैं. महिलाओं के लिए एक समूह के तौर पर काम करने के अवसर बहुत दुर्लभ थे.

कभीकभी साथी पुरुष रैपर उन महिलाओं को दिशा देने की कोशिश भी करते थे, जिन के साथ वे काम करते थे. ‘‘मेरे साथ तो यह बहुत हुआ,’’ एमसी महिला ने अपने एक पुरुष हिप-हौप समूह के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा, ‘‘वो लोग मतलब बताते थे कि ऐसा (बीट) ले, ये ले, इस पर लिख, उस पर लिख,’’ वे बताती हैं.

उस प्रभाव ने महिला रैपर्स के लिखने के विषयों और उन के लिखने के तरीके दोनों को बदल दिया. हैशटैगप्रीति ने मु झे बताया, ‘‘हम उन्हें देख कर प्रेरित हो रहे थे, लेकिन इस प्रक्रिया में हम अपनी स्त्रीत्व की पहचान खो रहे थे और धीरेधीरे ही सही मर्दाने अंदाज की ओर  झुक रहे थे,’’ वे कहती हैं.

‘‘हां, बिलकुल फुल गैंगस्टर रैप की तरह,’’ एमसी महिला बीच में बोल पड़ी.

‘‘जो हम हैं ही नहीं,’’ क्रांतिनारी ने बीच में फटाफट जोड़ा.

जहां जैम सैशन में वे पहली बार मिली थीं, उस के बाद क्रांतिनारी और हैशटैगप्रीति ने एकसाथ डोसा खाते हुए अपनी  झुं झलाहट एकदूसरे से सा झा की. वे दोनों पहले से ही अन्य महिलाओं के साथ इसी तरह की बातचीत कर चुकी थीं. हैशटैगप्रीति ने पहले एक आल वीमन कू्र बनाने की कोशिश की थी, जिस में वे सफल नहीं हो पाईं. क्रांतिनारी ने भी कुछ स्थापित महिला रैपरों से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन उन में से किसी ने कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी.

अब दोनों ने महिलाओं के लिए विशेष साइफर आयोजित करने का फैसला किया- एक अनौपचारिक मंच, जहां रैपर्स इकट्ठा हो कर खुल कर और तुरंत रचनात्मक प्रदर्शन कर सकें. ‘‘ठंडीठंडी का सीजन था, दिमाग शांत था, आइडियाज आ रहे थे,’’ क्रांतिनारी हंसते हुए बोलीं. उन्हें ठीकठीक नहीं पता था कि उन के प्रयास उन्हें कहां ले जाएंगे, लेकिन एक बात वे निश्चित रूप से जानती थीं, ‘‘हम उन लड़कों के ग्रुप्स को छोड़ना चाहते थे, जिन पर हम निर्भर थे,’’ क्रांतिनारी ने याद करते हुए बताया.

एकसाथ आने से पहले वाइल्ड वाइल्ड वीमन की पांचों रैपरों ने अपने हुनर की अलगअलग तरीके से खोज की थी. लगभग सभी के लिए यह उन की खुद की आवाज और पहचान को हासिल करने का जरीया था.

क्रांतिनारी का बचपन अकसर अस्पतालों के चक्कर लगाते हुए बीता. वे बताती हैं कि 7वीं कक्षा तक स्कूल जाना और बुली होना मेरे लिए रोजमर्रा की बात थी. 8वीं कक्षा में उन्होंने अपनी मां के प्रोत्साहन पर बास्केटबौल अपनाया. उन की मां खुद कभी राज्य स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी थीं. इस खेल ने क्रांतिनारी को स्कूल के बाहर आत्मविश्वास बनाने में मदद की.

लेकिन कोर्ट पर दूसरे खिलाड़ी अकसर क्रांतिनारी की टूटीफूटी और गलत अंगरेजी का मजाक उड़ाते थे. ‘‘मु झे सम झ नहीं आता था कि क्या करूं,’’ वे याद करते हुए बताती हैं.

‘‘क्योंकि मैं अपने घर में या अपने पड़ोसियों से अंगरेजी में बात नहीं करती थी. वह भाषा मेरी दुनिया का हिस्सा ही नहीं थी,’’ एक सीनियर ने उन का साथ दिया. उन्होंने क्रांतिनारी को अमेरिकन रैपर एमिनेम का गाना ‘ब्यूटीफुल’ सुनाया, जो आत्म स्वीकृति के बारे में है.

‘‘उस गाने के बोल इतने असरदार थे कि मैं हर शब्द, हर पंक्ति पर रुक कर यह सम झने की कोशिश करती थी कि उस का मतलब क्या है,’’ क्रांतिनारी याद करती हैं. वे शब्दों को सम झने से पहले ही उच्चारण का अभ्यास करती थीं. उन्होंने अपनी कई डायरियों को उन गानों के शब्दों से भर दिया था, जिन्हें वे पसंद करती थीं. धीरेधीरे संगीत ने उन्हें अंगरेजी के साथ सहज होने में मदद की. इसी दौरान कुछ हिप-हौप कलाकारों से आकस्मिक मुलाकात ने उन्हें ब्रेकडांस से परिचित कराया. यहीं उन्हें अपना पहला स्टेज नाम ‘बी गर्ल म्याऊ’ मिला.

क्रांतिनारी ने डिजाइन की पढ़ाई करने के लिए मुंबई शहर छोड़ा. बाद में आईआईटी बौंबे के डिजाइन सैंटर में स्कौलर के रूप में लौटीं और फिर हैदराबाद में माइक्रोसौफ्ट के साथ काम करने के लिए फिर से रवाना हुईं. इस दौराम उन्होंने अपने भीतर एक खालीपन सा महसूस किया. इसलिए उन्होंने खुद से रैप करना शुरू किया. मुंबई में तेजी से बढ़ते हिप-हौप परिदृश्य के करीब आने के लिए उन्होंने ऐसी नौकरी चुनी जिस में वे मुंबई वापस लौट सकें.

एक इंस्टाग्राम रील की झलकियां जिस में वाइल्ड वाइल्ड वीमन ने अपने गाने 'Game flip' पर परफौर्म किया था. इस रील को 15.5 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा और 1.2 मिलियन लोगों ने लाइक किया.
एक इंस्टाग्राम रील की झलकियां जिस में वाइल्ड वाइल्ड वीमन ने अपने गाने ‘Game flip’ पर परफौर्म किया था. इस रील को 15.5 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा और 1.2 मिलियन लोगों ने लाइक किया. Courtesy : Wild Wild Women/Youtube

जोश और जज्बा

इसी समय क्रांतिनारी ने पहली बार मुंबई स्थित एक पौलिटिकल रैप कू्रू स्वदेशी को देखा. उन्होंने सोचा कि ये तो वही बोल रहे हैं जो मेरे दिमाग में चल रहा है. उन्हें महसूस हुआ कि उन को अपना रास्ता मिल गया है. दिन में वे औफिस जातीं और शाम को स्वदेशी के साथ ट्रेनिंग करती थीं. यहीं वे अंडरग्राउंड गिग्स और ओपन माइक इवेंट्स में जाने लगीं, जहां कोई भी मंच पर आ कर परफौर्म कर सकता था. उन के मातापिता 3 साल तक इस बात से अनजान रहे. वे अगर कभी पूछते भी थे तो क्रांतिनारी कहतीं कि औफिस में देर तक काम कर रही थी.

उन के एक पारिवारिक मित्र ने अखबार में छपा एक लेख देखा, जिस में क्रांतिनारी का जिक्र था. उन की मां ने अल्टीमेटम दिया कि मैं रैप छोड़ दूं नहीं तो वे आत्महत्या कर लेंगी. क्रांतिनारी ने याद करते हुए बताया. उन्होंने अपने मातापिता को सम झाने की कोशिश की, लेकिन बहस हर मोड़ पर तैयार खड़ी थी.

एक बार उन के एक रिश्तेदार ने उन के रैप को ले कर आपत्ति जताई, जो सत्ता की संरचनाओं को चुनौती देता है. उन्होंने कहा कि हम तुम से बात नहीं कर सकते क्योंकि तुम देशद्रोही हो. क्रांतिनारी कहती हैं कि इस बात ने मु झे बहुत अंदर तक  झक झोर दिया. फिर भी मैं डटी रही.

क्रांतिनारी की तरह ही एमसी महिला को भी पारिवारिक दबावों का सामना करना पड़ा. जिस चाल में वे पलीबढ़ीं, वहां ज्यादातर लोग अपने बच्चों के लिए एक स्थिर नौकरी और सामान्य जीवन को ही बेहतर मानते थे. ‘‘उधर का वाइब बहुत अलग है,’’ वे कहती हैं, ‘‘यानी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कोई लड़की म्यूजिक करेगी.’’

जब उन्होंने रैप शुरू किया तो उन के मातापिता भी विरोध में थे. ‘‘मैं तो पूरी फैमिली की ब्लैक शीप हूं,’’ उन्होंने हंसते हुए कहा. लेकिन जैसेजैसे एमसी महिला ने अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया, उन के मातापिता का संकोच गर्व में बदल गया.

मंच पर एमसी महिला आग के गोले की तरह जोश से भरी होती हैं. मंच से उतरते ही वे एक निरीक्षक बन जाना पसंद करती हैं. ‘‘मैं बहुत कम बात करती हूं, मु झे बहुत  िझ झक होती है,’’ वे कहती हैं, ‘‘मैं ऐसी ही हूं स्ट्रेट अप.’’

उन की पृष्ठभूमि उन के काम को वाइल्ड वाइल्ड वीमन के अन्य रैपर्स से अलग बनाती है. प्रतिका ने बताया, ‘‘मु झे लगता है उन का काम ज्यादा असरदार और असली है.’’

‘‘प्रतिका के अपने अनुभव उन के परिवार की आर्थिक अस्थिरता से गढ़े गए. बचपन में वे मुंबई के अलगअलग हिस्सों में लगातार स्थानांतरित होते रहे. इन में से कुछ जगहों पर प्रतिका ने समाज में हिंसा को करीब से देखा. जिंदगी कठिन थी और शुरुआत में हर चीज एक संघर्ष जैसी थी. इस ने मेरे सोचने और लिखने के तरीके को गहराई से प्रभावित किया,’’ वे बताती हैं.

प्रतिका के लिए संगीत जीवन में बदलती परिस्थितियों के बीच एक सहारा बन गया. जब वे 12 साल की थीं, उस समय वे ‘क्रौनिक फोबिया’ नाम के एक मैटल बैंड में बेस गिटार बजाया करती थीं. कुछ साल उन्होंने चर्च के कौयर ग्रुप के साथ भी बिताए. जब उन्होंने टैलीविजन चैनलों के जरीए हिप-हौप से परिचय पाया तो उन का  झुकाव ऐसे ग्रुप्स की ओर हुआ, जिन में मजबूत संगीतकला को दमदार रैप के साथ जोड़ा गया जैसे अमेरिकी बैंड ‘लिंकिन पार्क.’

परफौर्मेंस के दौरान बैंड की सदस्य कभी साड़ी तो कभी लुंगी पहन कर स्टेज पर आती हैं. वे अभिमान और आजादी के साथ आगे बढ़ती हैं.
Courtesy : Wild Wild Women

संगीत से पहला परिचय

मास कम्युनिकेशन में डिगरी पूरी करने के बाद प्रतिका ने संगीत से जुड़े ऐसे काम की तलाश की जो उन्हें स्थिर आय दे सके. उन्होंने कई तरह की नौकरियां कीं- वाद्ययंत्र विक्रेताओं, एक इवेंट कंपनी और एक स्वतंत्र रिकौर्ड लेबल के साथ. कोरोना महामारी के दौरान वे जिस रिकौर्ड लेबल कंपनी में काम कर रही थीं, वह आर्थिक मुश्किलों से गुजर रही थी. तब खुद को सहारा देने के लिए उन्होंने एक रिमोट जौब करनी शुरू कर दी.

उसी दौरान जब प्रतिका दिल्ली की हिप-हौप जोड़ी ‘सीधे मौत’ के साथ वक्त गुजार रही थीं, उन में से एक ने उन्हें एक बीट सुनाई. उन्होंने पूछा कि क्या वे उस बीट का इस्तेमाल कर सकती हैं.

‘‘मैं उन के सामने बैठी और आधे घंटे में एक रैप लिखा और गाया,’’ प्रतिका ने याद किया. यही उन का पहला गाना था. ‘‘और बस, वहीं से सबकुछ शुरू हो गया,’’ प्रतिका ने मु झे बताया.

जे क्वीन का संगीत से पहला परिचय उन के पिता के जरीए हुआ. उन के पिता अमेरिकी गायक और डांसर माइकल जैक्सन के बहुत बड़े फैन थे. वे जे क्वीन के स्कूल और अपनी चाल में होने वाले कार्यक्रमों में जैक्सन के मशहूर गानों पर परफौर्म किया करते थे.

‘‘मैं भी माइकल जैक्सन की एकदम पागल फैन हो गई थी,’’ जे क्वीन ने मु झे बताया. एक टीचर के प्रोत्साहन से जे क्वीन ने सार्वजनिक तौर पर गाना भी शुरू कर दिया था. जैसेजैसे वे बड़ी हुईं, हिप-हौप की दुनिया से उन का परिचय हुआ ज्यादातर यूट्यूब वीडियोज के जरीए. उन की पसंदीदा कलाकारों में से एक थीं निक्की मिनाज, त्रिनिदाद की रैपर, गायिका और गीतकार, जो अमेरिका में रहती हैं.

‘‘मैं तो लड़के लोगों को देखती थी रैप करते हुए, लेकिन यह निक्की मिनाज तो कुछ अलग है,’’ जे क्वीन ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘मैं ने सोचा, मु झे भी ऐसा कुछ करना चाहिए.’’

वे गानों के लिरिक्स कौपी कर अकेले में उन की प्रैक्टिस करती थी. उन्होंने अपनेआप से बीटबौक्सिंग सीख ली, एक तकनीक जिस के माध्यम से कलाकार ड्रम की आवाजों का अनुकरण करते हैं. एक बार क्लास में देर से आने पर जे क्वीन को सजा के तौर पर कुछ परफौर्म करने को कहा गया. तब उन की दोस्तों को यह पता चला कि वे रैप कर सकती हैं. उस के बाद दोस्तों ने उन्हें इस कला को आगे बढ़ाने का हौंसला दिया.

हिप-हौप समूह के एक और दोस्त जे क्वीन को दक्षिण मुंबई में एक ठिकाने पर ले कर गईं. इस जगह का नाम जमैका के प्रसिद्ध गायक और गीतकार बौब मार्ले के नाम पर रखा गया था. इसे लोकप्रिय तौर पर ‘बौब मार्ले का मंदिर’ कहा जाता था. वास्तव में यह एक लकड़ी और धातु की वर्कशौप थी, जिस के मालिक गिटार बजाने वाले हरपाल सिंह थे. उन्होंने अपनी वर्कशौप को युवा संगीतकारों के लिए खोल रखा था ताकि वे यहां मिल सकें और अभ्यास कर सकें.

जे क्वीन ने याद किया कि हरपाल सिंह की वजह से उन्होंने ब्रिटिश रौक बैंड ‘द बीटल्स’ और स्वीडिश पौप ग्रुप ‘ऐब्बा’ का संगीत सुनना शुरू किया. जे क्वीन वर्कशौप में अन्य रैपर्स से भी मिलीं, जिन में एक पुरुष हिप-हौप कू्र भी था. वे उन के साथ परफौर्म करने लगीं.

जे क्वीन के मातापिता चाहते थे कि वह आर्थिक स्थिरता के लिए वे 9-से-5 की नौकरी करे. इस के चलते लगभग 6 सालों तक उन्हें बेहद कठिन दिनचर्या निभानी पड़ी. सुबह 7 बजे उठ कर, फिर 1 घंटे का सफर तय कर के वे रियल ऐस्टेट फर्म की नौकरी पर जातीं. वहां से डेढ़ घंटे की यात्रा कर के वे फिर अपने ग्रुप के साथ अभ्यास करने पहुंचतीं. अंत में वे 1 घंटे का सफर कर के घर लौटती.

‘‘मैं उन के लिए भी कर रही थी (मातापिता के लिए) और मैं अपना भी कर रही थी,’’ जे क्वीन ने कहा, ‘‘और मु झे अच्छा लग रहा था जो मैं कर रही थी.’’

जैसेजैसे जे क्वीन को पहचान मिलने लगी, ऐसा लगने लगा कि अन्य कू्र के सदस्य असुरक्षित महसूस कर रहे थे. आखिरकार उन में से एक ने जे क्वीन को ग्रुप छोड़ने के लिए कह दिया. इस के कुछ सालों बाद तक जे क्वीन गाती रहीं, लेकिन अब वे सिर्फ अपने लिए गाती थीं.

आदत नहीं जनून

इस बीच एक और युवा महिला अपनी आवाज एक अलग माध्यम में खोज रही थीं. हैशटैगप्रीति के लिए लिखना हमेशा से ही एक भावनात्मक अभिव्यक्ति का जरीया रहा था. बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें हर हफ्ते अपने मातापिता को पत्र लिखना होता था. जैसेजैसे वे बड़ी हुईं, यह अभ्यास एक नियमित डायरी लेखन में बदल गया. धीरेधीरे हैशटैगप्रीति को एहसास हुआ कि शब्दों के साथ काम करना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उन का जनून है.

‘‘मेरे पापा बिजनैसमैन हैं, तो मेरे मातापिता हमेशा सोचते थे कि मैं भी आखिरकार बिजनैस ही करूंगी, जिस के साथ बहुत सी सुविधाएं और विशेषाधिकार जुड़े हैं,’’ वे कहती हैं.

कुछ पाबंदियां भी थीं. ‘‘जो मु झे चाहिए था, वो घर पर कभी सुना नहीं जाता था,’’ हैशटैगप्रीति बताती हैं, ‘‘मैं ने खुद को कभी एक आर्टिस्ट के रूप में नहीं देखा, खुद को हमेशा कम ही आंकती रही.’’

लगभग 7 साल पहले, जब उन्होंने हिप-हौप की दुनिया खोजी, तब उन के लिए संगीत और शब्दों का सही माने में समायोजन हुआ.

‘‘तब मैं ने देखा कि यह भी किया जा सकता है और यह वही था जो मैं हमेशा से करना चाहती थी,’’ उन्होंने मु झे बताया.

हैशटैगप्रीति एक ऐसे माहौल में बड़ी हुईं, जहां उन के चारों ओर महिलाएं ही थीं. बहुत सारी बहनें और लड़कियों के स्कूल में गहरी दोस्तियां. ‘‘जब मैं हिप-हौप में आई, तो मु झे ऐसा लगा कि यार, मु झे मेरी लड़कियां चाहिए, वे कहती हैं कि उन का पहला रैप इस पंक्ति से शुरू हुआ था, ‘दिस इज फौर द गर्ल्स हू सम झते हिप-हौप, (यह उन लड़कियों के लिए है जो सम झते हिप-हौप).’’

जब हैशटैगप्रीति ने शुरुआत की, तो वे एक लड़कों के ग्रुप से जुड़ गईं. ‘चीजें ज्यादा ठीक नहीं चल रही थीं,’ उन्होंने बताया. ‘‘मु झे नहीं पता था कि मैं जिस रास्ते पर हूं, वह सही है या नहीं. मु झे हमेशा शक होता था.’’ लेकिन हैशटैगप्रीति के मन में एक सपना बारबार आता था, वे लड़कियों का एक अपना ग्रुप बनाना चाहती थीं.

जीवन का अच्छा निर्णय क्रांतिनारी और जे क्वीन एकदूसरे को हिप-हौप गिग्स से जानती थीं और वे पहले भी औल वीमन कू्र की जरूरत पर बात कर चुकी थीं. जब क्रंतिनारी ने उन्हें फोन किया उस सायफर के बारे में जिसे वे और हैशटैगप्रीति प्लान कर रही थीं, तो उन्होंने पूछा कि तू आएगी क्या? इस को ले कर जे क्वीन के मन में दुविधा थी.

अपने पिछले ग्रुप से निकाले जाने के बाद वे खुद से सवाल कर रहीं थीं.

‘‘मुझे तो यह भी पक्का नहीं था कि मैं अब रैप में कुछ कर भी पाऊंगी या नहीं,’’ वे बताती हैं.

जे क्वीन ने एक दोस्त से सलाह मांगी और एक और प्रयास करने की ठानी, ‘‘मु झे लगता है कि वह मेरे जीवन का सब से अच्छा निर्णय था उस सायफर में जाने का,’’ जे क्वीन कहती हैं.

क्रांतिनारी और हैशटैगप्रीति ने याद करते हुए कहा कि उस सायफर के लिए ज्यादातर बातचीत ऐसे ही हुई थी. कुछ जवाब इतने छोटे और जल्दी दिए गए थे कि उन्हें यकीन भी नहीं था कि जिन युवतियों से उन्होंने बात की थी, वे वास्तव में आएंगी भी या नहीं. लेकिन अधिकांश युवतियां आईं. 8 मार्च, 2021 यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन वाइल्ड वाइल्ड वीमन ने अपना पहला सिंगल रिलीज किया. इस का नाम था- ‘आई डू इट फौर हिप-हौप.’

इस गाने में शामिल सभी रैपर्स ने अपनी जड़ों और संगीत से अपने रिश्ते को व्यक्त किया. इस का प्रोडक्शन किया था पोषक ने जो उस समय इंडस्ट्री में एकदम नए थे. प्रतिका ने अपने पास मौजूद संसाधनों से वीडियो की शूटिंग और एडिटिंग की. ‘‘मैं इस सायफर को ले कर इतनी उत्साहित थी,’’ वे याद करती हैं, ‘‘कि मैं ने 2 दिनों में वीडियो एडिट कर के सब के साथ शेयर कर दिया.’’

अस्पष्ट सोच

ग्रुप ने उत्सुकता बढ़ाने के लिए एक टीजर भी जारी किया और उस के बाद एक प्रैस अनाउंसमैंट भी की. इस में उन्होंने खुद को भारत का पहला आल फीमेल हिप-हौप समूह बताया. उन्होंने हिप-हौप कम्युनिटी के अपने सभी परिचितों से दोबारा पुष्टि की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन से कोई भूल तो नहीं हुई थी. उस वक्त उन की सोच बिलकुल स्पष्ट थी, प्रतिका ने याद किया, ‘‘करते हैं बराबर से. अब पीछे नहीं हटेंगे.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन को लगभग तुरंत ही शो और इंटरव्यूज के औफर मिलने लगे. प्रतिका को याद है कि जो लोग उन से संपर्क करते थे, उन्हें वे यह साफसाफ कहती थीं कि उस समय उन के पास सिर्फ एक ही गाना था. उन्होंने वाइल्ड वाइल्ड वीमन के अगले 2 ट्रैक्स- ‘गेम फ्लिप’ और ‘उड्डू आजाद’ का प्रोडक्शन किया. 2023 में जब ‘गेम फ्लिप’ की रील वायरल हुई, तब तक यह ग्रुप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरने लगा था.

आगे बढ़ते हुए वाइल्ड वाइल्ड वीमन में नए सदस्य भी जुड़ने लगे. डांसर एमसीके बीगल- जो फ्ला-रा को पहले से ही जानती थी- का इस समूह से परिचय 2021 में हुआ.

क्रांतिनारी ने आर्टिस्ट गौरी से संपर्क किया, जिन्हें वे पहले से जानती थीं. वे दोनों ही एक एनजीओ के साथ काम करते हुए धारावी की  झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाती थीं. गौरी एक प्रशिक्षित जिमनास्ट हैं. उन्होंने सब से पहले ब्रेकडांसिंग के जरीए हिप-हौप को जाना था. वे 1 साल तक एक दूसरे समूह का हिस्सा भी रही थीं. लेकिन उन के मातापिता इस से खुश नहीं थे. बाद में जब उन्होंने मुंबई के जे.जे. स्कूल औफ आर्ट से अपनी डिगरी पूरी की तो उन्हें कैलीग्राफी और टाइपोग्राफी तकनीकों को ग्रैफिटी में इस्तेमाल करने में दिलचस्पी हुई. अब वे वाइल्ड वाइल्ड वीमन के प्रदर्शनों के दौरान स्टेज पर रखे कैनवस पर लाइव पेंटिंग करती हैं.

20 साल की श्रुति ग्रुप की सब से कम उम्र की और सब से नई सदस्य हैं. उन्होंने स्केटबोर्डिंग की दुनिया को 2017 में जाना, जब उन्होंने अपने घर के पास एक पार्क में कुछ लड़कों को स्केटबोर्ड करते हुए देखा. वे याद करते हुए बताती हैं, ‘‘तो उन को देखा और फिर मैं भी ‘भैयाभैया’ बोल कर चलती थी.’’

उन में से एक लड़के ने श्रुति को एक सैकंड हैंड स्केटबोर्ड दिया. इस के बाद वे चुपचाप लगभग डेढ़ साल तक स्केटबोर्डिंग में अपने हुनर को निखारती रहीं. ‘‘स्कूल का दांडी मारकर, मैं जाती थी वहां पर,’’ वह कहती है. जब श्रुति के घर वालों को इस के बारे में पता चला तो उन्होंने उन का स्केटबोर्ड फेंक दिया.

‘‘उन्होंने बोला कि ये लड़कियों के लिए नहीं है. ये लड़कों के लिए है,’’ श्रुति याद करती है. ‘‘मेरी दादी ने कहा कि लड़कों का ऐसा रहता है. तू नहीं कर सकती.’’

दादी ने श्रुति को यहां तक चेतावनी दी कि अगर स्केटबोर्डिंग करते हुए श्रुति की टांग टूट गई तो श्रुति से शादी करने वाला कोई नहीं मिलेगा.

2020 में जब कोविड-19 की पहली लहर के बाद देशव्यापी लौकडाउन खत्म हुआ तो श्रुति ने घर छोड़ दिया. अपने खर्च पूरे करने के लिए स्केटबोर्डिंग सिखाना शुरू किया. साथ ही वे अपने खुद के अभ्यास के लिए भी समय निकालती रहीं.

एक साल बाद श्रुति ने पहली बार राज्य स्तर पर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सोना जीता. उसी साल दिसंबर में उन्होंने राष्ट्रीय रोलर स्कैटिंग चैंपियनशिप में सीनियर महिलाओं की श्रेणी (17 वर्ष से ऊपर) में पहला स्थान हासिल किया. अखबार में उन का नाम देख कर उन के पिता खुश हुए, लेकिन उन का अगला सवाल मन में गूंजता रहा कि आगे इस का स्कोप क्या है?

श्रुति की नजरें अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हुई थीं. लेकिन घुटने की चोट ने उन के सपनों की उड़ान बीच में रोक दी. वे फिर से अपने परिवार के साथ रहने लगीं और स्केटबोर्डिंग के प्रति अपने जनून को अलगअलग तरीकों से जिंदा रखने की कोशिश करती रहीं.

2023 में क्रांतिनारी ने एक इनफ्लाइट मैगजीन में श्रुति पर एक फीचर देखा. उन्होंने तुरंत उस युवा स्केटबोर्डर से संपर्क किया और श्रुति को वाइल्ड वाइल्ड वीमन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया.

‘‘मैं हूं तो पुरानी स्केटबोर्डर, पर मैं ज्यादा हाइलाईट नहीं होती थी. वाइल्ड वाइल्ड वीमन में आने के बाद लोगों को मेरे बारे में पता चला,’’ श्रुति ने मु झ से कहा. पहले उन के ज्यादातर दोस्त वे लड़के थे जिन के साथ वे स्केटबोर्डिंग करती थीं. ‘‘लेकिन ग्रुप में आने के बाद मेरी लड़की दोस्त है,’’ उन्होंने मुसकरा कर कहा.

अब यह समूह अपने भविष्य की ओर नजरें टिकाए हुए है. क्रांतिनारी ग्रामीण भारत में वाइल्ड वाइल्ड वीमन मौडल को दोहराने का प्रयास कर रही हैं. इस के लिए उन्होंने ‘साउंड औफ वीमन’ नाम से एक लोक संगीत पहल शुरू की है, जिस का उद्देश्य स्थानीय महिलाओं द्वारा संचालित समूहों को तैयार करना है. अब तक वे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में कुछ समूहों के साथ काम कर चुकी हैं.

‘‘एक कू्र और रैपर के रूप में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं,’’ प्रतिका कहती है. चूंकि समूह की ज्यादातर सदस्य अपने स्वतंत्र कैरियर पर भी काम कर रही हैं, इसलिए अब वे प्रैक्टिस सैशन औनलाइन करती हैं. इस तरह व्यक्तिगत आकांक्षाओं और सामूहिक सपनों के बीच संतुलन बना रहता है

‘‘जब भी हम मिलते हैं, तो हमारी बातें हमेशा संगीत के बारे में होती हैं और यह बहुत अच्छा लगता है,’’ जे क्वीन कहती हैं, ‘‘जब मैं घर पर बैठी होती हूं, तो सोचती हूं, कभी मिलेंगे, कभी साथ काम करेंगे.’’

हैशटैगप्रीति ने इस भावना को दोहराया, ‘‘कई बार मैं बस हमारी बातचीत सुन रही होती हूं और भीतर से बहुत आभारी महसूस करती हूं कि मैं यहां बैठी हूं, इस कमरे में हूं,’’ उन्होंने मु झे बताया, ‘‘फिर मैं खुद को याद दिलाती हूं कि ये कभी एक सपना था और अब यह तुम्हारी हकीकत है. तो अब इस से पीछे मुड़ने का कोई सवाल ही नहीं.’’

लेखक- निकिता सक्सेना

Wild Wild Women

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