Abortion rights : एक 15 साल की लड़की के गर्भ को गिरवाने की अनुमति के लिए पेरैंट्स को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े और औल इंडिया इंस्टिट्यूट औफ मैडिसिंस और सरकार मैडिकल टर्मिनेशन औफ प्रैगनैंसी कानून का हवाला दे कर उसे जबरन बच्चा पैदा करने को कहें, दुख की बात है. यह कहना कि बच्चे ईश्वर की देन हैं अपनेआप में मूर्खता है जो हर धर्म ने औरतों को गुलाम बनाने के लिए थोपी है. बच्चों का जन्म पुरुष के सीमन से होता है, हवा में नहीं होता.

जब 15 साला लड़की प्रैगनैंट हो तो मामला पक्का है कि किसी लड़के के साथ संबंध हुए, चाहे रेप से चाहे कंसेंट से. उस सैक्स रिलेशन से हुए गर्भ को गिराना लड़की का निजी फैसला है, उस की आयु चाहे जो भी हो. सुप्रीम कोर्ट ने एम्स और सरकार की मांग को ठुकराते हुए सही कहा कि डाक्टर्स या सरकार पेरैंट बनने की कोशिश न करें और फैसला पेरैंट्स और लड़की पर छोड़ दें और 30 सप्ताह के बाद अबौर्शन होने दें. कानूनी मियाद 20 सप्ताह की है और अपवादों में 24 सप्ताहों की.

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कई बार लड़कियां अपने साथ हुए सैक्स संबंध को छिपाती रहती हैं और दिन गुजरते जाते हैं. बाद में सदमे में डूबे पेरैंट्स को होश संभालने और डाक्टरों के पास जाने में समय लगता है. यदि गर्भ 24 सप्ताह से ज्यादा हो और प्रैगनैंट 18 साल से कम की हो तो एमटीपी ऐक्ट के अनुसार अबौर्शन प्रोटैक्टेड नहीं रहता और डाक्टर्स को मर्डर का चार्ज भुगतना पड़ सकता है. इस मामले में डाक्टर्स जिद पर अड़े थे कि अभी लड़की चाहे 15 साल की हो, अनमैरिड हो, अबौर्शन न किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने जिद पकड़ ली कि नहीं, यह 15 साला और होने वाले बच्चे के लिए अनफेयर होगा कि वे जीवनभर इस दंश को झेलें. उन्होंने धार्मिक, संस्कारी, पुरातनसोच को परे रखने का सही फैसला दिया जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से भी ज्यादा लिबरल और रैशनल है. खुशी की बात है कि उन्होंने पुरातनपंथी संस्कारी एम्स और उसे चलाने वाली भगवा सरकार की भी बात नहीं मानी. इस मामले में उस लड़के का क्या हुआ जिस ने लड़की के साथ संबंध बनाए, पता नहीं पर अगर पता चल भी गया और कोर्ट से सजा भी मिली तो भी वह मर्द ही कहलाएगा. समाज विवाह बिना हुए मांबच्चे को उन शब्दों से पुकारेगा जिन्हें लिखा जाना चाहिए पर लिखा नहीं जाता. पुरुष इन मामलों में ज्यादा दोषी होता है पर सदियों से इस का बो झ लड़कियों पर डाला गया है.अबौर्शन कानून को लिबरल बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को थैंक्स.

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