Best Kahani :  प्रिया की नजरें बाहर टिकी थीं जहां उस का नया हस्बैंड नीरज उस की बेटी कनु को साइकिल सिखा रहा था. कनु के चेहरे पर डर के साथसाथ एक प्यारी सी मुसकान भी थी. नीरज ने उसे पीछे से पकड़ रखा था और लगातार उस के साथ चल रहा था. तभी कनु की साइकिल डगमगाई और वह साइकिल छोड़ कर नीरज की बांहों में आ गिरी. नीरज उसे संभालता खड़ा हुआ. उस समय कनु बिलकुल नीरज के करीब थी.

नीरज ने कनु की बांहों को कस कर पकड़ा था. इधर प्रिया कसमसाई सी उठी और बेचैनी से ड्राइंगरूम में ही टहलने लगी. कमरे में लगे बड़े से मिरर में उस ने खुद को निहारा. समय और परिस्थितियों की मार ने कहीं न कहीं उस की खूबसूरती में कुछ कमी ला दी थी. उम्र का असर उस की स्किन पर दिखने लगा था, जबकि उस की 15 साल की बेटी कनु बिलकुल नाजुक कली सी कोमल थी. युवावस्था की दहलीज की तरफ कदम बढ़ाता उस का शरीर आकर्षक रूप ले रहा था. नीरज भी कोई कम हैंडसम नहीं था. उस के आकर्षक व्यक्तित्व के जादू में बंध कर ही प्रिया ने दूसरी शादी इतनी जल्दी कर ली थी.

‘‘कनु इधर आ जल्दी. बहुत हो गई मस्ती.  चलो और कमरे में जा कर पढ़ाई करो,’’ प्रिया ने बालकनी में आ कर बेटी को आवाज लगाई फिर पति को संबोधित करती हुई बोली, ‘‘नीरज, मैं ने आप से कहा था न कि आज शौपिंग के लिए जाना है और आप यहां लगे हो कब से.’’

‘‘अरे मैडम अपनी बेटी को साइकिल चलाना सिखाना भी तो जरूरी है न बस वही कर रहा था.’’

प्रिया की सख्त आवाज सुन कर कनु चुपचाप अंदर आ गई और नीरज भी साइकिल रखता हुआ प्रिया से बोला, ‘‘चलो तुम्हारी शौपिंग करा दूं पर तुम तो तैयार भी नहीं.’’

‘‘2 मिनट घर में बैठ कर मु?ा से बात कर लोगे तो कुछ हो नहीं जाएगा. जब देखो कनु में ही लगे रहते हो,’’ प्रिया ने चिढ़ कर कहा.

नीरज ने अचरज से पत्नी की तरफ देखा, ‘‘बेटी से ईर्ष्या?’’

प्रिया ने मुंह बनाते हुए कहा, ‘‘बकवास बंद करो और मेरे लिए चाय बनाओ. तब तक मैं तैयार होती हूं,’’ कह कर प्रिया अपने कमरे में तैयार होने चली गई. उसे बारबार नीरज के शब्द चुभ रहे थे. पर अभी नीरज ने जो कहा वह सच ही तो था. उसे अपनी ही बेटी से ईर्ष्या होने लगी थी या कहिए एक तरह का डर लगने लगा था. पर इस डर को वह किसी से शेयर भी नहीं कर सकती थी. खुद अपनी बेटी या पति से भी नहीं.

कनु पिछले महीने ही ऐग्जाम खत्म होने पर घर लौटी थी वरना वह होस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थी. अपनी मां के जीवन में आए उतारचढ़ावों से दूर वह अपनी दुनिया में मगन थी. मगर जब एक दिन उस ने सुना कि उस की मां सैकंड मैरिज कर रही हैं तो सौतेले पिता का खौफ उस के दिल में घर कर गया. कुछ दिन वह परेशान सी रही.

इसी बीच एक दिन नीरज उस से मिलने आए और तब उसे महसूस हुआ कि उस के सौतेले पिता तो बहुत अच्छे हैं. इसी वजह से वह छुट्टियों में घर आने की हिम्मत जुटा सकी. वह घर आई तो नीरज ने उसे पिता की कमी महसूस नहीं होने दी. हमेशा पिता के रूप में उस के साथ खड़ा रहा. समय के साथ दोनों एकदूसरे से बहुत प्यार करने लगे. मगर प्रिया को बापबेटी के इस प्यार में वासना की ?ालक मिल रही थी और इसी वजह से वह परेशान रहती थी.

लता यही वजह है कि उस ने बेटी को छोटे या मौडर्न कपड़े पहनने से यह कह कर रोक दिया था कि तुम अब बड़ी हो गई हो. उस के लिए बड़ी बाजू की बिलकुल लाइट कलर की कुरतियां ला दी थीं. बेटी को मां का यह व्यवहार अजीब लगने लगा था. यही नहीं प्रिया हर समय उसे टोकाटाकी करने लगी थी. कनु जब भी नीरज के साथ होती तो प्रिया उसे किसी न किसी बहाने अपने पास बुला लेती.

‘‘मम्मी मुझे स्वीमिंग सीखनी है. मैं घर में बोर हो जाती हूं,’’ एक दिन कनु ने अपने मन की इच्छा बताई.

प्रिया कुछ कहती उस से पहले नीरज बोल पड़ा, ‘‘अरे वाह बेटे स्वीमिंग तो मुझे भी बहुत पसंद है. ऐसा करो कल से मैं औफिस के बाद तुम्हें स्वीमिंग क्लासेज ले चलूंगा.’’

‘‘औफिस के बाद शाम में कनु को ले जाने की क्या जरूरत? मैं दिन में इसे ले कर चली जाऊंगी. आप औफिस पर ध्यान दो,’’

कह कर प्रिया कनु का हाथ पकड़ कर किचन में ले आई.

‘‘स्वीमिंग, साइकिलिंग, पेंटिंग, डांसिंग के बजाए कभी कभी कुकिंग भी सीखने की कोशिश कर. लड़की है तू पर किचन

में कभी आती नहीं है.

चल चाय बना कर पिला,’’ प्रिया उसे डांट लगाते हुए बोली.

कनु को किचन में छोड़ कर प्रिया नीरज के पास लौटी. उसे घूरते हुए बोली, ‘‘हर समय कनु के आगे पीछे क्यों घुमते हो? क्या मु?ा में कोई कमी है? क्या मैं ने तुम्हें हर खुशी नहीं दी?’’

‘‘कहना क्या चाहती हो प्रिया? कनु बिन बाप की बच्ची है. उसे यह न लगे कि सौतेला पिता खराब होता है इसलिए उसे हर खुशी देना चाहता हूं. उसे हौसला देना चाहता हूं कि वह अकेली नहीं.’’

‘‘इतना भोला बनने की कोशिश मत करो नीरज. क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम कनु के मासूम रूप के पीछे दीवाने हो रहे हो? मधुमक्खी की तरह चिपके रहते हो उस से.’’

‘‘प्रिया खबरदार जो ऐसी बात की,’’ कहते हुए नीरज ने उसे चांटा रसीद कर दिया.

प्रिया को ऐसे रिएक्शन की अपेक्षा नहीं थी. उधर आवाज सुन कर कनु भी किचन से ड्राइंगरूम में आ गई. बेटी को देख कर दोनों चुप हो गए और ऐसी ऐक्टिंग करने लगे जैसे कुछ न हुआ हो.

उस दिन घर का माहौल कुछ सही नहीं था. नीरज रात को अपने कमरे में खामोश बैठा था तो प्रिया की बेचैनी भी खत्म नहीं हो रही थी. उधर कनु भी अपनी उल?ानों में खोई थी.

रात को नीरज को नींद नहीं आ रही थी. उस ने कभी सोचा भी न था कि प्रिया अपनी बेटी को ले कर ऐसा इलजाम लगा सकती है. वह बालकनी में निकल कर टहलने लगा. कनु भी जगी हुई थी. वह पानी लेने के लिए उठी तो पिता को बाहर देख करउधर ही आ गई.

नीरज कनु को देख कर थोड़ा चौंका फिर बोला, ‘‘क्या बात है बेटा आप सोए नहीं?’’

कनु पिता के गले लगती हुई बोली, ‘‘पापा आप बहुत अच्छे हो. मैं ने कभी सोचा नहीं था कि मुझे आप के जैसे पापा मिलेंगे. आई लव यू.’’

नीरज ने भी उस का माथा सहलाते हुए आई लव यू कहा. तभी पीछे से प्रिया वहां आ गई. उन्हें गले लगे देख कर वह अपना आपा खो बैठी और अनापशनाप चिल्लाने लगी.

प्रिया नीरज पर तोहमत लगाती हुई बोली, ‘‘तुम्हें लज्जा नहीं आई अपनी बेटी की उम्र की लड़की से इश्क फरमा रहे हो और कनु तुझे जरा भी एहसास है कि तू क्या कर रही है?’’

अचानक मां के इन इलजामों को सुन कर कनु को समझ नहीं आया कि यह क्या हो रहा है. वह घबराते हुए पीछे हट गई और उस की आंखों से आंसू बह निकले.

नीरज का पारा चढ़ गया. वह चिल्लाता हुआ बोला, ‘‘तुम कैसी औरत हो प्रिया, अपनी ही मासूम बच्ची पर ऐसी ओछी तोहमत लगा रही हो? कितनी घटिया सोच है तुम्हारी. लानत है तुम पर. बहुत हो गया. मैं तुम्हारे साथ अब नहीं रह सकता. मैं तुम्हें और इस घर को छोड़ कर चला जाऊंगा प्रिया. कनु भी होस्टल चली जाएगी. फिर तुम रहना अकेले. तुम्हारी यही सजा है,’’ कहते हुए वह अपने कमरे में चला गया और

आंखें बंद कर लेट गया. उस की धड़कनें गुस्से में बढ़ी हुई थीं.

तभी कनु का मोबाइल बजा तो गुस्से में प्रिया ने पूछा, ‘‘इतनी रात को तुझे कौन फोन कर रहा है?’’

‘‘मुझे नहीं मालूम मम्मी,’’ कनु ने घबराते हुए कहा.

प्रिया ने उस का फोन औन कर के स्पीकर पर डाल दिया. मोबाइल पर एक क्रूर घटिया सी आवाज गूंजी, ‘‘कनिका डार्लिंग अरे बाबा कनु डार्लिंग सुन रही हो न? मैं हूं तेरी सहेली निभा के भाई का दोस्त और सुन मैं ने कहा था न तेरी एक चीज मेरे पास है… तो अभी मैं ने वही चीज तुझे भेजी है. जरा व्हाट्सऐप खोल और वह वीडियो देख. फिर बाहर निकल के आ जा मैं इंतजार कर रहा हूं.’’

यह सब सुन कर प्रिया की आंखें डर और आश्चर्य से फैल गईं. जल्दी से व्हाट्सऐप खोला. दोनों मांबेटी वीडियो देखते ही घबरा उठीं. उन का दिल धक से रह गया. तब तक फिर से फोन आया तो प्रिया ने उसे स्पीकर पर डाल दिया.

फिर वही घटिया आवाज गूंजी, ‘‘सुन कनु डार्लिंग यह वीडियो मैं ने अभी वायरल नहीं किया है पर किसी भी समय कर सकता हूं. अगर तू चाहती है कि मैं इसे वायरल न करूं तो बाहर आ जा और हमारे साथ एक लौंग ड्राइव पर चल. घर वालों को कुछ मत बताना चुपचाप आ जा बाहर.’’

‘‘यह सब क्या है? कौन बदतमीज हो तुम? मेरी बेटी का ऐसा वीडियो बनाने की तुम्हारी जुर्रत कैसे हुई?’’ प्रिया गुस्से में चीखी.

‘‘ओए आंटी ऐसीवैसी बातें न करना. तेरी लाडली की इज्जत मेरे हाथ में है. जरा सा ऊंचनीच बोला न तो वायरल कर दूंगा. धमकी नहीं दे रहा हूं सचाई बता रहा हूं. मुझ से तमीज से बात कर.’’

‘‘तु?ा से तमीज से बात करूं? तेरे जैसे घटिया आदमी से?’’ प्रिया चीख रही थी और कनु रो रही थी. यह सब सुन कर जल्दी से नीरज बाहर आया और पूछने लगा कि क्या हो रहा है.

तब दौड़ती हुई कनु आई और नीरज से लिपट गई, ‘‘पापा वह लड़का मेरा वीडियो बना कर मुझे ब्लैकमेल कर रहा है.’’

‘‘कैसा वीडियो?’’

‘‘पापा वह…’’ कनु से कुछ बोला नहीं

जा रहा था तो प्रिया बोल उठी, ‘‘घटिया लड़केने कनु का कपड़े बदलते हुए वीडियो बना लिया है.’’

तब कनु सारी बात बताते हुए बोली, ‘‘2 दिन पहले मैं अपनी सहेली निभा के घर गई थी. उस का बर्थडे था तो इसी बीच निभा के भाई के दोस्त ने मेरे ऊपर सौस गिरा दी. निभा ने मुझे दूसरे कपड़े दे कर कहा कि तू चेंज कर ले. बस वहां उस के बाथरूम में मैं ने कपड़े चेंज किए और जरूर उस लड़के ने वहां कैमरा छिपा रखा था. उस ने मेरा वीडियो बना लिया.’’

‘‘इतनी गिरी हुई हरकत करने वाले लड़कों को अभी मैं सही कर के आता हूं,’’ कहता हुआ नीरज बाहर निकला.

पीछे से प्रिया पुकारती रह गई, ‘‘अरे नहीं वे गुंडे हैं. उन के पास मत जाना,’’ लेकिन नीरज ने एक न सुनी और बाहर निकल कर उन्हें खोजने लगा.

थोड़ी दूर से आवाज आई, ‘‘अरे अंकल

तू क्यों आ गया? तेरी लड़की कहां है? तुझे किस ने बुलाया?’’

‘‘अभी बताता हूं मुझे किस ने बुलाया कमीनो,’’ कहता हुआ नीरज आगे बढ़ा तो 3 लड़के सामने आ गए. नीरज उन के ऊपर लातघूंसों के साथ टूट पड़ा. बहुत देर तक नीरज अकेले उन से मोबाइल छीनने और उन्हें वश में करने की कोशिश करता रहा. मगर वे 3 थे सो उन का पलड़ा ही भरा था. नीरज को काफी चोटें आ गई थीं. फिर भी वह उन से लगातार जूझ रहा था. तभी एक लड़के ने चाकू निकाला और उस के कंधे पर इतना तेज वार किया कि वह तिलमिला उठा और नीचे गिर पड़ा. तीनों लड़के बाइक ले कर भाग गए.

तब तक प्रिया बाहर आ गई थी. नीरज को संभालते हुए रोने लगी, ‘‘यह सब क्या किया तुम ने नीरज? गुंडों से भिड़ गए.’’

‘‘मैं गुंडो से भिड़ गया और तब तक भिड़ता रहूंगा जब तक इन कमीनों को ऊपर या अस्पताल न पहुंचा दूं. जो मेरी बच्ची की इज्जत से खेले उसे जीने का हक नहीं है. मैं कुछ गलत नहीं कर रहा.’’

‘‘नीरज प्लीज मेरी बात सुनो. चलो अभी तुम्हें अस्पताल ले कर जाना होगा.’’

प्रिया उसे अस्पताल ले कर गई. मरहमपट्टी के बाद शाम तक छुट्टी मिल गई.

प्रिया ने घर पहुंचते ही हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘नीरज, तुम्हें कुछ हो गया तो मैं जी नहीं पाऊंगी प्लीज इन सब में मत पड़ो.’’

‘‘तो क्या करूं बेटी को भेज दूं कमीनों के साथ या फिर उस की इज्जत के साथ खेलने दूं? उस वीडियो को वायरल करने दूं? छोड़ो फिर पुलिस को खबर कर देता हूं.’’

‘‘पर इस से भी कनु की बदनामी होगी.’’

‘‘तो ठीक है फिर मुझे मेरे हिसाब से बदला ले लेने दो. उन्हें चुप करने का मौका दो. मैं तीनों को अस्पताल पहुंचाऊंगा और वह वीडियो अपने हाथ से डैस्ट्रौय करूंगा,’’ नीरज बोला.

‘‘पर इस तरह आमनेसामने लड़ना सही नहीं. कोई और उपाय निकालो,’’ प्रिया ने कहा.

‘‘ठीक है कुछ और सोचता हूं.’’

फिर नीरज ने कनु से लड़के का पता मांगा. कनु ने अपनी सहेली से पूछ कर पिता को पता दे दिया और बताया कि वह सुबहसुबह शहर के दूसरे हिस्से में स्थित जिम जाता है.

अगले दिन सुबह जब सब सो रहे थे तो नीरज ने अपनी कार निकाली और उस की नंबर प्लेट चेंज कर दी. फिर उस लड़के के घर के बाहर छिप कर उस का इंतजार करने लगा. सुबह 8 बजे के करीब वह लड़का अपने दोस्त के साथ बाइक पर बैठ कर निकला तो नीरज उस का पीछा करने लगा. नीरज उस की बाइक के एकदम करीब पहुंचा और पुल के पास सुनसान सड़क देख कर उस की बाइक को अपनी गाड़ी से इतनी तेजी से धक्का मारा कि एक लड़का तो उसी समय कोमा में चला गया और दूसरा बुरी तरह घायल हो गया. नीरज ने दोनों लड़कों की जेब से मोबाइल निकाले और उन्हें बुरी तरह तहसनहस कर के पानी में फेंक दिया.

एक लड़का और जो उन का साथी था वह अभी बचा हुआ था. मगर उस के पास कोई वीडियो नहीं था. वह बस मजे लेने के लिए उन दोनों के साथ आया था. उस से कोई खतरा न देख कर नीरज ने अपनी तरफ से मामले को यहीं खत्म करने का फैसला लिया. अब न तो बांस था और न बांसुरी के बजने का डर क्योंकि मोबाइल के साथ वीडियो समाप्त हो चुका था.

प्रिया नीरज की एहसानमंद थी और समझ चुकी थी कि नीरज कनु को ले कर कितना सैंसिटिव है.

अगले दिन जब सारा मामला शांत हो गया तो प्रिया ने पूछा, ‘‘कनु की इज्जत के पीछे तुम ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की. तुम्हें कुछ हो जाता तो?’’

‘‘तो मुझे कोई गिला न होता. मेरी बेटी मुझ से मदद मांग रही थी. मैं पिता हूं और उसे सुरक्षित रखना, उस की सुरक्षा करना मेरी जिम्मेदारी और मेरा प्यार है. अब तुम इस प्यार को जिस भी नजर से देखो. चाहे तुम्हें हम दोनों के बीच जो रिश्ता नजर आए पर मेरे लिए अपनी बेटी की इज्जत से बढ़ कर कुछ भी नहीं.’’

प्रिया नीरज के गले लग गई और आंसू बहाती हुई बोली, ‘‘नीरज मुझे माफ कर दो. इतने अच्छे पिता और इतनी प्यारी बेटी के बीच के रिश्ते को मैं ने गलत नजर से देखा.’’

कनु भी पिता के सीने से लगती हुई बोली, ‘‘पापा आप के जैसा पापा मैं ने कोई और नहीं देखा. मेरे अपने पापा भी ऐसे नहीं होते जैसे आप हैं.’’

नीरज ने खुशी से बांहें फैला कर दोनों को अपने से लगा लिया.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...