Hindi Stories Online : नीरजा को आजकल वीरेन का स्वभाव समझ नहीं आ रहा था. हर समय शीशे के आगे खुद को निहारता रहता है. हर समय एक मुसकान चेहरे पर थिरकती रहती है. कोई देख कर कह नहीं सकता कि उस की बेटी टिम्सी 23 साल की है जिस की जल्द ही शादी होने वाली है.
तभी नीरजा ने देखा वीरेन बाहर बालकनी में खड़ा सैल्फी खींच रहा है. नीरजा एकदम से जा कर बोली, ‘‘अरे वीरेन तुम ने तो टिम्सी को भी मात दे रखी है.’’
एकदम से वीरेन आगबबूला हो उठा, ‘‘अगर तुम्हारे चेहरे पर हर समय मुर्दनी छाई रहती है तो इस का मतलब यह तो नहीं कि मैं भी जीना छोड़ दूं?’’
नीरजा को ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी. इसलिए पनीली आंखें लिए अंदर चली गई.
पता नहीं वीरेन को क्या हो गया है. पहले वीरेन की पूरी दुनिया नीरजा के इर्दगिर्द घूमती थी. अब ऐसे लगता है कि वीरेन को नीरजा का साथ ही बोरिंग लगता है. अभी होली के आसपास टिम्सी के दफ्तर की छुट्टी थी तो सब लोग शौपिंग के लिए मौल चले गए. जब नीरजा वीरेन के लिए सफेद और ग्रे कपड़े देख रही थी तभी वीरेन ने लाल टीशर्ट और बैगनी रंग की शर्ट खरीदी. नीरजा ने सोचा शायद टिम्सी के मंगेतर उज्ज्वल के लिए ले रहा होगा.
मगर जब दूसरे दिन वीरेन उसी शर्ट को पहनने लगा तो नीरजा बोली, ‘‘यह तुम ने अपने लिए खरीदी थी?’’
वीरेन ने कहा, ‘‘क्यों मैं क्या ऐसे रंग नही पहन सकता हूं?’’
नीरजा असमंजस में देखती रही कि यह वही ही वीरेन है जो पहले ऐसे लोगों को गोविंदा बोलता था.
न जाने क्यों पिछले वर्ष से वीरेन के व्यवहार में अजीबोगरीब परिवर्तन आ रहे हैं. फोन से चिढ़ने वाला, ब्यूटी प्रोडक्ट्स का मजाक उड़ाने वाला अब एकाएक बदल गया है. पहले वह टिम्सी को कितना डांटता था कि खाने के समय मोबाइल से दूरी रखो और अब खुद ही मोबाइल से चिपका रहता है. इस वीरेन से तो नीरजा का परिचय नहीं था.
अगर नीरजा कुछ कहती तो वीरेन कहता, ‘‘पिछले 23 वर्षों तक मैं परिवार के लिए करता रहा हूं. अब बस खुद के लिए जीना चाहता हूं.’’
नीरजा ने कहा भी, ‘‘तुम्हें कब मैं ने किसी चीज के लिए मना किया है?’’
वीरेन बोला, ‘‘नीरजा, जिंदगी की जिम्मेदारियों ने सिर उठाने का मौका ही नही दिया कि मैं कुछ करूं.’’
टिम्सी हंसते हुए बोली, ‘‘पापा, पर इस का मतलब यह तो नहीं कि आप 16 साल के लड़कों जैसे कपड़े पहनोगे.’’
‘‘टिम्सी तुम कब से ऐसी बात करने लगी हो?’’
‘‘पापा, आप को पता है आप के बदले व्यवहार से मम्मी कितनी आहत है? आप का हर समय फोन पर चिपके रहना, नएनए दोस्तों के साथ पार्टी करना, घर से पूरापूरा दिन गायब रहना सब मम्मी को परेशान करता है. अभी तो मैं हूं, जब मैं चली जाऊंगी तब कौन संभालेगा मम्मी को?’’
वीरेन ने बिना कोई जवाब दिए कार की चाबी उठाई और निकल गया.
तभी फोन की घंटी बजी और मोनिका नाम देखते ही वीरेन के चेहरे पर मुसकान आ गई.
वीरेन की मोनिका से करीब 2 वर्ष पहले मुलाकात हुई थी. दोनों एक ही रनिंग ग्रुप के सदस्य थे. दोनो का बचपन एक ही शहर अहमदनगर में बीता था. जब आप को अपने ही शहर का कोई मिलता है तो आप को उस से एक अलग ही अपनापन हो जाता है.
वीरेन की पत्नी नीरजा में जहां हर चीज के लिए नखरा था वहीं मोनिका बहुत लचीली थी. मोनिका के पति की आमदनी न के बराबर ही थी पर फिर भी मोनिका कभी किसी चीज के लिए शिकवा नहीं करती थी. इन छोटीछोटी चीजों के कारण वीरेन उस की तरफ खिंचता चला गया.
नीरजा के बाद मोनिका ही उस की जिंदगी में दूसरी औरत थी जिस से वह अपने दिल की बात कह सकता था. अफेयर जैसा कुछ नहीं था पर फिर भी वीरेन को मोनिका का साथ ताजगी और खुशी देता था.
आज मोनिका और वीरेन को एक मुशायरे में जाना था. जब वीरेन ने हाल में ऐंट्री की तो देखा मोनिका ने उस के लिए एक सीट रोक कर रखी हुई है और साथ में उस के पसंदीदा चने भी रखे हुए हैं.
मोनिका की यही बात उसे पसंद थी. उस का स्वभाव ही देने का था. वह वीरेन की छोटीछोटी बातों का इतना ध्यान रखती थी कि वीरेन का मन भीग जाता.
वीरेन की जब नीरजा से शादी हुई थी तो दोनों ही 24 साल के थे. 1 साल में टिम्सी उन के जीवन में आ गई. नीरजा जहां अमीर परिवार की बेटी थी वहीं वीरेन एक मध्यवर्गीय परिवार का मेहनती बेटा था.
नीरजा और वीरेन जब विवाह के बाद गोरखपुर आए तो नीरजा ने रोरो कर वीरेन का जीवन हलकान कर दिया.
वीरेन को नीरजा की मम्मी को बुलाना पड़ा. नीरज की मम्मी ने पूरी गृहस्थी सजाई और फिर वीरेन को ढेरों नसीहतें दे कर चली गईं. वीरेन को नीरजा से बेहद लगाव था. उस की शरबती आंखों में वह आंसू बरदाश्त नहीं कर सकता था. इसलिए नीरजा को हर ऐशोआराम देने के लिए वीरेन जीतोड़ मेहनत करने लगा.
नीरजा ने कभी वीरेन के मन की थाह लेने की कोशिश नहीं करी. जब टिम्सी 2 साल की थी तो वीरेन की नौकरी छूट गई. तब वीरेन ने नीरजा से कहा, ‘‘नीरू, मेरे दोस्त के स्कूल में टीचर की वैकैंसी है. अगर तुम नौकरी कर लोगी तो हमारे जरूरी खर्चे चल सकते हैं.’’
नीरजा गुस्से में बोली, ‘‘मुझसे नहीं होगी यह मेहनत.’’
वीरेन ने फिर दोस्तों से उधार ले कर कुछ माह तक घर का खर्च चलाया. उस के बाद वीरेन कामयाबी की सीढि़यां चढ़ता चला गया. घर बड़ा होता गया और दूरियां बढ़ती चली गईं.
वीरेन ने एक अच्छा पति और पिता बनने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. पर इस सब में वीरेन बहुत पीछे छूट गया था और उसी वीरेन को पकड़ने के लिए वीरेन की जिंदगी में मोनिका आ गई थी. जब से मोनिका वीरेन की जिंदगी में आई, उस की जिंदगी 20 साल पीछे लौट गई.
शुरुआत में तो नीरजा ने महसूस नहीं किया क्योंकि उस के अधिकतर अपने दोस्तों के साथ तयशुदा प्रोग्राम होते थे पर धीरेधीरे जब वीरेन अधिकतर घर के बाहर समय बिताने लगा तो नीरजा का माथा ठनका.
एक दिन नीरजा की सहेली एकता ने रात के खाने पर बुलाया था. नीरजा जब तैयार होने लगी तो वीरेन बोला, ‘‘मुझे तो आज मुशायरे में जाना है.’’
नीरजा बोली, ‘‘कोई बिजनैस मीटिंग तो है नहीं. मना कर दो अपने दोस्तों को.’’
वीरेन बोला, ‘‘मैं तो हमेशा तुम्हारे हिसाब से चलता हूं, आज तुम मेरे साथ चलो.’’
नीरजा गुस्से में बोली, ‘‘क्या हो गया है तुम्हें वीरेन? क्यों एक छोटे से मुशायरे के लिए ये सब कर रहे हो?’’
वीरेन ने बिना कुछ कहे कार की चाबी उठाई और निकल गया. फिर यह सिलसिला बन गया. दोनों में से कोई भी ?ाकने को तैयार नहीं था. दोनों की राहें जुदा हो गई थीं.
इस से पहले नीरजा और वीरेन कुछ समझ पाते, कोरोना के कारण लौक डाउन हो गया और वीरेन, टिम्सी और नीरजा घर मे फंस गए. वीरेन का हर समय फोन पर चिपके रहना, रंगबिरंगे कपड़े पहनना सब नीरजा के तनबदन में आग लगा देता.
नीरजा कुछ बोल देती तो वीरेन भी पलट कर जवाब दे देता जिस के कारण घर का माहौल खराब हो जाता.
एक दिन टिम्सी ने पूछ भी लिया, ‘‘पापा, आप तो ऐसे न थे. मम्मी का बिलकुल ध्यान नहीं रखते हो.’’
वीरेन भी चिढ़े स्वर में बोला, ‘‘टिम्सी, तुम चीजों को बस अपनी मम्मी के नजरिए से ही देखती हो. तुम्हारी और तुम्हारी मम्मी की जिंदगी में मैं ने कभी दखलंदाजी नहीं करी तो तुम लोग मेरी में भी न करो.’’
टिम्सी गुस्से में बोली, ‘‘हम लोग ऐसा कुछ करते ही नहीं कि आप को कुछ कहना पढ़ें.’’
‘‘तो मैं ने क्या कर दिया है ऐसा? अब तक तुम लोगों के हिसाब से जिंदगी जी है, जहां कहा वहां घुमाने ले गया पर अब मेरा मन अगर कुछ अलग करने का करता है तो मैं क्या करूं? हां मैं ऐसा नहीं हूं जैसा था, अब मैं अपने लिए जीना चाहता हूं. अपनी सारी जिम्मेदारी पूरी कर ली है अब कुछ अपने लिए करना चाहता हूं.’’
नीरजा और टिम्सी वीरेन के बदले हुए रूप को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं. बारबार ऐसा प्रतीत हो रहा था कि घर की दरोदीवार यही कह रही है, ‘‘आप तो ऐसे न थे.’’ मगर वह पक्षी शायद अब पिंजरा खोल कर स्वच्छंद उड़ान भर चुका है.
