Family Drama :  रोली और रमण इतने बच्चे भी नहीं हैं कि उन्हें अपनी मां की तकलीफ दिखाई नहीं दे. जब एक नवजात भी संवेदनाओं और स्पर्श की भाषा को समझ सकता है तो ये दोनों तो किशोर बच्चे हैं. ये भला अपनी मां के रोज होने वाले अपमान और तिरस्कार को नहीं पहचानेंगे क्या? कड़वी गोली पर लगी मिठास भला कितनी देर तक उस की असलियत को छिपा सकती है? दादी और पापा भी तो मां को सब के सामने घर की लक्ष्मी कहते नहीं थकते लेकिन रोली और रमण जानते हैं कि उन के घर में इस लक्ष्मी का असली आसन क्या है.

दादी को पता नहीं मां से क्या परेशानी है. मां सुबह जल्दी नहीं उठे तो उन्हें आलसी और कामचोर का तमगा दे दिया जाता है और जल्दी उठ जाए तो नींद खराब करने का ताना दे कर कोसा जाता है. केवल दादी ही नहीं बल्कि पापा भी उनकी हां में हां मिलाते हुए मम्मी को नीचा दिखाने का कोई अवसर अपने हाथ से नहीं जाने देते. और जब पापा ऐसा करते हैं तो दादी के चेहरे पर एक संतुष्टि भरी दर्प वाली मुसकान आ जाती है. बहुत बार रोली का मन करता कि वह मां की ढाल बन कर खड़ी हो जाए और दादी को पलट कर जवाब दे लेकिन मां उसे आंखों के इशारे से ऐसा करने से रोक देती है. पता नहीं मां की ऐसी कौनसी मजबूरी है जो वह यह सब बिना प्रतिकार किए सहन करती रहती है.

‘‘मैं तो एक पल के लिए भी नहीं सहन करूं. आप क्यों कभी कुछ नहीं बोलती?’’

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

25% की बचत

डिजिटल

USD99 USD49 /Year
सब्सक्राइब करें

फायदे

  • गृहशोभा मैगजीन का सारा कंटेंट
  • 2000+ फूड रेसिपीज
  • 6000+ कहानियां
  • 2000+ ब्यूटी, फैशन टिप्स
Best Value - 26% की बचत

24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल

USD200 USD149 /Year
सब्सक्राइब करें

फायदे

  • 24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल एक्सेस
  • फ्री गृहशोभा ऐप
  • सभी गृहशोभा इवेंट्स के फ्री इन्विटेशन
(नाश्ता + लंच + ₹1000 तक गिफ्ट हैम्पर + किसना डायमंड पेंडेंट)
  • डिजिटल कवरेज का मौका (Women Achievers & Influencers)
  • 2000+ फूड रेसिपीज | 6000+ कहानियां | 2000+ ब्यूटी, फैशन टिप्स
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...