Short Stories in Hindi : उस दिन औफिस से हारेथके हम घर पहुंचे ही थे कि श्रीमतीजी ने दरवाजा खोलते ही अपना अभिभाषण शुरू कर दिया, ‘‘आप ने सुना… आज बहुत बड़ी खुशी की बात. वह कहावत है न कि जिसे ढूंढ़ते थे हम गलीगली, अरे वह तो हमें घर के दरवाजे पर ही मिल गई. फ्लैट के सामने वह जो पार्क है न, उसी में मोटापा से मुक्ति का कैंप लग रहा है.’’

‘‘अरे तो इस में खुशी की क्या बात हो गई? नगर में जबतब मोटापा मुक्ति कैंप लगते रहते हैं,’’ हम ने इतना कहा ही था कि श्रीमतीजी फिर बिफर गईं, ‘‘आप तो रिटायरमैंट से पहले मस्तिष्क से पूरी तरह रिटायर्ड हो चुके हो. अरे, आप ही तो रोजरोज कहते हो, मैं बहुत मोटी हो रही हूं. पार्टियों में मुझे साथ ले जाते हुए आप को शर्म आती है. राजीव कपूर की पार्टी में आप मुझे साथ नहीं ले जा रहे थे. कह रहे थे, कपूर की बीवी रश्मि के सामने बेलन सी लगोगी. अरे, उसी मोटापे को खत्म करने के लिए मोटापा मुक्ति कैंप लग रहा है… संडे को कैंप का उद्घाटन होगा. आप को यह तो बताना ही भूल गई कि कैंप नि:शुल्क लग रहा है. है न मजेदार बात? मोटापा भी नष्ट होगा और कोई पैसा भी नहीं खर्च करना पड़ेगा.’’

‘‘नि:शुल्क मोटापा कैंप में चली जाना… पर कैंप के चक्कर में क्या आज कुछ चायनाश्ता नहीं कराओगी? औफिस से बहुत थकेहारे घर लौट रहे हैं हम,’’ श्रीमतीजी के भाषण के बीच हम ने उन्हें याद दिलाया.

‘‘हां, हां, चायनाश्ते की याद है…

भुलक्कड़ तो आप हो ही. संडे तक का पता नहीं आप का… कितनी बार नि:शुल्क मोटापा मुक्ति कैंप की बात याद दिलानी पड़ेगी,’’ यह कहते हुए श्रीमतीजी पांव पटकती हुई किचन में चली गईं. किचन से बरतनों के आपस में टकराने की आवाज से श्रीमतीजी के गुस्से का पता चलता रहा.

एक दिन बाद ही संडे था. शानिवार की रात को फ्लैट के सामने बड़ेबड़े शामियाने लगा कर कैंप बना दिया गया था. सुबह से ही कैंप के प्रवेशद्वार पर मोटे स्त्रीपुरुषों की लाइनें लगने लगी थीं. कैंप के मुख्य दरवाजे पर 3 मेजों के पास कुरसियों पर 3 सुंदरी बालाएं बैठी थीं. उन बालाओं को कैंप में आने वालों के रजिस्ट्रेशन के लिए बैठाया गया था.

कैंप में मोटापा कम करने वालों के लिए 50 रजिस्ट्रेशन फीस थी. स्त्रीपुरुष 50-50 के नोट बरसा रहे थे. नि:शुल्क मोटापा कैंप में नोट बरसाने वालों की कोई कमी नहीं थी. आखिर श्रीमतीजी ने 50 दे कर रजिस्ट्रेशन करा लिया.

एक दिन मोटापा मुक्ति कैंप में संयासियों जैसे बड़ेबड़े कुरते पहने, लंबीलंबी दाढ़ी वाले कुछ लोगों ने भाषण दिए. मोटापे पर भाषण के दौरान उन्होंने चाटपकौड़ी नहीं खाने पर लंबेलंबे भाषण दिए. उसी कैंप की एक साइड में बहुत सी खानेपीने की दुकानें भी सजी थीं.

उन दुकानों के बीच कुछ रेस्तरां भी बने थे. उन रेस्तरां में पिज्जा, डोसा, इडली, समोसे, कचौड़ी के बैनर भी लगे थे. सभी रेस्तराओं के आगे स्त्रीपुरुषों की भीड़ लगी थी. कैंप के नुक्कड़ पर एक गोलगप्पे का स्टाल था. मोटापा मुक्ति कैंप में सब से ज्यादा उस स्टाल के आगे स्त्रियों की भीड़ थी. शायद उस दिन सभी स्त्रियां गोलगप्पे खा कर अपने मोटापे से मुक्ति पा लेना चाहती थीं.

मोटापे पर भाषण देने वाले संयासी कुरते पहने लोगों ने मोटापे से डायबिटीज, हार्ट अटैक, हाई ब्लडप्रैशर, किडनी फेल्योर, जोड़ों का दर्र्द होने की बात कहते हुए कैंसर भी मोटे स्त्रीपुरुषों को होने की बात कही. आजकल स्त्रीपुरुष किसी महानुभावक की बातें चाहे न मानें, लेकिन संन्यासी जैसे रंगीन कुरते पहने लोगों की बातें अवश्य मानते हैं. तभी तो देश में सभी साधुसंन्यासी प्रवचन करतेकरते बड़ेबड़े व्यापारी बन गए हैं. सभी साधुसंन्यासियों ने लोगों को मोटापा और दूसरी बीमारियों को नष्ट करने वाली दवाएं बेचना शुरू कर दिया है. एक बड़े संन्यासी बाबा तो प्रवचन करतेकरते, दवा बेचतेबेचते जेल चले गए. सुना है कि बाबा जेल में रहतेरहते भी खुद दवा बेच रहे हैं.

2-3 दिन मोटापे पर भाषण देने के बाद मंच से घोषणा की गई कि जो स्त्रीपुरुष डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लडप्रैशर आदि रोगों से पीडि़त हैं वे कैंप में लगे स्टालों से अपनीअपनी बीमारी की दवा खरीद लें. बीमारी नष्ट किए बिना मोटापा कम नहीं होता है. बस फिर क्या था, सभी स्त्रीपुरुष कैंप में लगे दवा के स्टालों की ओर दौड़ पड़े. दवा के स्टालों के आगे लंबीलंबी लाइनें लगने लगीं.

उस दिन हम श्रीमतीजी के साथ किसी दवा के स्टाल पर नहीं जा सके, क्योंकि उस दिन हमें औफिस से छुट्टी नहीं मिल सकी थी. मोटापा मुक्ति कैंप में श्रीमतीजी के साथ निपटने के लिए औफिस से 4 छुट्टियां ले चुके थे हम. उस दिन शाम को औफिस से घर पहुंचे तो श्रीमतीजी ने मेज पर कई डब्बे और शीशियां सजा दी.

आज मोटापा मुक्ति कैंप में 500 की दवा खरीद कर लाई हूं. बाबाजी ने कहा था कि बीमारी के चलते मोटापा कम नहीं होता है.

‘‘लेकिन आप को तो कोई बीमारी नहीं थी? फिर इतनी मंहगी दवा क्यों खरीद लाईं?’’ हम ने पूछा तो श्रीमतीजी तुनक कर बोलीं,

‘‘आप को क्या पता है कि हमें क्या बीमारी है. अरे, कब्ज की बीमारी है बाबाजी ने बताया है कि कब्ज के कारण ही मोटापा हुआ है.

मोटापा कम करने के लिए पहले कब्ज को नष्ट करना होगा.’’

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‘‘कब्ज नष्ट करने के लिए 500 की दवा? अरे, कब्ज तो आधा किलो पपीता खाने से नष्ट हो जाती है.’’

‘‘आप तो 500 की बात सुन कर ही घबरा रहे हो, बाबाजी ने तो कहा है कि 500-600 की दवा कई बार खानी पड़ेगी तभी कब्ज नष्ट हो पाएगी. आप यह क्यों नहीं सोचते कि नि:शुल्क मोटापा मुक्ति कैंप लगा है. आखिर दवागोली पर कुछ तो खर्च करना पड़ेगा. बाबाजी मोटापे से मुक्ति दिलाने पर कुछ तो मांग नहीं रहे,’’ कह श्रीमती पांव पटकती हुई किचन में चली गईं तो हम अपना सिर पकड़ कर बैठ गए.

अगले दिन मोटापा मुक्ति कैंप में सभी स्त्रीपुरुषों को मोटापा कम करने के लिए योगासनों का अभ्यास कराया गया. उत्तानपादासन, भुजंगासन, धनुरासन, चक्रासन आदि का प्रदर्शन कर के एक संन्यासी वेशभूषा वाले बाबाजी ने घर पर जा कर सर्वांगासन करने के लिए बताया.

उस दिन रविवार होने के कारण देर तक सोने को मन कर रहा था. तभी दूसरे कमरे से श्रीमतीजी के जोरजोर से चिल्लाने की आवाजें सुन कर उन के कमरे में पहुंचे तो श्रीमतीजी फर्श पर बिखरी पड़ी जोरजोर से कराह रही थीं, ‘‘आह, मर गई… मेरी तो गरदन टूट गई.’’

हम ने पास जा कर पूछा, ‘‘सुबहसुबह क्यों चिल्ला रही हो? सुबहसुबह पास के फ्लैट वाले आप की आवाजें सुनेंगे तो सब हाल पूछने आ धमकेंगे और फिर सब को चायनाश्ता कराना पड़ेगा. आप की सहेलियां तो चायनाश्ता किए बिना सोफे से उठने का नाम नहीं लेगीं.’’

‘‘अरे, अब खड़ेखड़े भाषण ही देते रहोगे… मुझे उठा कर डाक्टर के पास ले चलने की तैयारी करो. सर्वांगासन करते हुए मेरी तो गरदन ही टूट गई. आह… बहुत दर्द हो रहा है… आह मैं मर गई.’’

श्रीमतीजी की चीखपुकार निरंतर बढ़ रही थी. पड़ोस के लोगों की सहायता से श्रीमतीजी को उठा कर पास के नर्सिंग होम में ले जाना पड़ा. उस दिन शाम तक उस नर्सिंग होम में रहना पड़ा. सर्वांगासन करने में श्रीमतीजी के कंधे में चोट लगी थी और डाक्टर ने प्लास्टर चढ़ा दिया था. शाम तक नर्सिंग होम में रहने और प्लास्टर कराने का 3 हजार से अधिक का बिल बन गया था.

मोटापा मुक्ति कैंप में जाने से श्रीमतीजी का मोटापा तो 1 इंच भी कम नहीं हो पाया, उलटे 5 हजार का बिल चुकाना पड़ा… अभी तो प्लास्टर चढ़ा है पता नहीं आगे नर्सिंग होम के कितने बिल चुकाने पड़ेंगे.

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