Hindi Kahaniyan : अवनी अभी सुबह की चाय पी कर थोड़ा रिलैक्स ही हो रही थी कि उस का मोबाइल बज उठा. दूसरी तरफ उस की फास्ट फ्रैंड और औफिस कलीग रश्मि का फोन था, ‘‘हैप्पीसेकंड वैडिंग ऐनिवर्सरी माई डियर तुम दोनों बस ऐसे ही हमेशा हंसतेमुसकराते रहो. सारे जहां की खुशियां तुम्हें मिल जाए और मेरी उमर भी तुम दोनों को लग जाए.’’

‘थैंक यू थैंक यू माई डियर लव यू. तेरे जैसे दोस्त हैं तो जिंदगी में कभी कोई प्रौब्लम आ सकती है भला,’ अवनी ने खुश होते हुए कहा.

‘‘अरेअरे फोन मत काटना मुझे एक बात बतानी है तुझे पता है अश्विन आजकल बहुत बड़ा भगवान भक्त हो गया है अकसर भगवान का तिलक लगाए और मंदिर जाते ही नजर आता है.’’

‘‘तुझे कैसे पता उसके बारे में?’’ अवनी ने हैरत से पूछा.

‘‘अरे मनु के औफिस में ही तो है तो मनु बता रहे थे कि आजकल तो बस भगवा कपड़े पहन कर बाबाजी टाइप हो कर घूमता रहता है.’’

‘‘ऐसे लोग भगवान का भजन ही करेंगे, इसी को तो कहते हैं कि 900 चूहे खा कर बिल्ली हज को चली. चल अभी ठीक है मैं फोन रखती हूं औफिस के लिए लेट हो रही हूं. शाम को या फिर कल शांति से बात करूंगी,’’ कह कर अवनी ने फोन रख दिया.

जल्दीजल्दी तैयार हो कर औफिस जातेजाते अवनी ने मेड निशा को जरूरी निर्देश दिए, ‘‘देखो साहब आने वाले होंगे उन्हें चायनाश्ता करा देना और खाना डाइनिंगटेबल पर लगा कर चली जाना.’’

पार्किंग में आ कर अवनी ने अपनी कार स्टार्ट की और औफिस की तरफ

चल दी. कार चलातेचलाते अश्विन के बारे में सोचने लगी, ‘‘अश्विन जो उस की जिंदगी में एक ग्रहण बन कर आया था पर अपनी कालिमा से उसे काला करने से पहले ही चला भी गया था. उस समय उस ने भोपाल के एलएनसीटी कालेज से इंजीनियरिंग कंप्लीट ही की थी और 1 साल तैयारी कर के बैंक पीओ का ऐग्जाम दिया. उस की कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि उस का पहली बार में ही सलैक्शन भी हो गया. मातापिता के साथसाथ वह भी बहुत खुश थी और जिंदगी भी बड़ी खुशनुमा ही थी. अब उसे नौकरी करते

5 वर्ष हो गए थे और हर भारतीय मातापिता की तरह उस के मांपापा भी उस की शादी के लिए परेशान थे. हर दूसरे दिन किसी न किसी लड़के के रिश्ते के बारे में उसे बताते रहते थे पर अवनी अभी इन सब बंधनों में बिलकुल नहीं बंधना चाहती थी.

एक दिन जब अवनी औफिस से लौटी तो पापा ने आदेश दिया, ‘‘अवि, कल कुछ मेहमान आने वाले हैं तुम तैयार रहना, अच्छे जमीनजायदाद वाले लोग हैं, खातापीता परिवार है और लड़का भी औटोमोबाइल कंपनी में अच्छी पोस्ट पर है.’’

‘‘पर पापा मैं अभी…’’

‘‘अभीतभी कुछ नहीं, तुम आजकल के बच्चे समझते क्यों नहीं जिंदगी में सही उम्र में सही काम होना बहुत आवश्यक होता है. ठीक है मिल तो लो जब तुम पूरी तरह आश्वस्त होगी तभी शादी करेंगे ठीक है न, तो कल तुम औफिस से टाइम पर घर आ जाना.’’

अगले दिन जब अवनी औफिस से आई तो ड्राइंगरूम में एक सुदर्शन नौजवान युवक अपने मातापिता और बहन के साथ वहां मौजूद था. औपचारिक बातचीत और चायनाश्ते के बाद अवनी और अश्विन को अकेले में मिलने भेज दिया गया और जैसे वे दोनों टैरेस पर पहुंचे तो पहला प्रश्न अश्विन ने किया, ‘‘आप की रुचियां क्या हैं ताकि मैं आप की रुचियों के अनुसार स्वयं को आप के अनुसार बदल सकूं क्योंकि मुझे लगता है कि शादी के बाद यदि हम खुद को एकदूसरे के अनुसार बदल लेंगे तो जिंदगी काफी आसान हो जाएगी आप क्या सोचती हैं?’’

‘‘जी बिलकुल मैं आप की बात से पूरी तरह सहमत हूं. वैसे तो मुझे सबकुछ पसंद है और मैं बहुत ऐडजस्टेबल भी हूं, बस इतना चाहूंगी कि मैं चूंकि अपने मातापिता की इकलौती संतान हूं और मैं ताउम्र आप के मातापिता के समान ही अपने मातापिता का भी ध्यान रखूंगी और इस बारे में कुछ भी सुनना नहीं चाहूंगी,’’ अवनी ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा क्योकि उस का सोचना था कि विवाह से पहले ही यदि सारी चीजें क्लीयर हो जाएं तो बाद में किसी भी विवाद की स्थिति नहीं रहेगी.

‘‘अरे बिलकुल यह कोई पूछने की बात है आप के मातापिता मेरे भी तो मातापिता हैं. मैं आप को बता दूं कि मैं बहुत बड़ा फैमनिस्ट हूं और महिलाओं का बहुत सम्मान करता हूं इसलिए आप इस बारे में पूरी तरह आश्वस्त रहें,’’ अश्विन ने अपनी विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा.

अश्विन की बातें सुन कर अवनी पूरी तरह अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो गई थी और अपने मांपापा को भी अपनी सहमति से अवगत करा दिया था. दोनों परिवारों की आपसी सहमति से रोका की रस्म भी कर दी गई और अतिशीघ्र शादी की तारीख भी निकलवाने की बात की गई थी. मांपापा के साथसाथ उस की खुशी का भी कोई ठिकाना नहीं था. वह खुश थी कि चलो कोई अच्छा जीवनसाथी तो मिला जिस के साथ वह शांति से अपनी जिंदगी बिता सकती है.

दोनों फोन पर घंटों बतियाते और भविष्य की कल्पना कर के रोमांचित हो उठते. अवनी अभी अतीत में ही खोई रहती अगर पीछे से

आने वाली गाडि़यों के हौर्न की आवाज उसे सुनाई न देती.

हड़बड़ा कर अवनी ने देखा कि चौराहे पर उस ने यंत्रवत अपनी कार

तो रोक दी थी पर विचारों में इतनी खो गई थी कि लाइट कब हरी हो गई है उसे पता ही न चला. पीछे से आ रही गाडि़यों के हौर्न की आवाज से वह चौंकी और जल्दी से अपनी कार आगे बढ़ा दी. चौराहे से आगे जा कर जब उस ने चैन की सांस ली तो पाया कि वह तो औफिस से काफी आगे निकल आई है. कार को वापस ले कर वह औफिस पहुंची और अपने कैबिन में पहुंच कर जैसे ही पर्स में से फोन निकाला तो अबीर की 10 मिस्ड काल देख कर उस के होश उड़ गए और उस ने फटाफट अबीर को काल लगा दिया.

‘‘अरे यार कहां थीं तुम और फोन को किस डब्बे में डाल कर रखा था. कब से फोन लगा रहा हूं और तुम्हारा अतापता ही नहीं.’’

‘‘सौरीसौरी अबीर वह मैं गाड़ी चला रही थी न,’’ अवनी ने किसी तरह खुद को संयत करते हुए कहा.

‘‘तो गाड़ी में फोन को ब्लूटूथ से अटैच करने की सुविधा भी होती है कि नहीं.’’

‘‘सौरी बाबा सौरी तुम कब पहुंचे और निशा ने नाश्ता करा दिया न?’’

‘‘हांहां सब ठीक है. नाश्ता भी कर लिया हो सके तो शाम को जल्दी आ जाना. कहीं बाहर चल कर सैलिब्रैशन करेंगे. मैं ने होटल ताज में टेबल बुक कर दी है,’’ अबीर ने अपना मंतव्य बताते हुए कहा.

‘‘हांहां जरूर आप कहें और मैं इनकार करूं इतनी मेरी हिम्मत कहां जनाब. ठीक है तुम तब तक आराम कर लेना. 2 दिन के टूर के बाद लौटे हो थक गए होंगे. शाम को मिलते हैं.’’

अबीर के बारे में सोच कर अवनी के अधरों पर मुसकराहट आ गई और अपनी खुशी को काबू में करती हुई वह अपनी फाइलों में डूब गई.

शाम को काम खत्म करतेकरते काफी देर हो गई. घर पहुंची तो अबीर चाय चढ़ा कर

बस उस के आने का इंतजार कर रहे थे जैसे ही उसने कालबेल बजाई तो अबीर ने दरवाजा खोलते ही उसे आलिंगनबद्ध कर के एक मीठा सा चुंबन उस के गाल पर जड़ दिया और बोले, ‘‘2 दिन तुम से दूर क्या रहा ऐसा लग रहा है मानो पूरा युग बीत गया हो.’’

‘‘क्या बात है मेरे मजनू मियां,’’ कह कर अवनी फ्रैश होने चली गई. तब तक अबीर ने डाइनिंगटेबल पर चायनाश्ता लगा दिया.

‘‘अरे चाय बन भी गई वाह क्या बात है.’’

‘‘इसीलिए तो हम दोनों ने एकदूसरे के फोन में लाइफ 360 ऐप इंस्टाल कर रखा है ताकि एकदूसरे की लोकेशन पता कर के चायनाश्ते का इंतजाम कर सकें.’’

‘‘हां यह तो सही है.’’

रात को दोनों ने ताज लेक व्यू में डिनर किया और फिर आ कर कुछ अपनी कुछ उस की सुनतेसुनाते हुए दोनों बैडरूम में आ गए. अबीर को सोने की इतनी आदत है कि बेड पर जाते ही नींद के आगोश में चले जाते हैं. जैसे ही अवनी ने सोने की कोशिश की तो अनायास ही सुबह की रश्मि की बात उस के कानों में गूंजने लगी कि अश्विन आजकल बहुत भक्ति भाव करने लगा है. अश्विन की याद आते ही उस की कटु यादों और अनुभव के अधूरे पन्ने फिर फड़फड़ाने लगे जब अश्विन से विवाह तय होने के बाद उस के घर में जोरशोर से शादी की तैयारियां चल रही थीं. वह अपने मातापिता की इकलौती बेटी थी और बैंक में पीओ के पद पर कार्यरत थी. यों भी घर में रुपएपैसों की कोई कमी तो थी नहीं सो मम्मीपापा अपने सारे अरमान उस के विवाह में पूरे करना चाहते थे. भोपाल के महंगे होटल रैडिसन से सारी रस्में और विवाह होना था. सो उसे 4 दिनों के लिए बुक कर लिया गया था.

शादी के कार्ड की डिजाइन फाइनल हो कर प्रिंट के लिए दे दिए गए थे. बस 1 माह बाद शादी थी सो उस का रोमांच भी शिखर पर था.

अश्विन दिल्ली में था तो वह पुणे में सो दोनों बस फोन पर ही अपने भविष्य की कल्पनाएं करते थे. उस समय रश्मि हाल ही में दिल्ली से ट्रांसफर हो कर पुणे आई थी चूंकि बैंक में उस समय वे 2 ही महिलाएं थीं इसलिए जल्द ही रश्मि से उस की बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी. यों तो वह बेचलर थी पर अकसर अपने किसी पुरुष मित्र से बात करती रहती थी. एक दिन लंच के समय उस ने रश्मि से कहा, ‘‘क्या तुम किसी से रिलेशनशिप में हो? कहां मिलीं उस से, कौन है और क्या करता है.?’’

‘‘दी यों तो कोई खास रिलेशनशिप नहीं है अकसर मैं दिल्ली में बोर होती थी तो टाइमपास के लिए मैं ने बंबल नाम का एक डेटिंग ऐप डाउनलोड कर लिया था जिस से कुछ लोगों को डेट भी किया था क्योंकि इस से कई पुरुषों की मानसिकता भी पता चलती है और सोचती हूं कि  हो सकता है कभी कोई सीरियस बंदा भी मिल जाए तो उस से मैं शादी भी कर सकती हूं.’’

‘‘बाप रे तुम तो बड़ीं छिपी रुस्तम निकलीं… तो कोई सीरियस बंदा मिला या नहीं अभी तक?’’ अवनी ने आश्चर्य से उस की तरफ देख कर कहा.

‘‘हां आजकल मैं एक बंदे से कांटैक्ट में हूं. बहुत दिन तो नहीं हुए. अभी कुछ दिन पहले ही उस के साथ डेट की थी,’’ रश्मि ने कुछ शरमाते हुए कहा.

‘‘ओहो तुम्हारे गालों की लाली बता रही है कि तुम उसे ले कर सीरियस हो. अच्छा दिखाओ तो कौन है?’’

अवनी ने कहा तो रश्मि ने अपने व्हाट्सऐप पर अपनी और उस की कुछ पिक्स दिखाईं. अवनी का चेहरा एकदम स्याह पड़ गया. उसे लगा अभी वह चक्कर खा कर चेयर से गिर जाएगी क्योंकि पिक में रश्मि के साथ कोई और नहीं अश्विन था. कुछ देर शांत रह कर उस ने खुद को संयत किया फिर धीरे से बोली, ‘‘वाह बहुत हैंडसम है कब मिली थी इस से?’’

‘‘पिछले 3 महीनों से मैं इसे डेट कर रही हूं. अभी पिछले हफ्ते ही जब सामान लेने गई थी तो उस से मिल कर आई थी,’’ रश्मि ने बहुत ही मासूमियत से कहा.

रश्मि की बातें सुन कर अवनी को काटो तो खून नहीं. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या न करे. 6 महीने पहले ही तो उन का विवाह तय हुआ है और 3 महीने से तो रश्मि के साथ ही डेट कर रहा है. हो सकता है इस से पहले किसी और से भी… विवाह से पहले ही इतना बड़ा धोखा तो विवाह के बाद क्या होगा सोच कर ही उस की रूह कांपने लगी. उस दिन तबीयत खराब होने का बहाना कर के वह हाफडे ले कर घर आ गई.

शाम को जब मां का फोन आया तो बात करतेकरते उस की आवाज भारी हो गई और किसी तरह उस ने खुद को संभाल कर बात की और सिरदर्द का बहाना कर के जल्दी से फोन काट दिया. उस पूरी रात उस की आंखों में नींद नहीं थी. बस सिर्फ मंथन था. मांपापा का चेहरा और समाज था. कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे. इतना बड़ा धोखा कोई कैसे कर सकता है. यदि घर में बताती है तो बहुत नुकसान होगा दूसरे समाज में बदनामी होगी सो अलग क्योंकि भारतीय समाज में लड़कों को हमेशा दूध का धुला और पाकसाफ माना जाता है वहीं लड़कियों को हमेशा चरित्रहीन करार दे दिया जाता है. शादी तोड़ने का आरोप हमेशा लड़की पर ही लगाया जाता है.

अभी अवनी मंथन में डूबी ही थी कि तभी अश्विन का फोन आ गया स्क्रीन पर

अश्विन का नाम देखते ही क्रोध से उस के शरीर का रोमरोम कांपने लगा. 2-3 बार बज कर फोन बंद हो गया. उस की भी कब आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला. सुबह उठी तो सिर काफी भारी था. पर हां अब उस ने सचाई पता लगा कर अश्विन का परदाफाश करने का निश्चय कर लिया था और सोच लिया था कि अब समाज के डर और आर्थिक नुकसान के कारण किसी भी हालत में अपनी जिंदगी की कुरबानी नहीं देगी, बस अब किसी तरह सच पता लगाना है. अब तक वह और रश्मि चूंकि बहुत अच्छी दोस्त बन चुकी थीं तो अब उसे अपने साथसाथ रश्मि को भी अश्विन के चंगुल से बचाना उस की जिम्मेदारी थी. अगले दिन सुबह जा कर सब से पहले वह रश्मि के कैबिन में पहुंची.

‘‘रश्मि आज शाम को इंडियन कैफे चलें… कहीं बाहर जाने का मन हो रहा है.’’

‘‘क्या हुआ ऐनिथिंग सीरियस… तू कुछ परेशान सी लग रही है,’’ रश्मि ने उस के चेहरे की तरफ देख कर कहा.

‘‘नहीं कुछ खास नहीं शाम को मिलते हैं.’’

वह पूरा दिन उस के लिए कितना भारी था उसे याद कर के आज भी सिहर उठती है वह. शाम 6 बजे वह और रश्मि दोनों इंडियन कैफे में थे.

‘‘रश्मि देख अब जो मैं तुझ से कहने जा रही हूं उसे प्लीज गलत मत समझना…’’ कह कर उस ने शुरुआत से ले कर अब तक की पूरी कहानी रश्मि को सुना दी, साथ ही अश्विन के साथ हुई अपनी रोका की रस्म के फोटो, शादी के कार्ड्स और होटल की बुकिंग भी उसे दिखाई.

‘‘उफ कितना बड़ा फ्रौड और डबल कैरेक्टर आदमी है यह. बातें तो इतनी लच्छेदार

करता है कि इस से बड़ा ईमानदार कोई होगा ही नहीं… अरे भई अच्छा हुआ जो अभी पता चल गया तेरे साथसाथ न जाने कितनों कि जिंदगी यह इंसान बरबाद कर चुका होगा और आगे भी करता. इसे तो सबक सिखाना ही होगा अवनी और वह भी इसी के घर दिल्ली में,’’ रश्मि क्रोध से बोली.

‘‘मैं तो खुद उस दिन तेरे मोबाइल में आश्विन का फोटो देख कर चेयर से गिरतगिरते बची थी मांपापा की सारी जमापूंजी लगा कर शादी की सारी तैयारियां हो चुकी हैं पर अब लोग क्या कहेंगे कि डर से अपनी पूरी जिंदगी तो दांव पर नहीं लगा सकती न. कुछ समझ नहीं आ रहा क्या करूं. मांपापा को पता चलेगा तो पता नहीं क्या बीतेगी,’’ अवनी ने उदास होते हुए कहा.

‘‘मैं कल तक कुछ प्लान करती हूं फिर दिल्ली चलने का प्लान बनाते हैं. लौट कर आंटी अंकल को सचाई बता देना. फिर देखना वे खुद शादी कैंसिल कर देंगे. वह तो अच्छा हुआ जो सही समय पर पता चल गया वरना तेरे साथसाथ मैं भी उसे अपना हमसफर बनाने का सोच रही थी.’’

अगले दिन औफिस से लौट कर अवनी

ने अपने मम्मीपापा से कहा, ‘‘मां 2 दिन के दिल्ली टूर पर जा रही हूं. लौट कर भोपाल आती हूं अगले हफ्ते.’’

अगले दिन अवनी और रश्मि दोनों दिल्ली पहुंचीं. रश्मि ने पहले से ही अश्विन से एक कैफे में मिलने का टाइम ले रखा था. तय समय पर अश्विन आ गया. काफी देर बात करतेकरते रश्मि बोली, ‘‘आज तो कुछ ग्रैंड पार्टी करने का मन कर रहा है पर प्लान नहीं कर पा रही हूं कैसे करूं.’’

‘‘अरे तो प्लान मैं कर लेता हूं. ऐसा करते हैं मेरे फ्लैट पर चलते हैं. वहीं कुछ घंटे ऐंजौय करेंगे फिर आप चली जाना,’’ अश्विन ने बेशर्मी से कहा.

‘‘हां ठीक तो है पर किसी ने देख लिया तो…’’ कुछ अचकचाने की ऐक्टिंग करते हुए रश्मि ने कहा.

‘‘अरे नहीं वहां ऐसा कोई खतरा नहीं है. हमारी सोसाइटी में सब अपने में मस्त रहते हैं तो चलिए आज आप के साथ कुछ वक्त बिताया जाए.’’

रश्मि आश्विन के साथ चल दी पर इस बीच उस ने अपने मोबाइल से अपनी और अश्विन की बातचीत को रिकौर्ड करने के लिए वौइस रिकौर्डर को औन कर रखा था. चलतेचलते अवनी को अपनी लाइव लोकेशन भी भेज दी थी ताकि वह आराम से उन दोनों तक पहुंच सके. रास्ते में रुक कर जब अश्विन ने लिकर खरीदी तो भी उस ने कोई प्रतिरोध नहीं किया बल्कि जैसे ही अश्विन लिकर ले कर ड्राइविंग सीट पर बैठा, वह बोली, ‘‘यह किया आप ने कोई काम अब आएगा मजा पार्टी करने में.’’

‘‘वैसे इस बार आप कुछ ज्यादा ही बिंदास लग रही हैं,’’ अश्विन मुसकराते हुए बोला.

‘‘अरे ऐसा कुछ नहीं है. आप की ही तरह मुझे भी लगता है कि अभी कर लो जितने मजे करने हैं. कल को घरगृहस्थी में फंसे तो जिंदगी कब निकल जाती है पता ही नहीं चलता. वैसे आप का शादी के बारे में क्या विचार है. आप को तो मेरी जैसी ही बिंदास लड़की चाहिए होगी.’’

‘‘हां दरअसल इस शादीवादी के झंझट में अभी पड़ना नहीं चाहता. बिंदास और मस्त स्वभाव मस्ती करने के लिए होता है गृहस्थी चलाने के लिए नहीं मेरी जानेमन. चलिए आ गया मेरा फ्लैट,’’ कह कर अश्विन ने गाडी का दरवाजा खोल दिया.

मन ही मन अश्विन की चतुराई और आशिकमिजाजी को दाद देते हुए उस ने

अश्विन के फ्लैट में प्रवेश किया. बेहद खूबसूरती से सजाए गए घर को देख कर लग ही नहीं रहा था कि यह एक बैचलर का घर है. निस्संदेह यहां हर दूसरे दिन कोई नई आती होगी यह सोचते हुए वह बोली, ‘‘तुम चेंज कर लो तब तक मैं पैग बनाती हूं.’’

‘‘अश्विन जब लौटा तो वह पैग बना कर तैयार थी. उधर दरवाजा खोल कर उस ने अवनी को भी अंदर कर के परदे के पीछे छिपा दिया था. अश्विन पर तो मानो वासना का भूत सवार था. सो उस ने फटाफट पैग लिया और बोला, ‘‘चलो आज का जश्न शुरू करते हैं.’’

रश्मि ने धीरे से उस के गिलास में अपना गिलास भी डाल दिया. रश्मि ने इतना स्ट्रौंग पैग बनाया था कि उसे पीते ही अश्विन पर खुमारी सी छाने लगी. इधर रश्मि उस के गिलास में लिकर डालती जा रही थी. थोड़ी ही देर में अश्विन पूरी तरह नशे में धुत्त हो चुका था.

अवनी ने हर बात हर ऐक्टिविटी को रिकौर्ड कर लिया था. अब रश्मि और अवनी ने अश्विन के गले की चेन, 2 डायमंड की अंगूठियां, उस के वौलेट में रखे 20 हजार रुपए अपने हवाले किए ताकि वक्त पड़ने पर उन्हें प्रूफ के तौर पर प्रयोग किया जा सके. अश्विन के 4 एटीएम कार्ड निकाल कर कैंची से टुकड़ों में काट कर डाल दिए और इस के बाद वे दोनों फ्लाइट ले कर पुणे आ गईं.

रास्ते में अवनी बोली, ‘‘अब आगे मैं संभाल लूंगी. मेरी इतनी मदद करने के लिए तेरा बहुतबहुत धन्यवाद.’’

घर आ कर सारे सुबूतों के साथ अवनी ने जब पूरी बात अपने मातापिता को बताई तो पिताजी तो सिर पकड़ कर ही बैठ गए,

‘‘उफ, अब क्या होगा. सारी बुकिंग, नातेरिश्तेदार… समाज अब क्या करूं,’’ मां बोली.

‘‘अरे करना क्या है सब से पहले अपनी तरफ की सारी बुकिंग कैंसिल कीजिए ताकि जितना नुकसान बच सकता है हम बचा पाएं. बेटी की जिंदगी बरबाद होने से बच गई यह क्या कम है. पूत के पांव पालने में ही दिख गए वरना आगे ये क्या चाल दिखाते पता नहीं.’’

अगले दिन अपनी तरफ की सारी बुकिंग कैंसिल कर के अवनी के पिता ने

अश्विन के पिता को फोन लगाया, ‘‘शर्माजी मैं यह शादी नहीं कर सकता. कारण केवल तभी बता पाऊंगा जब आप भोपाल आएंगे. मेरा आना मुश्किल है.’’

3 दिन बाद अश्विन का फोन आया लगभग झुंझलाते हुए बोला, ‘‘ये तुम्हारे पिताजी क्या बकवास कर रहे हैं? तुम जानतीं नहीं क्या सारी तैयारियां हो चुकी हैं. इस स्टेज पर शादी कैंसिल करने का क्या मतलब है? हम लोग शनिवार को भोपाल आ रहे हैं.’’

‘‘मुझे कुछ नहीं पता. पापा ने मुझे बस इतना बताया कि उन्होंने आप लोगों को बुलाया है,’’ अवनी ने यह कह कर फोन काट दिया.

रश्मि ने अश्विन के नंबर को ही ब्लौक कर दिया था. अवनी अचरज में थी कि कोई इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी इतना झूठ कैसे बोल सकता है.

इधर एटीएम कार्ड्स खराब हो जाने के कारण और फोन के गुम होने की सूचना अश्विन को पुलिस थाने में देनी पड़ी. कई पेपर्स ने भी इस न्यूज को कवर किया, जिस की सारी कटिंग्स रश्मि अपने कुछ सोर्सेज से ले कर अवनी को सौंप दीं थीं.

शनिवार को अश्विन अपने मातापिता के साथ अवनी के घर पर था. उस दिन अवनी ने रश्मि को भी भोपाल बुला लिया था ताकि ढंग से परदाफाश किया जा सके.

अवनी के पिताजी ने पहले तो सारे फोटो अश्विन के मातापिता के फोन पर भेजे और उन से उन्हें देखने को कहा. रश्मि के साथ अपनी फोटो देख कर पहले तो अश्विन घबराया पर फिर बोला, ‘‘अरे यह लड़की बहुत बदमाश है. इस ने मुझे फंसाया है.’’

इस के बाद अवनी ने रश्मि और अश्विन की बातचीत की सारी रिकौर्डिंग्स चला कर सब के सामने रख दी. इस बीच रश्मि भी आ कर अश्विन के सामने बैठ गई थी.

अश्विन को अब तक समझ आ गया था कि उस का झूठ पकड़ा गया है. सुबूत के तौर पर अश्विन की घड़ी, चेन, मोबाइल भी अवनी ने ला कर टेबल पर रख दिया और बोली, ‘‘मेरे सामने बहुत बड़ीबड़ी फैमनिज्म की बातें करने वाले अश्विन जब आप ने अपने मातापिता की इज्जत की ही परवाह नहीं की तो मेरी और मेरे मातापिता की क्या करेंगे. शादी तय होने के बाद भी आप न जाने कितनी लड़कियों के साथ रंगरलियां मना रहे हैं आप को शर्म आनी चाहिए.’’

‘‘अरे बेटा ऐसे शादीब्याह थोड़े ही टूटते हैं. हो जाती है गलती बच्चों से आवेश और जोश में,’’ अश्विन के पिताजी अवनी को शांत करते हुए बोले.

‘‘अंकल और यदि यही गलती मुझ से हुई होती तो क्या तब भी आप मुझे अपने घर की बहू बनाते?’’ अवनी आवेश में बोली.

काफी देर तक अश्विन के पापा को कोई जवाब नही सूझा.

‘‘लड़का होने का मतलब यह नहीं कि उन्हें अपनी मनमरजी करने की आजादी मिल गई. सब जानतेबूझते मैं अपनी बेटी आप के घर में नहीं दे सकता. मेरी बेटी मेरी शान, मान और अभिमान है और न ही मेरे ऊपर भार है जो मैं किसी से भी उस की शादी कर दूं. यह शादी अब नहीं हो सकती.’’

‘‘अंकल आप से मुझे कोई शिकायत नहीं है. आप मेरे पिता समान हैं पर हां अश्विन आप को हमारा अब तक का हुआ सारा खर्चा पे करना होगा वरना ये सारी पिक्स आप के पूरे समाज में सर्कुलेट हो जाएंगी. यह रहा आप का सारा सामान अश्विन के रुपए, वौलेट, रिंग्स और रोके का सारा सामान,’’ सब को टेबल पर रखते हुए अवनी ने कहा.

मरता क्या न करता वाली स्थिति हो चुकी थी. अश्विन ने अवनी के कहे अनुसार

सारा पे किया और फिर अपने पिताजी के साथ चला गया. इस तरह एक बहुत बड़ी अनहोनी का शिकार होतेहोते वह बच गई.

इस घटना के बाद उसे विवाह के नाम से ही डर लगने लगा था. वह बैंक औफ बड़ौदा में पीओ थी तो अबीर स्टेट बैंक औफ इंडिया में. अकसर मीटिंग्स में दोनों टकरा जाते थे. फिर एक दिन जब बहुत पानी बरस रहा था और अवनी मीटिंग के बाद ओला के आने का इंतजार कर रही थी तभी अबीर ने अपनी कार उस के बराबर ला कर रोक दी, ‘‘आइए आप को कहां जाना है मैं छोड़ देता हूं.’’

‘‘नहीं मैं ओला से चली जाऊंगी.’’

‘‘अरे मैं और मेरी कार ओला से तो बेहतर ही है आइए… आइए.’’

जब अबीर ज्यादा इंसिस्ट करने लगे तो वह चुपके से आ कर ड्राइविंग सीट की बगल वाली सीट पर आ कर बैठ गई. इस तरह यह अबीर और उस की पहली मुलाकात थी. रास्ते में अबीर उस से परिवार आदि के बारे में पूछते रहे.

अबीर खुद इंदौर से थे और परिवार में मातापिता के अलावा एक बड़ा भाई था जिन की शादी हो चुकी थी और वे मुंबई में सैटल्ड थे. एक ही प्रदेश का होने के कारण दोनों में कुछ ही दिनों में अच्छीखासी दोस्ती हो गई. दोनों अब एकदूसरे को अच्छी तरह जानने भी लगे थे.

एक दिन जब वे दोनों मीटिंग से लौट रहे थे तो अबीर ने कार एक रैस्टोरैंट के सामने रोक दी और बोले, ‘‘चलो आज कौफी पीते हैं.’’

कौफी और्डर कर के अचानक से अबीर बोले, ‘‘क्या हम दोनों हमेशा के लिए एकदूसरे के नहीं हो सकते?’’

एकदम से ऐसा प्रस्ताव सुन कर अवनी तो लगभग चौंक ही गई फिर धीरे से बोली, ‘‘क्या मतलब?

‘‘देखो मुझे जलेबियां बनाना तो आता नहीं. क्या तुम मुझ से शादी करोगी?’’ अबीर ने बिना किसी लागलपेट के अपना प्रस्ताव अवनी के सामने रख दिया.

अवनी को चुप देख कर अबीर फिर बोले, ‘‘नहीं कोई जल्दी या प्रैशर नहीं है. यदि आप मुझे अपने योग्य समझेंगी तो मैं खुद को धन्य समझूंगा. आप आराम से सोच कर उत्तर दीजिएगा.’’

इस के बाद दोनों ही अपनेअपने घर चले गए. रात में अवनी ने बातों ही बातों में अपनी मां

को अबीर के बारे में बताया. मां खुश तो हुई पर धीरे से बोलीं, ‘‘बेटा, अच्छे से देखपरख लेना आजकल न जाने कौनकौन से ऐप और तकनीक आ गई है. वह तो भला हो उस बंबल ऐप का वरना अनजाने में ही हम सब बहुत बड़ा धोखा खा जाते.’’

फिर एक दिन इंडियन कैफे हाउस में अवनी ने अश्विन के साथ हुई सगाई से ले कर टूटने तक की सारी घटना अबीर को बता दी. पूरी बात सुन कर अबीर बोले, ‘‘देखिए पहले तो मुझे आप के पास्ट से कोई लेनादेना नहीं है दूसरे आप ने रिश्ता एक वाजिब वजह से तोड़ा है. शादी जैसे रिश्तों की शुरुआत ही यदि झूठ से होगी तो वह कितने दिन तक चलेगी, यह तो कुदरत ही बता सकती है. मेरा मानना है कि रिश्ता कोई भी हो उस में पारदर्शिता होना बहुत जरूरी होता है.’’

और इस के बाद दोनों के परिवार वालों की सहमति से दोनों विवाह के बंधन में बंध गए और आज दूसरी ऐनिवर्सरी भी सैलिब्रैट कर चुके हैं. विचारों के इस प्रवाह में अवनी इतना अधिक बह गई थी कि कब सुबह के 5 बज गए उसे पता ही नहीं चला. पर आज संडे होने के कारण जागने की कोई जल्दी नहीं थी सो मन

ही मन बंबल ऐप का थैंक्स करती हुई वह फिर नींद के आगोश में चली गई.

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