लेखिका : इंदु सिन्हा ‘इंदु’
तेरी मेरी, इस की, उस की, जेठानीदेवरानी, सास बहू की कथाएं तो चलती रहती हैं. लेकिन इस बीच अगर पति पुराण न हो तो मजा ही नहीं आता.
ऐसा लगता है बिना तड़के की दाल या दाल बाफले हो लेकिन चटनी गायब. ऐसा ही मामला होता है इस पति नाम के जीव का. पहले तो जब महिलाओं की बैठक घर में दोपहर में ही फ्री हो कर बाहर चबूतरे पर जमती थी. कोई मेथी तोड़ रही होती, कोई गेहूं साफ कर रही होती, तब भी पति पुराण चलता रहता था. लेकिन अब तो डिजिटल इंडिया है. क्रांति है चबूतरों पर बैठने के दिन तो हवा हुए. अब किटट्ी पार्टी और मोबाइल पर यह कथा पत्नियों द्वारा बांची जाती है. घंटों निकल जाते हैं. बातें खत्म नहीं होती. चाहे कुकर सीटी बजाबजा कर बुलाता रहे. चावल पक कर पतीले में अंगरेज से नीग्रो का रूप धारण कर लें पर साली बातें खत्म नहीं होतीं, दूसरों के पतियों की फितरत मासूम लगती है और अपने पति की फितरतें खतरनाक.
आइए चले चलते हैं आप और हम इन्हीं फितरती पतियों से मुलाकात करने:
पहले
उंगलियों पर नाचने वाले पति : इन पतियों को अन्य नाम से भी बुलाया जाता है आज्ञाकारी पति, जोरू के गुलाम पति. ऐसे पति पत्नियों की उपलब्धि होते हैं. उन्हें पत्नी के अंधभक्त भी कह सकते हैं. चाहे पत्नी का पहनावा हो जिस में वह फूहड़ लगे या अच्छी पर पति अच्छाई का चश्मा ही पहने रहते हैं. पत्नी में कैटरीना कैफ के दर्शन करते हैं. सुबह चाय का कप हाथ में पकड़े पत्नी को जगाते हैं. सार्वजनिक जगहों पर होटल में इन को लड़ते झगड़ते भी देखा जा सकता है. पत्नी की फरमाइश पूरी नहीं होने पर लड़ पड़ते हैं होटल मैनेजर से वेटर से. ये पत्नी की मरजी से दिन को रात और रात को दिन कह देते हैं. ऐसे पतियों की अपनी कोई मरजी नहीं होती.
दूसरे
हिटलर पति : इन को सब से खराब श्रेणी के पतियों में रखा गया है. उन के नियमकायदे बड़े सख्त होते हैं. इन को बस और्डर देना आता है. और्डर तुरंत पूरा भी होना चाहिए. पत्नियों की जरा सी गलती पर ये पूरा घर सिर पर उठा लेते हैं. इन की पत्नियां बस इंतजार में रहती हैं कि कब क्या और्डर आ जाए. पुरानी फिल्मों की हीरोइनों जैसी दरवाजे पर सावधान की मुद्रा में रहती हैं. जैसे ही पति घर में प्रवेश करें चायपानी तुरंत हाजिर होना चाहिए.
ऐसे पतियों की मुसकराहट और हंसी के लिए पत्नियां इंतजार करती रहती हैं जैसेकि करवाचौथ व्रत के लिए सालभर इंतजार किया जाता है. जब पति मुसकराते हैं वे बड़े ही स्मरणीय पल होते हैं. जब पति हंस देते हैं उस दिन दीवाली मन जाती है.
तीसरे
नौटंकी पति : ऐसे पतियों की जाति बहुतायत में होती है. यह जाति ज्यादातर घरों में पाई जाती है. इन पतियों के सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें आप आसानी से पहचान सकते हैं. जैसे पत्नी के हर काम में कमी निकालना, रिश्तेदारी में कोई आयोजन हो तो इन का औफिशियल अर्जेंट काम निकल आना या फिर उन की तबीयत खराब हो जाना. सिरदर्द हो भी जाता है. जब रिश्तेदार इन को कई बार फोन करते हैं ‘जमाई राजा’ प्लीज थोड़ा समय निकालो, ससुराल पक्ष का आयोजन हुआ तो ‘कंवर साहब’ कृपा पधारो ‘दामादजी’ आ जाओ सभी आप के दीदार को बेचैन हैं तो तब जमाई बाबू पधारेंगे.
चौथे
दिल फेंक मजाकिया पति: इस प्रकार के पति शादी के कुछ सालों तक बने रहते हैं बाद में ये लुप्त होने लगते हैं और फिर धीरेधीरे गायब हो जाते हैं क्योंकि शादी के कुछ सालों के बाद ये नून तेल के चक्कर में फंस जाते हैं और इन का दिल टुकड़ेटुकड़े हो कर बिखर जाता है. इसलिए ये ‘दिल फैंक नहीं पाते.’ वैसे ये पति कुछ सालों तक ‘दिल हथेली पर’ भी लिए रहते हैं. इन की पहचान है मजाकिया स्वभाव, छेड़ने की आदत. मजाक करने की आदत दिल की बातें सामने रखने में इन का कोई मुकाबला नहीं है. इन का टेलैंट रिश्तेदारी में, शादियों में उभर कर सामने आता है. जब दूरदराज की सालियां, भाभियां मिलती हैं. तब इन का मजाकिया स्वभाव छेड़छाड़ चरम पर रहता है. कुछ सालों बाद इन के स्वभाव में ग्रहण लग जाता है. ये गृहस्थी की गाड़ी में उल झ जाते हैं.
5वें
रोतला पति : इन्हें ‘रोंदू’ पति भी कहा जा सकता है. इन की रोने की आदत से इन की पत्नियां परेशान रहती हैं. महंगाई का रोना तो अकसर रोते हैं. पत्नी के खर्चों को भी गिनते हैं. मेकअप, साडि़यों के खर्च को भी ये रोते रहते हैं. इन के रोने के प्रिय स्थल हैं पान, चाय की दुकान, अड़ोसपड़ोस की भाभियां या किसी दोस्त से मोबाइल पर चर्चा. रिश्तेदारों के घर आनेजाने में भी इन्हें परेशानी रहती है. बच्चों की फीस पढ़ाई के खर्चों को ले कर भी अकसर परेशान होते हैं. चाहे उन की मासिक सैलरी अच्छी हो. अगर कोई छोटा बच्चा घर में हो तो उस के दूध का हिसाब भी रखते हैं. लेकिन पत्नी की कोई सुंदर सहेली आती है तो उन की बांछें खिल जाती हैं. सहेली के सामने अपने बाल संवारते परफ्यूम लगा कर तैयार रहते हैं. ऐसे पतियों की पत्नियां परेशान रहती हैं.
छठे
न्यूट्रल पति: ये पति दुर्लभ जाति के होते हैं किस्मत वाली पत्नी को ये नसीब में होते हैं. सब्जी जल गई कोई बात नहीं, घर गंदा है कोई बात नहीं, कपड़े प्रैस खुद कर लेंगे, खाना नहीं बना औफिस की कैंटीन में खा लेंगे. पत्नी का सिर दुखता है, कभी कमर दुखती है, बाहर होटल से खाना ले कर घर आ जाएंगे. घरपरिवार की पत्नी ने बुराई कर दी तो एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल देंगे. पत्नी की सहेलियों, सालियों, भाभियों के छेड़ने पर चुपचाप निकल लेंगे. पलट कर जवाब नहीं देंगे. न ही किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ करेंगे. पत्नी की सुंदरता की तारीफ भी नहीं करेंगे. उस के कपड़ोंगहनों पर भी कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. कोई नैगेटिव बात भी नहीं करेंगे. ऐसे पतियों की पत्नियां ऐसे शांत पति से ऊब जाती हैं, चिढ़ जाती हैं. न लड़ाई न झगड़ा, न कोई लफड़ा. संत होते हैं ऐसे पति. ‘न काहू से दोस्ती न काहू से बैर’ के सिद्धांत पर चलते हैं. तो अब बताइए आप के पति कैसे हैं?
