जब आप पूरी लगन से अपना फोन या लैपटौप खोलते हैं और औफिशियल मेल का जवाब देने की तैयारी में होते हैं तो स्क्रीन पर पहली चीज नजर आती है, ‘‘सेल…सेल…सेल…दीवाली की बंपर सेल… औनलाइन एक फ्रिज खरीदें और साथ में एक टोस्टर फ्री पाएं… आज का जबरदस्त औफर… लिपस्टिक खरीदें और एक पाउच मुफ्त पाएं… ये औफर सिर्फ आज के लिए.’’
औनलाइन ऐडवर्टाइजिंग इतना सशक्त माध्यम बन चुकी है कि आप सब काम छोड़ कर इसे ही देखने लग जाते हैं, उस ‘डिफरैंट’ सादे कुरते को, जिस के साथ मैचिंग ईयररिंग्स भी हैं और साथ में शूज भी. इस के लिए अपने बौस को मेल का जवाब देना रुक सकता है. इस समय यह जरूरी लगने लगता है कि मैं 1 मिनट निकाल कर पहले वह कुरता अपनी शौपिंग बास्केट में डाल लूं. 2 मिनट लगा कर शायद इसे खरीद ही लूं. दफ्तर में काम तो? होते रहेंगे. यदि यह कुरता हाथ से निकल गया तो दोस्तों में शो औफ करने का एक मौका जाया कैसे जाने दिया जाए और फिर यह जबरदस्त औफर तो सिर्फ आज ही के लिए है. आप का भी कुसूर नहीं. औनलाइन कैंपेनियन आप को चीखचीख कर कह रही होती है कि यह आखिरी पीस है. अब आप को पता है कि वह आखिरी पीस आप के पास नहीं आया तो आप की जिंदगी बरबाद हो जाएगी.
उलझे कि फंसे
कोई और तो सिर्फ आप को आप के जन्मदिन पर ही तोहफा देगा. औनलाइन शौपिंग से आप हर समय अपनेआप को तोहफा देते रहते हैं और खुश रहते हैं. यह अलग बात है कि उस के बाद के्रडिट कार्ड का बिल देख कर आप को दिल का दौरा भी पड़ सकता है.
औनलाइन कंपनियां जबौंग, फ्लीपकार्ट, स्नैपडील ने 2010 से ले कर अब तक इतनी जबरदस्त छलांग मारी है कि यूएस फाइनैंशियल मार्केट में भी इन के चर्चे हैं. साल 2013 में अमेरिकी रिटेलर अमेजौन ने भारत में भी अपना कदम रख दिया. आने वाले समय में ये सारी कंपनियां हजारों वर्कर्स रखने का प्लान कर रही हैं, क्योंकि आप का खरीदा आइटम आप के घर पहुंचाने के लिए ये कंपनियां बहुत डिपार्टमैंट्स के साथ समझौता करती हैं.
ये तो कामयाब हैं पर हम तो मायाजाल में फंस गए न. पहले जहां कोई ड्रैस मांगने पर मम्मीडैडी से डांटफटकार मिलती थी, वहीं अब आप चुपचाप वही ड्रैस औनलाइन और्डर कर लेते हैं. अब हर चीज अपनी पहुंच में लगती है. इस औनलाइन मायाजाल ने हमारी प्लानिंग बहुत अच्छी कर दी है. अब हम प्लान करने लग गए हैं कि इस महीने की सैलरी में कुछ पैसे तो उस लाल लिपस्टिक के लिए निकाल ही लूंगी. जब लाल लिपस्टिक ले ली तो अब लाल जैकेट की बारी है. लाल जैकेट के साथ लाल जूते न पहनो तो सहेलियां आप के फैशन सैंस की खिल्ली उड़ाएंगी. बस यह मान लें कि एक बार यह सिलसिला शुरू हो गया तो खत्म लेने का नाम नहीं लेता, क्योंकि अगर आप ने फौर्मल सलवारकमीज ले ली तो कैजुअल ड्रैस भी तो चाहिए, अगर हाई हील्स ले लीं तो फ्लैट चप्पलें भी तो चाहिए, अगर लाल झुमकियां ले लीं तो टौप्स भी तो चाहिए. इस तरह आप शौपिंग की बारिश में भीगते ही चले जाते हैं.
भगवान भी औनलाइन
हमारे मजहब में परमात्मा का नाम जपने को बहुत मान्यता दी गई है. पर हमें मायानगरी से फुरसत ही कहां कि हम परमात्मा को याद करें. शायद कोई औनलाइन कंपनी यह कह दे कि आप को पूजापाठ की कैसेट के साथसाथ पीवीआर की टिकिट्स फ्री मिलेंगी, तो शायद हम जाग जाएंगे. वे दिन दूर नहीं कि जब मंदिर या गुरुद्वारे में सैल्फी खींच कर औनलाइन पोस्ट करने पर आप को कोई सरप्राइज गिफ्ट भी मिल जाए.
बहाना तो अच्छा है
औरतें वैसे ही शौपिंग करने के लिए बदनाम हैं. एक शौपिंग मौल के पेमैंट काउंटर पर एक औरत पेमैंट करने लगी तो काउंटर वाली लड़की ने दिखाया कि दूसरी औरत के पर्स में टीवी का रिमोट पड़ा था. उस ने पूछा, ‘‘आप हमेशा अपने टीवी का रिमोट अपने साथ रखती हैं?’’ शौपिंग वाली औरत कहने लगी, ‘‘नहीं मेरे पति मेरे साथ शौपिंग करने नहीं आते, तो मैं कैसे उन को घर में अकेले खुश रहने दे सकती हूं?’’
वैसे घर में रह कर पतिदेव भी आजकल पत्नी को औनलाइन शौपिंग में पीछे छोड़े हुए हैं. मोबाइल, लैपटौप, आईपैड, टीवी अब सब उंगली दबाने पर आप के घर आ जाते हैं, पर शायद फिर कुछ चीजें ऐसी रह जाएंगी जिन को हम कभी औनलाइन नहीं मंगा पाएंगे. ऐसा ही एक व्हाट्सऐप मैसेज कुछ पुरुषों को मिला:
‘जितनी मरजी औनलाइन शौपिंग करेंगे, पर आप को मेरे पास खुद चल के आना ही पड़ेगा, क्योंकि इंटरनैट पर बाल नहीं काटे जाते.’
-सविता भट्टी
