Pyaar Ki Kahani: मोबाइल की घंटी बजी तो प्रकाश ने मोबाइल की ओर देखा. स्क्रीन पर ‘रेखा कालिंग’ फ्लैश हो रहा था. ‘‘हैलो रेखा,’’ प्रकाश ने काल रिसीव कर के कहा. ‘‘मेरी प्रमोशन हो गई है. मुझे नए औफिस दुबई में जौइन करना है,’’ रेखा ने चहकते हुए कहा. उस की आवाज से उस की खुशी का अंदाजा लगाया जा सकता था. ‘‘अरे वाह, आखिर तुम गर्लफ्रैड किस की हो? तुम्हारी प्रमोशन कोई कैसे रोक सकता था?’’ प्रकाश ने खुश हो कर कहा. ‘‘अच्छा शाम को मिलो, अभी कई लोगों की काल्स आ रही हैं. बधाइयों का तांता लग रहा है,’’ रेखा ने कहा और फोन डिसकनैक्ट कर दिया.

प्रकाश को एकदम से ध्यान आया कि रेखा को दुबई जाना होगा प्रमोशन के बाद. रेखा ने पहले ही बताया था इस के बारे में. यह सोच कर वह थोड़ा उदास सा हो गया. वह पिछले डेढ़ वर्षों से रेखा के साथ था. दोनों एकदूसरे से बेहद प्यार करते थे. रेखा प्रकाश को बहुत ही बेहतर तरीके से समझती थी. प्रकाश आज तक ऐसी किसी लड़की के संपर्क में नहीं आया था जो उसे इतने बेहतर तरीके से समझ सके.

रेखा को प्रमोशन मिली थी और निश्चित रूप से यह खुशी की बात थी. उस ने बताया था कि प्रमोशन होने पर उस का पैकेज काफी बढ़ जाएगा और दुबई में सैलरी उसे दिरहम में मिलेगी. एक दिरहम का मूल्य 25 रुपए के बराबर होता है पर साथ ही यह भी बताया था कि कम से कम 2 वर्षों तक उसे दुबई में ही रहना होगा. दुविधा में पड़ गया प्रकाश.

\इतना अच्छा अवसर मिला है तो रेखा को तो उसे छोड़ने के लिए कैसे कह सकता है वह? पर वह इतनी दूर रहेगी तो क्या उन की रिलेशनशिप पर प्रभाव नहीं पड़ेगा? क्या इतने लंबे समय तक दूर रहना उचित होगा? क्या इस दौरान उन के बीच वह रिलेशन रह पाएगा जो अभी है? शाम को मिलने के लिए कहा था रेखा ने. कहां मिलना है यह स्पष्ट था. जब भी रेखा खुश होती थी उसे अपने फ्लैट पर बुलाती थी. फिर वहां से दोनों पिंड बलूची जाते थे डिनर पर. रेखा का यह पसंदीदा रैस्टोरैंट था और उस के फ्लैट से मुश्किल से 2 सौ मीटर की दूरी पर था.

औफिस से फ्री हो कर प्रकाश रेखा के फ्लैट पर पहुंच गया. रेखा ने उसका दिल खोल कर स्वागत किया. एकदम से गले लग गई उस के. ‘‘एक बार फिर से बधाई,’’ प्रकाश ने उसे अपनी बांहों में कसते हुए कहा. ‘‘थैंक्यू सो मच,’’ रेखा खुश हो कर इठलाती हुई बोली. ‘‘आज तुम्हारे लिए तुम्हारी पसंद की मैंगो फ्लेवर आइसक्रीम लाई हूं,’’ कह रेखा ने फ्रिज से 2 आइसक्रीम ला कर एक प्रकाश को दी और एक खुद खोल कर खाने लगी. ‘‘अब आगे?’’ प्रकाश अपनी आइसक्रीम को अनपैक करते हुए बोला. ‘‘चलेंगे पिंड बलूची और करेंगे डिनर और क्या?’’ रेखा ने आइसक्रीम खाते हुए लापरवाही से कहा. ‘‘मैं इस की बात नहीं कर रहा,’’ प्रकाश ने आइसक्रीम की एक बाइट लेते हुए कहा. ‘‘तो फिर किस की बात कर रहे हो?’’ रेखा ने पूछा ‘‘भई दुबई वाली मैडम इस इंडियन को पूछेगी भला अब?’’ प्रकाश बोला.

रेखा ने उसे मुंह बनाते हुए देखा मानो वह कितनी वाहियात बात कर रहा हो. फिर बोली, ‘‘प्रकाश सीधी रेखा में गमन करता है. तुम्हें तो पता है ही. सीधी रेखा जहां भी रहेगी प्रकाश उसी ओर चलेगा,’’ रेखा ने उंगली से अपनी ओर इशारा करते हुए चुटकी ली. ‘‘दुबई यहां से 2 हजार किलोमीटर दूर है. प्रकाश वहां तक पहुंचतेपहुंचते क्षीण हो जाएगा,’’ प्रकाश ने कहा. ‘‘2 हजार किलोमीटर यानी ज्यादा से ज्यादा 4 घंटे. आ जाना मिलने बीचबीच में और दुबई घूमना. कभीकभी मैं भी आ जाया करूंगी.

2 वर्ष कैसे बीत जाएंगे पता भी नहीं चलेगा,’’ रेखा ने कहा. ‘‘मजाक बहुत हो गया. अब थोड़ा गंभीर हो जाएं हम दोनों. क्या यह दूरी हमें एकदूसरे से दूर नहीं कर देगी?’’ प्रकाश गंभीर हो कर बोला. ‘‘दूरी हमें एकदूसरे से दूर नहीं कर देगी… क्या फिलौस्फिकल बात कही है तुम ने,’’ रेखा ने पहले तो उस की बातों का मजाक उड़ाया.

फिर बोली, ‘‘लेकिन तुम्हें नहीं लगता कि कुछ ज्यादा ही फालतू बातें कर रहे हो?’’ रेखा ने परेशान हो कर कहा. ‘‘प्रैक्टिकल बात कर रहा हूं,’’ प्रकाश ने गंभीर होकर कहा. ‘‘एक ही घर में एक ही छत के नीचे रहने वालों के बीच अनबन होते हुए देखी है तुम ने?’’ रेखा बोली. ‘‘हां, देखी तो है,’’ प्रकाश ने कहा. ‘‘उन के बीच दूरी नहीं होती. फिर क्यों अनबन होती है?’’ रेखा ने सवाल किया? ‘‘विचार नहीं मिलने के कारण और क्या?’’ प्रकाश ने जवाब दिया. ‘‘यानी दूरी न भी हो पर विचार न मिलें तो प्रेम वैसा नहीं रहता. राइट?’’ रेखा ने फिर सवाल किया. ‘‘हां,’’ प्रकाश ने जवाब दिया. ‘‘इस का विलोम भी सत्य होना चाहिए यानी दूरी हो पर विचार मिलें तो संबंध बना रहता है,’’ रेखा ने तर्क दिया.

‘‘बात तुम्हारी सही है पर मुझे लगता है इतनी दूर रहने से हमारे बीच दूरी न बढ़ जाए,’’ प्रकाश ने फिर शंका व्यक्त की. ‘‘फिर मैं प्रमोशन छोड़ देती हूं,’’ रेखा ने कहा. ‘‘यह उचित नहीं होगा. तुम्हारी मेहनत और प्रतिभा के कारण तुम्हें प्रमोशन मिली है. बारबार यह मौका मिलने से रहा,’’ प्रकाश ने कहा. ‘‘फिर क्या किया जाए? तुम ही बताओ,’’ रेखा ने पूछा. प्रकाश को कोई जवाब नहीं सूझ. ‘‘पहले डिनर का जो प्रोग्राम बन गया है उसे निबटाते हैं, फिर आराम से बातें करेंगे.’’ रेखा ने कहा.

प्रकाश ने सिर हिला कर अपनी सहमति दी. उस के चेहरे पर अभी भी अनिश्चितता का भाव था. थोड़ी देर बाद दोनों डिनर के लिए गए पर एक अजीब सा खालीपन लग रहा था वातावरण में. थोड़ी देर पहले दोनों जितने खुश थे अब उतने खुश नहीं दिख रहे थे. डिनर से वापस आने के बाद रेखा बोली, ‘‘तुम मेरे दूर जाने से दुखी हो फिर भी मुझे रोक नहीं रहे हो क्योंकि यह मेरे कैरियर का मामला है. यही तो साबित करता है कि तुम मेरा कितना खयाल रखते हो. मैं तुम्हारे कहने पर प्रमोशन छोड़ने के लिए तैयार हूं.

यह साबित करता है कि मुझे कितना खयाल है तुम्हारा यानी हम दोनों एकदूसरे की खुशी चाहते हैं. 2 वर्ष कोई बहुत बड़ा समय नहीं है. इस के बाद मैं वापस आ जाऊंगी. यदि तुम्हें किसी बेहतर कंपनी में दुबई शिफ्ट होने का मौका मिले तो तुम भी वहां आ सकते हो. दूरी ऐसी समस्या भी नहीं है जितना तुम सोच रहे हो.’’ ‘‘तुम ठीक कह रही हो,’’ जब हम दोनों एकदूसरे का खयाल रखेंगे तो फिर दूरी का कोई मतलब नहीं रहेगा,’’ प्रकाश ने कहा. पर उस की आवाज में उदासी झलक ही रही थी.

कुछ महीनों के बाद रेखा दुबई चली गई. स्वाभाविक था कि शुरुआती कुछ महीनों में वहां के वातावरण में ढलने में समय लगा रेखा को. साथ ही वहां का समय भी डेढ़ घंटे पीछे था. कई बार ऐसा होता था कि प्रकाश रात में फोन करता तो रेखा रिसीव नहीं कर पाती थी. इस से प्रकाश को बहुत दुख होता था. पर जैसे ही रेखा को मौका मिलता था वह काल बैक जरूर करती थी. बाद में रेखा जब नए माहौल के अनुसार ढाल गई तो फिर दोनों के बीच हमेशा संपर्क बना रहा.

औफिस की ओर से मिलने वाले एलटीसी की सुविधा में प्रकाश दुबई और आसपास के इलाके घूम आया और रेखा का साथ मिला उसे. रेखा भी डेढ़ साल के बाद छुट्टी ले कर भारत आई तो प्रकाश के साथ उस ने खूब आनंद लिया. इस प्रकार डेढ़ वर्ष कब बीत गए पता ही नहीं चला. जब रेखा को वापस दुबई जाने के लिए एअरपोर्ट पर विदा करने प्रकाश पहुंचा तो उस ने कहा, ‘‘रेखा तुम ठीक कहती हो.’’ रेखा ने प्रकाश को प्रश्नवाचक निगाहों से देखा मानो पूछ रही हो कहना क्या चाहते हो? प्रकाश बोला, ‘‘तुम ने कहा था न कि दूरी हो पर विचार मिलें तो संबंध बना रहता है.’’ रेखा ने सहमति में सिर हिलाया.

‘‘शुरू में मैं आशंकित था पर तुम्हारी बात सच निकली. कुछ महीनों के बाद तुम वापस आ जाओगी फिर हम दांपत्यजीवन में प्रवेश करेंगे.’’ जवाब में रेखा ने प्रकाश के गाल पर एक चुंबन जड़ दिया और हाथ हिलाते हुए ट्रौली के साथ एअरपोर्ट के अंदर चली गई.

Pyaar Ki Kahani

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