Prem Kahani : जब ऋषभ और काजल की शादी बचातेबचाते देव खुद ही फंस गया. ऋषभ और काजल की शादी को लगभग 3 साल हो गए थे. दोनों की लव मैरिज थी. हर लव मैरिज की तरह पहले साल तो खूब मौजमस्ती चली लेकिन समय बीततेबीतते एक आम शादी में बदल गई और फिर एक चिड़चिड़ाहट में. यों तो आज भी दोनों की बीच प्यार मौजूद था लेकिन काजल यों तेवर ऋषभ को बहुत चुभते. दोनों की हर छोटी बात पर अकसर बहस हो जाती, जिस से दोनों के बीच दूरी बढ़ रही थी.
अब इस परेशानी का जिक्र वे करें भी तो किस से. ऋषभ अपने घर वालों से कर नहीं सकता था. वे हमेशा से इस शादी के पक्ष में नहीं थे. उन का मानना था कि ऋषभ डाक्टर है तो उसे किसी डाक्टर से ही शादी करनी चाहिए न कि किसी कौरपोरेट कंपनी की मैनेजर से. दूसरी ओर काजल के यहां उलटा हाल था. काजल के घर वालों को हमेशा ऋषभ ही सही और काजल जिद्दी नजर आती थी तो अब शिकवा करें तो किस से और सलाह भी मांगे तो किस से.
काजल एक सुबह ऋषभ से बोली, ‘‘मैं ने तुम से कहा था कि शाम को आते वक्त सब्जियां ले आना. लेकिन नहीं, तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता.’’
ऋषभ भी ऐठ में बोला, ‘‘अच्छा तो तुम ही क्यों नहीं ले आती सब.’’
‘‘मैं ला सकती हूं पहले भी मैं ही लाती थी लेकिन तुम्हें पता है मु झे आजकल घर आते इतनी देर हो जाती कि कोई दुकान खुली नहीं होती.’’
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