Prem Kahani : जब ऋषभ और काजल की शादी बचातेबचाते देव खुद ही फंस गया. ऋषभ और काजल की शादी को लगभग 3 साल हो गए थे. दोनों की लव मैरिज थी. हर लव मैरिज की तरह पहले साल तो खूब मौजमस्ती चली लेकिन समय बीततेबीतते एक आम शादी में बदल गई और फिर एक चिड़चिड़ाहट में. यों तो आज भी दोनों की बीच प्यार मौजूद था लेकिन काजल यों तेवर ऋषभ को बहुत चुभते. दोनों की हर छोटी बात पर अकसर बहस हो जाती, जिस से दोनों के बीच दूरी बढ़ रही थी.

अब इस परेशानी का जिक्र वे करें भी तो किस से. ऋषभ अपने घर वालों से कर नहीं सकता था. वे हमेशा से इस शादी के पक्ष में नहीं थे. उन का मानना था कि ऋषभ डाक्टर है तो उसे किसी डाक्टर से ही शादी करनी चाहिए न कि किसी कौरपोरेट कंपनी की मैनेजर से. दूसरी ओर काजल के यहां उलटा हाल था. काजल के घर वालों को हमेशा ऋषभ ही सही और काजल जिद्दी नजर आती थी तो अब शिकवा करें तो किस से और सलाह भी मांगे तो किस से.

काजल एक सुबह ऋषभ से बोली, ‘‘मैं ने तुम से कहा था कि शाम को आते वक्त सब्जियां ले आना. लेकिन नहीं, तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता.’’

ऋषभ भी ऐठ में बोला, ‘‘अच्छा तो तुम ही क्यों नहीं ले आती सब.’’

‘‘मैं ला सकती हूं पहले भी मैं ही लाती थी लेकिन तुम्हें पता है मु झे आजकल घर आते इतनी देर हो जाती कि कोई दुकान खुली नहीं होती.’’

‘‘क्योंकि उन्हें भी वक्त का होश रहता है.’’

‘‘कहना क्या चाहते हो?’’

‘‘यही कि सब्जी वाले भी टाइम से दुकान बंद कर घर चले जाते हैं. मगर तुम्हें वक्त का कोई होश नहीं. जल्दी जाती हो और देर से आती हो. जैसे घर, घर नहीं कोई होटल हो.’’

‘‘क्या? तुम्हें पता है न आजकल औफिस में नए प्रोजैक्ट को ले कर कितनी टैंशन चल रही है. मैं नहीं हरकोई ऐक्स्ट्रा टाइम दे रहा है.’’

‘‘अगर हरकोई मेरी बीवी नहीं.’’

‘‘तो तुम्हारा मतलब क्या है? बीवी हूं तो तुम्हारे कहने पर चलूं?’’

‘‘मेरा मतलब सिर्फ इतना है कि टाइम से घर आओ और अपना घर संभालो.’’

‘‘मैं संभालू और तुम? अगर मेरे पास टाइम नहीं तो क्या तुम यह घर नहीं संभाल सकते? यह घर तुम्हारा भी तो है.’’

‘‘जो हो सकता है मैं कर रहा हूं और इस से ज्यादा नहीं कर सकता. क्लीनिक देखूं फिर घर का काम भी. मैं पति हूं तुम्हारा, तुम्हारी बीवी नहीं.’’

‘‘मतलब बीवी का ही काम है घर देखना?’’

‘‘देखोगी तब न जब तुम्हारे पास वक्त होगा.’’

‘‘मेरे पास वक्त नहीं क्योंकि मैं जौब करती हूं. तुम्हारी तरह दुकान नहीं चलाती कि जब मन चाहा बंद किया और चल दिए.’’

‘‘क्या कहा दुकान. वह एक क्लीनिक है और मैं एक क्वालिफाइड डैंटिस्ट. कोई किराना स्टोर चलाने वाला नहीं जो बकवास कर रही हो.’’

दोनों की बहस 10 मिनट और चली. फिर दोनों अपनेअपने काम को निकल गए. कंपनी में काजल अपना गुस्सा अपने जूनियर्स पर निकाल रही थी और क्लीनिक में ऋषभ अपना गुस्सा एक डंपी टूथ सैंट पर. इसी बीच क्लीनिक में एक ऐसा पेशैंट आया जिसे देखते ही ऋषभ के चेहरे पर मुसकान आ गई. दरअसल, पेशैंट ऋषभ का दोस्त देव था. दोनों एकदूसरे के गले मिले और फिर बाहर निकल गए. एक चाय के बाद दूसरी फिर तीसरी. न दोनों की चाय खत्म हो रही थी न बातें.’’

देव ऋषभ से बोला, ‘‘अगर हम यों बीते दिनों की बातें याद करते रहेंगे तो न तू क्लीनिक जा पाएगा और न ही मैं घर.’’

‘‘मैं ने मैसेज कर रिसैप्शनिस्ट को क्लीनिक बंद करने को कह दिया है. अब तू भी घर मत जा. चल कहीं चलते हैं.’’

‘‘भाई मेरी वजह से काम मत छोड़.’’

‘‘अरे नहीं बहुत दिन हो गए थे कोई ब्रेक लिए. अच्छा हुआ तू आ गया. कम से कम पुरानी बातें कर मन तो हलका हो जाएगा.’’

‘‘हलका? क्या हुआ सब ठीक है?’’

‘‘हां भाई सब ठीक है. बस थक गया हूं क्लीनिक से घर फिर घर से क्लीनिक.’’

‘‘अच्छा… वैसे काजल कैसी है?’’

‘‘वह तो मस्त है. सीनियर मैनेजर बन हुक्म चलाती है सब पर.’’

‘‘यह तो बढि़या है. इतनी जल्दी बड़ी पोजिशन मिलना आसान नहीं,’’ और फिर दोनों ने पूरी दोपहर साथ बिताई.

‘‘चल अब शाम हो गई. टाइम से घर जा काजल वेट करेगी.’’

‘‘काजल,’’ ऋषभ के चेहरे पर एक भद्दी मुसकान थी. देव के कुछ कहने से पहले ही ऋषभ बोल पड़ा, ‘‘काजल के साथ रोज शाम गुजरती है. आज तेरे साथ शाम बितानी है. चल कहीं खानापीना करते हैं.’’

दोनों ने साथ डिनर किया फिर थोड़ी देर टहले. जब अलविदा का टाइम आया

तो ऋषभ देव को जाने नहीं दे रहा था.

देव ने कहा, ‘‘क्या भाई अब क्या?’’

ऋषभ ने जिद्द की, ‘‘चल ड्राइव पर चलें.’’

‘‘ऋ षभ माजरा क्या है?’ मैं दोपहर से देख रहा हूं तू घर जाने की बात को बारबार काट दे रहा है. सब ठीक है न?’’

‘‘हां सब ठीक है. मैं बस…मैं थोड़ा आजाद रहना चाहता हूं. घर जा कर तो वही सब चिकचिक.’’

‘‘चिकचिक… क्या  झगड़ा हुआ तुम दोनों का?’’

ऋषभ कुछ देर चुप रहा लेकिन देव के बारबार पूछने पर एकदम से बोल पड़ा, ‘‘तलाक भाई तलाक. तलाक चाहिए मु झे.’’

देव ऋषभ की बात पर चौंका. वह कुछ और कहतापूछता कि ऋषभ ही अपने अंदर का सारा गुबार निकालता चला गया, ‘‘काजल को जब से प्रमोशन मिली है, मेरे सिर पर नाच रही. एक चाय बना दो, कपड़े सूख गए होंगे, उन्हें उतार तह लगा दो, तुम सब्जी क्यों नहीं लाए? शाम को पौधों में पानी क्यों नहीं डाला? मैं लेट आऊंगी खाना बना लेना. हर वक्त और्डर जैसे मैं उस का पति नहीं कोई नौकर हूं. बौस होने की धौंस औफिस में दिखाए न. मेरे घर में नहीं. मेरे घर का बौस, उस का मालिक मैं हूं.’’

देव ऋषभ को थोड़ा शांत करते बोला, ‘‘देख भाई घर के कामों में हाथ बंटाना कोई बुरी बात नहीं.’’

‘‘हां लेकिन अपनी मरजी से, किसी के और्डर पर नहीं. मैं मदद करता हूं. मगर वह मेरी मदद को गुलामी बना रही है. बस अब बहुत हुआ. मैं उस के साथ नहीं रह सकता.’’

‘‘ऐसा मत बोल. अभी तू गुस्से में है. अभी दिमाग ठंडा कर और घर जा. काजल राह देख रही होगी.’’

‘‘राह और काजल. भाई वह घर होगी तो न राह देखेगी. वह रोज लेट आती है. आज भी लेट आएगी. इसलिए तो अब तक कोई फोन किया उस ने. अरे जो खुद लेट है वह क्या घर पर किसी की राह देखेगा. उसे वक्त पर आने की कहो तो कहेगी कि तुम्हारी तो दुकान है, तुम जब चाहो तब आ सकते हो. लेकिन वह तो जौब करती है. प्रमोशन का भूत यों चढ़ा है दिमाग पर कि क्लीनिक और दुकान का फर्क नजर नहीं आता.’’

देव ने ऋषभ को सम झाया उसे, ‘‘देख मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि थोड़ा वेट कर. जल्दबाजी में तलाक जैसा फैसला तो ले मत. तुम दोनों एक बार शांति से बैठ कर बात करो. देखना चीजें सुल झ जाएंगी… अभी घर चलते हैं.’’

ऋषभ शांत हो घर निकल गया. घर पहुंच काजल को घर में देख चौंक गया, ‘‘वह एक जरूरी काम आ गया था इसलिए देर हो गई.’’

‘‘हां काम. मैं भी कुछ काम आ जाने की वजह से लेट हो जाती हूं जानबू झ कर नहीं,’’ काजल ने ताना मारा. ‘‘मैं ने सोचा था आज डिनर साथ करेंगे. खैर, छोड़ो कोई नहीं. मैं ने खाना खा लिया है तुम भी खा लो.’’

ऋषभ तो खाना खा कर आया था लेकिन यह बात काजल को नहीं बता सकता था. मगर पेट भरा होने के बाद भी ऋषभ ने थोड़ा खाना खा लिया. आखिर काजल ने ऋषभ के पसंदीदा कढ़ीचावल जो बनाए थे.

अगले दिन ऋषण को देव का फोन आया, ‘‘देव देख मु झे यह लगता है, तुम

दोनों के बीच टैंशन इसलिए हो रही है कि तुम दोनों एकदूसरे को टाइम नहीं दे पाते और रोज के कामों से बोर होते जा रहे हो, तो क्यों न तुम दोनों एक ट्रिप पर चले जाओ.’’

‘‘नहीं देव. अभी हम चारदीवारी में लड़ रहे हैं. तू क्या चाहता है पूरी दुनिया के सामने लड़े?’’

देव ने शाम को फिर फोन किया, ‘‘फोन मत काट पहले बात सुन. तु झे काजल के साथ अकेले नहीं जाना तो मैं साथ चलता हूं.’’

‘‘क्या?’’

‘‘तू क्या भूल गया तेरी शादी के लिए मैं ने भी कितने पापड़ बेले थे तो अब शादी बचाने के लिए भी बेल लेता हूं. देख भाई वैसे भी मैं 10 दिन बाद लंदन चला जाऊंगा तो क्यों ने इसे मेरा फेयरवैल सम झ ले. मैं, तू और काजल एक ट्रिप पर चुनते हैं… बोल अब क्या कहता है?’’

‘‘औफर बुरा नहीं है लेकिन काजल नहीं मानेगी. उस के पास टाइम नहीं है.’’

जैसा ऋषभ ने कहा ठीक वैसा ही रिप्लाई काजल ने देव के मैसेज पर दिया, ‘‘सौरी देव. टाइम नहीं है.’’

काजल ने कुछ देर कोई जवाब नहीं दिया फिर कुछ देर बाद लिया, ‘‘ठीक है लेकिन सिर्फ 4 दिन.’’

2 दिन बाद तीनों मनाली के लिए निकल गए.पूरे रास्ते देव, ऋषभ और काजल की शादी में आई अड़चनों, शादी में की हुई मौजमस्ती के पलों को दोहराते जा रह था और काजल इन यादों को याद कर खूब हंसबोल रही थी. काजल को यों खुशी से  झूमता देख ऋषभ को सम झ आ रहा था कि देव का प्लान सही काम रहा है और ऋषभ अभी भी अपनी शादी से उम्मीद लगा सकता है.

मनाली की सुंदर वादियां, बारिश की भीनी बूंदों के मजे में ऋषभ और काजल के बीच की दूरी कम होती दिख रही थी. दोनों हर साइट सीन पर एकसाथ फोटो लेने लगे. चाय और नूडल का एकसाथ लुत्फ लेने लगें. उन का होटल भी बहुत ही खूबसूरत और अपने नाम की तरह ही था मूनवैली. रात में जब चांद निकलता तो पूरी वैली में अपनी चांदनी बिखेर देता.

एक लंबे सफर के बाद तीनों अपने कमरे में आराम को चले गए. एक तरफ कमरे में जाते ही देव सो गया. दूसरी तरफ ऋषभ और काजल मन ही मन यह सोच रहे थे कि पहल कौन करे. दोनों को एकदूसरे के करीब आए बहुत समय हो गया था. दोनों आजकल इतना झगड़ते थे कि एकदूसरे के नजदीक आने का मन ही नहीं करता था. मगर आज मन दोनों का था लेकिन समस्या वही ईगो. दोनों में से कोई भी पहल कर के अपने को छोटा नहीं दिखाना चाहता था और इसी ईगो को पकड़े दोनों सो भी गए. देर सुबह जब काजल की आंख खुली तो बहुत कुछ बदल चुका था. मूनवैली भी, मनाली भी और काजल की गृहस्थी भी.

चारों ओर शोर था. लोग रो रहे थे. काजल ने जब होटल के स्टाफ से पूछा तो पता चला कि भारी बारिश की वजह से लैंडस्लाइड हुआ है. बहुत से लोग उस की चपेट में आ अपनी जान खो चुके और बहुत से लोगों का कुछ आतापता नहीं. काजल भागीभागी यह बात ऋषभ और देव को बताने देव के कमरे की ओर गई. ‘देव ने नींद से भरी आंखें मलते हुए दरवाजा खोला, ‘‘पता है तुम दोनों को बाहर लैंडस्लाइड हुआ है. बहुत से लोग मारे गए और कुछ का पता नहीं चला.’’

देव काजल की बात सुनते ही होश में आ गया और खिड़की के परदे हटा बाहर देखने लगा.

‘‘ऋषभ क्या बाथरूम में है?’’ पूछ काजल ने बाथरूम में  झांका. ऋषभ कहां है.’’

देव चौंका, ‘‘क्या? ऋषभ तो तुम्हारे साथ था न… कल रात दोनों साथ गए थे कमरे में.’’

‘‘हां लेकिन सुबह वे कमरे में नहीं था.’’

‘‘तुम ने ठीक से देखा था?’’

‘‘हां मैं कमरे में अकेली थी और जब कमरे से बाहर आई तो…’’

काजल और देव ने पूरे होटल में ऋषभ को ढूंढा लेकिन वह नहीं मिला. तभी गार्ड ने बताया कि ऋषभ बहुत सुबह ही कुछ और गैस्ट के साथ एक हाई पीक की ओर निकल गया था और कुछ घंटे पहले जो लैंडस्लाइड हुआ वह उसी ओर हुआ है.

इतना सुनते ही काजल की सांस फूलने लगी. देव ऋषभ को ढूंढ़ने की बात करने लगा तो होटल मैनेजर ने कहा, ‘‘सर आप देख सकते हैं. हर जगह क्या हाल है. सारे रास्ते, नाके बंद हैं. रैस्क्यू टीम अपना काम कर रही है. हमें कोई इन्फौरमेशन मिलेगी तो हम बता देंगे. आप शुक्र करें कि मुसीबत अभी हम तक यहां नहीं पहुंची.’’

मैनेजर ने सब को अपनेअपने कमरे में जाने की सलाह दी. बहुत से लोग कमरों में चले गए है लेकिन कुछ हौल में बैठ कर ही अपने परिजनों की राह देखने लगे. काजल भी वहीं बैठ गई. सुबह से दोपहर फिर शाम हो गई लेकिन ऋषभ का कोई पता नहीं चला. देव ने काजल को सलाह दी कि वह कमरे में जाए नहीं तो ठंड का शिकार बन जाएगी.

काजल बिस्तर पर करवटें बदलती रही. उसे न नींद आ रही थी न चैन. घर वालों से जब सुबह बात हुई थी तो सब टीवी पर दिख रहे कुहराम को देख डरे हुए थे. ऋषभ की मां तो सारा दोष काजल को दे रही थी कि काजल के कहने पर ही यह ट्रिप बना होगा.

शाम आतेआते सारे नैटवर्क भी चले गए और बिजली भी. पूरा होटल कैंडल और लालटेन की रोशनी ओढ़े था. काजल को उस का बिस्तर एक ठंडे बर्फ की सिली की तरह महसूस हो रहा था. वह खुद को कोसे जा रही थी कि काश कल रात उस ने पहल की होती तो आज ऋषभ उसे यों सुबह छोड़ कर नहीं जाता बल्कि उस की बांहों में सोया रहता तो कभी उस के मन में आता कि अगर वह अपने रिश्ते को अपनी नौकरी के पीछे यों नजरअंदाज न करती तो ऋषभ और उस के बीच खटास नहीं पनपती. पूरी रात काजल ने रोतेबिलखते कमरे में बंद हो निकाल दी.

सुबह देव काजल के कमरे में आया है, ‘‘तुम ठीक तो हो? मैनेजर ने बताया कि तुम न बाहर खाना खाने आई न खाना मंगवाया,’’ ऐसा बोल देव ने चाय और कुछ स्नैक्स कमरे की टेबल पर रख दिए, ‘‘कुछ खा लो प्लीज.’’

काजल ने थोड़ा नाश्ता किया फिर चाय का कप थामे वापस बिस्तर में वापस चली गई. देव उस का मन बहलाने के लिए इधरउधर की बातें करने लगा. काजल ने कुछ देर उस की बातें सुनीं फिर बोली, ‘‘क्यों मन भटका रहे हो? डर तो तुम्हें भी लग रहा है न तो फिर मेरा जी क्यों बहला रहे हो?’’

देव ने एक मुसकान भरी और कहा, ‘‘यहां कोई मेरा अपना कहने और सम झने वाला सिर्फ तुम हो तो तुम्हारा ध्यान तो रखना ही पड़ेगा. नहीं तो ऋषभ भी आ कर कहेगा साले एक तो हमें फंसा दिया और बीवी का खयाल भी नहीं रखा.’’

सुबह से फिर दोपहर लेकिन ऋषभ की कोई खबर नहीं आई और जो खबर आई वह…

‘‘क्या बोला उन्होंने…’’ काजल ने देव से सवाल पूछा.

देव काजल से नजरें चुराने लगा तो स्टाफ ने बताया कि 2 लोगों की लाशें मिली हैं… वे वही हैं जो जो ऋषभ के साथ पीक पर गए थे.

काजल की बची आस भी दम तोड़ गई. वह दौड़ कर अपने कमरे में गई और खुद को बंद कर लिया. देव कुछ देर तक उस का दरवाजा खटखटाता रहा लेकिन काजल ने नहीं खोला. वह सिर्फ रोतीचीखती रही.

रात हो चुकी थी. एक तरफ देव खुद को कोस रहा था

तो दूसरी ओर काजल खामोश हो मन ही मन किसी उधेड़बुन में थी कि अचानक एक खयाल आया और वह एक पल में देव के पास पहुंच गई.

देव के दरवाजा खोलते ही काजल उस पर बरस पड़ी. उसे बारबार थप्पड़ मारती और कहती, ‘‘सब तुम्हारी वजह से हुआ. तुम हमें यहां लाए. हम दोनों को इमोशनल कर यहां फंसा दिया. सब तुम्हारी गलती है.’’

देव भी बिना कोई शिकायत करे काजल की फटकार और मार खाता रहा. लेकिन काजल की हिम्मत भी कुछ देर बाद टूट गई. वह जमीन पर बैठे रोने लगी. देव ने पहले दरवाजा बंद किया और फिर काजल को संभाला. काजल उस सैलिपट कर और तेज रोने लगी. धीरेधीरे वह इतना बेसुध हो गई कि देव की बांहों में उस के टूटे दिल को आराम मिलने लगा. देव भी उसे सहारा देने के लिए कभी उस के बालों में हाथ फेरता तो कभी पीठ सहलाता. दोनों के बीच का सहारा कब एक संबंध में बदल गया, इस की परवाह दोनों ने ही नहीं की.

अगली सुबह सुध में होते ही दोनों एकदूसरे से नजरें चुरा रहे थे. काजल उतनी तेजी से वापस अपने कमरे में चली गई जितनी तेजी से कल रात आई थी. काफी समय निकल गया लेकिन काजल अपने कमरे से नहीं निकली.

देव ने कई बार सोचा कि काजल के पास जा कुछ कहे, उस से बात करे. मगर हिम्मत नहीं कर पाया. लेकिन जब होटल में कुछ घायल आए तो दोनों उन की मदद के लिए आगे आए और होटल स्टाफ का हाथ बंटाया. शायद उस घड़ी में अपने हालात पर रोने से अच्छा लोगों की मदद करना ही उन दोनों ने ठीक सम झा.

शाम को हाथ में चाय का कप लिए देव काजल के पास बैठा, ‘‘काजल जैसे

हालात हैं, हम जिंदा भी रहेंगे या नहीं, इसलिए मन पर कोई बो झ मत रखो. जो हुआ सो हुआ.’’

काजल ने देव की बातें सुनीं और चाय का कप ले लिया. तभी मैनेजर ने एक और गैस्ट की लाश मिलने की बात बताई. इतना सुनते ही देव काजल का हाथ थाम लिया. काजल की चीख गले में ही दब गई.

देव ने काजल से कहा, ‘‘हमें खुद को टूटने नहीं देना. हम दोनों के लिए यहां कोई अपना नहीं… अब सिर्फ हम दोनों ही जिंदा है, और हम दोनों भी एकदूसरे के साथ कब तक रह पाएंगे, इस का भी कोई पता नहीं. क्या पता कब कोई तेज बहाव आए और हमें… इसलिए एकदूसरे के लिए हिम्मत रखो.’’

देव की बात सुन काजल की आंखें नम होने लगीं. देव भी कुछ आंसू बहा बोला, ‘‘काजल, मु झे माफ कर देना. मैं तुम्हें यहां लाया,’’ और फिर दोनों अपनीअपनी जगह खड़े रह कुछ देर रोए.

रात घायलों का खानापीना कर देव और काजल काजल के कमरे में चले गए. रजाई में बैठ दोनों ने खाना खाया, बहुत सी बातें कीं. इसी बीच काजल देव की ओर बढ़ी तो देव ने भी उसे बांहों में भर लिया. दोनों के बीच फिर से संबंध बने लेकिन इस बार दोनों पूरे होश में थे. इस बार दोनों का संबंध कोई सहारा नहीं. एकदूसरे की जरूरत थी.

काजल देव से कुछ कहने ही जा रही थी कि ऋषभ उन दोनों के सामने आ

खड़ा हुआ. ऋषभ उन दोनों से बोला, ‘‘मु झे जैसे ही पता चला कि मूनवैली से लोगों ने को रैस्क्यू कर लाए हैं तो मैं तुम्हें ढूंढ़ते आ गया,’’ और फिर ऋषभ ने काजल को गले लगा लिया, ‘‘मु झे माफ कर दो. मैं ने तुम्हें बहुत परेशान किया. लेकिन अब मैं तुम से कभी नहीं लड़ूंगा.’’

काजल सम झ ही नहीं पा रही था की वह खुशी से हंसे या रोए. उधर देव के पसीने छूट रहे थे. ऋषभ दोनों के मौन से घबरा बोला, ‘‘क्या कुछ हुआ हैं? क्या तुम दोनों ठीक हो?’’

देव अपने लफ्जों को समेटे बोला, ‘‘वह… वो हम डरे हुए थे. हमें लगा तुम भी इस आपदा का शिकार बन गए. मगर तुम थे कहां इतने दिन? हमें कौंटैक्ट क्यों नहीं किया?’’

ऋषभ काजल को अपनी बांहों में जकड़े बोला, ‘‘मैं भी लैंडस्लाइड में घायल हो गया था. रैस्क्यू टीम मु झे यहां ले आई. और रैस्क्यू टीम किसे इन्फौर्म करती, मैं बेहोश था और मेरे पास उन्हें न कोई पता मिला न फोन. 3 दिन बाद होश आया तो तुम्हें कौंटैक्ट नहीं कर पाया सिगनल जो बंद है. तुम्हें पता नहीं मैं कितना खुश हूं तुम्हें (काजल) देख कर.’’

एक ओर ऋषभ अपने डाक्टरी फर्ज निभाते कैंप में घायल लोगों की मलहमपट्टी कर रहा था. दूसरी ओर देव और काजल के बीच बने संबंध उन्हें चोटिल कर रहे थे. दोनों को सम झ नहीं आ रह था कि क्या किया जाए.

काजल और देव कुछ दूर जा बहस करने लगे.

काजल देव से बोली, ‘‘दिमाग खराब है तुम्हारा. क्या बोले जा रहे हो.’’

देव आंखें चुरा बोला, ‘‘यही कि मु झे शर्म आ रही है. मैं ने अपने दोस्त को धोखा दिया. मु झे यह नहीं करना चाहिए था. जो हुआ वह बहुत गलत था.’’

‘‘लेकिन तुम ने ही मु झ से कहा था कि जो हुआ सो हुआ. हमें नजरें चुराने की जरूरत नहीं और अब तुम…’’ काजल ने एक लंबी सांस ली और कहा, ‘‘मैं ने अपने पति को कोई धोखा नहीं दिया. मैं तुम्हारे करीब आई, जब मु झे लगा कि वह नहीं रहा. मैं उस वक्त टूट चुकी थी. अंदर ही अंदर पागल हो रही थी. ऋषभ का जाना, आसपास की तबाही, लोगों का रोना मेरा दम घोट रहा था. अगर उस वक्त जिंदा रहने के लिए खुद को एक खौफनाक अंधेरे से निकालने के लिए मैं किसी एक के साथ हो ली, उस के करीब चली गई तो मैं ने कुछ गलत नहीं किया. मु झे खुद को जिंदा रखना था, अपनी सैंस में रहने के लिए, उस भयानक स्ट्रैस को रिलीफ करने के लिए जो मैं ने जो किया वह कोई गलत कदम नहीं. हां, अगर अब ऋषभ जिंदा है तो मैं अब किसी के करीब जाऊं तो हां वह गलत होगा. इसलिए न तो मैं धोखेबाज हूं और न चरित्रहीन.’’

कुछ देर बाद चुप रहने के बाद काजल देव को फटकारते बोली, ‘‘तुम्हें, वह सब

गलत तब नहीं लगा लेकिन अब लग रहा है क्यों? क्या उस वक्त मैं ऋषभ की बीवी नहीं थी कि अब तुम्हें अपने दोस्त की बीवी दिख रही है?’’

देव काजल को कोई जवाब न दे सका. काजल फिर बोली, ‘‘और मान लो ऋषभ नहीं आता तब क्या? तब क्या तुम्हें कोई पछतावा होता? नहीं न? तुम तो दिल्ली जाते ही लंदन निकल जाते न कि हमारे बीच हुए सैक्स के चलते मु झ से शादी करते. क्या करते एक विधवा से शादी.’’

देव मौन ही रहा. ‘‘ऋषभ अगर नहीं भी आता तो भी हम साथ नहीं होने वाले थे. तुम अपने रास्ते जाते और मैं अपने तो अब उस के आने से क्यों परेशानी पैदा कर रहे हो? जो हुआ वह उस की वक्त जरूरत थी न कि कोई प्यार या गलती तो अब तुम अपने रास्ते जाओ और मैं अपने. जो हुआ वह यहीं शुरू हुआ और यहीं खत्म भी.’’

देव काजल की बात से सहमति दिखा वहां से चला गया.

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