लेखक- विनयचंद्र मौर्या
Romantic Story: मेरी डेटिंग को अभी 2 साल ही हुए हैं परंतु लगता है कि पता नहीं कितनी पुरानी बात हो गई है. बौयफ्रैंड बनने से पहले की निश्चित जिंदगी के बारे में सोचने के लिए जब दिमाग पर जोर डालता हूं, तभी गर्लफ्रैंड का गुस्से से भरा डांटताफटकारता चेहरा सामने घूमने लगता है. इस के अलावा तो अब कुछ भी याद नहीं आता. पता नहीं किस वजह से मैं ने उसे फ्रैंड रिक्वैस्ट फेसबुक पर भेज दी और मैं ने क्यों मान ली. हम दोनों एक ही शहर के थे इसलिए रीयल बौयफ्रैंडगर्लफ्रैंड बन गए. न शायद उसे और कोई घास डाल रहा था, न मुझे.
मगर फिर भी जिस तरह कांटों में रहने वाले लोग लगातार वहां रहतेरहते कांटों में सुख का अनुभव करने लगते हैं, उसी तरह मैं भी उस के रूखे चेहरे को देखने का इतना अभ्यस्त हो चुका हूं कि मु?ो उस के इसी रूप में असीम शांति तथा तसल्ली मिलती है. वह भी शायद अपने घर में कम मुसकराने का प्रण कर पैदा हुई थी. फिर भी वह जबजब मुसकराई है, तबतब मेरा बंटाधार ही हुआ है. उस की यदाकदा मुसकराहटों को भी बड़ी मुश्किल से झेल सका हूं.
पहली बार वह तब मुसकराई थी जब दूसरी रेस्तरां में मिले थे. वह सब से महंगी मुसकराहट साबित हुई क्योंकि गदगद हो कर उसी वक्त मैं उसे गर्लफ्रैंड बनने को प्रपोज कर बैठा, जिस की सजा आज तक भुगत रहा हूं और उस की पहली मुसकराहट मेरी फूल सी लहलहाती जिंदगी पर तुषारापात कर गई.
फ्रैंड बनने के 4 दिन बाद वह फिर मुसकराई और बोली, ‘‘एके, ….. वैकेशन मनाने ऊटी चलेंगे?’’
मेरे शांत हृदय में तूफान मचाने के लिए इतना काफी था. मैं हतप्रभ तथा ठगाठगा सा उस की मुसकराहट में बह गया. होंठ कुछ बोलने से पहले ही सिल गए. चुपचाप उलटे पैर अपने अजीज दोस्त के घर गया और उस के पैर पकड़ लिए. तब तक पैर नहीं छोड़े जब तक बतौर कर्ज 25 हजार रुपए नहीं ले लिए. होश तो अब आया जब 3 दिन में ही मुसकराहट का सारा नशा खत्म हो गया. मालूम पड़ा जैसे आसमान से सीधा दलदल में गिरा हूं. गनीमत थी कि वैकेशन के 4 दिनों के दौरान फ्रैंड एक दिन भी नहीं मुसकराई.
2 सप्ताह बाद एक बार मौल में इस के साथ घूम रहा था. मौसम कुछ आशिकाना था. मौल में रोमांटिक गाने की धुन बज रही था कि अचानक वह मुसकराई. तब तक मैं पुरानी मुसकराहट का हश्र कुछकुछ भूल चुका था, इसलिए अनजाने में फिर बह गया. उस का इशारा ड्रैस की दुकान की तरफ था. मैं सम्मोहित सा उस के पीछेपीछे था. कुछ होश ही नहीं था कि वह क्या ले रही है. पता नहीं मैं किस मदहोशी में डूबा था और वह साडि़यों पर साडि़यां पलटती जा रही थी.
थोड़ी देर बाद उस ने लाल रंग की एक औफशोल्डर ड्रैस मुझे दिखाई. मैं ने पता नहीं किस मूड में गरदन हिला दी. बस, फिर क्या था? ड्रैस पैक हो कर आ गई. मैं सब बातों से बेखबर फ्रैंड को एकटक देखे जा रहा था कि जालिम दुकानदार ने लाइन काट दी. मेरी तंद्रा उस समय टूटी जब देखा कि वह फ्रैंड का बिल मुझे दे रहा है. मेरा दिमाग ठनका. बिल देखते ही पसीना छूटने लगा. दुकानदार शादीशुदा था, सारा माजरा समझ गया. वह तुरंत भागता हुआ एक गिलास ठंडा पानी ले आया. पानी पी कर मैं थोड़ा संयत हुआ. फिर बिल देखा, पूरे क्व7 हजार रुपए का था. फ्रैंड की तरफ देखा, चेहरे से मुसकराहट गायब थी. जेब में हाथ डाला क्रैडिट कार्ड निकाला. उस ने स्काइप किया तो डिकलाइन हो गया. वह तो भला हो उस दुकानदार का, जो परिचित निकला. किसी तरह इज्जत बच गई और अगले दिन भुगतान कर आया पर क्व1 हजार महीने की ईएमआई आज भी चुका रहा हूं.
इसी तरह 2 या 4 सप्ताह में वह कभीकभार मुसकरा कर मुझ पर वज्रपात करती रही, मेरी कमर टूटती रही. अब हालत यह है कि मुझे उस की मुसकराहट से बड़ा खौफ सा लगता है. फ्रैंड की मुसकराहट झेलने का बूता अब मुझ में नहीं बचा है. जब भी किसी बाग या रेस्तरां में मिलते हैं चोरों की तरह दबे पांव पीछे से झांक कर यह तसल्ली कर लेता हूं कि कहीं वह मुसकराने के मूड में तो नहीं है. फिर अचानक गर्लफ्रैंड का तमतमाया तथा गुस्से से फूला चेहरा देख कर काफी तसल्ली और शांति के साथ उस से गले मिलन करता हूं कुछ जलीकटी सुनने को. वह सुनाती है, मैं सुनता रहता हूं. वाह, क्या आनंद है. गर्लफ्रैंड की गालियां भी फेसबुक पोस्ट पर लाइक्स लगती हैं.
किंतु यह आनंदमय जीवन ज्यादा समय तक टिक नहीं सका. इस में एक भयंकर तूफान आ गया. हुआ यह कि मैं एक दिन औफिस से बदहवास सा बाइक पर घर जा रहा था कि दूर चौराहे से देखा कि मेरी फ्रैंड एक बस स्टैंड पर खड़ी मेरा इंतजार कर रही है. मैं चौंका, ‘अरे यह नया करिश्मा कैसा?’ चश्मे की धूल कमीज से पोेंछते हुए फिर देखा. फ्रैंड ही थी परंतु जान नहीं पाया कि किस मूड में है. अनिष्ट की आशंका से दिल डूबने सा लगा. तय नहीं कर सका कि उस तरफ बढ़ूं या कहीं भाग जाऊं. काफी देर पसोपेश में खड़ा सोचता रहा. वह फ्रैंड थी कि हटने का नाम ही नहीं ले रही थी. दिल को मजबूत, सांत्वना तथा दिलासा दे कर संभाला. किसी तरह मन को झूठी तसल्ली दे कर उस की तरफ बढ़ने का फैसला कर लिया. दिल रहरह कर धड़क उठता था. किंतु मैं था कि वीरों की तरह मौत की तरफ बढ़ता जा रहा था.
बस स्टैंड गेट आ गया था परंतु गर्लफ्रैंड की तरफ मुंह उठा कर देखने का साहस नहीं जुटा पा रहा था. अभी सिर्फ सिर झुका कर बाइक को स्टैंड पर खड़ा किया ही था कि जिस का डर था वही हो गया. निगाहें न चाहते हुए भी उस के चेहरे की तरफ उठ गई थीं. फिर जो देखा उसे शब्दों में बयां करना मेरे लिए संभव नहीं है. मेरा तनबदन कांपने लगा. बदहवासी में हैंडल हाथ से छूट गया, ब्रीफकेस जमीन पर एक ओर गिर पड़ा, वह मुसकरा रही थी.
मैं जड़वत जहां का तहां खड़ा रह गया. पैर बढ़ाने की हिम्मत नहीं बटोर पा रहा था. दिल में अजीब से विचार उठ रहे थे. उस तरफ बड़ी ही कातर दृष्टि से देखा. वह अभी भी मुसकरा रही थी. उफ, आज क्या होग? मेरे मुंह से अनायास निकल गया. इतनी लंबी मुसकान किस कदर कहर बरपाएगी इस का अंदाज मु?ो लगने लगा था. वह शायद मेरी दयनीय दशा को भांप गई थी, सो एक प्यारी सी मुसकान बिखेरती हुई स्टैंड पर लगी बैंच पर बैठ गई. थोड़ा संयत होने पर मैं सामान बटोरने में लग गया.
धड़कते दिल से स्टैंड के अंदर घुसा. कदम फूंकफूंक कर रख ही रहा था कि अचानक जोर की आवाज के साथ मैं इतनी जोर से चौंका कि गिरतेगिरते बचा. देखा कि स्टैंड पर 2 बच्चे बैठे थे. मैं कुछ समझ पाता इस से पहले बच्चों की एक फौज कमरे में घुस आई. मालूम हुआ कि मेरी गर्लफ्रैंड की शादीशुदा बहनें अपने 2-2 बच्चों के साथ 1 महीने की छुट्टियां मनाने आई हैं. अब मैं फ्रैंड की मुसकराहट का रहस्य समझ गया था. मुझे उन बच्चों और उन की मांओं की खातिरदारी 4 दिन फ्रैंड का साथ देना था.
4 दिनभर की मेहमाननवाजी ने किन विषम तथा संकटपूर्ण आर्थिक समस्याओं के सम्मुख खड़ा कर दिया, इस का ब्योरा देना तो मुश्किल है पर इतना जरूर बताऊंगा कि इजराइली सेना ने इतनी निर्ममता से फिलिस्तिनियों को नहीं कुचला होगा, जितना कि बच्चों ने कूच करने से पहले मेरे पास, मेरी बाइक और मेरी नींद को कुचला. शायद यह सेना मेरा एकएक सामान (जो कुछ भी था) जब्त करने का लक्ष्य बना कर ही आई थी. उसे उस ने बड़ी आसानी से कर भी दिखाया. मैं बेबस और असहाय सा सब देखता रह गया. मेरा मोबाइल गया. मेरा आई पैड गया. मेरी हैल्थ वाच गई, पारकर का पैन गया. गौगल्स गए.
फिर भी कभीकभी सोचता हूं कि गनीमत है जो कुदरत ने असीम कृपा कर मुझे कम मुसकराने वाली फ्रैंड दी वरना मैं क्व3 हजार महीना कमाने वाला क्लर्क आज चौराहे पर बड़ा सा कटोरा लिए घूम रहा होता. भविष्य के बारे में तो कुछ कह नहीं सकता, पर अभी तक ऐसी नौबत नहीं आ पाई है.
