Short Stories : ‘‘दीना, तुम घर कब आ रही हो?’’ सुबह उठते ही प्रिया ने बेटी को फोन कर पूछा.
‘‘यह बात आप कितनी बार पूछ चुकी हो मम्मी. मुझे याद है 3 दिन बाद आप का बर्थडे है. भला वह दिन में कैसे भूल सकती हूं. मैं कल यहां से निकल रही हूं.’’
‘‘ठीक है मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.’’
‘‘लेकिन घर मैं बर्थडे से एक दिन पहले पहुंचूंगी मम्मी. 2 दिन के लिए मु?ो प्रशांतजी के पास रुकना है.’’
‘‘कौन प्रशांत?’’
‘‘इतनी जल्दी भूल गईं उन्हें. पापा के बैस्ट फ्रैंड प्रशांतजी.’’
‘‘तुम्हें उन से क्या काम है?’’
‘‘भला कोई काम के लिए ही किसी के पास जाता है. मु?ो वे अच्छे लगते हैं. उन से बातचीत करना मु?ो पसंद है. उन के साथ 2 दिन बिता कर मैं घर आऊंगी.’’
‘‘मु?ो सम?ा नहीं आता अधेड़ उम्र के प्रशांतजी से तुम्हें इतना लगाव क्यों हो गया?’’
‘‘लगाव तो किसी भी उम्र के आदमी के साथ हो सकता है. वह उम्र कहां देखता है?’’
‘‘तुम होश में तो हो दीना?’’
‘‘हां मम्मी मैं मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हूं. मैं ने आप को अपना प्रोग्राम बता दिया है. मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूं. पूरे 24 साल की हो चुकी हूं और अपना भलाबुरा सोच सकती हूं.’’
‘‘तुम से तो कुछ कहना ही बेकार है,’’ कह कर प्रिया ने फोन पटक दिया. उसे सम?ा नहीं आ रहा था दीना को क्या हो गया है. प्रशांत उस के पापा राहुल के बहुत अच्छे दोस्त थे. 4 साल पहले राहुल की एक ऐक्सीडैंट में असमय मौत हो गई थी. माना कि प्रशांत एक अच्छा इंसान है लेकिन इतना भी नहीं कि एक 24 साल की लड़की उस के पीछे दीवानी हो जाए. वैसे भी वह तलाकशुदा आदमी है और दीना यह बात अच्छी तरह से जानती है. उसे लगा प्रशांत ने दीना को बहका दिया तभी वह मम्मी को छोड़ कर पहले उन से मिलने जा रही है.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर के पिछले 6 महीने से दीना अब एक मल्टीनैशनल कंपनी में काम कर रही थी.इस दौरान वह घर नहीं आई थी.
प्रिया दीना का बेसब्री से इंतजार कर रही थी और अब जब उस ने आने की बात कही तो साथ में यह भी बता दिया. प्रिया अपनेआप को संयत नहीं कर पा रही थी.
इकलौती बेटी दीना के सहारे प्रिया आने वाले भविष्य के सपने देख
रही थी. बेटी की खातिर उस ने राहुल के चले जाने के बाद अपने जीवन के बारे में सोचना ही छोड़ दिया था. बस उस का एक ही मकसद था कि किसी तरह दीना अपनी जिंदगी में सफल हो जाए तो वह उस के सहारे अपनी जिंदगी सुकून से काट लेगी.
प्रिया को वह कठिन समय आज भी याद है जब राहुल के चले जाने के बाद प्रशांत ने उस की हर तरह से मदद की थी. उस का यह एहसान वह नहीं भूल सकती थी. हर कदम पर आगे बढ़ कर वह मांबेटी दोनों की मदद कर रहा था.
राहुल को भी प्रशांत बहुत पसंद था और उन दोनों के बीच में अच्छी दोस्ती भी थी. अकसर वे प्रशांत को शाम के समय घर ले कर आते और सब साथ बैठ कर खाना खाते थे. प्रशांत स्वभाव से बहुत सुल?ा हुआ इंसान था. उस के व्यवहार से कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह किसी स्वार्थ के लिए उन के घर पर आता है.
प्रशांत की अपनी शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं थी. शादी के बाद से उस की पत्नी रीमा अपने कैरियर की वजह से उस से अलग हो कर रह रही थी. वह मौडर्न विचारों की थी और प्रशांत एक साधारण परिवार का सुल?ा हुआ युवा था. दोनों के बीच में कभी बनी नहीं. प्रशांत ने उस से अलग होने का फैसला कर लिया था. पहले वह उस के लिए राजी नहीं थी लेकिन धीरेधीरे उस की सम?ा में बात आ गई कि प्रशांत उस के इशारों पर नाचने वाला नहीं है और फिर कुछ साल बाद उन का तलाक हो गया.
तब से प्रशांत एकाकी जीवन बिता रहा था. उसे किसी से कोई शिकायत नहीं थी. न ही वह खुल कर अपने बारे में किसी को बताता था. बहुत कुरेदने पर उस ने इतनी बात राहुल के साथ शेयर की थी. तभी एक दिन कार दुर्घटना में राहुल बुरी तरह जख्मी हो गया. यह देख कर प्रिया के हाथपैर फूल गए थे.
तब प्रशांत ने उस की हिम्मत बढ़ाई, ‘‘सब ठीक हो जाएगा, हिम्मत रखिए.’’
प्रशांत रातदिन राहुल की सेवा में लगा रहा लेकिन कुदरत को कुछ और मंजूर था. ऐक्सीडैंट में उस का बहुत खून बह गया था. जिस की वजह से राहुल को बचाया न जा सका.
प्रिया के लिए यह हादसा किसी बड़े सदमे से कम न था. वह अपनेआप को संभाल नहीं पा रही थी. ऐसे समय में प्रशांत ने आगे बढ़ कर परिवार की सारी जिम्मेदारी उठा ली थी. प्रिया को एहसास भी नहीं हुआ और उस ने सारी औपचारिकताएं पूरी कर दीं. उस ने उस के औफिस के काम से ले कर घर तक की जिम्मेदारी सब बहुत अच्छे ढंग से संभाल ली थी. प्रशांत उन के घर मिलने आता था और उन की छोटीबड़ी जरूरत का खयाल रखता. दीना उस से काफी घुलीमिली थी लेकिन प्रिया उस से बहुत कम बात करती थी.
प्रिया को औफिस से सारे फंड्स मिल गए थे. उसे जरा भी परेशानी नहीं उठानी पड़ी. सालभर बाद दीना का एक इंजीनियर कालेज में दाखिला हो गया. उस की सारी फौर्मैलिटी भी प्रशांत ने पूरी कर दी. दीना के होस्टल चले जाने के बाद प्रिया घर पर अकेले रह गई थी. प्रशांत हर रविवार को उस से मिलने घर आ जाता था. प्रिया महसूस कर रही थी उस के आने से आसपास के लोग बातें बनाने लगे थे. जब तक दीना साथ में थी किसी की कुछ कहने की हिम्मत न पड़ती थी. लोगों की आंखों की भाषा सम?ाते प्रिया को देर न लगी. बाहर क्या अब घर वाले भी उसे शक की निगाह से देखने लगे थे.
एक दिन दीना के बड़े ताऊजी प्रेम प्रकाश ने भी इस बारे में एतराज उठाया, ‘‘प्रशांत
का यहां आना हमें कतई पसंद नहीं है. कालोनी वाले तरहतरह की बातें बना रहे हैं. राहुल तक ठीक था लेकिन उस के चले जाने के बाद अब वह इस घर में नहीं दिखाई देना चाहिए. अगर कोई ऊंचनीच हो गई तो हम बरदाश्त नहीं करेंगे और इस का परिणाम तुम दोनों मांबेटी को भुगतना पड़ेगा.’’
प्रेम प्रकाश की धमकी भरी चेतावनी से प्रिया सहम गई. वह जानती थी कि राहुल के हिस्से की घरगांव की जमीनजायदाद की अकेली मालकिन अब दीना थी. कहीं उस के साथ कुछ हो गया तो…
इस की कल्पना से ही प्रिया को झरझरी होने लगी. रविवार के दिन उस ने मन कड़ा कर के यह बात प्रशांत से कह भी दी, ‘‘आप ने हमारे लिए जो कुछ किया इतना कोई अपना भी नहीं करता, इस के लिए मैं आप की आभारी हूं. दीना के चले जाने से मेरी जरूरतें बहुत कम हो गईं हैं. अच्छा होगा कि अब आप यहां न आया करें. जरूरत होगी तो मैं खुद ही आप को बुला लूंगी.’’
यह सुन कर प्रशांत चौंक गया. उस ने कहा, ‘‘मुझ से कोई गलती हो गई क्या?’’
‘‘ऐसी बात नहीं है. लोग तरहतरह की बातें बनाने लगे हैं. मैं यह सब नहीं ?ोल सकती.’’
‘‘एक बात कहूं अगर आप बुरा न मानें? उन की बातों को हकीकत में भी बदला जा सकता है.’’
‘‘यह क्या कह रहे हैं आप?’’
‘‘मैं कुछ गलत नहीं कह रहा. इतनी लंबी जिंदगी आप को भी अकेली गुजारनी है. आप चाहें तो हम दोनों साथ रह सकते हैं. मुझे आप से कोई अपेक्षा नहीं है. बस चाहता हूं आप को जीवन में कोई परेशानी न हो.’’
‘‘मैं एक जवान लड़की की मम्मी हूं. मुझे अपने सुख से ज्यादा बेटी के भविष्य की चिंता है.’’
‘‘उस का भविष्य हम दोनों मिल कर बना भी सकते हैं.’’
‘‘यह नहीं हो सकता. अच्छा होगा कि अब आप हमें हमारे हाल पर छोड़ दें. अब मु?ो राहुल के बिना जीने की आदत हो गई है और मैं अपना भलाबुरा सोच सकती हूं.’’
‘‘प्लीज मेरी बात को अन्यथा न लीजिएगा. मेरे मन में ऐसा कोई स्वार्थ नहीं है.’’ कह कर प्रशांत वहां से चले गए.
प्रशांत को मना कर के प्रिया खुद भी परेशान थी. उस के लिए प्रशांत बहुत
बड़ा सहारा था जिसे उस ने न चाहते हुए भी अपने ही हाथों से दूर कर दिया. वह जानती थी उस के परिवार के लोग यह कभी नहीं होने देंगे और इस का सीधा असर दीना पर पड़ेगा.
उस दिन के बाद से प्रशांत ने कभी इस घर का रुख नहीं किया और 2 साल पहले इस शहर को छोड़ कर दूसरी ब्रांच में शिफ्ट कर गए. इस दौरान प्रिया ने उन के बारे में जानने की कभी कोशिश नहीं की. पढ़ाई के दौरान दीना को जब मौका लगता घर आ जाती. उसी के सहारे वह अपनी जिंदगी काट रही थी लेकिन अचानक नौकरी लगते ही दीना को प्रशांत की याद कहां से आ गई.
यह बात प्रिया की सम?ा से परे थी. वह सोच रही थी दीना भी अब उन्हें भूल गई होगी और अपने नए साथियों के साथ अपना कैरियर संवारने में लग गई होगी. दीना की बात ने प्रिया का चैन छीन लिया. वह इस बारे में फोन कर के उस से कुछ कह भी नहीं सकती थी कि दोनों के बीच में पहले क्या बात हुई थी. बेटी को सम?ाने का वह कोई और तरीका ढूंढ़ रही थी लेकिन उसे कुछ सम?ा नहीं आ रहा था.
दीना ने प्रशांत के घर पहुंच कर मम्मी को फोन कर दिया. वह उस के बारे में बहुत कुछ जानना चाहती थी पर दीना ने इस बारे में कोई बात नहीं की. 2 दिन तक वह उस के साथ बस औपचारिक बात करती रही. जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले शाम को वह घर आ गई. प्रिया का मूड देख कर वह सम?ा गई कि मम्मी उस से नाराज हैं. इसी वजह से उस ने उन से ज्यादा बात नहीं की और शाम को दोनों शौपिंग पर निकल गई.
‘‘मम्मी बताइए आप को क्या गिफ्ट लेना है?’’
‘‘मुझे कुछ नहीं चाहिए. सबकुछ तो है मेरे पास और सच पूछो तो मेरा मन भी नहीं करता सजनेसंवरने का.’’
‘‘आप की उम्र की महिलाएं कितना बनसंवर कर निकलती हैं. 50 साल की उम्र में 35 की लगती हैं. आप को अपनी कोई सुध ही नहीं रहती.’’
‘‘मेरा चैन तो तू ने छीन लिया है दीना.’’
‘‘फिर वही बात. मम्मी प्लीज इसे छोड़ दीजिए. कल आप का जन्मदिन है. अच्छी बात कीजिए जिस से मैं आप का जन्मदिन खुश हो कर मना सकूं.’’
सबकुछ जानते हुए भी दीना मम्मी को कुछ कहने का अवसर नहीं दे
रही थी और न ही उन्हें कुछ बता रही थी कि उस के मन में क्या चल रहा है? रात के 12 बजे दीना ने केक काट कर मम्मी का बर्थडे सैलिब्रेट किया.
‘‘यह आप का 48वां जन्मदिन है मम्मी. याद रखिएगा.’’
‘‘मु?ो अपने सारे जन्मदिन याद हैं. तुम्हें याद दिलाने की जरूरत नहीं.’’
‘‘इस समय केक से काम चला लेते हैं. कल मैं ने होटल में आप के लिए एक स्पैशल पार्टी रखी है. इस में मेरे 1-2 गैस्ट भी आएंगे.’’
‘‘मैं भी तो जानूं वे मेहमान कौन हैं?’’
‘‘कल शाम को खुद ही देख लीजिएगा सरप्राइज है.’’ कह कर दीना मुसकरा कर मम्मी के गले लग गई. थोड़ी देर बात कर के वे सो गईं. दीना मम्मी के लिए एक बहुत अच्छी ड्रैस ले कर आई थी.
‘‘आज आप को यह गुलाबी ड्रैस पहननी है मम्मी,’’ दीना ने सुबह ही ऐलान कर दिया.
‘‘मैं ने ऐसे चटक कपड़े पहनने छोड़ दिए हैं.’’
‘‘मेरी खातिर आप को आज पहननी होगी. मैं आप को पहले वाले रूप में देखना चाहती हूं. मु?ो आप का यह उदासी भरा लटका हुआ चेहरा जरा भी अच्छा नहीं लगता. पापा चले गए दुख मु?ो भी है लेकिन हमारे बस में जो था हम ने किया अब जीना तो नहीं छोड़ सकते. जीवन तो अपनी गति से आगे बढ़ता ही रहेगा.’’
‘‘यह तू सोच सकती है क्योंकि तेरे आगे पूरा भविष्य पड़ा है. मेरा भविष्य तो उन के जाते ही ठहर गया.’’
‘‘यह आप किस जमाने की बातें कर रही हो. आप को भी अपना भविष्य संवार कर उसे जीने का हक है. ऐसी बातें मेरे सामने न किया करें. मुझे अच्छा नहीं लगता.’’
मम्मी की मनोदशा को नकारते हुए वह उन के लिए एक गुलाबी रंग का मौडर्न सूट ले कर आई थी. चाहती तो वह बहुत कुछ थी लेकिन उसे पता था मम्मी को आगे बढ़ाने के लिए एकदम बड़ा कदम उठाना ठीक नहीं होगा. उसे शाम का बड़ी बेसब्री से इंतजार था. बेटी के कहने पर प्रिया उस की लाई ड्रैस पहन कर तैयार हो गईं.
‘‘अपनेआप को शीशे में देखो मम्मी. आप कितनी सुंदर लग रही हैं,’’ उन के चेहरे पर हलका मेकअप करते हुए दीना बोली.
‘‘यह क्या कर रही है? मैं ने मना किया है.’’
‘‘आज आप की नहीं मेरी चलेगी,’’ दीना बोली.
शाम को मांबेटी दोनों तैयार हो कर होटल पहुंच गईं. दीना ने पहले ही कौर्नर की
टेबल बुक करा रखी थी. आज प्रिया को राहुल की बड़ी याद आ रही थी. अकसर वह उस के जन्मदिन पर उन्हें होटल ले कर आता था और वे खूब एंजौय करते थे. कौर्नर की मेज पर बैठते ही उस की नजर सब से पहले प्रशांत पर पड़ी. प्रिया को देखते ही वह उठ कर खड़ा हो गया और हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं,’’ और फिर एक खूबसूरत गिफ्ट प्रिया की ओर बढ़ा दिया.
‘‘मेरे कहने पर ही प्रशांतजी यहां आए हैं. वे हमारे खास गेस्ट हैं.’’ दीना बोली.
वे तीनों चुपचाप बैठे हुए थे तभी एक फोन आया और दीना उठ कर चल दी, ‘‘आप दोनों बात कीजिए मैं अभी आती हूं.’’
‘‘आप कैसी हैं?’’
‘‘ठीक हूं,’’ कह कर प्रिया ने बात खत्म कर दी. उसे प्रशांत का इस समय यहां आना जरा भी अच्छा नहीं लग रहा था.
‘‘मैं आप की मनोदशा समझ सकता हूं. मैं जानबूझ कर यहां नहीं आया. दीना ही मुझे यहां ले कर आई है.’’
‘‘वह तो मैं जानती हूं दीना का झुकाव आजकल आप की ओर कुछ ज्यादा ही होने लगा है,’’ तीखे लहजे में प्रिया बोली तो प्रशांत चुप हो गए.
प्रशांत प्रिया से ढेर सारी बातें करना चाहता था लेकिन प्रिया की मानसिक स्थिति को सम?ाते हुए चुप रहना ही बेहतर समझ. आज वह गुलाबी ड्रैस में बहुत सुंदर लग रही थी जैसे कुछ साल पहले राहुल के साथ लगती थी.
‘‘यह क्या आप दोनों अभी तक चुपचाप बैठे हैं,’’ थोड़ी देर में दीना वहां आ कर बोली.
‘‘समझ ही नहीं आ रहा है क्या बात करें? कोई ऐसा सूत्र ही नहीं मिल रहा है जिस से बात आगे बढ़ाई जा सके,’’ प्रशांत बोले.
‘‘क्या मुझे आप दोनों का दोबारा से परिचय कराने की जरूरत पड़ेगी.’’
यह सुन कर प्रिया मुसकरा दी.
‘‘यह सब छोड़ो तुम मुझे यहां क्यों ले
आई हो?’’
‘‘सोचा था इतने सालों बाद आप लोग मिलेंगे तो ढेर सारी बातें करेंगे लेकिन आप दोनों ने तो चुप्पी ओढ़ ली है. प्रशांतजी आप अपना गिफ्ट खोल कर दिखाइए तो सही इस में है क्या?’’
‘‘रहने दो दीना. घर जा कर देख लेना.’’
‘‘मुझे तो अभी देखना है,’’ कह कर दीना वहीं पर गिफ्ट खोलने लगी. उस के अंदर एक सुंदर सोने की चेन थी और साथ में अंगूठी भी.
‘‘मम्मी जरा इसे पहन कर देखो कितना सुंदर गिफ्ट है,’’ कह कर उस ने चेन निकाल कर मम्मी के गले में डाल दी और अंगूठी प्रशांत की ओर बढ़ा कर बोली, ‘‘इसे आप ही पहना दीजिए मम्मी को.’’
यह सुन कर प्रिया एक झटके में खड़ी हो गई, ‘‘मजाक की भी हद होती है दीना. यह क्या कह रही है?’’
‘‘ऐसा क्या हो गया मम्मी?’’
‘‘कभीकभी तुम अपनी हदें पार कर जाती हो दीना और अपनी सीमाएं भूल कर ऊलजलूल हरकतें करने लगती हो.’’
‘‘आप बेवजह नाराज हो रही हैं. मैं ने कुछ गलत नहीं किया है.’’
‘‘तुम इस का मतलब सम?ाती भी हो?’’
‘‘बहुत अच्छी तरह सम?ाती हूं मम्मी. चाहती हूं कि आप की सम?ा में भी यह बात जितनी जल्दी आ जाए उतना अच्छा है.’’
‘‘तुम्हारे कहने का मतलब क्या है?’’
‘‘सबकुछ समझ कर भी अनजान मत बनिए. आप क्या सोचती हैं आप कुछ बताएंगी नहीं तो मु?ो कुछ पता नहीं लगेगा. मैं सबकुछ जानती हूं लेकिन आप समय की नजाकत को देख कर भी आंखें मूंदे बैठी हैं.’’
‘‘मैं अपनी समझ से सब ठीक कर रही हूं.’’
‘‘यही तो समस्या है आप की समझ जमाने के साथ मेल नहीं खा रही है. आप की सारी अपेक्षाएं मु?ा से लगी हैं. मैं क्या चाहती हूं यह सोचा है कभी आप ने?’’
‘‘तुम मेरी बेटी हो. मुझ से बेहतर तुम्हें कौन सम?ा सकता है. मैं चाहती हूं तुम जीवन में खूब तरक्की करो. वह हर सपना पूरा करो जो तुम्हारे मम्मीपापा ने देखा है.’’
‘‘मेरे भी तो अपने सपने हो सकते हैं. उन का क्या होगा मम्मी?’’
‘‘तुम्हारे सपने क्या हम से अलग भी हो सकते हैं?’’
‘‘क्या आप के सपने अपने मम्मीपापा से मेल खाते थे? नहीं न? वे आप की शादी के खिलाफ थे फिर भी आप ने घर वालों की मरजी के खिलाफ जा कर पापा से शादी की. आप दोनों की बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग थी. यह विडंबना ही थी कि पापा आप का साथ पूरे समय तक न दे सके लेकिन इस से आगे की भी जिंदगी है.’’
‘‘आज के दिन आप दोनों क्या बात ले कर बैठ गई हो. यह सब करने के लिए यह उचित समय नहीं है. मेरे आने से रंग में भंग हो गया है दीना,’’ प्रशांत बोले.
‘‘ऐसा कुछ नहीं हुआ है. असली रंग निकल कर तो अब सामने आएगा आप देखते रहिएगा.’’
‘‘मुझे यहां नहीं आना चाहिए था. बेकार में तुम्हारी जिद की वजह से मैं यहां चला आया.’’
‘‘आप ने यहां आ कर बहुत अच्छा किया. मुझे खुशी है कि आप ने मेरी बात
मानी. मम्मी ने अपनेआप को पापा की यादों में कैद कर रखा है. उन को उस घेरे से बाहर निकलना बहुत जरूरी है. अगर वह आज भी न टूटा तो फिर आगे क्या होगा यह सोच कर ही मेरा मन घबरा रहा है.’’
‘‘तुम्हें मेरे बारे में गलतफहमी हो रही है दीना.’’
‘‘नहीं मम्मी, मैं आप को बहुत अच्छी तरह पहचानती हूं. बचपन से मैं ने अधिकांश समय आप ही के साथ गुजारा है. अब आप को मेरी खातिर जिंदगी में आगे बढ़ना होगा. आप की वजह से मेरे कई सपने अधूरे रह जाएंगे मम्मी जिन का मुझे बाद में बड़ा अफसोस होगा.’’
‘‘मैं तुम्हारी तरक्की में कभी रुकावट नहीं बनी हूं.’’
‘‘यह आप को लगता है लेकिन आप का प्यार मेरे पैरों की सब से बड़ी बेड़ी है. मैं चाह कर भी उस से अपने को आजाद नहीं कर पाती. जब भी उसे तोड़ना चाहती हूं हर बार मुझे खयाल आता है मम्मी घर पर अकेली हैं. उन का क्या होगा. मैं चाहती हूं आप को भी सही साथ मिले ताकि मैं बेफिक्र हो कर अपने काम को अंजाम दे सकूं. इस में आप का साथ प्रशांतजी दे सकते हैं. वे बहुत अच्छे इंसान हैं. हमारे सुखदुख का बहुत खयाल रखते हैं.’’
‘‘लेकिन वे मुझ से उम्र में छोटे हैं शायद तुम्हें यह नहीं पता है.’’
‘‘जानती हूं. उम्र केवल गिनती का जोड़ होता है जिस की गिनती तभी तक होती है जब तक हम युवावस्था में प्रवेश नहीं करते. उस के बाद तो अवस्था आती है युवावस्था, प्रौढावस्था और वृद्धावस्था. आप दोनों ही प्रौढ़ हैं और इस उम्र में एकदूसरे की भावनाओं और जरूरतों को ज्यादा अच्छे ढंग से समझते हैं. उम्र 2-4 साल ऊपर नीचे हो भी गई तो उस से फर्क नहीं पड़ता है,’’ दीना बोली तो प्रिया निरुत्तर हो गई.
तभी सामने से किसी ने आ कर हाथ हिलाया.
‘‘मैं अभी आती हूं,’’ कह कर प्रिया उस की ओर बढ़ गई. वे दोनों आमनेसामने बैठे थे.
‘‘तो आप ने सबकुछ दीना को बता दिया?’’
‘‘विश्वास करो मैं ने कुछ नहीं बताया प्रिया. वह खुद ही सम?ा गई. अब वह छोटी बच्ची नहीं है. बहुत सम?ादार है और कुछ समय से मु?ो लगातार जोर दे रही है कि आप मम्मी का हाथ थाम लीजिए जिस से मैं निश्चिंत हो कर अपना काम कर सकूं. मेरे लाख मना करने पर भी उस ने वादा ले कर मु?ो जबरदस्ती यहां आने के लिए मजबूर किया. मैं तुम्हें हर्ट नहीं करना चाहता था.’’
अपने लिए पहली बार प्रशांत के मुंह से तुम सुन कर प्रिया को अटपटा लगा लेकिन उस ने विरोध नहीं जताया.
‘‘मेरी किसी बात का बुरा लगा हो तो माफ कर दीजिएगा. आज के दिन पर मेरी यह मंशा कतई नहीं थी. यह सब दीना की इच्छा से हुआ.’’
तभी वहां पर दीना आ गई. उस के साथ वेदांत भी था. उस ने आगे बढ़ कर दोनों के पैर छू लिए.
‘‘मम्मी यह मेरा दोस्त वेदांत है. हम दोनों एकसाथ कालेज में पढ़ते थे और अब एक ही जगह नौकरी भी कर रहे हैं. वेदांत का सलैक्शन अमेरिकन कंपनी में हो गया है. वह मु?ो भी अपने साथ जाने के लिए जोर दे रहा है लेकिन मैं आप को अकेले छोड़ कर कहीं नहीं जा सकती.’’
‘‘मेरी वजह से अपने कैरियर में किसी प्रकार की रुकावट मत डालो.’’
‘‘लेकिन आंटी दीना ने कहा है कि जब तक वह मम्मी को राजी नहीं कर लेती तब तक वह मेरे साथ कहीं नहीं जाएगी.’’
‘‘दीना की अपनी जिंदगी है और मेरी अपनी. हम दोनों को उसे अपने तरीके से जीने का पूरा हक है वेदांत,’’ प्रिया बोली.
‘‘लेकिन मैं आप को अकेले नहीं छोड़ सकती. मुझे आप को एक भरोसेमंद साथी चाहिए और प्रशांत अंकल से अच्छा कोई दूसरा साथी हो ही नहीं सकता.’’
दीना के मुंह से प्रशांत के लिए अंकल शब्द सुन कर प्रिया ने राहत की सांस ली. उसे अपनी सोच पर गुस्सा आ रहा था जो अपनी बेटी के बारे में पता नहीं क्याक्या अनर्गल सोच रही थी.
‘‘लेकिन तुम्हारे चाचाताऊ… वे क्या सोचेंगे? वे यह कभी नहीं होने देंगे. समझ करो,’’ प्रिया बोलीं.
‘‘उन की चिंता मत करो मम्मी. मैं ने उन से पहले ही बात कर ली है. यदि उन्हें हमारे गांव की जमीन चाहिए तो उन्हें हम दोनों की जिंदगी से दूर रहना होगा.’’
‘‘यह क्या कह रही है?’’
‘‘मैं जानती हूं प्रशांत अंकल आप को पसंद है लेकिन परिवार वालों के डर की वजह से आप नई जिंदगी की तरफ कदम बढ़ाने में हिचक रही हैं.’’
‘‘तुम बहुत परिपक्व हो गई हो दीना.’’
‘‘अब और कुछ मत सोचो मम्मी. हमारी बात मान लो. इसी में आप की और हम सब की भलाई है.’’
यह सुन कर प्रिया निरुत्तर हो गईं. उन्होंने एक नजर प्रशांत पर डाली. वे उसी तरह शांत
भाव से बैठे हुए थे.
तभी वेदांत बोला, ‘‘बातों में बहुत समय बीत गया है. अब केक काटना चाहिए.’’
दीना ने प्रिया के हाथ में चाकू थमा कर कैंडिल लगा दी. कैंडिल बुझ कर केक कटते ही वे तीनों तालियां बजा कर बर्थडे गीत गाने लगे. प्रिया ने जैसे ही केक का टुकड़ा उठा कर दीना के मुंह में डालना चाहा उस ने मम्मी का हाथ पकड़ कर प्रशांत की ओर कर दिया. दोनों की नजरें टकराईं. प्रिया ने उन के मुंह की ओर केक का टुकड़ा बढ़ा दिया. प्रशांत ने भी एक छोटा सा टुकड़ा उठा कर प्रिया के मुंह में डाल दिया.
यह देख कर वेदांत और दीना की खुशी का कोई ठिकाना न था. वे दोनों मिल कर जोरजोर से तालियां बजा रहे थे. सब ने बारीबारी से एकदूसरे को केक खिलाया.
दीना अंगूठी उठा कर प्रशांतजी की ओर बढ़ाते हुए बोली, ‘‘इसे मम्मी को पहना दीजिए. नए रिश्ते की शुरुआत के लिए यह बहुत जरूरी है.’’
थोड़ी देर में ही माहौल हलका हो गया. वेदांत और दीना दूसरी टेबल पर जा कर भविष्य की कल्पना में डूब गए और इधर प्रिया और प्रशांत एकदूसरे के हाथों को थामे आने वाले समय की रूपरेखा तैयार कर रहे थे.
तभी दीना उठ कर उन के बीच में आ गई और वेदांत से बोली, ‘‘एक फैमिली फोटो हो जाए.’’
यह सुन कर सब के चेहरों पर मुसकान फैल गई.
राइटर- डा. के. रानी
