Best Online Story :  भूमिका आज बेहद खुश नजर आ रही थी. अभीअभी तो उस ने फेसबुक पर अपनी डीपी अपलोड करी थी और 1 घंटे में ही सौ लाइक आ गए थे. गुनगुनाते हुए खुद को आईने के सामने निहारते हुए भूमिका मन ही मन सोच रही थी. पहले मैं कितनी गंवार लगती थी. न कोई फैशन सैंस थी और ना ही मेकअप की तमीज और अब देखो 50 वर्ष की उम्र में भी कितने पुरुष और लड़के उस के ऊपर मोहित हो रहे हैं. काश, कुछ वर्ष पहले यह सोशल मीडिया आ जाता तो उस की जिंदगी कुछ और ही होती.

तभी रोहित डकार मारता हुआ भूमिका के सामने आ गया. भूमिका बेजारी से रोहित को देखने लगी कि क्या रोहित ही मिला था उस के मातापिता को इस दुनिया में उस के लिए… रोहित का बढ़ता वजन, झड़ते बाल, बेतरतीबी से पहने कपड़े, जोरजोर से डकार लेना सभी कुछ तो उसे रोहित से और दूर कर देता था.

रोहित भूमिका को देखते हुए बोला, ‘‘आज खाना नहीं मिलेगा क्या?’’

भूमिका फेसबुक पर नजर गड़ाते हुए बोली, ‘‘अभी बनाती हूं.’’

खाना बनातेबनाते भूमिका बारबार आज शाम के फंक्शन में कैसे रील बनाएगी सोच रही थी. बालों को खुला छोड़े या कोई हेयर स्टाइल बनाए.

ये सब सोचतेसोचते उस की तंद्रा तब टूटी जब कुकर से जलने की महक आने लगी. जल्दीजल्दी कुकर की सीटी निकाली और जल्दी खाना खा कर पार्लर की भाग गई.

जब मेकअप खत्म हुआ तो भूमिका ने एक नजर आईने पर डाली और मन ही मन इतराते हुए सोचने लगी कि आज तो मेरे फौलोअर्स की खैर नहीं. शाम के फंक्शन में भूमिका ने जम कर रील बनाई. भूमिका के भाईभाभी, रोहित और उस की बेटी आर्या सभी भूमिका के इस व्यवहार से आहत थे.

आज भूमिका के भाई के बेटे का जन्मदिन था. भूमिका की भाभी को लगा कि भूमिका के आने से उस की कुछ मदद हो जाएगी मगर भूमिका तो अपने में ही व्यस्त थी. बारबार रील बनाते हुए टेक और रीटेक करते हुए भूमिका ने अपना सारा समय बिता दिया. जन्मदिन में कौनकौन मेहमान आए, कब केक कटा उसे कुछ भी नहीं पता. वह तो बस अपनी ही दुनिया में खोई हुई थी. घर पहुंच कर भी भूमिका अपनी रील की एडिटिंग में ही व्यस्त रही. आर्या ने ही उलटासीधा खाना बना लिया था. आर्या को किचन में काम करता देख कर रोहित को गुस्सा आ गया. भूमिका के हाथ से मोबाइल छीनते हुए रोहित बोला, ‘‘आर्या को इस साल 12वीं कक्षा के ऐग्जाम के साथसाथ ऐंट्रैंस ऐग्जाम भी देने हैं और वह तुम्हारे हिस्से का काम कर रही है.

भूमिका तुनकते हुए बोली, ‘‘मैं रातदिन किचन में लगी रहती हूं तो कभी दर्द नहीं हुआ. आज बेटी ने एक टाइम का खाना क्या बना लिया कि पूरा घर सिर पर उठा दिया.’’

रोहित के हाथ से अपना मोबाइल छीनते हुए भूमिका ने अपनेआप कमरे में बंद कर लिया. भूमिका अपनी रील के व्यूज को देखने में व्यस्त थी. बस 250 व्यूज ही आए थे. मन ही मन मनन कर रही थी कि क्या करे कि व्यूज बढ़ जाएं.

तभी भूमिका ने सोचा क्यों न डांस करते हुए अपनी एक रील बनाए. सोशल मीडिया पर वैलिडेशन की भूमिका का सिर पर इतना भूत सवार था कि उस ने बिना कुछ सोचेसमझे एक रील बना ली और फेसबूक पर अपलोड कर दी. भूमिका उस रील में बेहद भद्दी लग रही थी. साफ नजर आ रहा था कि उस ने किसी और के शौर्ट्स और टीशर्ट पहन रखे थे. खटाखट लाइक्स आ रहे थे और साथ ही साथ भूमिका की खुशी भी बढ़ती जा रही थी.

कितने सारे पुरुषों के मैसेंजर पर मैसेज आए हुए थे. हरकोई उस से दोस्ती करने को आतुर था. और तो और कुछ लड़के तो भूमिका से 10 से 15 साल छोटे थे मगर सब को वो हौट लग रही थी. तभी भूमिका के घर से उस की मम्मी का फोन आया, ‘‘लाली यह क्या कर रही है तू सारे लोग महल्ले में तेरा मजाक उड़ा रहे हैं.’’

‘‘ऐसे कैसा वीडियो बन कर तूने डाल दिया है. कम से कम देख तो लेती कि तू उस में कैसी लग रही है.’’

भूमिका ने कहा, ‘‘लगता है भैयाभाभी ने तुम्हारे कान भरे हैं. मम्मी मैं कभी भी तुम्हारी फैवरिट नहीं थी. तुम्हें तो हमेशा दीदी और भाभी की सुंदरता के आगे मैं फीकी ही लगी. इतनी फीकी कि तुम ने रोहित जैसे नीरस आदमी के साथ मुझे बांध दिया.

‘‘आज अगर लोग मुझे पहचान रहे हैं, मेरे काम की तारीफ कर रहे हैं तो तुम्हारी बहू को आग लग गई क्योंकि वह अपने बढ़ते वजन के कारण ये सब नहीं कर सकती है जो मैं अब कर पा रही हूं.’’

भूमिका की मम्मी ने फोन रखने से पहले बस यह कहा, ‘‘लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए क्याक्या करेगी तू,’’ और खटाक से फोन रख दिया.

घर के काम निबटाने के बाद भूमिका अपनी रील पर आए कमैंट्स को पढ़ने लगी कमैंट्स पढ़ कर उस का मन करा कि वह जल्द ही एक और डांस करते हुए रील बना ले. अगले दिन सब के जाते ही भूमिका ने फिर से डांस करते हुए रील बनाने की तैयारी करीए. मगर हर बार उसे संतुष्टि नहीं मिल रही थी. जब तीसरी बार भूमिका घूमघूम कर नाचने लगी उस का पैर फिसल गया और उस का सिर पास ही रखी शीशे की मेज से टकरा गया. शुक्र था कि सिर बच गया मगर पैर में मोच आ गई. किसी तरह गिरतेपड़ते डाक्टर के पास पहुंची और तमाम प्रोसीजर्स के बाद जब बाहर निकली तो 5 हजार की चपत लग चुकी थी.

जब तक भूमिका का पैर पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ उस ने बैठेबैठे ही कुछ रील बनाईं और अपलोड कर दी थीं. हर रील पर भूमिका को कुछ न कुछ कमैंट्स आते ही थे और धीरेधीरे ऐसा होने लगा कि भूमिका अपनी वर्चुअल दुनिया से इतनी जुड़ गई कि वह अपनी असल दुनिया से डिस्कनैक्ट हो गई.

भूमिका को यह लगने लगा था कि स्क्रीन के उस पार के लोग ही हैं जो उस के अपने हैं, जो उस की कद्र करते हैं. हर रील के साथ यह पागलपन बढ़ता ही जा रहा था.

अब तो यह हाल हो गया था कि मार्केट जाते हुए, चाट खाते हुए हर समय भूमिका रील बनाती रहती. हद तो तब हो गई जब भूमिका की हास्यास्पद रीलों के कारण आर्य अपने दोस्तों के बीच मजाक बन कर रह गई.

सीधेसीधे नहीं मगर इशारों से सभी लड़के आर्या के आते ही हौट आंटी, मस्त आंटी कह कर के कटाक्ष करने लगते थे. आर्या को सब समझ में आ रहा था मगर वह कैसे अपनी मम्मी को सम?ाए. इन्हीं सब कारणों से आर्या और भूमिका में दूरी बढ़ती जा रही थी. मगर भूमिका इन सब बातों से बेखबर अपनी ही दुनिया में मस्त थी. उधर रोहित भूमिका का घर के प्रति लापरवाह रवैया देख कर मन ही मन कुढ़ता रहता था.

भूमिका का यह सोशल मीडिया का बुखार बढ़ता ही जा रहा था. वह अपने जीवन के हर लमहे को कैद कर के अपलोड कर देती थी. भूमिका को जीने से अधिक अपलोडिंग में मजा आता था. उस का पहनना, खानापीना सबकुछ सोशल मीडिया तय करता था. क्या ट्रैडिंग कर रहा है क्या नहीं इस बात पर भूमिका की जिंदगी निर्भर हो गई थी.

आर्या के ऐग्जाम के बाद पूरा परिवार जब घूमने गया तो हर 1 घंटे में एक नई रील बनाने के कारण भूमिका साथ होकर भी साथ नहीं थी. उस का सारा ध्यान उस रमणीय स्थल को देखने में नहीं वहां पर फोटो खिंचवाने और रील बनाने में था. भूमिका हर हाल में अपने सब्स्क्राइबर बढ़ाना चाहती थी.

रोहित ने एक दिन गुस्से में कह भी दिया, ‘‘भूमिका, तुम हमारे साथ आई ही क्यों हो. लगता ही नहीं तुम हमारे साथ आई हो.’’

मगर भूमिका सारी बातें अनसुनी कर देती थी. 12वीं कक्षा के रिजल्ट के बाद आर्या पढ़ने के लिए बाहर चली गई. उस की एडमिशन से ले कर प्रवेश परीक्षा तक सब चीजों में उस के पापा रोहित का ही योगदान था. भूमिका का योगदान बस अपनी बेटी के प्रति बस उस की तसवीरों और हैशटैग को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने में ही सिमट गया था.

आर्या के कुछ बोलने से पहले ही भूमिका कहती, ‘‘तुम्हें सबकुछ वर्षों बाद भी याद रहेगा इसलिए मैं ये सब कर रही हूं.’’

आर्या व्यंग्य करते हुए बोली, ‘‘हां, महसूस तो कुछ हुआ ही नहीं है बस तसवीरों में ही याद रहेगा.’’

भूमिका इतनी अधिक इस नशे की शिकार हो गई थी कि उसे भनक भी नहीं लगी कि कब और कैसे रोहित अपनी खुशी अपनी एक तलाकशुदा सहकर्मी में ढूंढ़ने लगा था. उस महिला का नाम भावना था. रोहित अकसर दफ्तर के बाद भावना के घर ही चला जाता था. वैसे भी उसे अपना घर, घर कम स्टूडियो ज्यादा लगता था. कहीं रिंग लाइट, कहीं मेकअप का बिखरा समान… हर जगह बस दिखावा था. भावनाएं कहीं नहीं थीं.

जब से आर्या होस्टल चली गई थी तब से अधिकतर खाना या तो बाहर से आता या फिर रोहित बनाता था. भूमिका ने यह भी ध्यान नहीं दिया कि कब और कैसे रोहित रात के 9 बजे दफ्तर से घर आने लगा है.

रोहित को अब भूमिका से कोई फर्क नहीं पड़ता था. भूमिका रील बनाने में व्यस्त रहती और रोहित भावना के साथ चैटिंग करने में. जब आर्या छुट्टियों में घर आई तब भी भूमिका अपने सोशल मीडिया पर ही व्यस्त रही. रोहित आर्या को भावना के घर ले कर गया और भावना ने आर्या के साथ खूब सारी बातें और शौपिंग करी. दोनों बापबेटी को भावना में अपना नया घर मिल गया था.

भूमिका को तब होश आया जब रोहित रात को भी घर से गायब रहने लगा. आखिर एक दिन भूमिका ने रोहित को रंगे हाथ पकड़ लिया. जब भूमिका रोहित को लानतसलामत भेज रही थी तब रोहित बोला, ‘‘तुम इस बात पर रील बना कर अपने व्यूज बढ़ाओ. तुम्हारे सब्स्क्राइबर्स बढ़ाने का यह सुनहरा मौका है. तुम्हारा पति हूं कुछ तो ऐसा करूंगा जिस से मेरी पत्नी को फायदा हो,’’ यह बोल कर रोहित तीर की तरह घर से बाहर निकल गया.

भूमिका को समझ नहीं आ रहा था कि रोहित क्या सच में ऐसा उस के व्यूज बढ़ाने के लिए कर रहा है या वाकई में उस का अफेयर चल रहा है.

भूमिका इस मायावी दुनिया के सफर में इतना आगे बढ़ गई थी कि उसे वास्तविकता और वर्चुअल दुनिया में कोई फर्क ही नजर नहीं आता था. बरसों से भूमिका अपने किसी भी दोस्त से नहीं मिली थी. औनलाइन दोस्त ही उस की दुनिया बन कर रह गए थे.

भूमिका अपनी इस समस्या के लिए नए हैशटैग और अपनी एक दुखी तसवीर को क्लिक करने में व्यस्त हो गई थी. शायद जिंदगी के हर लमहे को कैद करतेकरते भूमिका कब और कैसे इस मायावी दुनिया में कैद हो गई थी उसे पता नहीं था.

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