Famous Hindi Stories : नताशा का मोबाइल बहुत देर से शोर कर रहा था लेकिन वह वहां हो तो मोबाइल अटैंड करे. वह तो मौनिंग वाक पर गई थी. नताशा की आदत थी कि मौनिंग वाक पर मोबाइल साथ में नहीं रखती थी. उस की यह आदत बादल जानता था. फिर भी उस ने नताशा को फोन कर दिया. इतनी बड़ी खुशखबरी जो देनी थी. खुशी के उत्साह में वह भूल गया. चलो जाने दो. वाक से आएगी तब कौल बैक कर लेगी. यह सोच कर बादल अपना लैपटौप खोल कर औफिस का काम करने लगा. सुबह 8 बजे नताशा का मोबाइल आया. वह नाराज थी.

बादल ने पूछा, ‘‘क्या हुआ?’’

नताशा बोली, ‘‘तुम्हें पता है मैं मौर्निंग वाक में मोबाइल साथ नहीं रखती, फिर भी तुम ने इस समय फोन किया.’’

‘‘बाबा, सौरी. बात ही

ऐसी थी.’’

‘‘क्यों क्या हुआ?’’

नताशा बोली.

‘‘तुम ने जो वह कुंडली भेजी थी मैं ने वह अपने परिवार वालों को व्हाट्सऐप कर दी थी. उन्होंने मेरीतुम्हारी कुंडली मैच करवाई हैं पूरे 36 गुण मिल गए हैं. इसलिए शादी पक्की है हमारी.’’

नताशा जोर से हंसने लगी. जब हंसी रुकी तो बोली, ‘‘बादल ये सब फुजूल की बातें हैं. तुम भी क्या सोचने लगे.’’

‘‘यार, विश्वास तो मैं भी नहीं करता पर शादी की शर्त पापा ने यही बताई थी कि कुंडली अगर मिल गई तो मु?ो ऐतराज नहीं है. इसलिए करना पड़ा. सम?ा करो,’’ बादल बोला.

‘‘यह भी ठीक है. चलो आज शाम को डिनर पर मिलते हैं. तब बात करेंगे. मुझे भी तैयार होना है. तुम भी रैडी हो जाओ.’’

शाम ने सितारों की चुनर ओढ़ ली थी. चांद आवारा हो चला था. झील के चमकीले पानी में चांद अपना चेहरा देखदेख कर मुसकरा उठता था. झील के सामने बना खूबसूरत होटल था ‘स्टार.’ नताशा इंतजार कर रही थी. बादल नहीं आया था. नताशा को 20 मिनट हो गए थे. वह फोन नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसे कार ड्राइव करते समय मोबाइल पर बात करना पसंद न था. थोड़ा इंतजार और सही.

तभी बादल आता दिखाई दिया. जल्दीजल्दी कदम उठाता वह नताशा के नजदीक पहुंचा, ‘‘सौरी यार ट्रैफिक में फस गया था,’’ बादल बोला.

‘‘ओकेओके,’’ नताशा मुसकरा दी.

‘‘कुछ और्डर किया या यों ही बैठी हो?’’

‘‘तुम्हारा इंतजार कर रही थी,’’ नताशा बोली.

‘‘ओके बाबा कर देते हैं और्डर,’’ नताशा बोली और मेनू कार्ड उठा लिया.

बादल नताशा की सुंदरता में खो गया. लगभग 25 वर्षीय नताशा गोरी न हो कर बदामी रंग की थी. कंधों तक कटे बाल, कानों में डायमंड के छोटेछोटे टौप्स, एक हाथ में ब्रेसलेट और होंठों  पर हलकी सी लिपस्टिक. सिंपल सा लुक.बादल को यों भी ज्यादा मेकअप से चिढ़ थी. नताशा उसे इसलिए पसंद थी.

नताशा ने और्डर दे कर बादल की तरफ देखा तो वह उसे ही देख रहा था.

‘‘क्या हुआ?’’ नताशा ने पूछा.

‘‘नताशा कितनी प्यारी लग रही हो,’’ बादल रोमांटिक होने लगा.

‘‘पहली बार देख रहे हो? हम

1 साल से एकदूसरे के करीब है.’’

तभी बादल के मोबाइल पर मैसेज आया. देखा तो मां का मैसेज था कि बेटा कब आ रहे हो? शादी की तारीख पक्की करनी है. बादल ने नताशा को बताया.

नताशा बोली, ‘‘संडे को मिल लेते हैं.

1 दिन की छुट्टी ले लेते हैं.’’

‘‘ठीक है तुम भी अपने मौमडैड को बोल देना.’’

वेटर डिनर टेबल पर सजा गया था. दोनों डिनर में व्यस्त हो गए. नताशा स्कूल में टीचर थी. बादल एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर था. बादल अपने दोस्त के साथ नताशा के स्कूल गया था वहां नताशा और बादल की मुलाकात हुई थी. लगभग 1 वर्ष की रिलेशनशिप में दोनों ने शादी का फैसला लिया था. बादल के मम्मीपापा वाराणसी में थे. नताशा का परिवार अहमदाबाद में था. जौब उस की भी अहमदाबाद में थी. बादल ने डिनर के बाद घर फोन लगा कर बता दिया कि वह नताशा के मौमडैड के साथ नैक्स्ट वीक वाराणसी पहुंच जाएगा. 3 दिन बाद ही संडे था. जनवरी का महीना था. 1-2 छुट्टियां भी आ रही थीं. संडे के साथ उन का भी फायदा मिल गया.

जब नताशा के परिवार वाले बादल के साथ वाराणसी पहुंचे तो अंधेरा होने लगा था. बादल के परिवार ने गरमजोशी से स्वागत किया. बादल के मम्मीपापा अपनी होने वाली बहू को देख कर खुश थे. बादल के पापा सरकारी नौकरी में थे. उन्होंने स्वेच्छा से रिटायरमैंट ले लिया था. पुश्तैनी बड़ा मकान था. पैंशन आ रही थी. वे संतुष्ट और खुश थे.बादल उन का इकलौता बेटा था.

नताशा और उस के मौमडैड भी खुश थे. नताशा के डैड की अहमदाबाद में शौप थी. नताशा उन की इकलौती बेटी थी.

सुबह से ही घर में चहलपहल शुरू हो गई थी. दोनों परिवारों ने तय किया कि शाम को सगाई की रस्म कर दी जाए. नताशा के परिवार वाले दामाद के लिए शौपिंग करने मार्केट निकल गए. नताशा और बादल अपनी बाइक पर गंगा घाट चले गए. गंगा में नोका विहार करते हुए  नताशा के चेहरे से खुशी ?ालक रही थी. बादल के फोन की मधुर आवाज गूंजने लगी. बादल ने देखा उस के मामा थे.

‘‘हैलो भानजे बधाई हो शाम को हम भी समय पर पहुंच जाएंगे बहू को आशीर्वाद देने.’’

‘‘हां, मामाजी, थैंक्यू मिलते हैं शाम को.’’

शाम को सब परिवार वाले तैयार हो चुके थे. नताशा ने बड़ी प्यारी साड़ी पहन रखी थी. बादल ने भी लौग कुरते पर सिल्क का दुपट्टा ले रखा था. उस में वह बेहद हैंडसम लग रहा था. बादल के पापा ने शादी की तारीख के लिए पंडितजी को भी बुला लिया था. पंडितजी वहीं थे जिन्होंने कुंडली मिलाई थी. सिर्फ परिवार के लोग थे. बादल के मामा और बादल के करीबी दोस्त जो वाराणसी के ही थे.

बड़े ही खुशनुमा माहौल में सगाई की रस्म पूरी हो चुकी थी. सभी डिनर का आनंद लेने लगे थे. पंडितजी शादी के शुभ मुहूर्त के लिए अपनी पोथी देख रहे थे. डिनर समाप्त हो रहा था. सभी बादल की मां के हाथ की बनाई खीर की मिठास में खोए थे.

बादल नताशा से बोला, ‘‘नताशा, मम्मी से खीर बनाना सीख लेना. मुझे पसंद है मेवो वाली खीर.’’

नताशा हंस दी.

तभी बादल के मामा की कड़क आवाज गूंजी, ‘‘यह शादी नहीं होगी… यह शादी गलत है.’’

सभी चौंक गए. नताशा के डैड अचानक हुई इस बात से घबरा गए. खीर का स्वाद कड़वा लगने लगा.

‘‘क्यों क्या हुआ?’’ बादल के पापा घबरा गए.

बादल गुस्से में बोला, ‘‘मामाजी क्या बोले जा रहे हो? कुछ होश है?’’

‘‘बेटा में होश में हूं,’’ मामा बोले.

‘‘क्या बात है?’’ नताशा बोली.

‘‘पहले पूरी बात सुनो,’’ मामा बोले.

पंडितजी भी घबरा गए. बोले, ‘‘ऐसी अशुभ बातें क्यों बोले जा रहे हो?’’

‘‘मैं ने कोई अशुभ बात नहीं बोली. अशुभ तो आप करवा रहे हो,’’ मामा बोले.

‘‘मैं ने क्या किया?’’ पंडितजी बोले

‘‘आप ने नताशा की कुंडली नहीं देखी? आप मुहूर्त देख रहे थे. नताशा और बादल की कुंडली मैं ने भी अच्छी तरह देखी. नताशा तो मंगली है. इस की शादी बादल से होगी तो बादल पर संकट आएगा.’’

‘‘मैं नहीं मानता हूं,’’ बादल बोला.

कुछ नहीं होता अंगलीमंगली.’’

‘‘तुम्हारे मानने न मानने से बात बदलेगी नहीं. नताशा मंगली है तो शादी हम भी नहीं करेंगे,’’ बादल के पापा बोले.

‘‘आप इतने शिक्षित हो कर कैसी बात करते हैं? पंडितजी ने कुंडली मिलाई थी तब तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा था,’’ नताशा के डैड बोले.

‘‘पंडितजी झूठ क्यों बोलेंगे?’’ बादल की मां ने सवाल किया.

‘‘मंगली वाली बात छिपा गए हैं.’’

‘‘ऐसा नहीं है. नताशा की कुंडली में मंगल है, यह बात मैं ने बादल से कही थी. बादल ने

ही कहा था कि पंडितजी यह कोई खास बात नहीं है. आप घर पर इस का जिक्र मत करना. बाकी 36 गुण मिल गए थे. इसलिए मैं ने बताना उचित नहीं सम?ा,’’ पडितजी बोले.

‘‘आप ने अच्छा नहीं किया पंडितजी,’’ बादल की मां ने कहा, ‘‘मैं मंगली लड़की से बादल की शादी नहीं कर सकती. मेरा इकलौता बेटा है,’’ बादल की मां ने रोना शुरू कर दिया.

मामा अपनी बहन को चुप कराने में लग गए.

‘‘मां किस युग में जी रही हो ऐसा कुछ भी नहीं होता,’’ बादल बोला.

सारा माहौल बदल गया था. जो पहले खुश थे नताशा की सुंदरता को ले कर उन को नताशा अब बुरी लगने लगी थी. नताशा और उस के डैड भी परेशान थे. उन्होंने भी समझने की कोशिश की लेकिन बादल की मां और पापा अब नताशा को बहू नहीं बनाना चाहते थे.

आखिर नताशा ने कहा, ‘‘फिलहाल घर वालों की सोच इतनी जल्दी नहीं बदलेगी.

हम बाद में सोचेंगे. हम लोग कल अहमदाबाद लौट जाएंगे.’’

बादल की आंखों में आंसू भर आए. बोला, ‘‘नताशा इतनी जल्दी हमारे सपने टूट गए.’’

‘‘बादल टैंशन लेने की जरूरत नहीं है. अपनी जौब पर फोकस करो.’’

नताशा के डैड जानते थे उन की बेटी समझदार है कुछ सोचा ही होगा. नताशा यों भी मानसिक रूप से मजबूत लड़की थी. उन्हें नताशा पर पूरा भरोसा था.

‘‘जैसा तुम्हें ठीक लगे,’’ बादल बोला. वह उदास और दुखी था.

दूसरे ही दिन नताशा का परिवार अहमदाबाद लौट गया.

बादल का मूड भी खराब हो चुका था. उस के करीबी दोस्तों ने भी बादल के परिवार वालों को सम?ाने की कोशिश की. लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. बादल को अपने मामा दुश्मन नजर आने लगे थे. मामा की लगाई आग थी? जिस में उस का प्यार जल गया. उस की शादी पक्की होतेहोते रह गई. बादल भी कुछ दिन रहा फिर वापस लाने की तैयारी करने लगा.

बादल के पापा बोले, ‘‘बेटा चिंता मत करो तुम्हें नताशा से भी अच्छी लड़की मिलेगी, यहीं वाराणसी में.’’

‘‘बेटा नताशा पर ही जिंदगी खत्म नहीं होती,’’ मामा भी बोले.

‘‘नताशा से अच्छी लड़की नहीं चाहिए. मुझे नताशा से ही शादी करनी है. वह एक अच्छी बहू साबित होगी. आप एक बार अपने फैसले पर फिर सोच कर देखो. इस युग में अंधविश्वासी मत बनो मां. बादल ने एक बार दोबारा कोशिश की.

‘‘देखो बेटा शादी करने पर तुम पर कोई संकट आ गया तो?’’ बादल की मां का रोना फिर शुरू हो गया.

‘‘ऐसा कुछ नहीं होगा चिंता मत करो,’’ बादल गुस्से में आ गया. वह अब थक गया था सम?ातेसम?ाते.

बादल भी वापस आ गया अहमदाबाद. जौब से ज्यादा दिन छुट्टी नहीं ले सकता था.

वापस अहमदाबाद आ कर जीवन उसी रूटीन पर चलने लगा. थोड़ेथोड़े दिनों में बादल के पापा लड़कियों के फोटो बादल के पास भेजते रहते थे. बेटा लड़की देख कर पसंद करो जिस से कि आगे बात चलाई जाए. लेकिन बादल टालता रहता.

लगभग सालभर बाद एक दिन बादल ने पापा को फोन कर बोला, ‘‘पापा मैं ने एक लड़की पसंद की है. जल्द ही आप से मुलाकात कराऊंगा. आप मु?ो लड़कियों के फोटो भेजना बंद कर दो.’’

‘‘अरे वाह, अच्छी बात है कब आएं हम लोग?’’ पापा बोले.

‘‘पापा मेरा प्रमोशन ड्यू है कुछ महीनों में मैं ही आ जाता हूं आप की बहू को ले कर.’’

‘‘बेटा तुम ने मेरा मान रख नताशा का पीछा छोड़ दिया. हम सब को तुम पर गर्व है,’’ बादल के पापा खुश थे.

कुछ महीनों बाद ही बादल अपनी पत्नी को ले कर वाराणसी पहुंच गया. गुलाबी जोड़े में सजी दुलहन सुंदर लग रही थी. हाथों में मेहंदी का रंग गहरा था.

‘‘अरे वाह, मेहंदी का रंग गहरा है. दुलहन संस्कारी भी है, सिर नहीं उघाडे़ हैं, सिर, चेहरा ढके हैं.

‘‘आओ बेटी अंदर आओ,’’ बादल की मां खुश थीं. मां ने महल्ले की महिलाओं को बुलाया था.

बादल के कुछ करीबी दोस्त भी जो मंदमंद मुसकरा रहे थे.

दुलहन बादल की मां के पैर छूने के लिए झुकी ही कि मां ने उसे गले लगा लिया. तब तक दुलहन चेहरे से घूंघट हटा चुकी थी.

‘‘अरे, यह नताशा है मंगली,’’ बादल की मां ने दुलहन को एकदम से दूर कर दिया.

बादल के पापा गुस्से से बोले, ‘‘नाक कटा दी तुम ने… नताशा को नहीं छोड़ा था तुम ने?’’

‘‘पापा आप लोगों ने मंगली होने की वजह से नताशा को छोड़ा था, जबकि नताशा में कोई कमी नहीं थी. मैं ने अहमदाबाद जाते ही नताशा से कोर्ट मैरिज कर ली थी. हमारी शादी को डेढ़ साल होने वाला है लेकिन मैं सहीसलामत हूं. मुझे कुछ नहीं हुआ है. न ही कोई दुर्घटना हुई मेरे साथ. बताइए आप की मंगली वाली बात गलत हुई?’’

‘‘क्या बात करता है तू? तुझ पर कोई प्रभाव नहीं?’’ बादल के पापा आश्चर्य से बोले.

‘‘हां पापा सबकुछ बढि़या है. मुझे मामा पर कुछ शक हुआ था जब उन्होंने नताशा के घर अपने साले के बेटे का रिश्ता भेजा था. उन्हें पता था कि नताशा के पेरैंट्स के पास बहुत पैसा है. मामा ने यह पौलिटिक्स खेली थी. नताशा की जौब भी अच्छी चल रही है. मेरा प्रमोशन भी हो गई है. आप की प्रमोशन भी होने वाली है,’’ बादल मुसकराया.

मेरी क्यों प्रमोशन होगी? मैं तो रिटायर हो गया हूं,’’ बादल के पापा बोले.

‘‘आप जौब से रिटायर हुए हैं. परिवार की जौब से रिटायर नहीं हुए हैं. कुछ महीनों में पापा आप दादा बनने जा रहे हो. नताशा ने मैटरनिटी लीव ले ली है. आप के पास ही रहेगी डिलिवरी तक.’’

‘‘बेटा, तुम ने तो मेरी बरसों की सोच ही बदल दी,’’ बादल की मां की आंखों में खुशी के आंसू भर आए, ‘‘नताशा बेटा मुझे माफ कर दो.’’

नताशा मुसकरा दी और फिर सासूमां के पैरों में झुक गई. सास ने भी उसे गले लगा लिया.

घर में मंगल गान शुरू हो गया था. सब शुभ और मंगल जो हो गया था.

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