Hindi Story Collection : सुबह के 6 बजे थे. 20 वर्षीय यशी अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी क्योंकि आज संडे था. मोबाइल की घंटी से उस की नींद टूटी तो उस ने उनींदी आवाज में हैलो बोला. अपनी स्कूल फ्रैंड गीत की आवाज सुनते ही उस की नींद हवा में उड़ गई.

गीत और यशी दोनों बचपन की दोस्त थीं. दोनों के घर पासपास थे. दोनों ने ही प्रयागराज के सीएमपी डिगरी कालेज से बीकौम किया था. हमेशा दोनों सखियां साथ बैठ कर पढ़ाई करती थीं. परिवारों में भी आपस में एकदूसरे से मिलनाजुलना था लेकिन चूंकि दोनों परिवारों के जीवनस्तर में काफी अंतर था इसलिए गीत का परिवार थोड़ी दूरी बना कर रखता परंतु उन दोनों की दोस्ती में इस से कोई अंतर नहीं पड़ा था.

जब दोनों बीकौम कर रही थीं तो गीत की दोस्ती अंगद से हो गई. अंगद एमबीए कर रहा था और उस का व्यक्तित्व काफी आकर्षक  था.

यशी की दोस्ती उमंग से हो गई थी. दोनों  डेट पर जातीं और लौट कर दोनों ही अपनी डेट की 1-1 बात आपस में शेयर करतीं. आपस में खूब हंसतींखिलखिलातीं और मस्ती करतीं. यहां तक कि गीत और अंगद की जोड़ी तो कालेज में इतनी मशहूर हो गई कि सब की जबान पर उन दोनों के ही नाम सुनाई पड़ते.

उमंग तो यशी के नोट्स के चक्कर में प्यार का दिखावा कर रहा था क्योंकि यशी पढ़ने में बहुत तेज थी लेकिन जब यशी ने एक दिन उमंग की चैट कृति के फोन में पढ़ ली तो उस के सामने  उस की सारी असलियत खुल गई. पहले तो उसे बहुत गुस्सा आया लेकिन फिर उस से ब्रेकअप कर के उस ने अपने को पूरी तरह पढ़ाई में ?ांक दिया. दोनों ने आपस में तय किया कि बीकौम के बाद दोनों कैट की कोचिंग जौइन करेंगी.

यशी ने कालेज में टौप किया तो उसे सरकार की तरफ से स्कौलरशिप मिल गई. उस ने दिल्ली में कोचिंग जौइन करने का फैसला कर लिया.

यशी के दिल्ली जाने की बात सुनते ही गीत ने भी दिल्ली जाने की बहुत जिद की लेकिन उस के पापा ने साफ मना कर दिया. गीत कई दिनों तक रोईधोई लेकिन उस के पापा नहीं पिघले.

यशी के दिल्ली चले जाने के बाद दोनों फ्रैंड्स के बीच फोन पर बातें होतीं लेकिन अब चूंकि यशी अपनी क्लासेज में ज्यादा बिजी रहने लगी थी, इसलिए दोनों के बीच बातें कम होती थीं.

गीत पढ़ाई के नाम पर लैपटौप पर मूवी देखती और अंगद के साथ रोज देर रात तक चैट करती. वह अंगद से मिलने के लिए बेकरार हो रही थी, इसीलिए उस ने कैट ऐग्जाम का सैंटर दिल्ली रखने का निश्चय कर लिया और चुपचाप अपनी योजना पर अमल कर लिया.

गीत दिल्ली आ कर यशी को सरप्राइज देना चाहती थी. इसलिए वह जब दिल्ली पहुंच गई तब उस ने उसे फोन किया.

‘‘हाय, गीत… इतनी सुबहसुबह… क्या हुआ यार?’’

‘‘मैं प्रयागराज से दिल्ली आ गई हूं. अपने फ्लैट का ऐड्रैस मुझे व्हाट्सऐप पर भेज दो.’’

यशी ने झटपट ऐड्रैस व्हाट्सऐप पर भेजा और तेजी से उठ कर अपना रूम ठीक करने लगी स्विगी से दूधब्रैड का और्डर कर के फ्रैश हो कर अपनी फ्रैंड गीत का इंतजार करने लगी. उस के मन में प्रश्नचिह्न मुंह उठाए हुए दस्तक दे रहा था कि आखिर गीत को अकेले उस के पेरैंट्स ने दिल्ली कैसे भेज दिया?

बेसब्र मन से उस की ऊंगलियां अनायास गीत का नंबर मिला बैठीं, ‘‘हैलो गीत यह तो बता तुझे पापामम्मी ने अकेले कैसे भेज दिया?’’

‘‘तुम इतनी बेचैन क्यों हो? मैं बस 10-15 मिनट में पहुंचने वाली हूं. तुझे सारी बातें बता दूंगी. यहां टैक्सी ड्राइवर सारी बातें सुन लेगा.’’

यशी बहुत ऐक्साइटेड थी क्योंकि उस की फास्ट फ्रैंड आ रही थी. 20 वर्षीय यशी ने एमबीए गुरु कोचिंग जौइन की थी. वह कैट का कंपीटीशन पास कर के किसी सरकारी कालेज से एमबीए करना चाहती थी, इसलिए वह कड़ी मेहनत भी कर रही थी. वह रात मे लगभग 3 बजे तक पढ़ती रही थी इसीलिए सुबह के समय उस की आंख लग गई थी. उस के पापा बैंक में अकाउंटैंट हैं, मां गृहिणी… घर में दादादादी और छोटा भाई वह भी कालेज में पढ़ रहा था, इसलिए उस ने मन ही मन ठान लिया था कि वह कैट  पास कर के अपने पेरैंट्स के सपने को जरूर पूरा करेगी.

गीत के पापा का लंबाचौड़ा बिजनैस था. मां गृहिणी थीं जो हर समय पूजापाठ आदि में व्यस्त रहतीं. उन की दुनिया घरगृहस्थी और मंदिर तक ही सीमित थी.

गीत का गोरा रंग और सांचे में ढला छरहरा बदन देख लड़के आंहें भरा करते थे. इसलिए उस का बीकौम पूरा होते ही मम्मीपापा उस की शादी कर के अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाना चाहते थे, लेकिन गीत किसी तरह से भी शादी के लिए तैयार नहीं थी और उस ने जिद कर के कैट की परीक्षा के लिए आकाश औनलाइन कोचिंग के मैटीरियल, बुक्स, पेपर्स और वहां के लिटरेचर से घर पर तैयारी कर रही थी.

यशी ने दिल्ली में कोचिंग जौइन की थी. गीत दिल्ली अपनी फास्ट फ्रैंड यशी के साथ कंबाइंड स्टडी के बहाने से आई थी. वह अपनी प्लानिंग के अनुसार दिल्ली ऐग्जाम का सैंटर भर कर बहुत खुश थी. जब वह औनलाइन फौर्म भर रही थी तो उस ने चुपचाप परीक्षा केंद्र दिल्ली का औप्शन भर दिया क्योंकि उस का मनमीत दिल्ली में था.

गीत टैक्सी में बैठी हुई अंगद से मिलने की कल्पना में खोई हुई थी. उस के मन में पिछली बातें उमड़घुमड़ रही थीं.

जब वैबसाइट पर ऐग्जाम से संबंधित सूचना अपलोड हुई तो वह खुशी से नाच उठी क्योंकि ऐग्जाम तो केवल बहाना था, उस का खवाब तो अपने बौयफ्रैंड अंगद की बांहों में जल्द से जल्द खो जाने का था जो परीक्षा केंद्र के बहाने से पूरा होने वाला था.

गीत पिछले दिनों की यादों में खोई हुई सोच रही थी कि जब शाम को उस ने अपने पापा को दिल्ली सैंटर की बात बताई थी तो वे कितना नाराज हो कर बोले थे, ‘‘प्रयागराज की जगह दिल्ली का कालेज क्यों?’’

‘‘पापा मु?ो यशी के साथ कंबाइंड स्टडी करनी है.’’

‘‘मु?ो तो तुम्हारी कोई खास तैयारी दिखाई नहीं पड़ती,’’ वे धीमी आवाज में बोले, ‘‘पढ़नालिखना तो दिखाई नहीं पड़ता… केवल तुम्हारी शोशेबाजी दिख रही है. फौर्म भरने और ऐग्जाम दे देने से थोड़े ही कंपीटीशन पास हो जाते हैं… मन लगा कर तैयारी करनी पड़ती है.’’

 

मम्मी सुगंधा ?ाट से बोलीं, ‘‘आप तो बस हर समय उस से ऐसे ही बोलते हैं…

वह दिनभर तो लैपटौप खोल कर पढ़ती रहती है.’’

पापा पत्नी की तरफ आंखें तरेर कर बोले, ‘‘मैं अच्छी तरह से जानतासम?ाता हूं कि कितनी पढ़ाई हो रही है. कुछ उलटासीधा हुआ तो तुम ही जिम्मेदार होगी. कब जाना है?’’

‘‘पापा टिकट तो मैं ने कर लिया है.’’

‘‘तुम्हारा सब काम अब अपने मन से होने लगा है. टिकट कैंसिल करा दो, मैं चलूंगा तुम्हें पहुंचाने.’’

यह सुनते ही गीत का चेहरा उतर गया. लेकिन अचानक पापा को बुखार आ गया इसलिए मम्मी का भी उन के पास रहना जरूरी हो गया. अत: उस के चेहरे पर हलकी सी मुसकान छा गई.

यशी को गेट पर देखते ही हाय यशी कहते हुए गीत उस के गले लग गई. काफी दिनों के बाद मिलने पर दोनों सहेलियों की आंखें छलछला पड़ीं.

‘‘यशी, पापा को बुखार आ गया इसलिए उन्होंने रामू काका को मेरे साथ भेज दिया था.’’

रामू काका को उस ने उसी टैक्सी से सोसायटी के गेट पर आते ही वापस भेज दिया.

‘‘अरे वाह गीत तुम तो बहुत इंटैलीजैंट हो  गई हो… अंगद कभी दिखता है?’’

‘‘नहीं यार… कोचिंग के मारे दम मारने को फुरसत नहीं है.’’

‘‘अरे वाह मेरी पढ़ाकू सखी.’’

टेबल पर बुक्स और खुले लैपटौप को देख कर वह बोली, ‘‘यशी तुम तो लग रहा है कि  सीरियसली तैयारी कर रही हो.’’

‘‘हां यार, मैं तो जीजान से लगी हुई हूं. मु?ो तो हर हाल में कंपीटीशन पास करना ही है…. देखो अब रिजल्ट क्या होता है. वैसे उम्मीद तो पूरी है.’’

अंगद ने उसी कालेज से एमबीए की डिगरी ली थी. अंगद पढ़ने में बहुत तेज था,

वहीं गीत बहुत खूबसूरत थी. दोनों को अपनीअपनी खूबियों का एहसास था. शुरू के दिनों में तो आपस में नोक?ांक हुई लेकिन फिर दोस्ती गहरे प्यार में कब बदल गई पता ही नहीं लगा.

गीत तो कालेज समाप्त होते ही अंगद पर  शादी कर लेने के लिए जोर डालने लगी थी और वह कैंपस सलैक्शन की जौब जौइन कर लेने के लिए दबाव डाल रही थी लेकिन अंगद अपने लिए अच्छा पैकेज और कंपनी खोज कर अपनी काबिलीयत को परखना चाह रहा था इसलिए उस ने प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने के लिए दिल्ली के एक प्रतिष्ठित इंस्टिट्यूट में एडमिशन ले लिया था. उस ने गीत से कहा था कि मैं जब कुछ बन जाऊंगा तभी तो तुम्हें बेहतर भविष्य दे पाऊंगा.

हालांकि दोनों मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े हुए थे लेकिन गीत अंगद से दूरी सहन नहीं कर पा रही थी. उस ने अपने पापा से दिल्ली जा कर कोचिंग करने के लिए बहुत जिद की थी लेकिन वह किसी भी तरह से राजी नहीं हुए थे और प्रयागराज के ही कोचिंग इंस्टिट्यूट में एडमिशन करवा दिया था.

गीत ने अंगद से मिलने के लिए यह तरीका निकाला और यशी के साथ कंबाइंड स्टडी के बहाने दिल्ली पहुंच गई. जब उस ने अंगद को सरप्राइज देते हुए बताया कि वह दिल्ली में है तो तुरंत अंगद अपनी बाइक ले कर उस की सोसायटी के पास पहुंच गया.

गीत अपने प्रियतम को देखते ही दौड़ती हुई बिना किसी की परवाह किए उस से लिपट गई. अंगद घबरा कर चारों ओर देखने लगा और आहिस्ता से उसे अपने से अलग किया. लेकिन गीत पर तो अंगद को पाने का नशा छाया हुआ था. वह उस की बाइक पर उस से चिपक कर बैठ गई. अंगद बहुत असहज महसूस कर रहा था. वह उसे एक पार्क में ले गया. वहां तो गीत कभी अंगद के कंधे पर सिर रखती तो कभी उस का हाथ पकड़ कर सहलाने लगती. अंगद पर भी नशा छाता जा रहा था.

तभी यशी का फोन आया कि वह लाइब्रेरी में स्टडी के लिए जा रही है. वहां उसे 2-3 घंटे लगेंगे. यशी उन दोनों की तड़प सम?ा रही थी इसलिए जानबू?ा कर उस ने लाइब्रेरी का बहाना बनाया जबकि वह अपनी फ्रैंड के पास चली गई थी.

अब तो अंगद और गीत दोनों कमरे में अकेले थे. एकांत पाते ही गीत अंगद की बांहों में समा गई. अब अंगद का भी अपनेआप से नियंत्रण खत्म हो चुका. फिर 2 जवान दिलों को एक होने में कितनी देर लगती है. आज दोनों के बीच वह दीवार भी ढह गई जिसे दोनों ने शादी के लिए बचा कर रखा था. उन दोनों को होश तब आया जब शाम को दिन ढले यशी ने घंटी बजाई.

अंगद तेजी से चला गया परंतु उस की नजरें ?ाकी सी थीं जैसे उसे अपनी गलती का पछतावा हो रहा हो. गीत की आंखों में खुशी की चमक देख यशी ने छेड़ते हुए कहा, ‘‘क्या बात है गीत बहुत खुश दिख रही हो?’’

‘‘दोस्त मैं तो तेरी जिंदगीभर के लिए कर्जदार बन गई हूं. जो खुशी तुम्हारी वजह से आज मु?ो मिली है उसे बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं.’’

‘‘दोस्त किसी पर एहसान नहीं करते, समय आने पर वसूल भी कर लेते हैं,’’ कह कर यशी हंस पड़ी और सुनाओ, जब 2 दीवाने आपस में मिल बैठे तो क्याक्या कर गुजरे?’’

क्या यार तू भी क्या कहेगी? उस ने अपना मोबाइल औन किया और फिर अपने अंतरंग पलों का वीडियो दिखाया. वह अंतरंग पलों का वीडियो देख यशी का चेहरा लाल हो उठा. गीत की आंखें भी शर्म से ?ाकी थीं.

‘‘आखिर तूने यह शूट कैसे किया?’’ यशी ने पूछा.

‘‘बस मोबाइल पर कैमरा औन कर के टेबल पर रख दिया. अब मैं अंगद के प्यार के इन पलों की यादों को अपने साथ ले कर जाऊंगी. जब भी उस की याद आएगी इसे देख कर अपनी प्यास बु?ा लिया करूंगी,’’ अंगद के प्यार में आकंठ डूबी गीत ने खोए हुए अंदाज में कहा.

‘‘देख लो गीत, तुम्हारी यह नादानी कहीं तुम्हारे लिए कोई बड़ी मुसीबत न बन जाए,’’ लेकिन प्यार में डूबी गीत ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया. इस तरह से गीत अंगद के साथ अंतरंग संबंध बना कर बहुत खुश थी और ऐग्जाम दे कर लौट गई. अंगद को पा कर वह खुशियों के ?ाले पर ?ालती हुई आकाश में उड़ी जा रही थी.

कुछ दिनों से उसे यह महसूस हो रहा था कि अंगद अब उसे इग्नोर कर रहा है क्योंकि जब वह उसे कौल करती तो वह बिजी हूं, बाद में करता हूं कह कर फोन काट देता. कई बार कहता कि फोन साइलैंट पर था. हर बार कोई बहाना बना देता.

गीत को अंगद का यह रवैया बहुत परेशान कर रहा था. वह पछता रही थी कि उस ने क्यों इतनी बड़ी बेवकूफी कर डाली.

एक दिन गीत अपने व्हाट्सऐप पर मैसेज देख रही थी. तभी यशी का मैसेज देख वह चौंक पड़ी. उस ने वही वीडियो उसे भेजा था जो उस का और अंगद के अंतरंग पलों का था, जो उस ने यशी को दिखाया था.

एक पल को तो घबराहट के कारण उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं लेकिन फिर अपने को नौर्मल दिखाने की कोशिश करती हुई उस ने लिखा, ‘‘वाह यशी तुम तो पूरी उस्ताद निकलीं. मेरी आंखों से तुम ने काजल कब चुराया? यह तुम ने कब कर लिया?’’

‘‘अरे 10 मौके थे… बस कर लिया. अब मु?ो 5 हजार रुपयों की जरूरत है तुम तुरंत भेज दो नहीं तो अंजाम….’’

गीत समझ गई कि वह ब्लैकमेलिंग का शिकार बन चुकी है. यद्यपि जब से वह दिल्ली लौट कर आई थी, वह अपने कृत्य पर बहुत शर्मिंदा हो कर स्वयं को कठघरे में खड़ा कर रही थी कि उस ने इतनी बड़ी ब्लंडर आखिर क्यों कर दी. वह बारबार उस घड़ी को कोस रही थी जब वह अंगद के साथ अंतरंग हुई थी. वैसे तो वह अंगद को अपना भावी पति मान रही थी लेकिन उस ने अपने कौमार्य को अक्षत क्यों नहीं रखा… वह अपनी सुहागरात तक क्यों नहीं अपने कौमार्य को सुरक्षित न रख सकी.

गीत मन ही मन सोचती रहती कि यदि गर्भ ठहरने की आपात स्थिति आ जाती तो वह अपने मांपापा के सामने कैसे जाती. वह क्या कर बैठी है… यदि अंगद ने उस से शादी से मना कर दिया और मांपापा के दबाव में उसे कहीं और शादी करनी पड़ी… उस के पति को यह शक हो गया कि वह वर्जिन नहीं है तो वह जीतेजी मर जाएगी और मांपापा तो सचमुच में जहर खा लेंगे… यदि यशी उस के वीडियो को वायरल कर देगी तो इस के पास तो आत्महत्या कर लेने के सिवा दूसरा कोई रास्ता ही नहीं रह जाता.

उफ, वह क्या कर बैठी है… परंतु अब पछताए होत क्या, जब चिडि़यां चुग गईं खेत.

यशी उस की बचपन की सब से अच्छी दोस्त कितनी नीचता पर उतर आई है… सारी बातें उस के दिमाग में अपना बसेरा बना कर बैठ गईं… और इस वजह से उस की रातों की नींद उड़ी हुई थी. उसे अब अंगद से भी फोन पर बात करने से डर लगने लगा था. वह रातदिन यही सोचती रहती और जितना सोचती, उतना ही नैराश्य से घिरती जाती. उसे डिप्रैशन हो रहा था.

गीत के चेहरे की रंगत बिगड़ गई थी. वह अपने बैड पर पड़ी इन्हीं बातों में उल?ा छत को देखती रहती. उस ने जो किया वह तो उस समय का नशा था लेकिन यह वीडियो बनाने की कैसी नासम?ा वाली हरकत कर बैठी थी… और तो और यशी के सामने अपनी बेवकूफी जाहिर करते हुए वीडियो क्यों दिखाया… उस के समान दुनिया में कोई भी मूर्ख नहीं होगा… उफ, कितनी  बचकानी हरकत कर बैठी है… क्या जरूरत थी यशी को यह वीडियो दिखाने की…

गीत को अपने ऊपर गुस्सा आता कि एक तरफ ऐसी बचकानी हरकत और फिर आ बैल मु?ो मार कहावत चरितार्थ करते हुए यशी को वीडियो दिखा डाला… अब तो तीर कमान से निकल चुका है, इसलिए उसे इस स्थिति से  होशियारी से निबटना पड़ेगा. वह मन में तरहतरह की योजनाएं बनाती रहती लेकिन उसे अपने चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा दिखाई पड़ता.

मां बोलीं, ‘‘क्या हुआ है तु?ो? चलो डाक्टर के पास दिखा लाएं.

‘‘नहीं मां, मैं ठीक हूं.’’

उस ने किसी तरह 5 हजार रुपए यशी को भेज दिए लेकिन वह जानती थी कि यशी के लिए तो वह अब सोने का अंडा देने वाली मुरगी बन चुकी है… उस ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है तो उसे इस जख्म का इलाज भी खुद ही जल्दी से जल्दी करना पड़ेगा नहीं तो यह नासूर बन कर उसे ऐसा दर्द बारबार देता रहेगा. इसलिए अब उसे सम?ादारी से उस के फोन से इस वीडियो को डिलीट करना होगा.

गीत ने चुपचाप उस के घर से पता लगा लिया कि इस सैटरडे को यशी अपने घर आने वाली है… बस उस ने अपने मन में प्लान तैयार कर लिया. वह यशी के घर पहुंच गई और हायहैलो के बाद यशी से गले मिल कर हालचाल पूछने लगी लेकिन वीडियो या पैसे को ले कर  अपने चेहरे पर कोई शिकन नहीं आने दी.

तभी आंटी ने यशी को किसी काम के लिए पुकारा तो वह तेजी से अंदर गई. तब जल्दी से गीत ने फोन खोलने की कोशिश की तो वह तो बिना पासवर्ड के खुल ही नहीं सकता था क्योंकि फोन तो लौक्ड था… वह सोच नहीं पा रही थी कि अब उसे क्या करना चाहिए… उस ने अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाए और जब तक यशी आती उस ने फोन में से मैमोरी कार्ड निकाल कर अपने पर्स में रख लिया.

थोड़ी देर इधरउधर की बात करने के बाद गीत अपने घर लौटने लगी तो यशी बोली कि गीत मु?ो कल तक 5 हजार रुपए दे देना क्योंकि अगले दिन ही मु?ो जाना है.

गीत मन ही मन बहुत खुश थी अब तुम्हें एक पैसा भी नहीं मिल पाएगा… वह अपनी कामयाबी पर बहुत प्रसन्न थी कि उस ने बड़ी आसानी से अपना काम कर लिया है.

‘‘यशी ठीक है, तुम कल मेरे घर पर आ जाना… मैं कोशिश करती हूं… नहीं तो मम्मी से मांग कर दूंगी.’’

दोनों सखियों के चेहरे पर विजयी मुसकान थी. एक स्वर्ण मृग का शिकार कर के तो दूसरा शिकारी की गरदन पकड़ लेने की कल्पना कर के.

गीत ने घर पहुंचते ही मैमोरी कार्ड को चैक किया तो वह निराश हो गई क्योंकि उस में वह वीडियो नहीं था. इस का मतलब है कि वह वीडियो मोबाइल की हार्ड डिस्क में है… यदि किसी तरह से मोबाइल को फौर्मैट करवा दिया जाए तो बात बन सकती है. वह मन ही मन कई तरह के प्लान बना रही थी लेकिन कुछ सम?ा नहीं पा रही थी कि कैसे यशी का फोन उसे मिल सकता है…

अगली सुबह यशी का फोन आया, ‘‘गीत तुम ने रुपए तैयार कर लिए…’’

‘‘हां मैं ने मौम से रुपए मांगे तो उन्होंने दे दिए हैं, इसलिए आज आ जाना मौम भी तुम्हें बहुत याद कर रही थीं. मैं इंतजार करूंगी.’’

यशी की आंखों के सामने तो 5 हजार के करारे नोट नाच रहे थे. वह हमेशा की तरह गीत के घर आ गई.

‘‘आंटी कहां हैं?’’

‘‘जरा मार्केट तक गई हैं… आ ही रही होंगी. यशी रुपए तो मौम के आने के बाद ही मिल पाएंगे. मु?ो यह अंदाज नहीं था कि तुम इतनी जल्दी आ जाओगी. चाय पीएगी या कौफी?’’

‘‘कुछ भी पिला दो,’’ कह कर यशी मोबाइल पर गेम खेलने में बिजी हो गई थी. तभी गीत ने आवाज दी कि वहां अकेले क्या कर रही है? यहां आ जाओ तो कुछ बातें की जाएं.’’

यशी की उंगलियां तो गेम पर थिरक रही थीं. यह लैवल जीतने का नशा बड़ा ही अलबेला होता है. लोग होशहवास खो कर मोबाइल पर ही नजरें लगाए रहते हैं. यशी भी अपने गेम में बिजी,  कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां चला रही थी. तभी गीत ने कनखियों से उस की ओर देखा और हलके से अपनी कुहनी उस के हाथ पर मार दी, उस के हाथ से मोबाइल छूट कर जमीन पर गिर गया.

यशी चिल्ला कर बोली, ‘‘यह क्या बद्तमीजी है? तुम ने मेरा मोबाइल…’’ वह नीचे ?ाक पाती कि उस से पहले ही चीते की तेजी से गीत ने मोबाइल उठा कर चाय के पैन के खौलते पानी में डाल दिया.

यशी ने तुरंत आंच बंद कर के मोबाइल निकाला और औन करने की कोशिश करने लगी लेकिन फोन औन नहीं हुआ तो वह चीख कर बोली, ‘‘तुम ने मेरा फोन जानबू?ा कर खौलते पानी में डाला है.’’

‘‘अरे नहीं वह तो मेरे हाथ से फिसल कर गिर गया.’’

‘‘अब तुम्हें ही इस की रिपेयरिंग करवानी पड़ेगी.’’

‘‘चलो यहीं पास में मोबाइल रिपेयरिंग की शौप है, वहीं चलते हैं… जो भी चार्ज होगा मैं दे दूंगी.’’

‘‘मेरे रुपए तो दे दो…’’

‘‘इतनी भी क्या जल्दी है यार फोन ठीक करवा कर यहीं तो आएंगे.’’

फोन मेकैनिक ने फोन खोल कर चैक किया तो वह बोला कि खौलते पानी में गिर जाने से

फोन की आईसी चली गई है इसलिए बदल कर नई लगानी पड़ेगी और इस का सारा डेटा करप्ट हो चुका है.

गीत के कान कब से यही बात सुनने को तरस रहे थे. उधर यशी के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. इतनी जल्दी उस के हाथ से सोने का अंडा देने वाली मुरगी निकल गई थी…

‘‘सौरी यार,’’ तुम्हारा फोन मेरी वजह से खराब हो गया. मु?ो बहुत अफसोस है कि तुम्हारे हाथ से सोने का अंडा देने वाली मुरगी इतनी जल्दी मर गई.’’

‘‘ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है वह वीडियो तो मेरे फोन के मैमोरी कार्ड में सेव है, इस में नहीं था.’’

गीत ने पर्स से मैमोरी कार्ड निकाल कर 2 टुकड़े कर के हवा में उछाल दिया,’’ लो ये रहा तुम्हारा बेचारा मैमोरी कार्ड.’’

यशी आंखें फाड़े गीत की होशियारी देखती रह गई थी.

‘‘यशी यार यू आर ग्रेट… तुम ने मु?ो बहुत कुछ सिखा दिया कि किसी को भी मेरी तरह की बेवकूफियां कभी नहीं करनी चाहिए और यदि कभी करनी भी हैं तो किसी को भी कभी भनक तक न लगने दो यहां तक कि अपने इस तरह के राज अपने सब से खास से भी छिपा कर रखो.

‘‘दूसरी बात यह कि कभी किसी पर आंख बंद कर के भरोसा मत करो… भविष्य में जाने कब वह आप के राज को सब के सामने उजागर कर के आप को मुसीबत में फंसा दे और सच तो यह है कि ऐसे राज अपनेआप से भी छिपा कर रखना चाहिए. सम?ा गई मेरी प्यारी दोस्त यशी?’’

गीत कुछ पलों तक उसे ध्यान से देखती रही. तभी यशी भी जोर से हंसने लगी. गीत को चौंकते देख कर बोली, ‘‘तो तू सम?ा रही थी कि मैं तु?ो ब्लैकमेल कर रही हूं. मेरी बन्नो, मेरा प्लान तो तु?ो सम?ाना था. तेरे दिए रुपए तो वैसे के वैसे पर्स में रखे हैं. ले वापस ले,’’ कहते हुए यशी ने पूरे पैसे लौटा दिए. यही नहीं उस ने गीत का मोबाइल ले कर उस के मोबाइल से भी उस का वीडियो डिलीट कर दिया.

‘‘लो अब न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी…’’ यशी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ गीत को अपने गले से लगा लिया.

‘‘आ गले लग जा… यू यार माई रियल फ्रैंड,’’ गीत बोली.

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