लेखक- राजीव कैलाशचंद
Best Hindi Story: माफ कीजिए, पहले मैं आप को अपने बारे में बता तो दूं. मैं देश की सब से मजबूत दीवारों में से एक हूं. यह किसी कंपनी का इश्तिहार नहीं है. मैं तिहाड़ जेल की दीवार हूं. हिंदी में कहावत है न कि दीवारों के भी कान होते हैं. मैं भी सुनती हूं, देखती हूं, महसूस करती हूं, पर बोल नहीं पाती, क्योंकि मैं गूंगी हूं.
एक बार जो मेरी दहलीज के बाहर कदम रख देता है, वह मेरे पास दोबारा न आने की कसम खाता है. न जाने कितनों ने मेरे सीने पर अपने आंसुओं से अपनी इबारत लिखी है.
कैदियों के आपसी झगड़ों की वजह से अनगिनत बार उन के खून के छींटे मेरे दामन पर भी लगे, फिर दोबारा रंगरोगन कर मुझे नया रूप दे दिया गया.
समय को पीछे घुमाते हुए मैं वह दिन याद करने लगी, जब राजू ने पहली बार मुझे लांघ कर अंदर कदम रखा था. चेहरे पर मासूमियत, आंखों में एक अनजाना डर और होंठों पर राज भरी खामोशी ने मेरा ध्यान उस की ओर खींचा था. मैं उस के बारे में जानने को बेताब हो गई थी.
‘‘नाम बोल...’’ एक अफसर ने डांटते हुए पूछा था.
‘‘जी... राजू,’’ उस ने मासूमियत से जवाब दिया था.
‘‘कौन से केस में आया है?’’
‘‘जी... धारा 420 में.’’
‘‘किस के साथ चार सौ बीसी कर दी तू ने?’’
‘‘जी, मेरे बिजनैस पार्टनर ने मेरे साथ धोखा किया है.’’
‘‘और बंद तुझे करा दिया. वाह रे हरिश्चंद्र की औलाद,’’ अफसर ने ताना मारा था.
अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में यहां मेरे पास भेज दिया था.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
फायदे
- गृहशोभा मैगजीन का सारा कंटेंट
- 2000+ फूड रेसिपीज
- 6000+ कहानियां
- 2000+ ब्यूटी, फैशन टिप्स
24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल
फायदे
- 24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल एक्सेस
- फ्री गृहशोभा ऐप
- सभी गृहशोभा इवेंट्स के फ्री इन्विटेशन
- डिजिटल कवरेज का मौका (Women Achievers & Influencers)
- 2000+ फूड रेसिपीज | 6000+ कहानियां | 2000+ ब्यूटी, फैशन टिप्स
