Long Story : अजय को मानव फूटी आंख नहीं सुहाता. आज से नहीं तभी से जब से उस ने उस के औफिस में जौइन किया था. 5 साल पहले उस की पोस्टिंग पास के कसबे में हुई थी, लेकिन मंत्रीजी की सिफारिश लगवा कर उस ने यहां मुख्यालय में बदली करवा ली थी. मंत्रीजी के नाम का नशा आज भी उस के सिर चढ़ कर बोलता है. तभी तो औफिस में अपनी मरजी चलाता है. देर से आना और जल्दी चले जाना उस की आदत बन चुकी है. लंच तो उस का 1 घंटे का होता ही है उस के अलावा चाय के बहाने भी घंटों अपनी सीट से गायब रहता है. कभी डांटफटकार दो तो तुरंत मंत्रीजी के पीए का शिकायती फोन आ जाता है और अजय की क्लास लग जाती है.
मानव अपनी कौलर ऊंची किए मस्ती मारता रहता है और मजबूरन उस की सीट का पैंडिंग काम अजय को किसी अन्य कर्मचारी से करवाना पड़ता है और ऐसा करने से स्वाभाविक रूप से शेष कर्मचारियों में असंतोष फैलता है.कंट्रोलिंग औफिसर होने के नाते सभी कर्मचारियों को समान रखना अजय की ड्यूटी भी है और विवशता भी लेकिन मानव को कार्यालय शिष्टाचार से कोई फर्क नहीं पड़ता. उसे तो अपनी मनमानी करनी होती है और वह मंत्रीजी के दम पर ऐसा करता भी है.
यहां तक तो फिर भी सहन किया जा रहा था, लेकिन जब से नैना इस औफिस में आई है तब से मानव के लिए औफिस कंपनी गार्डन की तरह हो गया है. जितनी देर औफिस में रहता है, उसी के इर्दगिर्द मंडराता रहता है. कभी चायकौफी और लस्सी के दौर तो कभी मिठाईनमकीन और केकपेस्ट्री की दावत. स्टाफरूम को पिकनिक स्पौट बना कर रख दिया है उस ने. सामने तो कोई कुछ नहीं कहता लेकिन पीठ पीछे सभी उन दोनों को ले कर तरहतरह की अनर्गल बातें करते हैं.अजय भी अंधाबहरा नहीं है,
सब सुनता और देखता है. मन तो करता है कि अनुशासनभंग करने के नाम पर मानव को तगड़ी सजा दे लेकिन न तो उस के पास कोई पुख्ता सुबूत हैं और न ही नैना ने कभी उस की शिकायत की. ऐसे में किसी के चरित्र को निशाना बनाना खुद उसे ही भारी पड़ सकता है, इसलिए वह केवल कुढ़ कर रह जाता है.‘‘नैना, तुम अभी नई हो. अत: जितना सीख सकती हो सीख लो.
आगे तुम्हें बहुत काम आएगा. बेकार इधरउधर की बातों में समय बरबाद करना तुम्हारे भविष्य के लिए ठीक नहीं,’’ कह कर अजय नैना को इशारों ही इशारों मेंमानव से दूर रहने की सलाह देता था, लेकिननैना भी जैसे मानव के रंग में रंगी जा रही थी. वैसे भी सरकारी दफ्तरों में काम करना किसे सुहाता है. अधिकतर लोग अपनी हाजिरी पक्की करने की जुगाड़ में ही रहते हैं. नैना भी उसी राह चल रही थी.नैना और मानव का फ्लर्ट पूरे परवान पर था. नोक झोंक और छेड़छाड़ से ले कर रूठना और मनाना तक. कभी चोरीछिपे तो कभी खुलेआम हो रहा था.
‘कोई क्या कहेगा’ जैसी बंदिश तो आज की पीढ़ी मानती ही कहां है. औफिस में सब इस रासलीला को देख कर अपनी आंखें सेंक रहे थे. केवल अजय ही था जो ये सब अपनी आंखों के नीचे होते देख कर सहन नहीं कर पा रहा था.‘‘मानव और तुम्हें ले कर स्टाफ में तरहतरह की बातें हो रही हैं. मैं तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं कि औफिस का डेकोरम बना कर रखो. मु झे यहां कोई तमाशा नहीं चाहिए जो करना है, औफिसके बाद करो,’’ कहते हुए एक दिन अजय ने नैना को चेताया.‘‘क्या करूं सर, मैं तो नई हूं और जूनियर भी. मु झे तो सब की सुननी पड़ती है. चाहे मानव हो या आप,’’ नैना ने मासूमियत से जवाब दिया.अजय हालांकि उस के सब इशारे और तंज सम झ रहा था, लेकिन फिलहाल उस के पास कोई पुख्ता सुबूत नहीं था, इसलिए वह भी कुछ न कर पाने के लिए मजबूर था.
सबकुछ इसी तरह हौलेहौले चल रहा था कि कल अचानक औफिस में हलचल मच गई. सचिवालय से आई एक मेल ने स्टाफ को पंख लगा दिए. जिस ने भी इसे पढ़ा वह उड़ाउड़ा जा रहा था. दरअसल, विभाग की तरफ से अगले सप्ताह जयपुर में 5 दिन का एक ट्रेनिंग कार्यक्रम संचालित होने वाला है जिस में हरेक संभाग से3 से 4 कर्मचारियों को भाग लेने का प्रस्ताव है. स्वयं के अतिरिक्त 3 अन्य कर्मचारियों के नाम अजय को प्रस्तावित करने हैं.
अब चूंकि सारा कार्यक्रम सरकारी खर्चे पर हो रहा है तो कोई क्यों नहीं जाना चाहेगा. आम के आम और गुठलियों के दाम. 5 दिन शाही खानापीना और स्टार होटल में रहना. बचे हुए समय में जयपुर घूमना. भला ऐसे स्वर्णिम अवसर को कौन नहीं लपकना चाहेगा.मानव के लिए मंत्रीजी के यहां से फोन आ गया था, इसलिए एक नाम तो तए हो ही गया. नैना ने अपने नये होने का हवाला देते हुए काम सीखने की इच्छा जाहिर की और इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लिया.
नैना का नाम जोड़ने में खुद अजय का भी स्वार्थ था. इस बहाने वह नैना और मानव के बीच की कैमिस्ट्री नजदीक से सम झ पाएगा. चौथे नाम के लिए अजय ने अपने चमचे मयंक का नाम चुना और लिस्ट सचिवालय मेल कर दी.चूंकि अजमेर से जयपुर की दूरी अधिक नहीं है. इसलिए चारों ने एकसाथ अजय की कार से जाना तय किया. अजय गाड़ी चला रहा था और मयंक उस के साथ आगे बैठा था. पीछे की सीट पर मानव और नैना बैठे थे. गाड़ी तेज रफ्तार से चल रही थी.
अजय का ध्यान बीचबीच में शीशे की तरफ जा रहा था जहां से वह मानव और नैना के मचलते हुए हाथ साफसाफ देख पा रहा था. उन की हरकतें उसे बेचैन कर रही थीं. उस का मन तो कर रहा था कि दोनों को वहीं हाई वे पर ही उतार दे, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि नौकरी तो उस की भी अभी बहुत बाकी थी और वह नदी में रह कर मगरमच्छ से बैर मोल लेना तो अफोर्ड नहीं कर सकता था. सभी कर्मचारियों के रुकने की व्यवस्था आरटीडीसी के होटल तीज में की गई थी और ट्विन शेयरिंग के आधार पर कमरे दिए गए थे.
प्रशिक्षणार्थियों में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम थी और विषम भी.संयोग से नैना को जो कमरा अलौट हुआ उस में कोई अन्य महिला नहीं थी. वे चारों सुबह लगभग 9 बजे जयपुर पहुंचे. चैकइन करने के बाद नाश्ता और फिर 10 बजे से 1 बजे तक प्रशिक्षण. 1 बजे से 2 बजे तक लंच और फिर5 बजे तक क्लास. इस बीच 11 और 4 बजे चाय की भी व्यवस्था थी. शेष 4 दिन भी यही व्यवस्था रिपीट होनी थी.शाम को 5 बजे के बाद मानव और नैना गुलाबी नगरी घूमने निकल गए. मानव उसे राजमंदिर सिनेमा में फिल्म दिखाने ले गयाऔर उस के बाद उसे स्पैशल तिवाड़ी की चाट खिलाई.
रात 10 बजे दोनों खिलखिलाते हुएट्रेनिंग सैंटर आए. हालांकि लोगों की निगाहों से बचने के लिए वे दोनों आगेपीछे अंदर घुसे थे लेकिन अजय ने उन्हें एकसाथ कैब से उतरते देख लिया था. मानव की हठधर्मी पर उस का खून उबल रहा था, लेकिन क्या करता. इस तरह एकसाथ घूमने से कुछ भी साबित नहीं होता. वह खुद भी तो जोधपुर वाली रिया मैडम के साथ शाम को कौफी पीने जीटी गया ही था.अगले 3 दिन फिर यही हुआ. कभी कनक गार्डन तो कभी हवामहल. कभी मोती डूंगरी तो कभी अजमेरी गेट. दोनों साथसाथ घूम रहे थे. आज ट्रेनिंग का अंतिम दिन था.
क्लास के बाद मानव और नैना शहर घूमने निकल गए. अजय भी मयंक के साथ छोटी चौपड़ की तरफ निकल गया. छोटी चौपड़ के बाद वे लोग जौहरी बाजार की तरफ आ गए. अजय अपनी पत्नी के लिए साड़ी पसंद करने लगा. खानेपीने के बाद जबवे लोग वापस ट्रेनिंग सैंटर पहुंचेतो नैना के कमरे की लाइट जली हुई थी.‘‘आज ये दोनों जल्दी वापस आ गए लगते हैं,’’
अजय ने कहा.‘‘कौन जाने, गए ही नहीं हों. जब मनोरंजन का साधन घर में ही मौजूद हो तो फिर बाहर क्यों जाना?’’ मयंक ने बाईं आंख दबा कर चुटकी लेते हुए कहा तो अजय की छठी इंद्री जाग उठी. वह नैना के कमरे की तरफ चल दिया. वह यह जानने के लिए जिज्ञासु हो उठा कि बंद कमरे में मानव है या नहीं और यदि है तो उन के बीच क्या चल रहा है. बिना अधिक विचार किए उस ने दरवाजा नोक कर दिया. कुछ पल की खामोशी के बाद अंदर हलचल हुई.
शायद खिड़की का पल्ला भी थोड़ा सा खुला था और उस में से किसी ने बाहर झांका भी था. चुप्पी के बाद अचानक भीतर से अजय को कुछ आवाजें भी सुनाई दीं.‘‘यह क्या कर रहे हो, छोड़ो मु झे,’’ नैना गुस्से में कह रही थी.‘‘नैना… क्या हुआ नैना. कौन है तुम्हारे साथ?’’
कहते हुए अजय जोरजोर से दरवाजा पीटने लगा. तभी दरवाजा खुला और मानव फुफकारता हुआ बाहर लपका.‘‘क्या हुआ? क्या किया मानव ने,’’ अजय ने पूछा. हालांकि उसे यह भी दोनों की कोई चाल ही लग रही थी, लेकिन फिर भी वह अनभिज्ञ बना रहा. नैना सिसक रही थी.‘‘हुआ तो कुछ नहीं लेकिन हो बहुत कुछ जाता. मैं तो इसे अपना अच्छा दोस्त सम झ रही थी लेकिन यह तो,’’
नैना ने शेष शब्द आंसुओं के हवाले कर दिए.‘‘तुम फिक्र मत करो. मानव के खिलाफ अपने विभाग की विशाखा कमेटी में शिकायत दर्ज करवाओ. मैं तुम्हारे पक्ष में गवाही दूंगा,’’ कहते हुए अजय ने उसे सांत्वना दी.‘‘रहने दीजिए सर, होनाजाना तो कुछ है नहीं बेकार ही मेरी बदनामी हो जाएगी,’’ नैना ने अपनेआप को संयय करते हुए कहा.‘‘अरे, यह क्या बात हुई भला.
महिलाएं शिकायत नहीं करतीं तभी तो पुरुषों के हौसले बढ़ते हैं. फिर महिलाएं ही सरकार से शिकायत भी करती हैं कि सरकार कुछ करती नहीं. सरकार को क्या सपने आते हैं कि फलांफलां के साथ कहीं कुछ गलत हुआ है. तुम शिकायत करो बल्कि अभी इसी वक्त मु झे लिख कर दो, मैं मानव के खिलाफ कार्यवाही करता हूं,’’ अजय ने नैना को शिकायत करने के लिए राजी किया. क्या करती नैना. इस समय उसे अपनी इज्जत बचानी प्राथमिकता लग रही थी.चूंकि अजय के सामने यह सारी घटना घटित हुई थी, इसलिए इसे झुठलाया भी नहीं जा सकता था. बात नैना की इज्जत पर बन आई थी. यदि अजय की बात नहीं मानती तो सीधेसीधे दोषी करार दे दी जाती. खुद की इज्जत बचाने की खातिर उसे अजय की बात माननी ही पड़ी.
उस ने एक सादे पन्ने पर मानव के खिलाफ यौन दुराचार की शिकायत लिख कर अजय को थमा दी. शिकायत में पूरी घटना का विवरण लिखा था. अजय ने पढ़ा लिखा था, ‘‘मैं और मानव अच्छे दोस्त हैं. हम कई बार आउटिंग पर जाते हैं. मानव के साथ मैं बहुत सहज महसूस करती हूं और सुरक्षित भी. आज शाम क्लास के बाद मैं ने मानव के साथ रामनिवास बाग घूमने का कार्यक्रम बनाया. मानव मेरे कमरे में आया तब मैं बाल बना रही थी.अचानक न जाने इसे क्या हुआ और यह मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. मैं ने इसे रोकने की बहुत कोशिश की.
हमारी हाथापाई भी हुई लेकिन इस पर तो जैसे भूत सवार था. तभी अजय सर वहां आ गए. इन्होंने दरवाजा खटखटाया तो मानव घबरा गया और इस ने मु झे छोड़ दिया. आज तो मैं बच गई लेकिन मु झे डर है कि मानव भविष्य में मु झे परेशान कर सकता है. हो सकता है कि अपनी बेइज्जती का बदला ही लेने की कोशिश करे. मु झे सुरक्षा दिलवाने की व्यवस्था करवाई जाए.’’ अजय ने नैना की शिकायत विभाग की विशाखा कमेटी को मेल कर दी.
4 दिन बाद विशाखा कमेटी की बैठक हुई. नैना, मानव और अजय. तीनों को इस बैठक में बुलाया गया. नैना ने जो बात शिकायती पत्र में लिखी थी वही कमेटी के सामने दोहरा दी. अजय ने चश्मदीद गवाह का काम किया. अब तो शक की कोई गुंजाइश ही कहां बची थी.मानव ने लाख सफाई दी. कहा भी कि नैना और उस के बीच रिश्ता दोस्ती से कहीं बढ़ कर है. जो कुछ हो रहा था, वह दोनों की सहमति से ही हो रहा था लेकिन अचानक अजय सर के आने से नैना ने यू टर्न ले लिया और चिल्लाने लगी. मगर उस की दलील किसी ने नहीं सुनी.
कमेटी ने अपने निर्णय में मानव को दोषी करार दिया और उसे निलंबित करने की अनुशंसा कर के अपनी रिपोर्ट विभाग सचिव को भेज दी.विशाखा कमेटी के इस निर्णय को स्वीकार करते हुए सचिव ने मानव को निलंबित कर दिया और उस का मुख्यालय राज्य के अंतिम छोर यानी जैसलमेर कर दिया गया. मानव कसमसा कर रह गया लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी.
उस ने नैना और अजय के खिलाफ अदालत में जाना तय कर लिया.हालांकि कोर्ट और वकीलों से उस का कोई वास्ता नहीं रहा था, लेकिन जब मंजिल तय हो जाए तो फिर रास्ते तलाश करना बड़ी बात नहीं. 1-2 मित्रों से सलाह करने के बाद उस ने एडवोकेट सुहानी से मिलना तय किया. सुहानी एक कम उम्र की नई वकील है और 2 साल पहले ही उस ने अपनी प्रैक्टिस शुरू की है.
अधिक अनुभव तो उसे नहीं है, लेकिन मानव जानता था कि अपनी साख बनाने के लिए वह उस के मुकदमे पर बहुत मेहनत करेगी. मानव सुहानी से मिला और सुहानी ने उस की पूरी बात सुनने के बाद यह मुकदमा अपने हाथ लेना स्वीकार कर लिया.‘‘आप का कहना है कि नैना और आप के बीच का रिश्ता दोस्ती से कहीं ज्यादा है. क्या आप इसे साबित कर सकते हैं.
मसलन नैना की कोई स्वीकारोक्ति जैसे लव लैटर या कोई मेल या फिर व्हाट्सऐप चैट आदि?’’ सुहानी ने मानव से पूछा.‘‘लैटर तो आजकल लिखता ही कौन है. मेल उस ने कभी नहीं किया. हां, व्हाट्सऐप पर कई बार हमारी रोमांटिक चैट होती थी, लेकिन नैना अपने मैसेज डिलीट कर देती थी. मैं ने भी अपने मोबाइल में उस की कोई चैट नहीं रखी क्योंकि यह खुद मेरे लिए भी नुकसानदेह हो सकता था,’’ मानव ने कहा.‘‘यानी आप दोनों को ही एकदूसरे पर भरोसा नहीं था.
यानी प्यार भी नहीं था. भरोसा प्रेम की पहली शर्त होती है मानव,’’ कहते हुए सुहानी मुसकराई तो मानव थोड़ा शर्मिंदा हुआ.‘‘खैर. यह आप का व्यक्तिगत मामला है. फिलहाल तो हमें यह साबित करना है कि आप के खिलाफ लगाया गया नैना का आरोप बेबुनियाद है और उस ने ऐसी शिकायत या तो किसी दबाव में आ कर की है या फिर यह आप को बदनाम करने की कोई साजिश है,’’ सुहानी ने मानव को नौर्मल करने की मंशा से कहा. मानव को लग रहा था मानो सुहानी से मिल कर उस की आधी समस्या तो हल हो ही गई. शेष आधी सुहानी हल कर ही देगी.
सुहानी ने मानव से नैना द्वारा की गई शिकायत से ले कर विशाखा कमेटी के निर्णय और उस के बाद मानव के निलंबन तक के सभी आवश्यक दस्तावेज देखे.‘‘मानव, यह तो अच्छी बात हुई कि कमेटी ने आप के केस को आपराधिक नहीं माना वरना आईपीसी की धारा 354 के अंतर्गत यह मामला पुलिस में जाता और हमारी समस्याएं बढ़ जातीं. आप को जेल भी हो सकती थी और जुरमाना भी लेकिन अब यह केस सर्विस रूल के अंतर्गत आएगा और हम आप के निलंबन के खिलाफ सीधे विभाग के सचिव को अपील करेंगे,’’ सुहानी ने दस्तावेजों का अवलोकन करने केबाद कहा.
‘‘मानव, नैना के खिलाफ हमारे पास कोई ठोस सुबूत नहीं है. क्या तुम्हारे फोन में कौल्स की औटो रिकौर्डिंग होती है? मतलब उस रात की बात करें तो क्या नैना ने तुम्हें ऐसा कुछ फोन पर कहा था जिस का दावा तुम कर रहे हो? मसलन, कमरे में इनवाइट करना या कोई रोमांटिक संकेत आदि. यदि ऐसा कुछ मिले तो शायद हम अपने पक्ष में कुछ साबित कर पाएं,’’
सुहानी ने मानवसे कहा.‘‘उस ने मु झे कमरे में आने के लिए कहा तो था, लेकिन फोन पर नहीं बल्कि व्हाट्सएंप कौल पर. जब भी इस तरह की कोई बात उसे फोन पर करनी होती थी तब वह फोन काट कर व्हाट्सऐप कौल किया करती थी. जहां तक मेरी जानकारी है,
व्हाट्सऐप कौल रिकौर्ड नहीं होती,’’ मानव ने अपनी शंका जाहिर की.सुहानी ने मानव की व्हाट्सऐप कौल्सकी हिस्ट्री देखी. उस में नैना की बहुत सी इनकमिंग कौल्स थीं. उस दिन भी उस ने मानव को कौल किया था. समय भी वही था जो मानव ने बताया था. ‘‘कोई बात नहीं, हम नैना के साथ एक गेम खेलेंगे. तुम उसे कौल लगाओ,’’ सुहानी ने मुसकराते हुए कहा.सुहानी की योजना के अनुसार मानव ने नैना को कौल लगाई. जैसाकि मानव ने कहा था, नैना ने उस का फोन काट दिया और व्हाट्सऐप कौल लगाई.‘‘नैना, तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं निर्दोष हूं.
तुम ने खुद ही मु झे कमरे में बुलाया और खुद ही मेरे खिलाफ शिकायत भी कर दी. तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रही हो?’’ मानवने कहा.‘‘तुम मेरे मामले में निर्दोष हो सकते हो लेकिन मेरी बहन के मामले में नहीं. याद करो,3 साल पहले तुमने मेरी बहन से सिर्फ इसलिए सगाई करने से इनकार कर दिया था क्योंकि तुम्हारी सरकारी नौकरी लग गई थी और शादी के बाजार में तुम्हारी कीमत बढ़ गई थी,’’ नैना ने कड़वाहट से कहा. स्पीकर पर रखे फोन पर सुहानी यह सारी बात सुन रही थी. नैना का जवाब सुन कर उस ने आश्चर्य से मानव की तरफ देखा. खुद मानव भी असमंजस में था कि नैना आखिर किस घटना का जिक्र कर रही है.
‘‘बहुत जल्दी भूल गए सपना को,’’ नैनाने कहा तो मानव को याद आया. सपना केसाथ उस के रिश्ते की बात चल रही थी. बात लगभग तय ही थी, लेकिन सगाई होने से 3 दिन पहले ही उस की प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम आया और उस का चयन लेखाधिकारी के पदपर हो गया.
उस की नौकरी की खबर सुनते ही उस के पिता सपना के साथ रिश्ते को ले कर आनाकानी करने लगे और अंतत: वह रिश्ताटूट गया.‘‘तुम से रिश्ता टूटने के बाद सपना की सगाई कहीं नहीं हो रही थी. ऐसे में वह गहरे अवसाद में चली गई. उस ने कभी शादी न करने का फैसला तक ले लिया. उसे सामान्य करने में हमें क्या कुछ नहीं करना पड़ा. तभी मैं ने निश्चय किया था कि जिस सरकारी नौकरी का तुम दंभ पाले बैठे हो, उस से तो मैं एक दिन तुम्हें निकलवा कर रहूंगी,
नैना ने कहा तो मानव वर्तमान में आया.मगर अब तक सुहानी उस बातचीत को अपने मोबाइल में रिकौर्ड कर चुकी थी. हालांकि वह जानती थी कि यह कोई ठोस सुबूत नहीं है, लेकिन ‘न मामा से तो काना मामा ही भला’ क्या पता यही रिकौर्डिंग मानव के पक्ष को मजबूत बना दे. सुहानी ने मानव की तरफ से सचिव के नाम एक अपील लिखी.‘‘नैना ने जो आरोप मु झ पर लगाए हैं उन्हें साबित करने के लिए इन्होंने कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया. नैना यह साबित नहीं कर पाई कि मेरा कोई भी कृत्य आईपीसी की किसी भी धारा के अंतर्गत आपराधिक श्रेणी में आता है.
पूरे प्रकरण में चश्मदीद गवाह कोई भी नहीं है.‘‘केवल संदेह के आधार पर मु झे दोषी करार दिया जाना कौन से कानून में लिखा है?बंद कमरे में 2 वयस्कों के बीच जो कुछ भीहोता है वह सहमति से हुआ है या जबरदस्ती से, इसे साबित करने के लिए किसी के पास कोई सुबूत नहीं होता. ऐसे मामलों में कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं होता तो फिर आप मु झे किस आधार पर दोषी मान सकते हैं, माना कि मैंअपने पक्ष में सुबूत नहीं जुटा पाया तो क्या नैना ने मेरे गुनाह का कोई सुबूत पेश किया? नहीं न. सिर्फ अजय सर की गवाही को आधार बना कर मु झे दोषी साबित नहीं किया जा सकता.
वैसे भी अजय तो कमरे के बाहर ही थे न. भीतर क्या हो रहा है और किन परिस्थितियों में हो रहा है इस बात का उन्होंने केवल अंदाजा ही लगाया है, देखा तो कुछ भी नहीं. मु झे यह कहते हुए बहुत अफसोस होता है कि बहुत सी पढ़ीलिखी और जागरूक महिलाएं कानून द्वारा दिए गए अधिकारों का गलत इस्तेमाल करती हैं. नैना भी उन्हीं में से एक है.
‘‘मेरे पास इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि नैना ने मु झ से पुरानी खुंदस निकालने के लिए मेरे प्रति दुर्भावना रखते हुए एक सोचीसम झी चाल के तहत मु झे फंसाया है. न केवल मुझे बल्कि उस ने अजय का भी जो उस से सहानुभूति रखते थे गलत इस्तेमाल किया है.
अपनी दलील के पक्ष में मेरे पास एक औडियो रिकौर्डिंग है जिस में नैना खुद अपनी साजिश को स्वीकार रही है.’’ सुहानी ने अपनी अपील के अंत में समस्त बचाव पक्ष के साक्ष्यों को संलग्न कर के मानव को बरी करने का निवेदन सचिव महोदय से किया और मानव तथा नैना की बातचीत की रिकौर्डिंग को एक पैन ड्राइव में डाल कर मानव के साथ सचिवालय पहुंच गई.रिकौर्डिंग सुनने के बाद सचिव महोदय के सामने सारी तसवीर साफ हो गई. उन्होंने 4 दिन बाद नैना को अपने कार्यालय में उपस्थित होनेके लिए तलब किया. मानव को भी बुलाया गया था.
नैना अपना दांव उलटा पड़ते देख पहले ही घबरा गई थी. जैसे ही सचिव महोदय ने सख्त शब्दों में बात करनी शुरू की, नैना फूटफूट कर रोने लगी और उस ने अपनी गलती स्वीकारकर के उन से और मानव से लिखित में माफी मांग ली. सचिव महोदय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि मानव के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है. उन्होंने परिवीक्षा अधिनियम के तहत संदेह का लाभ देते मानव का निलंबन आदेश निरस्त कर दिया तथा निलंबन काल में रोके हुए उस के वेतन एवं अन्य भत्ते भी बहाल करने का आदेश जारी कर दिया.
नैना को भविष्य में अपने आचरण में सुधार करने की चेतावनी देते हुए उस का ट्रांसफर जिला मुख्यालय से पास के कसबे में कर दिया गया. आदेश मिलते ही मानव ने सब से पहले सुहानी को फोन कर के यह खुशखबरी दी.‘‘थैंक्यू सुहानीजी. मेरी मदद करने के लिए,’’ मानव ने कृतार्थ होते हुए कहा.‘‘बधाई हो आप को. आप ने मु झे अपना वकील चुना इस नाते मैं ने जो कुछ किया वह मेरा पेशा था. लेकिन फिर भी मु झे अफसोस है मानव कि हम महिलाएं अपने उपयोग के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग करने से नहीं हिचकतींऔर अपने स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए पुरुषों को झूठे केस में फंस देती हैं. मैं पूरी महिलाजाति की तरफ से आप से माफी मांगती हूं,’’
सुहानी ने कहा.एक बार फिर से सुहानी को धन्यवाद देता हुआ मानव वापसी के लिए बस स्टैंड की तरफ चल दिया.‘वैसे नैना की प्रतिक्रिया भी जायज ही थी. गलती मेरी भी कम नहीं थी. मैं भी अपने पिता की बातों में आ कर सरकारी नौकरी पर दंभ कर बैठा था. हम ने भी तो सपना के साथ अन्याय किया ही था. सजा तो मु झे भी मिलनी चाहिए,’ मानव के मन में 1-1 कर विचारों की तरंगें उठगिर रही थीं. उस ने फैसला कर लिया कि वह नैना और सपना से माफी मांगेगा. यदि नैना राजी हुई तो उसे अपना कर अपनी भूल को सुधारने का प्रयास भी करेगा.विशाखा कमेटी, वकील, जिरहबहस और जांचपड़ताल के इस जंजाल से बाहर निकल कर अब उसे अपने पांव बहुत हलके, बेहद शांत और सफर आसान लग रहा था.
