Social Story :  घर के संस्कार और वातावरण आदमी की प्रकृति को इस हद तक प्रभावित करते हैं कि वह प्रकृति के विपरीत असामान्य आचरण करने लगता है. यहां तक कि उस के परिवार के सदस्यों को भी उस में अधूरेपन का एहसास होने लगता है. क्या सलीम भी इसी का शिकार था?

वह सन्न सी बैठी सलीम को घूर रही थी और सलीम दूसरे पलंग पर आराम से लेटा खर्राटे ले रहा था. कुछ ही क्षणों में उस के विचारों और सपनों की शृंखला कांच के समान टूट कर बिखर गई. कुछ देर पहले जब वह सुहाग की सेज पर बैठी सलीम की राह देख रही थी, उस के हृदय की स्थिति भी अजीब सी थी.

उस के मस्तिष्क में तरहतरह के विचार घूम रहे थे. उन बातों के बारे में सोचसोच कर उस के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं. आने वाले क्षणों की कल्पना से उसे पसीना छूट रहा था. उसी समय दरवाजा एक हलकी सी आवाज के साथ खुला और उस के दिल की धड़कनों की गति और भी तेज हो गई.

वह कुछ और सिकुड़ कर बैठ गई और स्वयं पर नियंत्रण पाने का प्रयत्न करती सोचने लगी कि किस तरह सलीम से बातें करे या उस की बातों का उत्तर दे.

कमरे में मौन छाया रहा. उस का सिर  झुका हुआ था. जब उस भयंकर मौन से उस का मन घबरा गया तो उस ने धीरे से नजरें उठा कर चोर नजरों से सलीम की ओर देखा.

वह अपने कपड़े बदल रहा था. कपड़े बदल कर वह सामने वाले पलंग पर बैठ गया.

‘‘इस लंबे समय में तुम काफी थक गई होगी?’’ सलीम ने धीरे से पूछा.

‘‘जी…’’ उस ने धीरे से जवाब दिया.

‘‘मैं भी काफी थक गया हूं,’’ कहते हुए वह पलंग पर लेट गया और बोला, ‘‘तुम भी सो जाओ.’’

उसे इस बात की कतई आशा नहीं थी कि सलीम उस से ये शब्द कहेगा और उससे ऐसा व्यवहार करेगा. बहुत देर तक तो वह कुछ भी नहीं सम झ सकी, अपनी ही उधेड़बुन में व्यस्त रही. फिर जब उस ने सलीम को देखा तो उस के मस्तिष्क को एक  झटका लगा. वह सो गया था. सलीम ऐसा होगा, यह तो उस ने सपने में भी नहीं सोचा था.

उसे  झुंझलालट सी हो रही थी. फिर जब वह गंभीरता से सोचने लगी तो उसे अपनी मूर्खता पर क्रोध आया कि वह भी कितनी मूर्ख है, क्याक्या सोच रही है. सलीम की बात भी तो सच है. 2 दिन के विवाह के  झमेलों और फिर लंबी यात्रा ने उसे भी तो काफी थका दिया था. सलीम सचमुच थक गया होगा. ऐसी स्थिति में वह उस से क्या बातें कर सकता था? इन बातों के लिए तो जिंदगी पड़ी है. यह सोच कर वह पलंग पर लेट गई. थोड़ी देर यों ही लेटी रही. फिर थकान के कारण उसे जल्द ही नींद आ गई.

सवेरे आंख खुली तो सूरज काफी चढ़ आया था. वह घबरा कर उठी. उसे स्वयं पर लज्जा आने लगी कि यह आ इतनी देर कैसे नींद आती रही.

सलीम का पलंग खाली था. शायद वह काफी पहले उठ चुका था. लज्जित सी वह कमरे के बाहर आई.

‘‘नींद पूरी हो गई, बेटी?’’ अम्मी से सामना होने पर उन्होंने पूछा.

‘‘हां, अम्मी,’’ उस ने सिर  झुका कर जवाब दिया.

‘‘अच्छा देखो, मेरी किट्टी की 1-2 मैंबर्स आई हैं, उन से मिल लो.’’

वह दूसरे कमरे में आई तो उस ने देखा कि उस की उम्र की कई लड़कियां उस की राह देख रही हैं. उन्होंने उसे घेर लिया.

‘‘वाह, खालाजान सलीम ने क्या बहू चुनी.’’

‘‘अरे, चांद का टुकड़ा नजर आती है.’’

‘‘अच्छी पढ़ीलिखी भी है.’’

‘‘सुनाइए, भाभीजी, रात कैसी बीती? सलीम ने ज्यादा तंग तो नहीं किया?’’

‘‘अरे, तंग क्या करेंगे, मु झे तो लगता है उन्होेंने भाभी को छुआ भी नहीं,’’ एक शोख लड़की बोल उठी.

‘‘क्या मतलब?’’ सभी चौंक कर उसे देखने लगीं.

‘‘सुबूत हाजिर है,’’ उस ने उस का हाथ पकड़ लिया.

‘‘इन हाथों में सुहाग की ये कच्ची चंपई चूडि़यां बिलकुल साबूत हैं. अरे, ये तो जरा सा धक्का लगते ही टूट जाती हैं. अगर सलीम इन्हें छूते तो ये यों कैसे रहतीं?’’

‘‘बेचारी निकहत,’’ एक बोली, ‘‘हम तो सम झते थे सलीम हम से बात करते हुए इसलिए घबराते हैं कि शायद वे हम से शरमाते होंगे परंतु उन्होंने तो हमारी तरह निकहत की तरफ भी

आंख उठा कर नहीं देखा. हम तो खैर उन की बहनेंभाभियां हैं, परंतु निकहत तो उन की पत्नी है.’’

‘‘देखेंगे भी कैसे?’’ एक चंचल पड़ोसिन बोल उठी.

‘‘हमारे खयाल से तो गली के मर्द सलीम के बारे में जो कहते हैं वह सच ही है कि वे अधूरे हैं.’’

‘‘उफ, अब यह अधूरेपन का महारोग भाभी जैसी अप्सरा को लग गया.’’

यह सुनते ही उस के मस्तिष्क में धमाके होने लगे. उस के होंठों से चीख निकलतेनिकलते रह गई.

‘‘लड़कियों, अब उसे और अधिक तंग मत करो,’’ इस बीच अम्मी आ गईं, ‘‘उसे बाथ के लिए जाने दो.’’

‘‘बाथ…’’ 1-2 लड़कियां जोर से हंस पड़ीं, ‘‘अरे खालाजान, आज या आज के बाद भाभी को कभी बाशरूम की जरूरत नहीं पड़ेगी,’’ कहती हुई वे भाग गईं.

उन के कहकहे उस के मस्तिष्क में हथौड़े की तरह बरसने लगे. उस ने अम्मी की तरफ देखा. उन का चेहरा भी पीला था जैसे उन की कोई चोरी पकड़ ली गई हो. यह रिश्ता उस के पिता के एक जानकार ने कराया था. सलीम से 2 बार मिली भी थी पर आसपास सब लोग थे. सलीम चुप ही रहे थे. उसे थोड़ा सरप्राइज हुआ पर ऐसे लड़के होते हैं  जो लड़कियों के साथ बात करने से घबराते हैं, वह जानती थी.

उस ने आंखों से निकलने के लिए बेताब आंसुओं को किसी तरह रोका और दूसरे कमरे में आ गई. उस के मस्तिष्क में रात की घटनाएं और उन पड़ोसियों की बातें घूम रही थीं. रात की घटनाओं को तो संयोग सम झ कर उस ने अपना मन बहला लिया परंतु इन बातों को वह कैसे  झुठलाए, उस की सम झ में नहीं आ रहा था.

क्या सचमुच विवाह के साथ ही उसे अधूरापन जैसे महारोग लग गया है? यह सोच कर वह कांप उठी.

फिर किट्टी की कुछ और औरतें आ गईं. वे उस से बातें करने लगीं. उन के साथ बातों में वह सारी बातें भूल गई. परंतु जब वह किसी को खुसुरफुसुर करते पाती या किसी स्त्री की बात में व्यंग्य का अनुभव करती तो बेचैन हो उठती. वह एक अजीब सी दुविधा में फंसी हुई थी. दिन तो गुजर गया परंतु अगली रात फिर एक कड़ी परीक्षा लेने के लिए आ गई. वह पलंग पर बैठी सलीम की प्रतीक्षा करने लगी. सलीम बहुत देर से आया. उस की राह देखतेदेखते वह उकता गई थी.

आने के बाद सलीम बजाय उस के पास आने के पलंग पर लेट गया, ‘‘तुम अभी तक सोई नहीं? सो जाओ,’’ कह कर उस ने करवट बदल ली.

बिना कोई उत्तर दिए वह उठ कर उस के पास चली गई. उस की आहट सुन कर सलीम चौंक उठा. फिर उसे इतना समीप पा कर वह घबरा गया.

‘‘तुम… तुम यहां क्यों आई हो?’’ वह बोला.

‘‘क्यों? मैं आप की पत्नी हूं. मैं यहां नहीं आ सकती?’’

‘‘नहीं,’’ वह भयभीत स्वर में बोला, ‘‘मु झे लड़कियों को करीब पा कर घबराहट होने लगती है. पसीना छूटने लगता है.’’

उस ने सलीम की ओर देखा, सचमुच उस का चेहरा भय से पीला पड़ गया था और माथे पर पसीने की बूंदें उभर आई थीं. वह जैसे ही उस के समीप गई, वह चीख उठा, ‘‘मेरे करीब मत आओ, निकहत, मु झे घबराहट होती है.’’

यह सुनते ही उस के मस्तिष्क को एक आघात लगा. आंखों से आंसू छलक पड़े. वह तेजी से मुड़ी और पलंग पर गिर कर सिसकने लगी. उस की सिसकियां कमरे के करुणामय मौन को भंग कर रही थीं और आंसू तकिए के गिलाफ को गीला कर रहे थे. दूसरी ओर सलीम बेखबर सोया हुआ था. उस की आंखों से नींद कोसों दूर थी. मां और बहन की वीसियों कौल व्हाट्सऐप पर आ चुकी थीं पर वह उठा नहीं रही थी. न जाने कब मन का गुबार निकल जाए और शादी के 4 दिन में ही हंगामा मच जाए.

दूसरे दिन सो कर उठी तो वह बहुत उदास थी. वह स्वयं को टूटा हुआ अनुभव कर रही थी. अम्मी भी उस से कतरा रही थीं, जिस से साफ सिद्ध हो रहा था जैसे वह महसूस कर रही हैं कि उन्होंने उसे अपने घर की बहू बना कर उस से बहुत बड़ी ज्यादती की है. इस अपराधबोध के कारण वे उस का सामना नहीं कर पा रही हैं. वे अपने काम में व्यस्त हो गईं.

दोपहर में जो स्त्री उस से मिलने के लिए आई उसे देख कर उस का चेहरा खुशी से खिल उठा, ‘‘अरे शब्बो, तू यहां है?’’ उस ने पूछा.

‘‘और तू यहां कैसे?’’

शब्बो आश्चर्य से बोली, ‘‘क्या सलीम का विवाह तेरे साथ हुआ है?’’

‘‘हां,’’ उस ने धीरे से जवाब दिया. उस का उत्तर सुन कर शब्बो सन्नाटे में आ गई. बहुत देर तक वह कुछ नहीं बोली. फिर बोली, ‘‘निक्की, विवाह से पहले लड़के को अच्छी तरह देख तो लिया होता.’’

‘‘अच्छी तरह देखा था, 2 बार साथ बैठ कर बात भी की थी,’’ वह दर्द भरे स्वर में बोली.

‘‘फिर इतनी बड़ी गलती क्यों की?’’

‘‘मु झे तो ऐसा अनुभव हो रहा था मैं कोई गलती नहीं कर रही हूं,’’ वह बोली, ‘‘परंतु तुम ही बताओ क्या सचमुच यह मेरी गलती है? मैं बहुत परेशान हूं.’’

‘‘मैं सलीम के बारे में अधिक नहीं जानती,’’ शब्बो बोली, ‘‘क्योंकि कुछ दिनों पहले ही उन की बदली होने से यहां रहने आई हूं.

परंतु कालोनी के लोगों और औरतों का विचार है कि सलीम अधूरा है. वह लड़कियों से बात करते हुए घबराता है. मैं ने खुद कभी उसे किसी लड़की से बात करते नहीं देखा. कालोनी में

यह बात गरम है कि सलीम का विवाह एक बड़ी ही सुंदर लड़की से हुआ है. बेचारी का जीवन नष्ट हो गया. उस बेचारी को देखने ही मैं यहां आई थी परंतु मैं ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह तू होगी.’’

शब्बो की बात सुन कर उस का मन भर आया और वह सिसकसिसक कर रोने लगी.

शब्बो ने उसे सांत्वना दी और सम झाया, ‘‘जो हो गया अब उस भूल का प्रायश्चित्त इसी तरह किया जा सकता है कि तुम इसी समय मायके वापस चली जाओ और सलीम से तलाक ले लो. यदि तुम यहां रही तो तुम्हें मानसिक यातना का तो सामना करना ही पड़ेगा, साथ ही लोग तुम्हारा मजाक भी उड़ाएंगे.’’

उसे क्या करना चाहिए, उस ने मन में तय कर लिया.

रात जैसे ही सलीम आया, उस ने सख्त स्वर में एक ही सवाल पूछा, ‘‘सचसच बताइए क्या आप सचमुच अधूरे हैं?’’

यह सुनते ही सलीम का चेहरा पीला पड़ गया. वह आश्चर्य से उसे देखने लगा. फिर धीरे से बोला, ‘‘नहीं.’’

सलीम की बात सुनते ही उस की सारी उत्तेजना गायब हो गई. उस ने कोमल स्वर में पूछा, ‘‘आप ने कभी खुद को किसी डाक्टर को दिखाया?’’

‘‘हां,’’ सलीम बोला.

‘‘फिर?’’

‘‘जांचने के बाद उस ने कहा था कि मु झ में कोई कमी नहीं है,’’ सलीम बोला, ‘‘लोग जब मेरे बारे में ऐसी बातें उड़ाते थे तो मैं भी जीवन से निराश हो गया था परंतु डाक्टर की रिपोर्ट के बाद मेरे मस्तिष्क में समाई हीनभावना दूर हो गई. उस के बाद मैं ने कभी लोगों की परवाह नहीं की. वे बकते हैं तो बकें.’’

उसे सलीम की बात सुन कर एक संतोष सा मिला. उसे लगा, उस की कई दिनों की उल झन एक क्षण में दूर हो गई.

‘‘ठीक है,’’ वह बोली, ‘‘कल मु झे उस डाक्टर के पास ले चलिए.’’

‘‘अच्छा,’’ सलीम ने धीरे से उत्तर दिया.

दूसरे दिन सलीम उसे उस डाक्टर के पास ले गया. डाक्टर से कह कर उस ने कुछ देर के लिए सलीम को बाहर भेज दिया. वह डाक्टर से एकांत में कुछ बातें करना चाहती थी.

‘‘डाक्टर साहब, आप ने उन का कभी मैडिकल चैकअप किया था?’’ उस ने पूछा.

‘‘हां,’’ डाक्टर बोला, ‘‘अचानक लोगों की बातों से उन के मन में यह बात बैठ गई थी कि वे अधूरे हैं. उस समय मैं ने सलीम साहब का चैकअप किया था. चैकअप के बाद मु झे उन में कोई कमी अनुभव नहीं हुई. तब मैं ने उन्हें विश्वास दिलाया था कि वे संपूर्ण पुरुष हैं. अधूरे का विचार अपने दिमाग से निकाल दें. उन्होंने मेरी बात मान भी ली थी. उस के बाद वे फिर कभी मेरे पास नहीं आए.’’

‘‘डाक्टर साहब, आप विश्वास से कह रहे हैं कि उन में कोई कमी नहीं है?’’ उस ने पूछा.

‘‘ झूठ बोलने की कोई जरूरत ही नहीं,’’ डाक्टर बोला, ‘‘उन में कोई कमी नहीं है.’’

‘‘फिर उन्होंने अभी तक मु झे छुआ क्यों नहीं?’’ वह उत्तेजित हो कर बोली,

‘‘डाक्टर साहब, अभी हमारे विवाह को कुछ ही दिन हुए हैं परंतु उन्होंने मेरे साथ जो व्यवहार किया है और मैं ने लोगों से जो कुछ सुना है उस से तो लगता है कि मैं ने उन से विवाह कर के बहुत

बड़ी गलती कर दी है. विवाह मेरी पसंद से हुआ है. वे विवाह से पहले मेरे घर आए थे. मैं ने उन

से ज्यादा बातें तो नहीं कीं परंतु उन्हें अच्छी तरह देखा था. वे थोड़े दुबले हैं परंतु मु झे लगा था कि वह मु झे एक पति के सारे सुख दे सकते हैं. उनका कारोबार भी अच्छा है. परंतु यहां अजीब मुसीबत में फंस गई हूं. जी चाहता है कि आत्महत्या कर लूं. मेरी एक सहेली ने तो कहा कि मैं तलाक ले लूं.’’

‘‘मैं आप की स्थिति को सम झ रहा हूं,’’ डाक्टर बोला, ‘‘यह एक मनोवैज्ञानिक केस है. सलीम साहब का आप से दूरदूर रहना, आप के समीप जाते ही उन्हें पसीना छूटना या लड़कियों से कतराने का कारण एक ही हो सकता है और वे हैं उन के संस्कार, वह वातावरण जिस में उन की परवरिश हुई.’’

वह चुपचाप डाक्टर का चेहरा ताकती रही.

‘‘कुछ घरों में लड़कों को बहुत दबा कर रखा जाता है. कुछ घरों में लड़कों को मसजिदों, मौलाओं, दरगाहों पर ज्यादा ले जाया जाता है. उन्हें लड़कियों से घुलनेमिलने नहीं दिया जाता, दूरदूर रखा जाता है. फिर जैसेजैसे उम्र बढ़ती है लड़कियां उन के लिए हौआ बन जाती हैं और लोग उस लड़के को अधूरा सम झने लगते हैं और इस तरह की समस्या पैदा हो जाती है. बस, यही सलीम के साथ भी हुआ है.’’

‘‘इस का कोई हल?’’ उस ने पूछा.

‘‘आसान सा है,’’ डाक्टर बोला, ‘‘पहले उन के दिमाग से यह बात निकालनी है कि लड़कियां हौआ होती हैं. अभी तक लड़कियां अधिक देर तक उन के साथ

एकांत में नहीं रहीं. बस आप ज्यादा से ज्यादा उन के साथ एकांत में रहने का प्रयत्न करें. उन से दोस्तों की तरह बातें करें. आप को एकांत में देखने के वे आदी हो जाएंगे तो धीरेधीरे उन के समीप जाइए. आप देखेंगी कि उन्हें घबराहट नहीं हो रही है, पसीना नहीं छूट रहा है और

फिर आप अनुभव करेंगी कि वह रोग भी दूर हो गया है.’’

‘‘बहुतबहुत शुक्रिया, डाक्टर साहब,’’ वह उठती हुई बोली, ‘‘आप ने मेरी एक  बहुत बड़ी उल झन दूर कर दी.’’

वापसी में उस ने अनुभव किया कि सलीम उस से दूरदूर चल रहा है और चुप भी है. उस खामोशी को तोड़ने के लिए वह उस से बातें करने लगी.

शुरूशुरू में सलीम उस की बात सुन कर चुप रहता था, फिर धीरेधीरे उस की बातों के जवाब देने लगा.

रात को सलीम सोने के लिए अपने पलंग पर लेटा तो उस ने उसे जल्दी सोने नहीं दिया, उस से बातें और हंसीमजाक करती रही.

सलीम भी उस का साथ दे रहा था. उस के साथ दिल खोल कर बातें कर रहा था, उस की बातों पर जोरजोर से हंस रहा था.

फिर सलीम कोई हंसी की बात कहता तो वह भी जोर से हंस पड़ती. उसे हंसता देख कर सलीम खुश होता.

दिन में भी वह सलीम के चारों तरफ ज्यादातर मंडराती रही. वजहबेवजह उस से बातें करती या छेड़ती.

सलीम का सारा संकोच खत्म हो गया था और वह भी उस से दोस्तों की तरह खुले मन से बात करने लगा था.

रात वह सलीम के पलंग पर उस के समीप जा बैठी और और उस से बातें करती रही.

सलीम के चेहरे पर घबराहट का कोई चिह्न नहीं उभरा, न माथे पर पसीने की बूंदें आईं.

बातें करतेकरते वह धीरे से सलीम के शरीर को छू लेती तो वह चौंक पड़ता परंतु वह तुरंत जल्दी से हाथ हटा कर इस तरह बातों में उस घटना को उड़ा देती कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

उस के बाद वह सलीम के अधिकाधिक समीप रहने लगी. कभी अपने शरीर का स्पर्श सलीम के शरीर से कर देती तो कभी बातों ही बातों में अपने शरीर का सारा बो झ सलीम पर डाल देती.

एक रात अचानक सलीम ने उसे बांहों में भर लिया. उस के शरीर में खुशी की लहरें

दौड़ने लगीं.

‘‘यह क्या कर रहे हो? छोड़ो न…’’ वह उस की बांहों में धीरे से कसमसाई.

‘‘क्यों छोड़ूं?’’ सलीम चंचल दृष्टि से उस की आंखों में  झांकते हुए बोला, ‘‘मैं कोई पराया हूं? तुम्हारा पति हूं पति.’’

‘‘कोई आ जाएगा?’’

‘‘रात के 12 बजे इस बंद कमरे में कौन आ सकता है? अम्मी तो आराम से खर्राटे ले रही होंगी,’’ कहते हुए उस ने उस के होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

उस के शरीर में बिजलियां सी दौड़ने लगीं. उस ने भी सलीम को अपनी बांहों में भर लिया. और उस रात के बाद सलीम उस के लिए ‘पूर्ण’ बन गया. उसी रात उस का अधूरापन हमेशा के लिए खत्म हो गया.

अगले दिन उस ने सब से पहले उन सारी कौल्स के जवाब दिए जिन्हें वह टाल रही थी. फिर प्रैगनैंसी पिल्स भी औनलाइन और्डर कर दीं शब्बों के पते पर.

राइटर: मो. मुबीन

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