लेखक- रेनू सैनी
Suspense Story in Hindi: ‘‘यह जो लीगल डिपार्टमैंट में नया मैनेजर आया है बहुत ही सिंपल और स्वीट है. किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता.’’
‘‘तुम्हें सिंपल और स्वीट लगता होगा. मु झे तो अजीब सा लगता है. कान देखे हैं उस के, खरगोश की तरह हैं बड़ेबड़े. एकदम नजरें झुका कर चलता है, चाहे किसी से टक्कर ही क्यों न हो जाएप्त एकदम नशे में धुत लगता है,’’ टीना अरुणा की बात पर बोली.
ऐक्चुअली वह मेरी ब्रांच का मैनेजर है तो मु झे ज्यादा अच्छी तरह पता है. तुम्हारा उस से अब तक सामना नहीं हुआ न, इसलिए ऐसा बोल रही हो. जब जान जाओगी तो तुम भी उस की फैन बन जाओगी.’’
‘‘नो, नेवर मैं और उस नशेड़ी की फैन,’’ टीना हंसते हुए बोली.
टीना बहुत ही मुखर, आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामिनी थी. 33 की आयु हो गई थी लेकिन उसे अभी तक अपने अनुरूप कोई वर ही नहीं मिला था. टीना का कहना था कि उसे विवाह के लिए एक ऐसा पुरुष चाहिए जो उसे सम झे, उस के विचारों का सम्मान करे, अपनी सारी बातें मेरे साथ शेयर करे. वह पढ़ालिखा होना चाहिए और हां उसे सिगरेट, शराब आदि की लत बिलकुल नहीं होनी चाहिए.
यह सुन कर अरुणा कहती, ‘‘ऐसे तो उम्र निकल जाएगी. कहीं न कहीं तो सम झौता करना ही होगा. शादियां हमेशा सम झौते से ही चला करती हैं बल्कि मैं तो यह कहूंगी कि शादी कुछ और नहीं केवल जिम्मेदारी और सम झौते का ही दूसरा नाम है. अब मु झे ही देखो न मेरा पति बहुत स्मोक करता है. जरा सा कुछ बोल दूं तो खाने को दौड़ता है. मैं उस के साथ बच्चों के कारण केवल सम झौता ही तो कर रही हूं. बच्चों से ले कर घर की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है. उसे सिर्फ अपनी आरामतलबी से मतलब है. जानता है कि सब वक्त पर मिल ही जाएगा.’’
‘‘यार, तुम्हारी बातें सुन कर सम झ नहीं आता कि क्या पुरुष ऐसे ही होते हैं गैरजिम्मेदार. अगर ऐसा ही है तो फिल्मों एवं साहित्य में जो दोनों की कंपैटीबिलिटी पर बातें होती हैं, वह सब क्या है?
‘‘वह सब सिर्फ फिल्मों एवं साहित्य में देखने को मिलता है. लोग कहते हैं कि स्त्री को सम झना मुश्किल होता है लेकिन अपनी जिंदगी के 50 वसंत देखने के बाद मु झे लगता है कि पुरुष को सम झना बड़ा मुश्किल है. वह बहुत ही रहस्यवादी होता है. साहित्य में रहस्यवाद के साथ एक लैसन पुरुष रहस्यवाद का भी जुड़ जाना चाहिए,’’ और फिर अरुणा एवं टीना दोनों ही जोरजोर से हंसने लगीं. दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी. अरुणा मनोविज्ञान की छात्रा रह चुकी थी, इसलिए अकसर टीना को ऐसी बातें बताती रहती थी. अरुणा लीगल डिपार्टमैंट देखती थी.
एक दिन काम करते हुए ज्यादा टाइम हो गया. उस दिन अरुणा छुट्टी पर थी. काम ज्यादा था. टीना ने जल्दी से अपना पर्स उठाया और औफिस से बाहर निकल गई. बाहर आ कर देखा तो पाया कि बारिश हो रही है. बंद औफिस में और काम के चलते उसे जरा भी अनुमान नहीं था कि बारिश इतनी तेज हो रही होगी. मैट्रो स्टेशन दूर था. तेज बारिश के कारण यातायात के वाहनों की आवाजाही भी कम थी.
अचानक एक गाड़ी उस के पास आ कर रुकी. गाड़ी में माया बैठी हुई थीं. वे कंपनी के लीगल मामलों को देखने के लिए आती थीं. टीना को बहुत अच्छी तरह जानती थीं. माया को देख कर टीना चहक कर बोली, ‘‘हैलो मैम. कैसे हैं आप?’’
‘‘अच्छी हूं. पहले गाड़ी के अंदर आ जाओ. तुम्हें तुम्हारे घर के आसपास छोड़ दूंगी. रात भी हो रही है और तेज बारिश भी.’’
कुछ दूर चलते ही माया की गाड़ी खराब हो गई. तभी अचानक एक गाड़ी पास से गुजरी. कुछ दूर जा कर वह रुक गई. देखा तो गाड़ी में लीगल डिपार्टमैंट के मैनेजर राजन बैठे हुए थे. उन्हें देख कर माया बोली, ‘‘सर, प्लीज आप टीना को मैट्रो या आसपास छोड़ दीजिए. मेरी गाड़ी खराब हो गई है, मैं कुछ करती हूं.’’
राजन बोले, ‘‘मैं तुम्हें भी छोड़ देता हूं. गाड़ी यहीं आसपास पार्क कर देते हैं.’’
लेकिन माया ने मना कर दिया. टीना जल्दी से राजन की गाड़ी में बैठ
गई. पता नहीं क्यों उसे राजन सचमुच अजीब सा लगता था. उस ने सीट बैल्ट लगाई और आगे की ओर देखने लगी. कुछ देर की चुप्पी के बाद टीना ने ही खामोशी तोड़ी और बोली, ‘‘सर, आप को प्रौब्लम हो गई होगी न?’’
‘‘कैसी प्रौब्लम?’’ राजन ने उस की आंखों में देखते हुए कहा.
‘‘मतलब, आप ने ऐसे मु झे लिफ्ट दी… आप का समय खराब हुआ. मेरा तो बिलकुल मन नहीं था आप के साथ बैठने का. लेकिन क्या करूं? माया मैम ने आप पर बहुत दबाव डाला कि आप मु झे आसपास छोड़ दें. यह बारिश भी तो रुक ही नहीं रही. पता नहीं आज क्या हो गया है मौसम को.’’
‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. वैसे आप ने मु झे अभी तक यह नहीं बताया कि आप को छोड़ना कहां है?’’
यह सुनते ही टीना अपने बड़बोलेपन पर शर्मिंदा होते हुए बोली, ‘‘मु झे आप आसपास किसी भी मैट्रो स्टेशन पर उतार दीजिए.’’
‘‘किसी भी मैट्रो स्टेशन पर मतलब? अरे कौन सी लाइन पर उतारना है? राजीव चौक
ठीक रहेगा?’’
‘‘जी… जी बिलकुल आप वहीं उतार दीजिए.’’
राजीव चौक उतरने पर टीना ने राजन को थैंक्यू कहा और मैट्रो की ओर चल पड़ी.
अगले दिन टीना ने अरुणा को बताया कि कल पहली बार वह राजन के साथ लिफ्ट ले कर आई. 1 सप्ताह बाद ही कंपनी में नए सीईओ आ गए. सीईओ आनंद. आनंद ने अपने जूनियर अंनत कुमार से सभी ब्रांचों के काम की जांच करने के लिए कहा. यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट 1 सप्ताह के अंदर उन्हें सौंप दी जाए. अनंत कुमार बेहद आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी थे लेकिन बहुत ही खड़ूस थे. सभी ब्रांचों के सीनियर अपनीअपनी ब्रांच के कार्य की रिपोर्ट ले कर अनंत कुमार का इंतजार कर रहे थे.
अरुणा, टीना, राजन, अशोक कुमार, माया, अंगद और रोहित हाल में बैठे थे. जब काफी देर तक अनंत नहीं आए तो अशोक कुमार ने मौन को भंग करते हुए कहा, ‘‘यार बहुत देर हो गई. ये हम से बड़े सीनियर हमारे समय की कीमत ही नहीं सम झते. इन के कहे अनुसार बैठो और खड़े रहो. अच्छी गुलामी है.’’
‘‘बिलकुल सही कहा. यार, यह अनंत कुमार जितना खड़ूस है, उस से ज्यादा तो यह नया सरदार सीईओ आनंद है. घंटों खड़ा रखेगा, बैठने को भी नहीं बोलता. खड़ेखड़े पैर जम जाते हैं पर बंदा नहीं पिघलता,’’ रोहित बोला.
राजन ने कहा, ‘‘अरे पिघलने की बात तो छोड़ो सब से बड़ी बात तो यह है कि इन के सामने सिर झुका कर हर बात माननी पड़ती है. अभी परसों की बात है. हम सभी सीनियर को उन्होंने ग्रुप मीटिंग के लिए अपने कमरे में बुला लिया. चपरासी वहां पर ब्रैडपकौड़े और गरमगरम चाय रख गया. बरसात के मौसम में ब्रैडपकौड़े और चाय देख कर मेरा मन किया कि तुरंत झपट पड़ूं.
तभी मेरी नजर आनंद पर पड़ी जो आंखें बंद कर कुछ बुदबुदा रहे थे. अब मैं भी यहां
नया हूं. मु झे लगा ऐसा कुछ रिवाज होता होगा. मैं ने भी अपनी आंखें बंद कर लीं. कुछ देर बाद उन्होंने भी अपनी आंखें खोलीं और मैं ने भी. उन्होंने ब्रैडपकौड़े का आधा पीस उठा कर उसे एक कोने में रख दिया, मैं ने भी ऐसा ही किया. फिर उन्होंने उस ब्रैडपकौड़े को देख कर हाथ जोड़े, मैं ने भी ऐसा ही किया. मैं सम झ नहीं पा रहा था कि वे ब्रैडपकौड़े की पूजा कर रहे थे या किसी ईश्वर की.’’
इस पर अशोक कुमार बोले और तब उन्होंने तुम्हें गुस्से से कहा, ‘‘क्या तुम भी उसी गुरु को मानते हो, जिसे मैं?’’
इस पर मैं ने बोला तो वे गुस्से से आंखें दिखा कर बोले, ‘‘फिर खाते क्यों नहीं? यह क्या नाटक कर रहे हो? सच मु झे तो सम झ ही नहीं आया कि मैं क्या करूं’’?
‘‘सर, आप को मालूम नहीं कि उस समय हम ने कितनी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी हुई थी,’’ रोहित बोला.
इस प्रसंग को सुन कर सभी जोरजोर से खिलखिला कर हंस पड़े. राजन के द्वारा इस प्रसंग को सुनने के बाद टीना हैरानी से कुछ देर तक
उसे देखती रही. वह तो उसे भी एकदम खड़ूस मानती थी.
अब कई बार टीना राजन को गुड मौर्निंग कर दिया करती थी. कभीकभी छोटीमोटी बात भी हो जाती थी. एक दिन किसी केस के सिलसिले में दोनों को साथ जाना पड़ा. उस दिन दोनों ने लंच भी एक रैस्टोरैंट में किया. उस दौरान दोनों को ही एकदूसरे के बारे में बहुत कुछ पता चला.
‘‘आप की फैमिली में कौनकौन हैं?’’
‘‘मैं, मेरी पत्नी और 1 बेटी.’’
‘‘मु झे देख कर तो आप को आइडिया लग ही गया होगा कि अभी तक अनमैरिड हूं.’’
2-3 बार कार्यवश मिलने के दौरान ही राजन और टीना एकदूसरे से बहुत खुल गए थे. दोनों की उम्र में बहुत अंतर था. लेकिन फिर भी दोस्ती ऐसी बनती जा रही थी जैसी शायद ही किसी की होती हो. पहले टीना अरुणा को राजन से हुई सारी बातें बता दिया करती थी लेकिन अब वह अरुणा को सब नहीं बताती थी. धीरेधीरे टीना और राजन अपने जीवन की सारी बातें एकदूसरे से करने लगे थे.यह भी कहा जा सकता है कि भावनात्मक रूप से दोनों एकदूसरे की आदत बन गए थे. टीना राजन के सीनियर होने पर भी उसे राजू कह कर बुलाती थी.
राजन एक बेहद ईमानदार अधिकारी था. वह स्पष्टवादी था. अपनी पत्नी व बेटी की बातें भी टीना को बताता था. उस ने इस बात को भी स्वीकार किया था कि ईमानदार अधिकारी होने के कारण उस की पत्नी से कई बार अनबन भी हो जाती है. पत्नी सीमा उसे इस बात का भी दिनरात ताना देती है कि 50 साल की आयु तक उस ने अभी तक मकान भी नहीं बनाया.
एक दिन आनंद ने पूरे औफिस के लिए राजकचौड़ी का और्डर दिया. सभी ने बेहद स्वाद ले कर राजकचौड़ी का आनंद उठाया. अचानक टीना राजन के कमरे में गई तो देखा कि राजकचौड़ी बिलकुल पैक पड़ी हुई थी.
‘‘क्या हुआ सर आप ने राजकचौड़ी क्यो नहीं खाई?’’ टीना ने पूछा.
‘‘अरे खाता तो तब जब मु झे पता चले कि इसे कैसे मिक्स करूं? इस के साथ दही, चटनी पता नहीं क्याक्या अंटशंट है.’’
‘‘आप ने आज तक राजकचौड़ी नहीं खाई?’’ टीना अपनी बड़ीबड़ी आंखें करते हुए बोली.
‘‘हां तो नहीं खाई. अब खाने की इतनी चीजें हैं. क्या तुम ने कभी सांप का अचार खाया है? नहीं न. पर मैं तुम्हारी तरह आंखें बड़ी कर के नहीं बोल रहा कि अरे टीना तुम ने कभी सांप नहीं खाया.’’
इस पर टीना जोरजोर से हंस पड़ी. फिर उस ने आनंद को बताया कि राजकचौड़ी कैसे खाई जाती है? इस तरह टीना राजन को बहुत सी बातें बताती थी. राजन उस की बातें मानता भी था.कई बार वह सोचता भी था कि आखिर उस से इतनी कम उम्र की लड़की इतनी सम झदार कैसे है?
एक दिन टीना औफिस में काम कर रही थी. अचानक राजन का मोबाइल बजा. उस दिन राजन छुट्टी पर था. जैसे ही उस ने फोन उठाया वैसे ही उसे रोने की आवाज सुनाई दी. टीना भौचक्की सी फोन पर बोली, ‘‘हैलो राजू… क्या हुआ? आर यू ओके? बताओ क्या हुआ?’’
टीना के बहुत बार पूछने पर राजन बोला, ‘‘आज मेरे पिताजी की पुण्यतिथि है. मैं उन से बहुत अटैच था. सारे भाईबहनों में मैं ही उन का प्यारा था. आज उन को गए 5 साल हो गए हैं. आज भी मैं उन्हें बहुत मिस करता हूं. टीना मु झे अपने फादर की बहुत कमी खलती है.’’
टीना ने राजन को सम झाया कि जीवन और मृत्यु तो कुदरत के हाथ में है. हम सभी उस के निर्णय के सामने लाचार हो जाते हैं.मैं हूं न. चिंता मत करो. सब ठीक होगा. इस के बाद से तो राजन टीना के साथ बेहद जुड़ाव महसूस करने लगा था.
अंतर्मुखी राजन टीना के साथ बेहद बर्हिमुखी था. एक दिन उस ने इस बात को भी स्वीकार कर लिया कि पहले दिन ही उस की नजर टीना पर पड़ गई थी. वह उस की मासूमियत देख कर उसे देखता रह गया था. यह सुन कर टीना का हैरानी से मुंह खुला का खुला रह गया. वह बोली, ‘‘अच्छा मु झे लगता था कि तुम अपनी नजरें ऐसे नीची कर लेते हो जैसे कभी किसी महिला की शक्ल ही न देखी हो.’’
इस पर राजन ने कहा, ‘‘पुरुष अकसर ऐसे ही होते हैं.वे अंदर से कुछ और होते हैं और बाहर से कुछ ओर.’’
‘‘और तुम कैसे हो?’’ टीना ने पूछा.
राजन तपाक से बोला, ‘‘तुम मु झे पुरुष मानती कहां हो? तुम तो मु झे थर्ड पार्टी कहती हो.’’
‘‘हां वह तो तुम हो. तुम लल्लू तो हो यार यह तो मानना पड़ेगा. वह तो मेरे जैसी स्मार्ट लड़की ने तुम्हें थोड़ाबहुत ठीक कर दिया है. सच कहूं यार मैं ने भी आज से पहले किसी पुरुष को इतना जोरजोर से रोते नहीं देखा जैसे तुम रोते हो. अब तो मेरे सामने तुम बहुत बार रो चुके हो.’’
‘‘हां तो क्या पुरुष इंसान नहीं होते क्या? हद है यार. भई बाकी का मु झे पता नहीं लेकिन मैं तो बहुत इमोशनल हूं.’’
एक दिन टीना बोली, ‘‘सुनो यार, जब हम इतने अच्छे दोस्त हैं तो फिर तुम मु झे सीमा से भी मिलवा दो न. मु झे नहीं लगता कि उसे हमारी दोस्ती पर कोई एतराज होगा.’’
यह सुनते ही राजन बोला, ‘‘नहींनहीं तुम्हें मालूम नहीं टीना. औरतें बहुत शक्की होती हैं, फिर तुम जैसी खूबसूरत लड़की को देख कर तो उसे पक्का संदेह हो जाएगा कि चक्कर कुछ और है.’’
‘‘अरे ऐसा नहीं होगा. फिर यह कैसे संभव है? खुद ही बताओ मेरी और तुम्हारी उम्र में इतना अंतर है. दूसरा मैं तुम्हें कभी इस नजर से नहीं देखती.’’
राजन बोला, ‘‘कभी बाद में देखेंगे. अभी तो नहीं.’’
‘‘टीना तुम शादी क्यों नहीं कर लेती? जिंदगी में सभी को एकदूसरे का सहारा चाहिए होता है. एक दिन राजन बोला.
‘‘राजू, यार मैं किस से शादी करूं तुम ही बताओ? ऐरेगैरे लड़के मु झे पसंद नहीं. फिर मैं विवाह के बाद कई लोगों के इतने सारे लड़ाई झगड़े और अलगाव देख चुकी हूं कि मेरा इस बंधन में बंधने को मन ही नहीं करता. वैसे भी यह कहां लिखा है कि सहारा केवल पति दे सकता है दोस्त नहीं.’’
यह सुन राजन हंसते हुए बोला, ‘‘हां बात भी सही है. यार तुम ऐसे लौजिक निकालती है कि दूसरे को जवाब ही नहीं सू झता.’’
टीना और राजन एकदूसरे से फिल्म से ले कर सैक्स तक पर घंटों बिना रुके बातें कर सकते थे. दोनों की ट्यूनिंग मिल गई थी. दोनों ने अपने बहुत सारे सीक्रेट्स भी एकदूसरे को बताए थे. दोनों अकसर पुरानी फिल्मों और गानों पर चर्चा करते थे. ऐसा कुछ नहीं था जो दोनों को एकदूसरे के बारे में पता न हो. दोनों एकदूसरे का साथ भी देते थे. दोनों में अधिकारी एवं जूनियर जैसी कोई बात नहीं थी. औफिस में भी उन दोनों की दोस्ती को ले कर खुसरफुसर होती थी लेकिन दोनों ही इस पर ध्यान नहीं देते थे.
टीना अकसर जिक्र होने पर कहती भी थी कि लोगों की गंदी सोच का हम कुछ नहीं कर सकते. यह कहां लिखा है कि एक मर्द और औरत अच्छे दोस्त नहीं हो सकते? हम ही उन्हें सिर्फ एक रिश्ते में देखना चाहते हैं. दूसरा कोई रिश्ता समाज को मर्द और औरत का पसंद ही नहीं आता. इस के लिए समाज को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है मु झे नहीं.
एक दिन राजन ने टीना को सीमा से भी मिलवा दिया. सीमा बड़े ही सहज तरीके से मिली. टीना को सीमा बहुत ही सुल झी हुई महिला लगी.
राजन ने कहा, ‘‘टीना सीमा तुम्हारी बहुत तारीफ कर रही थी. तुम्हारी खूबसूरती और साथ ही तुम्हारे मिलनसार स्वभाव की भी.’’
टीना बोली, ‘‘मु झे भी सीमा का स्वभाव बहुत पसंद आया.’’
4 साल बाद राजन की वहां से ट्रांसफर हो गई. राजन और टीना दोनों को ही एकदूसरे से बिछुड़ने का बहुत दुख था. राजन मुंबई जा रहा था. राजन के मुंबई जाने के कुछ दिनों तक टीना को अजीब सा लगा. लेकिन फोन पर उन की रोज बातें होती थी.
दोनों फोन पर बातें कर के अकसर कई लोगों का मजाक भी उड़ाया करते थे. दोनों ही इस बात को मानते थे कि दुनिया में किसी की भी दोस्ती ऐसी नहीं होगी जैसी उन दोनों की है. बिलकुल अलग, अद्भुत. राजन अकसर उसे पुरुषों की सोच से भी अवगत कराता रहता था.
टीना बोलती, ‘‘यार, तुम खुद पुरुष होकर मेरे से पुरुषों की बुराई कैसे कर लेते हो?’’
इस पर राजन कहता, ‘‘इसलिए ताकि तुम यह सम झ जाओ कि पुरुष और उन की नीयत कैसी होती है? जिंदगी में कभी भी किसी पुरुष के झांसे में मत आना.ये बहुत अवसरवादी होते हैं. इन बातों से अवगत करा कर मैं तुम्हें मजबूत बनाना चाहता हूं ताकि तुम भविष्य में किसी पुरुष की मीठी बातों में न आओ. तुम ने मु झे कभी मीठी बात करते देखा है? हम आपस में लड़ते झगड़ते भी हैं लेकिन फिर एक हो जाते हैं क्योंकि दिल से एकदूसरे की इज्जत करते हैं.’’
टीना को इस बात में सचाई नजर आती थी.
राजन अकसर फोन पर टीना से मजाक में कहता, ‘‘यह तो पक्का है कि मैं तुम से पहले मरूंगा. लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम मेरे अंतिम संस्कार में जरूर शामिल होओ. तुम मेरे दिल के बहुत करीब हो, शायद मेरी पत्नी सीमा से भी ज्यादा. मु झे पता है यह गलत है. लेकिन यही सच है. तुम से मैं भावनात्मक रूप से बहुत गहराई तक जुड़ गया हूं,’’ यह कह कर राजन रोने लगा.
टीना ने उसे चुप कराया और कहा, ‘‘मैं जानती हूं कि हम दोनों एकदूसरे से बहुत अटैच हैं पर यह बताओ कि तुम्हारे मरने की खबर मु झ तक पहुंचेगी कैसे? तुम बताने आ जाना. मैं तुरंत चली आऊंगी.’’
यह सुन कर राजन रोतेरोते हंसने लगा.
अचानक कुछ दिनों से राजन फोन नहीं उठा रहा था. टीना की सम झ में नहीं आ रहा था कि वह किस से पूछे? कहां जाए? उस के पास सीमा का नम्बर भी नहीं था. आखिर एक दिन उस ने संदेश बौक्स में लिखा, ‘‘कहां हो.’’ पर कई दिन बीत जाने पर भी कोई जवाब नहीं आया. कहीं राजन ने अपना फोन बदल तो नहीं लिया. यह सोच कर टीना ने भी अब उस नंबर पर फोन करना बंद कर दिया. उसे सम झ ही नहीं आ रहा था कि वह राजन जो छोटी से छोटी बात उसे बताए बिना नहीं रहता था, अचानक कहां चला गया? कहां गुम हो गया?
किस रहस्य की परत में खो गया?
एक दिन रात के समय टीना टीवी देख रही थी. अचानक उस के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया. टीना ने जैसे ही फोन उठाया तो आवाज आई, ‘‘तुम टीना हो?’’
‘‘जी,’’ टीना बोली.
तुरंत दूसर ओर से आवाज आई, ‘‘मैं सीमा बोल रही हूं. राजन इज नो मोर.’’
यह सुनते ही टीना के हाथ से मोबाइल गिरतेगिरते बचा. फिर बोली, ‘‘मैम… यह कब हुआ? कैसे हुआ?’’
सीमा रोते हुए बोली, ‘‘उन के शरीर के सारे अंगों ने धीरेधीरे काम करना बंद कर दिया था. वे बहुत ड्रिंक करते थे. तुम्हारा अकसर घर में जिक्र करते थे. बातबात में तुम्हारी तारीफ. मु झे चिढ़ होने लगी थी. अपने से इतनी छोटी उम्र की लड़की के साथ वे ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर कर रहे थे.’’
यह सुन कर टीना को बहुत धक्का पहुंचा. वह खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘मैम, प्लीज आप ऐसा क्यों कह रही हैं? हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं था. वे तो बहुत अच्छे इंसान थे. मैं ने आज तक उन के जैसा ईमानदार पुरुष इस दुनिया में नहीं देखा.’’
सीमा फोन पर रोंआसी आवाज में हंसते हुए बोली, ‘‘पुरुष ईमानदार? अगर वे
इतने ही ईमानदार होते तो अपने जवान दिव्यांग बेटे का कुछ तो खयाल करते. वे तो हमेशा तुम्हारे पक्ष को संबल बनाने में लगे रहे. हमेशा हम से ज्यादा उन्हें तुम्हारी चिंता रहती थी कि टीना अकेले सब कैसे संभालेगी? उन का दिव्यांग बेटा अकेले सब कैसे संभालेगा, यह उन्हें चिंता कभी नहीं हुई.’’
इस पर टीना के मुंह से निकल गया, ‘‘उन्होंने तो कहा था कि उन की केवल 1 बेटी है. बेटे के बारे में उन्होंने कभी नहीं बताया.’’
सीमा बोली, ‘‘कैसे बताते? उन्हें दिव्यांग बेटे से मिलाते हुए शर्म जो आती थी. अरे अब बेटा दिव्यांग है इस में मेरा या उस का या फिर किसी का क्या दोष?’’
‘‘घर में कोई दिन ऐसा नहीं था जिस दिन हमारी लड़ाई न होती हो. आज मैं तनाव में तुम्हें फोन कर रही हूं. मन तो कर रहा है कि तुम से मिल कर 2-4 झापड़ मारूं. आखिर तुम ने उन पर ऐसा क्या जादू कर दिया था जो सिर्फ वे तुम्हारी ही बातें करते थे. घरपरिवार की उन्हें कोई चिंता ही न थी. जवान बेटी के सामने बाप ऐसी हरकतें करेगा तो बेटी को कैसा महसूस होगा.’’
टीना जड़वत हो कर यह सब सुन रही थी कि तभी उसे फोन पर दूसरी महिला का
स्वर सुनाई दिया. वह बोली, ‘‘मैं उन की बेटी हूं. मु झे बड़ी शर्म आती है कि तुम ने एक औरत हो कर दूसरी औरत का घर खराब कर दिया. वे तुम्हारे साथ इतने मित्रवत कैसे हो सकते हैं? हमें आज तक यह सम झ नहीं आता,’’ कह कर उस ने फोन पटक दिया.
फोन कटने के बाद टीना बहुत देर तक शून्यचित्त सी खड़ी रही. उसे सम झ ही नहीं आ रहा था कि ये सब क्या था? क्या वाकई राजन ईमानदार पुरुष थे या फिर यहां अरुणा की रहस्यवाद पुरुष वाली बात सार्थक हो गई थी.जो भी हो लेकिन यह तो स्पष्ट था कि इस प्रकरण पर से परदा सिर्फ राजन उठा सकता था. अफसोस कि राजन अब जिंदा नहीं था.
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