Suspense Story: राशि और भुवन पतिपत्नी हैं. आज से 4 साल पहले दोनों ने प्रेम विवाह किया था. राशि उस समय एक नईनवेली ड्राइंग टीचर थी. वह कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों को चित्र बनाना, स्कैचिंग करना सिखाती थी. राशि ने कला विषय में एमए किया था. उस के बाद बीएड कर के उसे एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी मिल गई थी. राशि का पसंदीदा विषय कला था. इसीलिए उसे इस नौकरी में बहुत आनंद आता था. कुछ महीने बाद उस के शहर में आर्ट पर एक कार्यशाला हुई थी. वहां राशि भी गई थी.

आधुनिक कला के आयाम विषय पर, जिस में एक युवा कलाकार भुवन की मुख्य पेटिंग्स भी प्रदर्शनी में लगाई गई थीं. भुवन नामक कलाकार तब एकदम नयानया था मगर राशि भी तो कला की समझ रखती थी. भुवन की उन मनमोहक तथा एकदम अनोखी पेंटिंग्स ने राशि का दिल ही जीत लिया. उस कार्यशाला में भुवन का संवाद भी आयोजित किया था. उस के सवालजवाब भी रखे गए थे.

न जाने भुवन ने क्या जादू किया था या फिर राशि ने ही मन ही मन तय कर लिया था कि भुवन को खास दोस्त बना कर ही दम लेगी.कहते भी हैं कि जिस चीज को शिद्दत से चाहो पूरी कायनात उसे मिलाने की कोशिश में जुट जाती है. फिर क्या था. भुवन ने भी राशि की आंखों में प्यार का लहराता सागर देख लिया था. उस कार्यशाला के बाद फोन नंबर का आदानप्रदान तथा मेलमुलाकात का कुछ ही वक्त गुजरा था कि उन दोनों प्रेमपंछियों के पुलकित मन एकदूजे में रमने लगे. दोनों एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम गुजारने लगे. जल्द ही दोनों विवाह के बंधन में बंध गए. विवाह के बाद भी अपनी नौकरी करती रही राशि.

भुवन भी अपनी पेंटिंग्स के साथ शहरशहर इधरउधर, आताजाता रहा. कभी कलादीर्घा में पेंटिंग्स की प्रदर्शनी तो कभी लैक्चर, कभी स्कूलों में विशेष कक्षा रखी जाती तो कभी विविध रेडियो चैनल भुवन को आमंत्रित करते. भुवन अभी केवल 30 साल का था. मगर उस की लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी. राशि कभी भी हद से अधिक खर्च नहीं करती थी इसलिए घर चलाना इतना मुश्किल नहीं था. दिन आराम से गुजर रहे थे.

आज भुवन काफी दिनों बाद घर वापस आया. आते ही राशि ने उसे मीठी सी झिड़की दी, ‘‘ओ, कलाकार भुवन आजकल तो तुम पर कला रसिक और कला प्रेमी जान लुटा रहे हैं. बोलो है कि नहीं?’’ राशि ने तंज कसा. ‘‘तो इस में गलत क्या है? लोगों का अटैंशन मिलने पर मैं कंफर्टेबल ही महसूस करता हूं. अगर वे मुझे जानतेपहचानते हैं और प्यार भी करते हैं तो इस के लिए मैं उन का शुक्रगुजार हूं,’’ भुवन ने खुशी से कहा. ‘‘ओहो तो आगे जा कर मौडर्न कला का आइकोन बनना अच्छा लगेगा आप को मेरे पतिदेव?’’ राशि ने उसे फिर से छेड़ा. ‘‘हां, हां, क्यों नहीं? एक कलाकार को प्यार किया जाना ही तो उस के सब से बड़ा कौंलिमैंट हैं. उसे न दौलत चाहिए न पैसों का ढेर. सराहना ही उस के लिए खादपानी है,’’ भुवन ने दिल की बात जस की तस कह दी. ‘‘अहंकार सा नहीं आ गया तुम्हें भुवन?’’ कहते हुए मैं ने कौफी बना दी थी. 1 कप भुवन को थमाते हुए वह भी दिल की बात कहने से खुद को रोक न सकी. ‘‘यार राशि जानेमन, कमाल की बात करती हो. आजकल तुम भी न, बाकी रूढि़वादी और लकीर के फकीर टाइप लोगों की तरह जजमैंटल सी बन गई हो. है कि नहीं. देखो, तुम ने मेरी हर चीज और मेरे हर काम पर चाहे वह पुल और शराबखाने को एकसाथ जोड़ कर दिखाने वाली पेटिंग हो या फिर मेरे जटिल आर्ट वर्क की बात हो या फिर मेरी कला के खुले मन से कद्रदानों पर, सब एक तरह का लेबल लगाना शुरू कर दिया है तुम ने.

राशि मुझे इस तरह की टैगबाजी से एतराज है मेरी जान. मेरे खयाल से यह कोई जरूरी नहीं है कि मेरा कोई आर्ट वर्क दूसरे से हमेशा बेहतरीन ही होगा या वह हर बार मेरे ही किसी दर्शन को अभिव्यक्त करेगा.’’ अब यह तर्क सुन कर राशि चुप हो गई. भुवन ने उसे लाजवाब कर दिया था. सचमुच मार्के की बात कही थी भुवन ने. राशि को अपने बचपने पर खूब हंसी आने लगी और इसीलिए उस ने भुवन को बांहों में भर कर चूम लिया. अब जितने दिन भुवन घर पर रहा हर पल जैसे रोमांटिक ही था. राशि ने स्कूल से एक दिन का अवकाश भी ले लिया था. पूरा दिन दोनों घूमतेफिरते रहे.

शाम को घर लौट कर भुवन ने बताया कि उसे सुबह 6 बजे मुंबई के लिए निकलना होगा. ‘‘ओह, नो भुवन, इतने दिन बाद घर आए हो और जाने की बात करते हो. रहने दो न. मत जाओ. मना कर दो,’’ राशि उस से लिपट कर बच्चों की तरह मचलने लगी. ‘‘राशि सोच लो एक नया और शानदार ड्रीम लुक रिलोर्ट बन रहा है. उसी के मालिक ने देशभर से 20-21 कलाकार बुलाए हैं. वह हमारी पेंटिंग्स को वहां लाइव बनता हुआ दिखाना चाहता है और पूरी हो जाने के बाद वहीं पर उन की अच्छी से अच्छी कीमत देगा.

इसलिए 7 दिनों तक वहां रहना भी होगा. इतना समय तो लगेगा एक बेहतरीन पेंटिंग तैयार करने में. और हां हमारी बाकी पेंटिंग्स की भी प्रदर्शनी लगेगी. करोड़पतियों से कम लोग नहीं आते उस के रिजोर्ट में. सब खुल कर खर्च करते हैं. वहां लाखों मिलेंगे. तुम्हारा कार खरीदने का मन है न. अब अगर मना करती हो तो रहने देता हूं. मगर ऐसा सुनहरा मौका बारबार नहीं आता. सोच लो,’’ भुवन ने साफसाफ कहा. ‘‘ओह, भुवन तुम ने भी 2 तरह की बात कह दी. अब मैं कुछ नहीं कहती,’’ कह कर राशि ने एक बार फिर उस का आलिंगन किया और कुछ देर ऐसे ही रही. फिर भुवन इसी खामोशी को उस की मौन सहमति मान कर फटाफट से मुंबई की तैयारी में जुट गया. वह कलाकार था. जानता था कि चित्र बेचना चित्र की मार्केटिंग करना कितना जरूरी है. भुवन रात को समय पर सोया और सुबहसुबह चला भी गया.

उस के 1 घंटे के बाद 7 बजे राशि भी स्कूल चली गई. इस तरह दिन फिर से गुजरते रहे. मुंबई से भुवन काफी रुपए कमा कर लाया. राशि ने अभी कार खरीदने से मना कर दिया. राशि ने कहा कि अभी ये रुपए जमा कर दो. कुछ महीने बाद सोचेंगे. भुवन ने उस की राय मान ली. 2 दिन रुक कर भुवन कोलकाता चला गया. वहां पर उसे एक महाविद्यालय में 3 दिवसीय कला उत्सव में सहभागिता करनी थी. इधर राशि भुवन की नित नई उपलब्धियों से खुश थी. उधर एक दिन स्कूल में समय पा कर रैना ने राशि को कुछ बताया.

वह भुवन की चुगली कर रही थी. उस ने राशि से कहा, ‘‘राशि अगर कोई खूबसूरत मर्द और औरत किसी काम के लिए मतलब खास तरह के काम के लिए महीनाभर लगातार एकसाथ रहें, ऊपर से मौसम और माहौल भी दोनों ही खुशगवार हों और जोश भर देने वाले तो क्या होगा? रत्तीभर को भी कोई रोकनेटोकने वाला न हो, आजादी हो, मन के भाव उमड़ रहे हों तो जरा सा सोच कर देखो न राशि.’’ ‘‘जाहिर है, दोनों का साथ में खूब मन लगेगा. दोनों एकदूजे के करीब और करीब आते जाएंगे. है न?’’ राशि ने चट जवाब दिया. ‘‘सच राशि,सोचो भुवन और उस की बिंदास सी प्रेमिका…’’ रैना ने खुलासा किया. ‘‘ओह, नहीं, कभी नहीं,’’ राशि ने कानों को हथेली से ढंक लिया. दरअसल, यह सुन कर राशि भीतर तक कांप गई. फिर राशि खुद को संभालती और संतुलित करती हुई बोली, ‘‘रैना, आप को शायद गलतफहमी हुई है.

भुवन एक समर्पित कलाकार हैं. आज तो उन का काम बोलता है और यह बात तभी से लोग कहते आ रहे हैं, जब उन की बतौर आधुनिक कलाकार पहली पेटिंग ‘मौसम की अंगड़ाई.’ आई और उसे लगभग हर चित्र प्रदर्शनी में शामिल किया गया था. जिस ने देखी उस ने ही सराही. भुवन हर कला रसिक का दिल छूने में कामयाब रहा है. इसलिए कुछ लोग बेकार ही जलन भी करते हैं,’’ राशि एक ही सांस में बोल गई. ‘‘राशि भला मुझे किस बात की जलन. मैं न तो चित्र बनाती हूं न मैं कोई नवयुवती हूं. मैं तुम से 10 साल सीनियर हूं. मुझे तो जीवन का कुछ न कुछ अनुभव होगा. तभी तुम्हें आगाह कर रही हूं.’’ सचमुच, रैना की बात में दम था. राशि ने उस से कहा कि स्कूल की छुट्टी के बाद मेरे घर चल कर सब विस्तार से बताना. मैं चाहती हूं कि अब आप सबकुछ बता कर अपनी तसल्ली कर लो. रैना ने हामी भर दी. दोपहर के बाद राशि और रैना साथसाथ चली गईं. राशि ने पूरे रास्ते कोई बात नहीं की. खामोश रही.

राशि के घर आ कर रैना आराम से बैठी. राशि को बैठाया. फिर अपने मोबाइल में एक वीडियो दिखाया. भुवन और एक उसी की हमउम्र दोनों सोफे पर बैठ कर गपशप कर रहे थे. भुवन बातबात पर उस के गाल सहला रहा था. राशि से पूरा वीडियो नहीं देखा गया. उस की मानसिक दशा को भांप कर रैना ने वह वीडियो उसी समय बंद कर दिया. अब रैना ने राशि के कंधे पर हाथ रखा. उस की पीठ सहलाई. फिर रैना ने सब बताया, ‘‘राशि यह युवती लतिका है. यह उस ड्रीम लुक रिजोर्ट मालिक की भतीजी है. यह भुवन को पिछले 3-4 महीने से जानती है. मेरी बहन की बेटी इना ने भी वहां पर अपनी कुछ पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई थी. वह भुवन को भी जानती है. मगर उसे भुवन की इस हरकत का पता न था. इसलिए उस ने बदनाम करने के लिए नहीं, आगाह करने के लिए यह वीडियो चुपचाप बना लिया था.

पता है राशि यह लतिका शादीशुदा भी है. इस का पति कारोबारी है. वह दिनरात रुपए कमाने की जुगत में रहता है और यह लतिका बस इधरउधर ही डोलती रहती है. इना ने यह भी बताया कि हर जगह लतिका खुद को अविवाहित कहती है. ‘‘मगर राशि तुम घबराना मत. किसी अजीब सी पत्नी की तरह रोनापीटना मत करना. मैं एक उपाय बताती हूं,’’ कह कर रैना ने एक तरकीब बताई. सुन कर राशि का मन हलका हुआ. उस ने रैना को गले से लगा लिया. सचमुच रैना तो उस का भला ही चाहती है. प्लान के मुताबिक राशि ने सपन को सोशल मीडिया पर मित्र बनाया. सपन ने भी राशि की मित्रता स्वीकार कर ली.

अब राशि को जानना था कि सपन आभासी जीवन के अलावा सचमुच में कैसा है. इस के लिए राशि ने दिनरात मेहनत की. उस ने सपन का सारा कारोबार खोजबीन कर जाना और समझ. दरअसल, सपन खुद भी अपनी कंपनी का एक अवार्ड समारोह आयोजित करता था. अब राशि और रैना ने उस के अवार्ड समारोह की सारी डिटेल निकाली. यह अवार्ड सामाजिक कार्य, सांस्कृतिक कार्य, खेलकूद, आभासी जगत, पर्यावरण आदि के लिए अलगअलग कैटेगरी बना कर दिए जाते थे. उस में कुछ जूरी सदस्य भी होते थे, जिन्हें अलगअलग क्षेत्रों से चुना जाता था.वही सदस्य अवार्ड पाने वालों की सूची जारी करते थे. रैना और राशि ने भुवन का परिचय भी खूब बढ़ाचढ़ा कर अवार्ड का जूरी सदस्य बनने के लिए भेज दिया.

अब तक पूरे 2 महीने निकल गए थे. इस बीच 3 बार भुवन घर आया. मगर राशि ने उसे तनिक भी आभास नहीं होने दिया कि वह उस की बेवफाई के किस्से सुन चुकी है. राशि को भोली समझ कर भुवन भी लतिका के नशे में चूर रहा. एकाध बार राशि को रोना आया पर उस ने खुद को संभाल लिया. 6 साल पहले कोविड की पहली लहर में अपने मातापिता को खो दिया था राशि ने वरना उन के पास चली जाती. अब तो उसे मजबूत बन कर ही रहना था. और कोई विकल्प था ही नहीं. एक अच्छी बात यह हुई थी कि इना से पता लगा लतिका 2 सप्ताह से इटली घूमने गई थी. यह खबर राशि को सुकून देने वाली थी. ‘वहीं इटली में अटक जाना चुड़ैल,’ राशि ने मन ही मन कहा. इसी बीच उधर से भुवन के पास जूरी सदस्य बनने का प्रस्ताव भी आ गया. उसे 1 लाख रुपए तथा रहने की सुविधा दी जा रही थी. भुवन ने भी चट से हामी भर दी.

मगर उस ने एक बार भी सोच कर इतना दिमाग नहीं लगाया कि आखिर उस का नाम यहां तक आया कैसे और उसे अभी तक लतिका के शादीशुदा होने का भी अंदाजा नहीं था. न जाने क्यों भुवन ने लतिका को भी इस अवार्ड समारोह के बारे में नहीं बताया वरना तभी खुलासा हो जाता. ठीक समय पर समारोह आयोजित हुआ. इना भी वहां गई हुई थी. उन का पूरा संस्थान वहां आमंत्रित था. रैना और राशि को वीडियोकौल कर के वह सबकुछ दिखा रही थी. भुवन अकेला बैठा था. उस के पास कुछ देर बाद 2 युवक आ कर बैठ गए. इना ने बताया कि ये भी जूरी सदस्य थे. अब अचानक लतिका और सपन के नाम की घोषणा हुई. दोनों मंच पर आए. भुवन के चेहरे पर हवाइयां उड़ती साफ नजर आ रही थीं. इला सब दिखा रही थी. मंच पर जूरी सदस्य बुलाए गए. पतिपत्नी सपन और लतिका ने अनजान बन कर भुवन का मानसम्मान किया लतिका का अभिनय देखने लायक था. भुवन का चेहरा भी पलपल रंग बदल रहा था.

भुवन अपना जूरी सदस्य का सम्मान ले कर नीचे उतर सीधे बाहर आ गया. अगली सुबह भुवन अचानक घर पर पहुंच चुका था. राशि मन ही मन सब समझ गई थी. उस ने आलिंगन भर कर भुवन का स्वागत किया. दोनों एकदूसरे में खो गए. 1 सप्ताह तक भुवन घर पर रहा. वह जब तक घर पर रहा राशि के लिए खाना बनाता घर की साफसफाई करता. 1 सप्ताह बाद भुवन ने खुल कर कहा, ‘‘राशि, अब अपने शहर में ही नौकरी करना चाहता हूं. काफी रुपए कमा लिए हैं. अब साथसाथ रहने का मन है. तुम से दूर नहीं रहना चाहता अब,’’ कह कर उस ने राशि को चूम लिया.

राशि को उस की आवाज में ईमानदारी साफ दिखाई दे रही थी. वह कलाकार था. वह राशि को ही प्यार करता था. यह सब सुन कर राशि का मन फूल सा खिल उठा. अगर रैना न होती तो शायद भुवन का यह रूप वापस न लौट पाता. रैना ने उस की समय पर मदद कर दी थी. रैना को उस ने यह खुशखबर सुनाई तो रैना ने भी संतोष से भर कर राशि को गले लगा लिया. राशि की गृहस्थी में भयंकर सुनामी आतेआते रह गई. अब सब ठीकठीक था.

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