‘शादी कब करोगी?’ इस सवाल से आज की लड़कियां टेंशन में नहीं आतीं बल्कि हंस कर बात उड़ा देती हैं. क्योंकि उन्हें समझ आ गया है कि शादी कर के जिम्मेदारियां ओढ़ने से बहुत जरुरी और बेहतर है आत्मनिर्भर बनना और अपने हिसाब से जीना.  अब लड़कियां-लड़के खुद अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना चाहते हैं.

आज के समय में शादी की इच्छा न रखने वाले युवक 25% बढ़े हैं तो युवतियों में ये आंकड़ा 48% बढ़ा है. यानी हर 2 में से 1 लड़की अभी शादी करना नहीं चाहती.

यूगव के एक सर्वे और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में हर चार में से एक युवा शादी से कतरा रहा है. मिलेनियल्स के बाद जेन-अल्फा और जेन-जी के एक बड़ी आबादी भी अब शादी को जीवन का जरूरी पड़ाव नहीं  बल्कि एक विकल्प मान रही है. भारत की कुल जनसंख्या का एक चौथाई से अधिक हिस्सा जेन अल्फा की है.

सिंगल महिलाओं की संख्या बढ़ रही 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक देश में सिंगल महिलाओं की संख्या 7 करोड़ से ज्यादा थी जो मौजूदा जनगणना में 10 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. इसमें बड़ी संख्या उन महिलाओं की है जिन्होंने अपनी मर्जी से शादी नहीं की है और करना भी नहीं चाहती. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2011 से 2019 तक 9 वर्षों में शादी न करने की इच्छा रखने वाली युवतियों की संख्या करीब 48% बढ़ी.  शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता ने महिलाओं की सोच बदली है. अब वे ऐसे रिश्ते चाहती हैं जहां समझौता कम और समानता ज्यादा हो.

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जेन जी और जेन अल्फा के बीच सिंगल रहने की मानसिकता बढ़ रही है. दरअसल ये पीढ़ी जिम्मेदारियां नहीं लेना चाहती और किसी भी किस्म के बंधन में बंधना नहीं चाहती इसलिए शादी से बचती है.  समाज, रिश्तेदारों का डर अब बचा नहीं है, बुजुर्गों में देखभाल करने के लिए बच्चे पैदा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि बच्चे आजकल पास नहीं रहते. ओल्ड एज होम भी सुविधा संपन्न बन गए हैं.

जेन-जी और मिलेनियल्स की पहली पसंद शादी नहीं बल्कि करियर बनाना है. वे कम उम्र में ही पैसे कमाने के बारे में सोचते हैं. पहले अपने पैरों पर खड़े होंगे फिर पार्टनर की जिम्मेदारी लेंगे – ये सोच बढ़ रही है. उन्हें लगता है शादी के बाद पर्सनल ग्रोथ रुक जाती है.

माएं क्या करें

लोग क्या कहेंगे  का जुमला भूल जाएं. बेटी 28 की हो गई और शादी नहीं की तो टेंशन न लें. दुनिया बदल रही है. 48% लड़कियां आपकी बेटी जैसी ही सोच रही हैं. बात करें मगर ताना न दें. ‘शादी कर ले उम्र निकल जाएगी ‘की जगह पूछें कि तेरे फ्यूचर प्लान क्या हैं. बेटी को सिखाएं कि शादी ऑप्शन है मजबूरी नहीं. पहले खुद का बैंक बैलेंस, घर, करियर बनाओ. पार्टनर बाद में भी मिल जाएगा. अपनी बेटी की ‘सिंगल’ स्टेटस को ‘स्ट्रॉन्ग’ स्टेटस समझकर सपोर्ट करें. क्योंकि आत्मनिर्भर लड़की ही खुशहाल परिवार बना सकती है. दरअसल शादी की उम्र 20 से 30 होना जरूरी नहीं. जरूरी है सही उम्र पर सही फैसला. हम शादी के खिलाफ नहीं लेकिन जल्दबाजी के खिलाफ होना जरूरी है.

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