Screen-Free Activities : गरमी की छुट्टियां में बच्चों को टीवी और मोबाइल स्क्रीन से दूर रखना एक जंग की तरह दिखाई पड़ता है क्योंकि छुट्टी में स्क्रीन से बड़ी मुश्किल से दूर हो पाते हैं. बच्चों के लिए छुट्टियों का मतलब ही पूरा दिन स्क्रीन से चिपके रहना है. तो फिर उन के और स्क्रीन के बीच कैसे दूरी लाई जाए?

बच्चों को स्क्रीन से दूर करने के बहुत से उपाए हैं जैसे खेल, क्रिएटिव ऐक्टिविटी, डांस, पिकनिक आदि. लेकिन एक ऐक्टिविटी या हैबिट ऐसी भी है जिसे जो बच्चा रोज, किसी भी समय और जितनी देर हो उतनी देर बिना किसी परेशानी या नियम के कर सकता है और वह है बुक रीडिंग. लेकिन यह भी सच है कि बच्चे रीडिंग या किताबों से दूर भागते हैं, जिस का एक कारण हम पेरैंट्स ही हैं. वह कैसे?

याद है जब बच्चे छोटे होते हैं तो हम रोज उन्हें किताबों से नईनई कहानियां सुनाते थे लेकिन जैसे ही बच्चे थोड़े बड़े होने लगते हैं, स्कूल जाने लगते हैं तो हम उन की कहानियों का दौर बंद कर सिर्फ स्कूल टैक्स्ट बुक ही थमा देते हैं. पेरैंट्स को चाहिए कि बचपन की कहानियों का दौर बंद न किया जाए बल्कि इसे एक नया मोड़ प्रदान करें. बच्चों को रीडिंग की हैबिट डालें. टैक्स्ट बुक के अलावा दूसरी बुक्स जैसे फैंटैसी, बायोग्राफी, कौमिक, ऐडवैंचर, साइंस फिक्शन, सैल्फ्हैल्प की बुक्स पढ़ने की इच्छा जगाएं. इस हैबिट से एक तो बच्चों की कल्पनाशक्ति बढ़ती है, दूसरा किताबों के जरीए ही वे बहुत सी चीजों, लोगों, कल्चर, हिस्ट्री आदि को ऐक्सप्लोर कर लेते हैं, साथ ही उन की रीडिंग ऐंड लर्निंग पावर भी बढ़ती है.

हां, यह भी सच है कि बच्चे को रीडिंग हैबिट या किताबों से जोड़ना आसान नहीं है क्योंकि वह स्कूल की इतनी किताबें पढ़ता है कि उस का जी किताबों से ऊब जाता है या और किताबें उसे आफत दिखती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे ऐनकरेज करें रीडिंग हैबिट?

ऐनकरेज रीडिंग हैबिट्स: बच्चे आप को कौपी करते हैं, उन के सामने आप किताबें पढ़ें. छोटे बच्चों को बहुत जिज्ञासा होती है कि हमारे पेरैंट्स क्या देख रहे हैं? क्या कर रहे हैं? साथ ही उन की पेरैंट्स को नकल करने की बड़ी इच्छा होती है तो जब बच्चा आप को पढ़ते हुए देखता है तो जानना चाहेगा कि आप क्या पढ़ रहे हैं? क्यों पढ़ रहे हैं? आखिर उस किताब में क्या खास है? तो इन सब सवालों के जवाब देने के लिए आप उसे अपने साथ पढ़ने का सु झाव दे सकते हैं या किताब के बारे में बताएं, उस के किरदारों के बारे में कुछ ऐसी बात शेयर कर सकते हैं जिस से उस के मन में और जानने की इच्छा बढ़े और वह स्वयं सारी बात जानने के लिए किताब पढ़ना शुरू कर दे.

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साथ ही रीडिंग हैबिट डालने के लिए आप दोनों (बच्चे और पेरैंट्स) एकसाथ एक बुक रीड कर सकते हैं या दोनों अपनी पसंद की अलगअलग बुक.

उन की पसंद को किताबों से जोड़ें: हर बच्चे की कोई न कोई पसंद होती है. अब चाहे कार्टून हो, सुपर हीरो हो, कोई खिलाड़ी हो, चांदसितारे हों या चिडि़या, जानवर हों, जिन्हें वे घंटों टीवी पर देखते रहते हैं तो उन की इन्हीं पसंद को जान कर उन की किताबों का चयन करें ताकि वे उन किताबों को दिलचस्पी के साथ पढ़ें जैसे अगर बच्चे को कोई क्रिकेटर पसंद है तो उस खिलाड़ी की बायोग्राफी या उस खेल से जुड़ी किताब ला कर दें.

अगर उसे सुपर हीरो मूवी पसंद है तो उस सुपर हीरो का कौमिक ला कर दें, बच्चे को अगर चांदसितारों की फिल्म या वीडियो देखना पसंद है तो उसे गैलेक्सी प्लैनेट्स की किताबें ला कर दें. इस तरह उस की पसंद से मेल खाती किताबें आप उसे ला कर देंगे तो वह उन्हें पढ़ने में इच्छा दिखाएगा और जब उसे ऐसी बहुत जानकारी किताबों से मिलेगी जो उसे रील्स नहीं देती तो स्वयं उस के बारे में और जानने के लिए और किताबें पढ़ेगा.

किताबी किरदारों को निभाएं: कुछ ऐसी किताबों का चयन करें जिन के किरदारों को जीया जा सके अर्थात उन का अभिनय किया जा सके. जिस तरह स्कूल में किताबी किरदारों को बच्चे प्ले या नाटक के रूप में उत्साह से निभाते हैं. बच्चों को अभिनय बहुत पसंद होता है, इसलिए इस अभिनय को, नाटक को स्कूल तक सीमित न रखें, बल्कि घर पर भी करने का प्रयास करें. कोई किताबी कहानी लें और उस के किरदार बनें. जैसे बच्चा कोई सिपाही या हीरो बने, आप पेरैंट्स कोई राजा आया डाकू तो इस तरह से आप सब किताबों के जरीए एक नाटक, एक मनोरंजन खेल खेल पाएंगे, जिसे बच्चा बहुत पसंद करेगा.

लाइब्रेरी की दुनिया दिखाएं: छोटे बच्चों को बहुत कम ही स्कूल की लाइब्रेरी में ले जाया जाता है. साथ ही बच्चे जाते हैं तो इतना ऐक्सप्लोर नहीं करते. इसलिए उन्हें अपने साथ पब्लिक लाइब्रेरी ले जाएं और आज तो कुछ ऐसी लाइब्रेरीज भी हैं जो सिर्फ बच्चों के लिए बनाई गई हैं. वहां सिर्फ बच्चों के लिए ही किताबें और ऐक्टिविटज हैं तो उन्हें वहां ले जाएं ताकि बच्चा गिनीचुनी किताबों से निकल किस्सेकहानियों और ज्ञान के भंडार को ऐक्सप्लोर कर सके.

ऐक्सपैरिमैंटल रीडिंग करें: ऐक्सपैरिमैंटल रीडिंग यानी जो पढ़ रहे हैं उसे कर के भी देखें. आज स्कूल में बहुत से टौपिक्स को सम झाने के लिए बच्चों को ऐक्सपैरिमैंट या प्रैक्टिकल कर के दिखाया जाता है तो क्यों न बच्चों के साथ मिल कर कुछ ऐक्सपैरिमैंट आप भी करें. जैसे अगर उसे साइंस पसंद है तो कुछ यूनीक क्रिएटिव मौडल जैसे छोटी गैलैक्सी बनाएं, सोडा के साथ कुछ रिएक्शन ऐक्सपैरिमैंट करें. आज ऐसी बहुत बुक्स अवेलेबल हैं, जिन्हें पढ़ कर बच्चे छोटेछोटे ऐक्सपैरिमैंट घर पर कर सकते हैं.

रीडिंग टारगेट सैट करें: बच्चों को पेरैंट्स से आगे निकलने में बड़ा मजा आता है. याद है जब वे दौड़ना सीखते हैं तो बहुत तेज दौड़ते हैं ताकि हम से आगे निकल जाएं और हम उन्हें न पकड़ सकें.

ठीक वैसे ही उन्हें इस रीडिंग रेस में आगे भागने का मौका दें. उन के साथ रीडिंग टारगेट सैट करें कि आप आज कितने पेज पढ़ेंगे या इस हफ्ते आप कितनी बुक्स या कहानियां पढ़ेंगे अथवा किस ने ज्यादा पढ़ा तो इस तरह आप एकदूसरे के साथ एक खेल या कंपीटिशन कर सकते हैं और साथ ही जो हफ्ते के अंत में आगे निकल कर जीतता है उसे कोई ट्रीट या गिफ्ट दें ताकि यह रेस मजेदार बनी रहे.

किताबों को सुना भी जा सकता है: यदि बच्चा किताब पढ़ने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा या पढ़ने से ऊब रहा है तो आप उसे किताबें सुना भी सकते हैं. जैसे औडियो बुक. आज बहुत सारी औडियो बुक या स्टोरी प्लेटफौर्म हैं, जहां हर तरह की किताबें, कहानियां उपलब्ध हैं, साथ ही वहां कहानियों को बहुत ही अच्छे ढंग से सुनाया जाता हैं तो आप भी बच्चे के साथ किसी औडियो बुक या स्टोरी को प्ले करें, आंखें बंद करें और उसे सुन कर ऐक्सपीरियंस करें. इस तरह बच्चे की इमेजिन पावर बढ़ती है. वह कहानी को सुन कर अपने किरदारों की कल्पना करेगा. स्वयं अपने मन में उन के चेहरे, उन की दुनिया, उन के काम, उन की लड़ाइयां बनाएगा और उन्हें महसूस भी करेगा.

किताबों से मिली इस तरह की कल्पनाशक्ति न केवल बच्चों को उत्साहित करती है बल्कि उन के भीतर क्रिएटिविटी भी पैदा करती है. क्या पता कल यह बच्चा इन्हीं किताबोंकहानियों को लिखने वाला लेखक बने, आर्टिस्ट बने या एक अच्छा स्टोरीटैलर बने.

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