Global Warming Hindi : सी  पीआरआई की ताजा ‘मौडर्न दिल्ली हाट रिपोर्ट’ ने चेतावनी दी है कि दिल्ली में हर साल बढ़ती गरमी की सब से बड़ी वजह कंक्रीट लोहे से बनी आधुनिक इमारतें हैं. टाइल्स, ग्लास और कंक्रीट की सतहें बाहर की गरमी को अंदर ‘कैप्चर’ कर लेती हैं. पुराने वैंटिलेशन सिस्टम गायब हो गए हैं जिस से घरों और दफ्तरों के अंदर ‘थर्मल स्ट्रैस’ बढ़ रहा है और लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है.

ध्यान रखें

गरमी अब सिर्फ मौसम नहीं बल्कि शहरी योजना की गलती है. हम जितना कंक्रीट बिछाएंगे उतना ही गरमी को न्योता देंगे.

लगातार गरमी और घरों के अंदर फंसी गरमी से हृदय, श्वास और डिहाइड्रेशन की बीमारियां बढ़ रही हैं. बुजुर्ग, बच्चे और बाहर काम करने वाले सब से ज्यादा जोखिम में हैं.

कंक्रीट सतहें बारिश का पानी जमीन में नहीं जाने देतीं जिस से भूजल घटता है और गरमी और बढ़ती है.

घर की छत और दीवारों पर सफेद, रिफ्लैक्टिव पेंट या कूलरूफ टाइल्स लगवाएं.

खिड़कियों पर बाहरी शेड, परदे या बांस की चटाई लगाएं ताकि सीधी धूप अंदर न आए.

बालकनी और घर के आसपास तुलसी, मनी प्लांट, गमले वाले पेड़ जरूर रखें.

नई इमारतों में ‘कूल रूफ’ और प्राकृतिक वैंटिलेशन अनिवार्य किया जाए.

पार्क, तालाब और खुले मैदान बचाए जाएं क्योंकि ये शहर के ‘कूलिंग जोन’ हैं.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...