राइटर- वीणा राज
Desi Kahani : ‘‘हां तो कमलेश कुमार साहब, किस लिए छुट्टी चाहिए आप को 15 दिनों की?’’ कड़क आवाज में पदोन्नत हो कर आई सीआरपीएफ की कमांडैंट सौम्या ने पूछा.
सहायक कमांडैंट कमलेश कुमार ने एक पल को उसे देखा.
‘‘तो आप सीनियर अफसर हो कर छुट्टी लेना चाह रहे हैं. क्या आप नहीं जानते कि आप के छुट्टी लेने से आप के अधीनस्थ सैनिकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?’’ सौम्या ने उसी कड़क आवाज में कहा.
‘‘मैडम, मैं ने 1 साल से कोई छुट्टी नहीं ली है. अपनी जिम्मेदारियों से मैं बखूबी वाकिफ हूं पर मेरी बहन की शादी है और मेरे सिवा उस का कोई नहीं,’’ कमलेश कुमार ने अपनी बात कही.
‘‘ओह, जा सकते हैं आप.’’
कमलेश कुमार के जाते ही सौम्या बीते दिनों में खो गई जब वह दिल्ली के हंसराज कालेज में पढ़ा करती थी... कमलेश उस की क्लास में ही पढ़ा करता था. अमीर घराने से ताल्लुक रखता था वह और अपने सामने किसी को तवज्जो देना उस की आदत में शुमार नहीं था.
वहीं सौम्या बिहार के एक छोटे से गांव से पढ़ने आई थी. 6 महीने हो गए थे उसे दिल्ली आए हुए पर दिल्ली की हवा उसे छू भी न पाई थी.
रोज तेल लगा 2 चोटियां कर वह कालेज जाती. सभी उसे कहते, ‘‘क्या इस मौडर्न जमाने में भी तुम गंवार की तरह रहती हो... पर उन की बातों को वह हंसी में उड़ा देती.
हां, पढ़ाईलिखाई, कालेज में हो रही प्रतियोगिताओं में उस का कोई सानी नहीं था. चाहे खेलकूद, वादविवाद या गाना गाने की प्रतियोगिता कोई उसे हरा नहीं सका कभी.
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