राइटर- रंगनाथ द्विवेदी
Humor and Satire : एक कुत्ते की हमारे देश में आजकल कुत्ता खरीदना और पालना दोनों ही चलन में है. किसीकिसी शहर में तो कुछ कालोनियां ऐसी हैं, जहां कुत्ता न पालने वाले व्यक्ति या परिवार को अच्छी नजर से देखते तक नहीं.
ऐसे ही एक होनहार हमारी कालोनी के श्यामल हैं, जिन्होंने अभी पिछले हफ्ते ही एक विलायती नस्ल के कुत्ते के बच्चे को क्व14 हजार में, एक ऐसी दुकान से खरीदा जोकि कुत्तों के विभिन्न नस्ल के बच्चों को बेचने के लिए हमारे आसपास की कालोनी में ही नहीं बल्कि दूरदराज के विभिन्न जनपदों में भी काफी चर्चित और प्रसिद्ध है.
ऐसा नहीं कि हमारी कालोनी में कुत्ता पालने और उसे खरीदने वाले ये प्रथम व्यक्ति हों, इस से पहले भी कई लोगों ने अपने घरों में एक से बढ़ कर एक कुत्ता पाल रखा है. हां, इन का यह कुत्ता कालोनी के अन्य कुत्तों से थोड़ा सा भिन्न इसलिए है कि यह जरमनी के कुत्ते की सब से लैटेस्ट नस्ल है जिसे कि श्यामल ने हमारी कालोनी में पहली बार खरीदा है. वैसे भी कुत्ते की खरीद में जो इतनी बेतहाशा वृद्धि हुई है, उस का सारा श्रेय हमारे देश के पतियों की अपेक्षा उन की खूबसूरत पत्नियों को ज्यादा जाता है.
श्यामल से भी इस कुत्ते के बच्चे को खरीदवाने का सारा श्रेय उन की मिसेज को ही जाता है. उन्होंने इस कुत्ते के बच्चे को खरीदने के तुरंत बाद ही अपनी कालोनी या घर न आ कर के बल्कि सीधे कुत्ते के बच्चे को ले कर के पंडितजी के यहां पहुंच गए.
पतिपत्नी दोनों ने बाकायदा कुत्ते के बच्चे को गोद में लिएलिए ही पंडितजी को साष्टांग प्रणाम किया तो पंडितजी चौंकगए. फिर भी उन्होंने अपने चेहरे से बिना कोई पंडिताई करने वाली अपनी भावभंगिमा को व्यक्त किए ही पूछा, ‘‘और बताइए यजमान, किस प्रयोजन से आप का हमारे यहां आगमन हुआ?
श्यामल से पहले ही उन की मैडम बोल उठीं, ‘‘पंडितजी हम चाहते हैं कि आप हमारे कुत्ते के नाम से कोई मंत्र पढ़ कर इस के माथे पर तिलक लगा के इस के खुश और प्रसन्न रहने का आशीर्वाद दे देते तो बड़ी कृपा होती.’’
इतना सुनते ही पंडितजी के पांडित्य की सारी बुद्धि चकरा गई क्योंकि आज से पहले उन्होंने नई गाड़ी या फिर नया मकान या फ्रिज खरीदने वाले यजमान के नाम की पूजा का मंत्र और तिलक किया था. यह पहला अवसर था जब उन्हें किसी ने नए कुत्ते की खरीद पर मंत्र पढ़ने और उसे चंदन लगाने के लिए कहा था.
फिलहाल उन्होंने किसी तरह अपनी इस नई टैकनिक के यजमानी की इतिश्री की क्योंकि चढ़ावे में पूरे क्व5 हजार मिल रहे थे.
फिर कुत्ते के बच्चे के साथ श्याम ला अपने घर और कालोनी आ गए. आने के दूसरे ही दिन उन्होंने सारी कालोनी में अपने कुत्ता खरीदने की खुशी में सभी के यहां मिठाई बंटवा दी.
बंटवाने के बाद वे अपनी मैडम के साथ कुत्ते को गोद में उठा कर ऐसे निकले जैसे कोई दंपत्ति तब निकलता है जब उसे 15-16 वर्ष के बाद बड़ी मानमनौती से उस के यहां किसी बच्चे का जन्म होता है. वे पत्नी और कुत्ते के बच्चे को ले कर हर घर गए और हर किसी के घर वे तकरीबन 1-2 घंटे ठहरने के बाद ही निकल रहे थे.
ऐसे में अभी तक उन का आगमन मेरे घर नहीं हुआ था. मैं यह सोच कर मन ही मन बहुत प्रसन्न था कि चलो, कम से कम श्यामल मेरे घर नहीं आए. मेरी यह खुशी एक तरह से जान बची तो लाखों पाए जैसी थी.
लेकिन मेरे इस भ्रम की दूसरे ही दिन श्यामल ने ऐसीतैसी कर दी. एक तरह से आप यह कह सकते हैं कि इस खुशी की मौसी की उन की वजह से टें बोल गईं. उन दोनों ने अपनी बत्तीसी निपोरते हुए कहा कि बस केवल आप का ही एक घर बचा रह गया था जिसे की हम ने अपना यह कुत्ता नहीं दिखाया था. वैसे भी यह कैसे हो सकता है कि हम कालोनी में सभी को अपने कुत्ते को दिखाते और आप को छोड़ देते और वैसे भी आप हमारे लिए कोई गैर थोड़ी न हैं. तभी श्यामल की मिसेज ने अपने पति की इस बात पर यह कह कर चौका जड़ दिया कि भाभीजी कहीं दिखाई नहीं पड़ रही हैं? उन के पूछने से मु?ो थोड़ी फुरसत मिली तो मैं ने एक नजर ध्यान से कुत्ते की तरफ देख लगा कि अभी से पट्ठा अपने विलायती नस्ल के होने की खुशी में तल्लीन है. अब मेरे मन में कुत्तावाद को ले कर मेरे अनुभवी कुत्तापालक मित्र की वे बात याद आ गई. जब उस ने मु?ा से कहा था कि यार, कुत्ता पालने के पहले ही दिन से अगर तुम खुद 30 फीसदी मानसिक रूप से कुत्ता होने को तैयार हो तभी कोई कुत्ता पालने या खरीदने की जहमत मोल लेना.
वैसे भी कुछ जैंट्स कुत्ते अपनी खूबसूरत मालकिन को ऐसे देखते हैं जैसे किसी रोमांटिक फिल्म में शाहरुख खान अपनी हीरोइन को देखता है. तभी मेरी पत्नी भी कमरे में आ गई. उन के आते ही उन लोगों ने मेरी पत्नी से हैलोहाय करने के बाद उस कुत्ते की ऐसी तारीफ झांकी कि मुझे लगा कि जैसे इन्हें और इन के पूरे परिवार को विदेशी कुत्तों के पालने का कोई खानदानी अनुभव हो. उन के इस आचरण और व्यवहार से मेरी पत्नी की आंखें भी साफसाफ कुत्ते पालने के आकर्षण की चपेट में आती हुई दिखाई पड़ी तो मेरे कान उस गोद में लिए हुए कुत्ते से भी कहीं ज्यादा खड़े हो गए क्योंकि मुझे अपने एक रिश्तेदार का वह चेहरा अभी तक याद है, जब मुझसे वे एक रैस्टोरेंट में अपनी पत्नी और कुत्ते के साथ मिला था.
अभी उस से मेरा ठीक से हाय हैलो भी नहीं हुआ था कि तभी मेरे और उन के करीब खड़ी उन की पत्नी के करीब से गुजर रहे एक व्यक्ति ने कहा, ऐक्सीक्यूज मी मैडम, क्या मैं आप के और आप के इस खूबसूरत कुत्ते के साथ अपनी एक फोटो मोबाइल से ले सकता हूं? वैसे भी मैं आप का फेसबुक फ्रैंड हूं. सच. आप की फोटो जब इस कुत्ते के साथ फेसबुक पर देखता हूं तो मुझे बड़ी खुशी होती है.
मेरे उस रिश्तेदार की पत्नी ने उस फेसबुक फ्रैंड से हंसते हुए कहा, ‘‘क्यों नहीं…’’ इतना सुनते ही उन की पत्नी कुत्ते और उस आदमी के साथ फोटो खिंचाने चली गई और मेरे रिश्तेदार की हालात मानो तो ‘बेचारे को काटो तो खून नहीं,’ मैं ने मन ही मन कहा कि वाह कुत्ता पालन की स्थिति और फिर मै उस रिश्तेदार से इजाजत ले कर उस रैस्टोरेंट से बाहर आ गया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उसे कुछ देर और मेरे सामने शर्मिंदा होना पड़े. वैसे भी ज्यादातर कुत्ते पालने वाली पत्नियों के कुत्ते धीरेधीरे उस के अपने पति से भी ज्यादा खास और करीब हो जाते हैं. वे बैड पर छेड़खानी करने के साथ ही मौका मिलते ही मालकिन के होठों की पप्पी लेने से भी बाज नहीं आते. कुछ कुत्ता पालने वाली पत्नियां ऐसी भी देखने को मिलती हैं कि वे पति के पानी मांगने पर एक गिलास पानी तक नहीं देती लेकिन कुत्ते को ऐसे पानी पिलाती हैं कि जैसे कैटरीना कैफ ‘अग्निपथ’ में विलेन को अपनी नाजोअदा से ड्रिंक पिलाती हैं.’’
और वैसे भी किसी कुत्ता पालने वाले व्यक्ति को भूल कर भी कभी कोई नसीहत उस के कुत्ते पालने को ले कर नहीं देनी चाहिए क्योंकि इस से आप के उस व्यक्ति से घनिष्ठ संबंध खराब हो सकते हैं. वैसे भी मु?ो श्यामल के कुत्ते की हरकत कतई ठीक नहीं लग रही थी. ससुरा मेरी पत्नी को इतनी स्टाइल से देख रहा था कि उतनी स्टाइल से मैं ने खुद आज तक अपनी पत्नी को नहीं देखा था. मैं अभी इस से ठीक से उबर भी नहीं पाया था कि तभी मेरी पत्नी ने मेरे जले पर नमक छिड़कने का एक और मौका मु?ो दिया और मैं उस की इस हरकत से जलभून उठा.
दरअसल, उस ने किचन से काफी नमकीन ला कर हम लोगों को देने के बाद एक फिर दोबारा किचन में गईं और जब इस बार किचन से बाहर निकलीं तो इस बार उन्होंने 3-4 मक्खन टोस्ट ला कर कुत्ते को खाने के लिए दे दिया, जबकि मैं ने पत्नी से अपने लिए मक्खन टोस्ट तैयार करने के लिए कहा था. लेकिन यहां मामला बिलकुल लोटे की तरह उलट गया था.
वैसे भी एक कहावत है कि मुड़ मुंडाने से पहले ही ओले का पड़ जाना अभी मैं ने कुत्ता खरीदने के बारे में कुछ सोचा ही नहीं था कि, पट्ठे ने मेरा मक्खन टोस्ट ही मार दिया. इस के बाद जब श्यामल अपनी पत्नी और उस विलायती कुत्ते के साथ मेरे घर से बाहर निकले तो मैं ने 3-4 लंबीलंबी सांस ऐसे ली और छोड़ी कि जैसे सुबहसुबह किसी टीवी चैनल पर लोग बाबा रामदेव के कहने और बताने पर अपनी सांस लेते और छोड़ते हैं.
यह पक्का था कि अगर श्यामल अपने विदेशी कुत्ते और पत्नी के साथ एकाध घंटे और मेरे घर रूक जाते तो मुझे भी श्यामल की तरह दूसरे दिन ही कोई न कोई कुत्ता खरीद लेने को बाध्य होना पड़ता क्योंकि उन के कुत्ते की हरकत से मेरी श्रीमती जी भी सम्मोहित होने की कगार तक पहुंच गई थीं.
फिर इस के कुछ दिन बाद मेरी मुलाकात श्यामलालजी से हुई लेकिन उन के चेहरे पर अब पहले वाली सारी चमक गायब थी. जब वे मेरे यहां अपनी पत्नी के साथ कुत्ते को ले कर आए थे एक तरह से उन के चेहरे के सारे लालित्य और लालिमा की हालत इतनी बुरी थी कि उतनी बुरी हालत तो किसी शहर के गड्ढायुक्त या खोद कर छोड़ दी गई सड़क की भी नही होगी. श्यामल शुद्ध रूप से अब कुत्ता पालने की बीमारी की चपेट में आ चुके थे लेकिन मैं ने उन से उन का हालचाल बिना उन्हें किसी भी प्रकार का मानसिक आघात पहुंचाए हुए पूछा और फिर अपने घर चला आया.
ठीक उस के दूसरे ही दिन रविवार की छुट्टी थी. इसलिए मैं सुबह बरामदे में बैठा अखबार पढ़ रहा था कि तभी मेरी नजर अखबार के साप्ताहिक पृष्ठ पर प्रकाशित देश के सर्वाधिक महंगे कुत्तों के एक न्यूज पर पड़ी जिस के पढ़ने के लोभ से मैं खुद को नहीं रोक पाया. ज्योंज्यों मैं कुत्तों का रेट पढ़ता गया मेरे चेहरे की सारी रंगत ने मानो एकसाथ इस्तीफा दे दिया.
अंतिम कुत्ते की कीमत तो इतनी ज्यादा थी कि उतने में शायद एक नई बीएमडब्ल्यू कार खरीदी जा सकती थी. मैं ने बहुत पहले कुछ पुराने लोगों के मुंह से यही सुना था कि हाथी पालना हर ऐरेगैरे के बस की बात नहीं लेकिन आज ठीक इस के उलट है. अब हाथी की बजाए हमारा यह कहना कहीं ज्यादा ठीक होगा कि आज के समय में कुत्ता पालना उस समय के हाथी पालने से भी ज्यादा कठिन है.
अभी इस रेट लिस्ट से मैं उबर भी नहीं पाया था कि तभी श्यामल अपनी पत्नी और
कुत्ते के साथ मेरे घर आए. फर्क इतना था कि पिछली बार बड़ी उत्साह के साथ कुत्ते को श्यामल अपनी गोद में उठाए हुए आए थे और इस बार कुत्ता उन की पत्नी अपने गोद में उठाए हुए आई थीं. हां, इतना जरूर था कि विलायती कुत्ता और श्यामल की मिसेज देखने से ही लाल गेहूं की तरह दिख रही थीं और बेचारे श्यामल की हालत उस गेहूं की तरह हो गई थी जो बिना किसी सिंचाई के बस किसी तरह से खेत से पैदा भर हो गया हो.
अब पहली वाली हंसी भी उन के चेहरे से विलुप्त थी, जब वे पहली बार विलायती कुत्ते को ली हमारे घर आए थे. अब तो बेचारे श्यामलालजी ने कब हंसने केप्रयास में अपनी बत्तीसी भी निपोरी तो ऐसे लगा कि जैसे उन के हंसने के सारे प्राकृतिक यंत्रों को कोई लकवा मार गया हो.
वे दोनों जब खाली कुरसी पे बैठ गए तो उनकी पत्नी ने माधुरी दीक्षित की तरह मुसकराते हुए कहा, ‘‘भाई साहब, आप और भाभी कल शाम को 7 बजे हमारे यहां आने की कृपा करें. हमें बड़ी खुशी होगी.’’
‘‘अरे भाई मैं भी तो सुनूं की आखिर बात क्या है?’’
उन्होंने कहा कि, ‘‘दरअसल, कल हम ने अपने घर पर इस की बर्थडे मनाने का फैसला किया है. उन्होंने कुत्ते को प्यार से सहलाते हुए कहा.
‘‘वैसे भाभी थोड़ी जल्दी में हूं क्योंकि कालोनी में और लोगों को भी तो बर्थडे में बुलाना है और कल के लिए तमाम तैयारियां भी तो करनी हैं लेकिन वैसे बुरा न मानो तो आप भी कोई ठीकठाक कुत्ता देख कर पाल लीजिए. अच्छा तो फिर मैं चलती हूं.’’
इस वार्ता के बाद जब मेरी नजर श्यामल पर पड़ी तो मेरा रोमरोम कांप गया. ‘‘नहींनहीं,’’ मेरी पत्नी ने कहा, ‘‘क्या हुआ आप को? कुछ नहीं जी, बस ऐसे ही.’’ लेकिन मेरी पत्नी तब भी मुझे अजीब सी नजरों से देख के बरामदे से अंदर चली गईं.
फिर दूसरे दिन मैं निर्धारित समय पर मैं अपनी पत्नी के साथ श्यामल के घ पहुंच गया. वहां देखा कि कुत्ते के बर्थडे की सारी व्यवस्था ऐसी थी जैसी बर्थडे या मैरेज एनिवर्सरी में कोई करता होगा.’’ श्यामल अपनी मैडम के साथ गेट पर खड़े हो कर सभी आने वाले गेस्ट का वैलकम कर रहे थे और इतना ही नहीं उन्होंने अपने उस विलायती कुत्ते को इतना सजाया था कि जिसे देखने के बाद एक बारगी कोई भी पत्नी अपने पति से इस तरह के कुत्ते को खरीद लाने के लिए दबाव डाल सकती थी.
तभी मेरी पत्नी को श्यामल की पत्नी कुत्ते के बर्थडे का सारा सामान दिखाने के लिए अपने साथ ले कर चली गई और मैं वहां तमाम अपनीअपनी पत्नियों के साथ आए हुए पतियों की तरह अकेला छोड़ दिया गया. मैं उन पतियों की अपेक्षा कहीं अकेले में बैठने की नियत से श्यामल के मकान के बगल में बने हुए एक छोटे से लौन में चला गया और वहीं खाली सीमेंट के एक बेंच पर बैठ गया.
तभी अपने बगल में बैठे एक बूढ़े दंपति के आपस में बात करने की आवाज सुनी तो मु?ो पता चला कि अरे, यह श्यामल के मातापिता हैं. मैं अपनी उत्कंठा नहीं रोक पाया. मैं ने उन से पूछा, ‘‘आप दोनों यहां बैठे हैं जबकि आप के यहां कुत्ते का बर्थडे मनाया जा रहा है…’’
तभी उन्होंने दुखी मन से कहा कि क्या करेंगे हम दोनों वहां जा कर क्योंकि हम से हमारे बेटे की उपेक्षा और उस की बेइज्जती देखी नहीं जाएगी और बेटा, तुम बताओ?
‘‘जो मैं भी इस कुत्ते के बर्थडे में शामिल होने वाले मेहमानों में से एक हूं.’’ तभी उन दोनों ने कहा, ‘‘अच्छा. तब तो तुम ने भी बेटा कोई न कोई विलायती कुत्ता पाल रखा होगा?’’
उन के इस सवाल की पीड़ा मेरे मन को भेद गई.
मैं ने कहा, ‘‘नहीं, मैं ने कोई भी विलायती कुत्ता नही पाल रखा है बाबूजी. हां, लेकिन मेरी पत्नी की बड़ी इच्छा है कुत्ता पालने की.
‘‘बेटे अगर तुम ने कोई कुत्ता नहीं खरीदा है तो खरीदना भी मत,’’ श्यामल की मां ने कहा.
हमारे श्यामल को हम से बहू के विलायती कुत्ता खरीदने की फरमाइश ने ही छीन लिया. अब हम दोनों बूढ़े और बुढि़या घर में अपने श्यामल को उतना नहीं देख पाते जितना कि हम उस विलायती कुत्ते को देखते हैं. कभी हमारा यही श्याम सुबह 6 बजे से पहले सो कर नहीं उठता था लेकिन आज इस की हालत यह हो गई है कि खुद अपने मकान में अपने इस विलायती कुत्ते से कम सो पाता है. 4 बजे सुबह उठ कर कुत्ते की दिनचर्या में लग जाता है. सच, बेटा अपनी पत्नी के कहने पर तुम जो चाहो खरीद देना लेकिन कभी भी उस के कहने पर तुम कोई कुत्ता मत खरीदना और पालना.’’
तभी पत्नी का फोन आ गया उस ने कहा, ‘‘कहां चले गए आप? यहां केक काटने का समय हो गया है. जल्दी आइए.’’ मैं ने दोनों बुजुर्गों को नमस्ते किया और जल्द से जल्द बर्थडे हौल में पहुंच गया.
मैं ने बर्थडे हौल में श्यामल की पत्नी और उस विलायती कुत्ते की तरफ देखा जो केक वाली मेज के सामने ऐसे सजीबजी खड़ी थी जैसे कोई नईनवेली पत्नी अपने पति के पहले बर्थडे के अवसर पर अपने पति के साथ खड़ी होती है. पति के स्थान पर उस की खूबसूरत पत्नी के शरीर से लग कर विलायती कुत्ता खड़ा था. श्यामल की मैडम ने कुत्ते के बर्थडे के नाम पर केक काटा और उस केक के एक टुकड़े को अपने कोमल हाथों से उठा कर उन्होंने प्यार से उस कुत्ते के मुंह में केक का टुकड़ा लगाया फिर उसी पोज में उस ने कुत्ते के साथ कई सारी फोटो खिंचाई.
फोटो खिंचाने के बाद श्यामल की मिसेज ने कुत्ते को अपने दोनों होठों से चूम लिया तो मुझे ऐसा लगा जैसे बिपाशा बसु ने किसी फिल्म में इमरान हाशमी को चूम लिया हो. फिर वहां उपस्थित सभी लोगों ने उस विलायती कुत्ते के बर्थडे की सामूहिक जोरदार ताली बजाते हुए एक सुर में ‘‘हैप्पी बर्थडे टू यू…’’ कहा.
सभी बारीबारी से उस कुत्ते के लिए लाए अपने बर्थडे गिफ्ट को श्यामल की मिसेज के हाथो में पकड़ाते चले गए. वैसे वहां ज्यादातर गिफ्ट देने वाले में सर्वाधिक संख्या कुत्ता पालने वालों की ही थी. बस. मैं ही वहां एक ऐसा होनहार व्यक्ति उपस्थित था, जिसे कुत्ते के बर्थडे पर गिफ्ट देने की कोई बहुत वैज्ञानिक जानकारी नहीं थी. एक तरह से मैं उस बर्थडे पार्टी में किसी 24 कैरेट के बेवकूफ की तरह उपस्थित था, लेकिन मेरी पत्नी के टैलेंट ने मेरी इस कमी को वहां मौजूद सभी कुत्ता पालने वाली पत्नियों के सामने उन्नीस नहीं होने दिया.
मु?ो पता था कि इस बात का खामियाजा मु?ो कई दिनों तक भुगतना पड़ेगा. वैसे अगर यही हाल रहा तो वह समय दूर नहीं जब ऐसी पत्नियां कुत्ता पालने वाले या किस्त पर कुत्ता दिलाने वाले किसी संगठन की स्थापना कर कालोनीकालोनी जा कर कुत्ते के रखने और पालने की गोष्ठी आयोजित कर उस कालोनी की सर्वश्रेष्ठ कुत्ता पालने वाली पत्नी और कुत्ते को क्व25 हजार नगद पुरस्कार के साथ प्रशस्तिपत्र भी प्रदान करें.
मुझे यह सोचते हुए ज्यादा वक्त नहीं बिता था कि तभी मेरी पत्नी ने मुझ से अपना मुंह
?फुलाते हुए कहा. ‘‘अब यहीं खड़े रहेंगे कि घर भी चलेंगे.’’
मैं एक चुप की हजार चुप साधे पत्नी की नाराजगी के आतंकी हमले को झेलते हुए घर की तरफ बढ़ चला पत्नी रास्ते भर कहती रही कि आप को क्या पता कि मैं वहां उपस्थित कालोनी की सारी पत्नियों के बीच खुद को कितना उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रही थी. लेकिन अब मेरे जेहन में एक बार फिर से श्यामल का चेहरा याद आ गया, जब मैं उन से शिष्टाचारवश घर लौटने की इजाजत मांग रहा था तो वह बेचारा कुत्ता प्रताडि़त पति की तरह निरीह भाव से हाथ जोड़े ऐसे खड़ा था जैसे किसी विज्ञापन की परची में हम ने इलाज के पहले और इलाज के बाद के व्यक्ति की कोई फोटो देख ली हो.
तभी मेरे शरीर में एक झरझरी उठी और मेरे कानों में एक बार फिर से श्यामल के बुजुर्ग मांबाप की आवाज सुनाई पड़ी कि बेटा, तुम कभी कुत्ता मत पालना.’’
