राइटर - डा. सरस्वती
बारिश के बाद आज सुबहसुबह नीरजा की जब आंख खुली तो बंद खिड़की के खुले हुए हिस्से से एक छोटे से धूप के टुकड़े को अंदर आते देख वह खुशी से उछल पड़ी. दौड़ कर उस ने परदा खोला और खिड़की पूरी खोल दी. अब धूप का एक बड़ा टुकड़ा खिड़की से उतर कर कमरे के अंदर फर्श पर आ गया था. गुनगुनाते हुए नीरजा उस धूप के टुकड़े के साथ खेलने लगी.
नीरजा उन लोगों में है जो छोटीछोटी खुशियों में खुश हो जाते हैं और फिर आज तो नीरजा के साथ उस की 3 दिनों से बंद खिड़की जो अभीअभी खुली थी वह भी खुश थी, खिड़कियों के परदे भी खुश थे, कमरा भी खुश था, अस्तव्यस्त बिस्तर, चादर, तकिए, दरवाजे, दीवार, दीवार पर टंगी हुई. बड़ी सी पेंटिंग सब खुश थे.
चादरबिस्तर को करीने से लगाते हुए नीरजा ने मन ही मन दिनभर का प्लान बना लिया. आज रविवार की छुट्टी है, इसलिए आज बहुत से काम उसे करने हैं. अभी सब से पहले एक बढि़या सी कौफी पीनी है, नाश्ते के लिए ब्रैड बटर तो है ही. उस के बाद कपड़े धो कर छत पर सुखाने हैं क्योंकि बारिश में कपड़ों में जो नमी सी रहती है वह उसे बिलकुल पसंद नहीं, फिर पूरे घर को गीला पोंछा मारना है जो उस ने 3 दिनों से नहीं किया था. आज तो दालखिचड़ी और पापड़ से काम चलना पड़ेगा क्योंकि फ्रिज में कोई सब्जी ही नहीं है. लंच के बाद थोड़ी देर आराम करना है जो उसे पिछले पूरे सप्ताह औफिस के प्रोजैक्ट के कारण नहीं मिला था, बाद में शाम को सुपर मार्केट में जा कर सप्ताहभर का राशन का सामान भी लाना है क्योंकि आज बंपर छूट का आखिरी दिन है. ओह कितना काम है, नीरजा व्यस्त सी हो उठी.
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