Home interior : एक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाली निशा हर 8 से 10 साल बाद अपने घर की इन्टीरीयर को बदल देती है, क्योंकि रोजरोज उन्हे ऑफिस से आकर एक ही घर के डेकोरेशन और फर्नीचर देखना पसंद नहीं. इसके लिए वह अपना अलग बजट बनाती है, जिससे उन्हे खर्च करना आसान होता है. इसमें पहले वह 5 साल रंग रोगन या फर्नीचर की प्लेसमेंट को बदलती है, फिर वह फर्नीचर को ही बदल देती है, जिससे उनके घर का लुक हमेशा फ्रेश बना रहता है.
असल में फैशन की तरह, इंटीरियर डिजाइन के ट्रेंड भी समय के साथ बदलते रहते हैं. कभी ऐसा समय था, जब लोग पुरानी दादा-दादी के ओल्ड भारी – भड़कम फर्नीचर को सम्हाल कर रखते थे और उसी को सालों साल प्रयोग करते थे और घर के इंटीरियर में किसी प्रकार की बदलाव करने से कतराते थे. समय के साथ इसमें बदलाव आया है. अब बड़े शहरों में जगह की काफी कमी और लोगों के लाइफस्टाइल में काफी परिवर्तन आया है, ऐसे में लोग जगह के अनुसार ही इंटीरियर करते है, ताकि उन्हे घर हमेशा फ्रेश और नया दिखे.
क्या कहती है रिसर्च
इन्वाइरन्मेनल साईकोलोजी के अनुसार, हम जिस माहौल में रहते हैं, उसका गहरा असर हमारे विचारों पर पड़ता है. घर के इंटीरियर बदलने से न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा मिलता है, जिससे दिमाग को नयापन और ताजगी महसूस होती है. साथ ही फालतू सामान हटाकर इंटीरियर को व्यवस्थित करने से कोर्टिसोल यानि तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन का स्तर कम होता है. बिखरा हुआ घर बिखरे हुए दिमाग का प्रतीक होता है, जबकि साफ और व्यवस्थित घर मानसिक शांति देता है. इतना ही नहीं, जब आप घर में अपनी पसंद के रंग, सुंदर सजावट या नया फर्नीचर देखते हैं, तो दिमाग में ‘डोपामाइन’ रिलीज होता है. इसे इंटीरियर डिजाइनिंग की भाषा में ‘डोपामाइन डेकोर’ भी कहा जाता है.
समय – समय पर इंटीरियर बदलना जरूरी
इस बारें में मुंबई की इंटीरियर डिजाइनर विजय सिपाडिया कहते है कि असल में घर के इंटीरियर को समय-समय पर बदलना बेहद जरूरी है. पुराने और भारी फर्नीचर आज ट्रेंड में कम है, क्योंकि जगह की कमी है. फर्नीचर बदलने पर यह न केवल घर को एक नया लुक देता है, बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य, मूड और घर की उपयोगिता को भी बेहतर बनाता है. एक ही तरह के माहौल में लंबे समय तक रहने से बोरियत होने लगती है, जबकि बदलाव से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इंटीरियर में बदलाव अधिकतर लोग 8 से 10 साल में कर लेते है, लेकिन इसमें बजट के अनुसार ही बदलाव की जानी चाहिए. इसकी उपयोगिता निम्न है,
- सकारात्मक ऊर्जा
नया बदलाव तनाव को कम करता है और मानसिक शांति देता है. साथ ही बेहतर स्पेस मैनेजमेंट और बढ़ती जरूरतों के हिसाब से घर की जगह का सही इस्तेमाल हो पाता है.
- बदलती जीवनशैली
समय के साथ हमारी जरूरतें बदलती हैं, जैसे वर्क फ्रॉम होम का स्पेस या आधुनिक किचन की आवश्यकता आदि.
- प्रॉपर्टी की वैल्यू
अच्छा और आधुनिक इंटीरियर आपके घर की रीसेल वैल्यू को काफी बढ़ा देता है.
कम बजट में प्रीमियम लुक
यदि आप बिना ज्यादा खर्च किए या बिना बड़ी तोड़-फोड़ के अपने घर को एक नया और प्रीमियम लुक देना चाहते हैं, तो आप इन आसान तरीकों को अपना सकते हैं,
- पेंट और दीवारों को हर 4 से 6 साल में बदलना अच्छा होता है, क्योंकि घर का पेंट अमूमन 5 सालों में फीका पड़ने लगता है. ऐसे में दीवारों पर नए ट्रेंडी और वार्म कलर्स, मसलन क्रीम या बेज कलर लगाकर आप कम बजट में घर को नया लुक दे सकते हैं.
- अगर घर में वॉलपेपर लगा है, तो वह 5 से 7 साल में कोनों से उखड़ने लगता है, जिसे बदलना जरूरी हो जाता है.
- हर 7 से 10 साल में सोफा और कुशनिंग करना जरूरी होता है. लगातार इस्तेमाल से सोफे की गद्दी दब जाती है और कपड़ा गंदा या फट जाता है. इसे 7 से 8 साल में कपड़ा बदलना या रिप्लेस करना पड़ता है.
- अच्छी क्वालिटी की प्लाई से बने बेड और डाईनिंग टेबल 9 से 10 साल या उससे ज्यादा भी आसानी से चल जाते हैं, अगर वह मजबूत लकड़ी की बनी हो, तो उस पर बार्निश लगवाकर चमक लाया जा सकता है.
- किचन में नमी और तेल के धुएं के कारण सनमाइका और चैनल खराब होने लगते हैं. अगर मॉड्यूलर किचन और वॉर्डरोब के मेटीरियल अच्छी क्वालिटी का है, तो यह 10 साल तक टिकता है, नहीं तो बदलना सही होता है. इसके अलावा आउटडेटेड डिजाइन को बदलने के लिए घर का लाइटिंग और पर्दे को भी बदलकर भी रीफ्रेश किया जा सकता है.
इंटीरियर बदलने के मुख्य संकेत
अगर दीवारों में नमी आ रही है या लकड़ी में दीमक लग गई है, तो आपको तुरंत इंटीरियर बदलना जरूरी होता है.
बच्चों के बड़े होने या वर्क फ्रॉम होम सेटअप के लिए अक्सर लोग 7-8 साल में स्पेस री-डिजाइन करवाते हैं, ताकि हर स्थान का सही से प्रयोग हो सकें.
इस प्रकार घर के इंटीरियर को अपनी पसंद के अनुसार ढालने से व्यक्ति को अपने जीवन पर एक सकारात्मक नियंत्रण महसूस होता है. यह घर को केवल एक ‘मकान’ नहीं, बल्कि एक सुरक्षित ‘शरणस्थली’ बनाता है, जहाँ आकर आप पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं. यही वजह है कि आपको घर के इंटीरियर में समय – समय पर अपनी बजट के अनुसार बदलाव करते रहना चाहिए, ताकि आपके सपनों का घर हमेशा आपको ताजगी और सुकून महसूस करवाएँ.
