पहली शादी चाहे प्रेमविवाह से हुई हो या अरैंज्ड हुई हो, तलाक के बाद दोबारा शादी करने के लिए भटकना यही जताता है कि अभी भी लड़कियां तलाक की टै्रजेडी को सिर्फ भाग्य या बैड इंसीडैंट मानती हैं और फिर दोबारा वैसा सा ही रिस्क लेने को उतावली रहती हैं. तलाक के बाद कोई कहीं मिल जाए, मन को भा जाए, पटरी बैठने लगे तो बात दूसरी है पर विज्ञापनों और मैट्रीमोनियल साइटों के सहारे जीवनसाथी ढूंढ़ना गलती को दोहराना है.
यह देख कर थोड़ा सरप्राइज होता है कि ‘इन्नोसैंट डाईवोर्सी’ जैसे खुद का सर्टिफिकेट दे कर लोग न्यूजपेपर्स में ऐड छपवाते हैं कि किसी तरह कोई पुरुष मिल जाए और पति बन कर नैया पार कर दे. ऐसा नहीं कि लंबे समय तक सिंगल रहने वाली, डाईवोर्सी और विडो को दोबारा साथी नहीं मिल सकता पर विज्ञापन या साइट के जरीए ढूंढ़ना हैल्प लैस नैस दर्शाता है.
जिंदगी हमेशा सीधी राह पर चले, जरूरी नहीं. लाइफ में इंसीडैंट और ऐक्सीडैंट होते ही हैं. एक जने से डाइवोर्स लेना गलत नहीं क्योंकि जिस से किसी वजह से, वायलैंस की वजह से, कंजूसी की वजह से, दूसरी लड़की के चक्कर में फंसने की वजह से डाइवोर्स लेना कतई गलत नहीं है पर ऐसे मामलों में अगर दोबारा साथी ढूंढ़ने का सपना भी हो तो पहली को तोड़ते समय किसी तरह का डिस्प्यूट खड़ा नहीं करना चाहिए.
हिंदू मैरिज एक्ट 1955 में तलाक की सुविधा पहली बार पंडों, पाखंड शादियों की मरजी के खिलाफ जवाहरलाल नेहरू ने उलझा कर दी थी और औरतों को आदमियों के बराबर हक दिया था. 1955 से पहले आदमी पत्नी को घर से बाहर निकाल सकता था पर पत्नी के लिए वही एक चौखट बची हुई थी. बाद में इंदिरा गांधी ने इस में 13 (बी) जुड़वा दी जिस में म्यूचुअल कंसैंट से शादी कर के अलग जिंदगी जीने का रास्ता तय हो जाता है.
13 (बी) से डाइवोर्स लिए हुई लड़की की दूसरी शादी ज्यादा आसान है पर इस के लिए सही जना आसपास ढूंढ़ें यह मुश्किल काम है पर अनजानों से संपर्क कर, किसी रेस्तरां में इंटरव्यू दे ले कर जज करना कि यह नया साथी पहले से अच्छा होगा कहना मुश्किल है.
डाइवोर्सियों को सब से पहले जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, रंग का खयाल छोड़ देना चाहिए. उन्हें खुले मन से नए साथी ढूढ़ना चाहिए. जैसे औफिस में आप के साथ वाली सीट पर कौन आ कर बैठेगा यह आप तय नहीं कर सकतीं वैसे ही नया पति किसी पैमाने में ढका हो, यह पहले से डिसाइड न करें.
यह काम खुद करना होगा. पार्टियों और शादियों में ज्यादा जाना होगा. सहेलियों, साथियों को कहना होगा कि आप नए साथी के लिए तैयार हैं. अपनी चाहतों की सूची छोटी करनी होगी. किसी को मिलते ही जज न करें. हरेक को परखना, हरेक को अपने को परखने दें. सामने वाला जब तक अपनी सच्चीझूठी बातें करे, चुप रहें, पर अपना दुखड़ा पहले ही न रो दें.
अमेरिका में 60-62% रिमैरिज टूट जाती हैं क्योंकि औरतें ही नहीं आदमी भी ऐक्स से कंपेयर करते हैं. कंप्रोमाइज करना सीखें. जीवन का उसूल बनाएं कि दुनिया में हर चीज आप की चाहत की नहीं होती. यह याद रखें कि दूसरी शादी अमेजन पर मिले सामान की तरह औनलाइन और्डर से नहीं होती. इस के लिए रिलेशनशिप तैयार करनी होती है.
