early age skin problems : 20 वर्षीय निशा के गालों पर अचानक कालेकाले छोटे धब्बे दिखाई देने लगे। निशा परेशान हो कर कई डाक्टर के पास गई। हर तरह के टेस्ट करवा डाले लेकिन कुछ नहीं निकला। अंत में त्वचारोग विशेषज्ञ के पास जाने पर उन्होंने बताया कि यह सनबर्न है, जो उस की मार्केटिंग की जौब की वजह से धूप में घूमने की वजह से हुआ है, जिसे लेजर थेरैपी से ठीक किया गया.

आज निशा अपनी त्वचा का बेहद खयाल रखती है और धूप में खुद को पूरा ढंक कर चलती है.

आत्मसम्मान में कमी

असल में आज की किशोरों और युवाओं में त्वचा की समस्याएं बहुत आम हो गई हैं. 15 से 35 वर्ष के युवाओं के लिए ये समस्याएं उन के आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं क्योंकि कीलमुहांसे, इस के बाद झाइयां, काले धब्बे और आंखों के नीचे काले घेरे जैसी कई समस्याएं उम्र के बढ़ने के साथ आती हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि सही देखभाल, डाक्टर की सलाह और लगातार ध्यान देने से इन में से लगभग हर समस्या को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.

प्रदूषण अधिक जिम्मेदार

मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हौस्पिटल की डर्मेटोलौजिस्ट डाक्टर जवाहरलाल मनसुखानी कहते हैं कि इस आयु वर्ग की सब से आम त्वचा की समस्याएं दिनोदिन बढ़ती जा रही हैं, जो अधिकतर प्रदूषण की वजह से है. ऐक्ने का मतलब सिर्फ पिंपल्स नहीं होता, इस में व्हाइटहैड्स और ब्लैकहैड्स भी शामिल हैं. जब त्वचा में तेल ज्यादा बनने लगता है, तो त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं. इस के बाद वहां बैक्टीरिया जमा होने और सूजन आने से ऐक्ने होता है.

यह समस्या चेहरे, छाती या पीठ पर हो सकती है. इस की गंभीरता हर इंसान में अलग होती है. सब से ज्यादा परेशानी की बात यह है कि पिंपल्स ठीक होने के बाद भी काले धब्बे और झाइयां छोड़ जाते हैं. इन दागधब्बों को ठीक होने में बहुत लंबा समय लगता है. संवेदनशील या सांवली त्वचा पर ये दाग और भी ज्यादा साफ दिखाई देते हैं.

लाइफस्टाइल जिम्मेदार

इस के आगे डाक्टर कहते हैं कि इस उम्र के लोगों में आंखों के नीचे काले घेरे आना भी एक बड़ी समस्या है. तनाव, कम सोना, स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, शरीर में पानी की कमी और अनुवांशिकता इस के मुख्य कारण हो सकते हैं. यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इस से व्यक्ति के रूपरंग और आत्मविश्वास पर असर पड़ता है.

इलाज की कमी नहीं

डा. जवाहर का कहना है कि हर किसी के लिए त्वचा का इलाज एकजैसा नहीं होता. डर्मेटोलौजिस्ट हमेशा समस्या के प्रकार और गंभीरता को देख कर ही कोई दवा बताते हैं. ऐक्ने के इलाज के लिए डाक्टर आमतौर पर लगाने वाली क्रीम से शुरुआत करते हैं. इस में बैंजोइल पेरोक्साइड, रेटिनोइड्स और ऐंटीबायोटिक क्रीम सब से आम हैं.

ये दवाएं त्वचा में तेल को कम करती हैं, बंद रोमछिद्रों को खोलती हैं और बैक्टीरिया को रोकती हैं. जब ये क्रीम असर नहीं करतीं या समस्या ज्यादा गंभीर होती है, तब खाने की दवाएं दी जाती हैं.

कैमिकल पील्स और लेजर थेरैपी है कारगर

कुछ मामलों में हारमोनल थेरैपी या आइसोट्रेटिनौइन शामिल हो सकते हैं. आइसोट्रेटिनौइन का इस्तेमाल हमेशा डाक्टर की कड़ी निगरानी में ही किया जाता है. त्वचा की बनावट और झाइयों को ठीक करने के लिए कैमिकल पील्स और लेजर थेरैपी का विकल्प भी मौजूद है, जिसे अधिकतर डाक्टर करते हैं.

इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति की त्वचा को किस चीज की जरूरत है और त्वचा कितनी सेंसिटिव है, इसे देखना जरूरी होता है.

किसी भी उम्र में इलाज संभव

इलाज के लिए उम्र की कोई तय सीमा नहीं होती. टीनएजर्स और अपनी उम्र के 20 या 30 साल के यूथ कोई भी इलाज करवा सकते हैं और इलाज जल्दी शुरू करने की सलाह दी जाती है. इस से आगे चल कर होने वाली लंबी परेशानियां, जैसे चेहरे पर गड्ढे होना और झाइयां बढ़ना आदि को पहले ही रोकना संभव होता है.

इलाज की अवधि

समस्या अगर हलकीफुलकी हो, तो कुछ ही हफ्तों में सुधार दिखने लगता है. मध्यम से गंभीर समस्याओं को ठीक होने में थोड़ा समय लगता है. आमतौर पर 6 से 12 हफ्तों में इलाज का असर दिखाई देने लगता है. पूरी तरह ठीक होने या इसे लंबे समय तक नियंत्रण में रखने के लिए और भी समय लग सकता है. इस में सब से बड़ा असर तभी सामने आता है, जब आप डाक्टर द्वारा बताए गए इलाज को लगातार और नियम से करते हैं.

इस के अलावा हमेशा अनुभवी डाक्टर की सलाह लें, ताकि बाद में किसी समस्या का सामना न करना पड़े.

रिस्क फैक्टर पर दें ध्यान :

-कई बार लगाने वाली क्रीम से शुरुआत में कभीकभी त्वचा पर सूखापन, लालिमा या जलन हो सकती है.

-खाने वाली दवाओं के अपने अलग असर होते हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप कौन सी दवा ले रहे हैं. इसलिए इन्हें हमेशा डाक्टर की देखरेख में ही दवाइयां लेनी चाहिए.

-कुछ इलाजों की वजह से त्वचा पर धूप का असर बहुत जल्दी होता है, जो अधिकतर अस्थायी साइड इफैक्ट्स होते हैं, ऐसे में डर्मेटोलौजिस्ट को सही तरीके से इलाज की निगरानी करना जरूरी होता है.

-मेकअप का ले सकते है सहारा :

डाक्टर कहते हैं कि कम समय के लिए मेकअप की मदद से भी ऐक्ने, झाइयों और डार्क सर्कल्स को छिपाया जा सकता है और इस में कोई गलत बात नहीं है. इस में बस ध्यान यह रखना है कि आप ‘नौन-कौमेडोजेनिक’ प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें, जो त्वचा के रोमछिद्रों को बंद नहीं करते. सस्ते या गलत मेकअप प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कभी न करें. इस के अलावा मेकअप लगाने के बाद रात में चेहरे को अच्छी तरह साफ करना भी जरूरी होता है.

स्किन की समस्याएं टीनएज में होना आम है और इन्हें आसानी से ठीक भी किया जा सकता है.
इस प्रकार त्वचा की समस्याओं का सही पहचान और जल्दी से इलाज त्वचा के स्वास्थ्य और टीनएज के आत्मविश्वास को बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. दवाओं के अलावा, समस्या की रोकथाम और इस के साइको सोशल इफैक्ट को भी मैनेज करना लौंग टर्म उपचार का अभिन्न हिस्सा है, जिसे बनाए रखना जरूरी होता है.

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