Gold Facial: ब्यूटी की दुनिया में ट्रीटमैंट्स रोज नए आते हैं. कोई फ्रूट वाला, कोई डायमंड फेशियल तो कोई औक्सीजन थ्योरी लेकिन कुछ ऐसे ट्रीटमैंट्स होते हैं जो समय बीतने के बाद भी एवरग्रीन बने रहते हैं. गोल्ड फेशियल उन्हीं में से एक है. 90 के दशक में जब पहली बार गोल्ड फेशियल सामने आया तो लोगों को यह सिर्फ एक लग्जरी नहीं बल्कि एक नया अनुभव लगा. उस समय उस की चमक इतनी ज्यादा थी कि हर महिला की ख्वाहिश बन गया. समय के साथ और भी कई फेशियल्स आए लेकिन गोल्ड फेशियल का चार्म कभी कम नहीं हुआ.

गोल्ड को हमेशा से ही रिचनैस, ग्लो और शान का प्रतीक माना गया है. पहले गोल्ड फेशियल का मतलब था गोल्ड बेस्ड क्रीम और पैक लगाना. चेहरे पर हलकीहलकी मसाज होती और तुरंत एक निखार आ जाता. लेकिन आज का गोल्ड फेशियल पहले से कहीं ज्यादा एडवांस्ड हो चुका है. अब इस में 24 कैरेट गोल्ड की नाजुक सी लीफ सीधे चेहरे पर रखी जाती है और अल्ट्रासाउंड मशीन की मदद से इसे स्किन की गहराई तक पहुंचाया जाता है.

यह प्रोसैस न सिर्फ चेहरे की झुर्रियों की विजिबिलिटी कम करता है बल्कि डलनैस और थकान को भी मिटा देता है. गोल्ड पार्टिकल्स जब अंदर तक औब्जर्ब होते हैं तो ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जिस से नैचुरल ग्लो लंबे समय तक टिका रहता है और त्वचा टाइट और फर्म दिखने लगती है. यही वजह है कि आज भी खास मौकों पर महिलाएं गोल्ड फेशियल को ही चुनती हैं.

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