fish spa : फिश स्पा एक तरह का ब्यूटी और रिलैक्सेशन ट्रीटमैंट है. दरअसल, यह एक पेडिक्योर ट्रीटमैंट है जिसे लोग पैरों में रिलैक्स करने के लिए करते हैं. इस में ‘गारा रूफा’ (Garra rufa) नामक छोटी मछलियों का इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें ‘डाक्टर फिश’ भी कहा जाता है.
आकार में बेहद छोटी यह मछलियां आप के पैरों में धीरेधीरे काटती हैं, जिस से आप को हलकी गुदगुदी का एहसास होता है. पैरों में काटने के दौरान यह मछलियां आप को पैरों में मौजूद बैक्टीरिया और डेड स्किन को निकाल कर अलग कर देती हैं. इस से न सिर्फ पैर सुंदर होते हैं, बल्कि आप को काफी आराम भी मिलता है.
पिछले कुछ सालों में इस का प्रचलन काफी बढ़ा है और कई बड़े शहरों में सर्टिफाइड सेंटर्स के अलावा कई इम्यूजमैंट पार्क, ओपन मौल और ऐसे स्थान पर जहां पर्यटक व लोग काफी घूमने आते हैं, पर भी ऐसे छोटे स्पा सेंटर मिल जाते हैं जहां लोग यह सुविधा ले सकते हैं.
कई लोगों के लिए यह एक अच्छा अनुभव हो सकता है लेकिन चिकित्सकों की मानें तो यदि यह प्रक्रिया सही और सुरक्षित तरह से न हो तो कई समस्याओं का कारण बन सकती है.
इस को करना वैसे भी सही नहीं है क्योंकि पहली बात तो यह कि फिश इस काम के लिए नहीं होती हैं. दूसरी बात यह कि आप के पैरों में वे अपना खाना ढूंढ़ रही होती हैं. तीसरा जो काम आप खुद ही घर पर छावे से पैर साफ कर के कर सकते हो उस के लिए इतने पैसे क्यों देने और साथ ही इतना रिस्क लेना ही क्यों? चौथा थाइलैंड जैसे शहरों में इसे दुकानों के आगे किया जाता है ताकि देखने में यह तमाशे जैसा लगे और लोग रुकरुक कर इसे देखें.
किन देशों में फिश स्पा पर प्रतिबंध है
संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा सहित दुनियाभर के कई देशों में फिश पेडीक्योर या फिश स्पा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
अनहाइजीनिक
फिश स्पा करने के लिए कांच के एक जार या टब में पानी डाल कर पेडिक्योर किया जाता है. इस जार में मछलियां पहले से ही मौजूद रहती हैं. लेकिन कई बार इन जार या टब में मौजूद पानी को कई दिनों तक बदला नहीं जाता, जिस से इस में काफी गंदगी जमा हो जाती है, जो आप के पैरों से आप के शरीर में प्रवेश कर सकती है.
स्किन में इन्फैक्शन हो सकता है
टैंक में मौजूद मछलियों में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं. इन बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर संक्रमण का भी खतरा रहता है. टैंकों में मौजूद मछलियों में गंभीर बैक्टीरिया और वायरस हो सकते हैं. इन मछलियों के संपर्क में आने से त्वचा संबंधी संक्रमण, फंगल इन्फैक्शन और पैरों में घाव होने का खतरा बढ़ जाता है. खासकर खुले घाव या एक्जिमा जैसी त्वचा की समस्याओं वाले लोगों के लिए फिश स्पा और भी ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है.
फिश स्पा से एलर्जिक रिएक्शन
कई लोगों को फिश स्पा करने के बाद काफी ज्यादा स्किन एलर्जी हो जाती है जिस से स्किन में जलन, खुजली और लालिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इस के आलावा स्किन बहुत डल और ड्राई भी हो जाती है और यही वजह होती है कि पैर में खुजली ज्यादा लगती है.
बीमारी के फैलने का डर
यदि किसी व्यक्ति को कोई संक्रामक रोग है, तो टैंक के पानी में उस के रोग फैलने का खतरा रहता है. हालांकि एचआईवी और हेपटाइटिस जैसी बीमारियां तो नहीं फैलती हैं क्योंकि ये टैंक के वातावरण में जीवित नहीं रह सकते. लेकिन अन्य बैक्टीरियल या फंगल इन्फैक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकते हैं, खासकर अगर टैंकों को साफ न रखा जाए.
फिश स्पा करने से आप को सिरोसिस, एक्जिमा समेत एड्स जैसी बीमारियां हो सकती हैं. यहां पर मछलियां किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आती हैं, तो इस का नुकसान हो जाता है. इस के अलावा मछलियों से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है.
नाखून भी खा सकती हैं मछलियां
कई बार मछलियां पैरों की उंगलियों, अंगूठों और नाखूनों को भी खाने लगती हैं, जिस से नुक़सान पहुंचता है.
त्वचा का छिलना
मछलियां जब मृत त्वचा को खाती हैं, तो कई बार वे स्वस्थ त्वचा को भी काट लेती हैं, जिस से त्वचा छिल सकती हैं और रैशेज हो सकते हैं.
मछलियों को भी पहुंचता है नुकसान
इन मछलियों का भोजन आप के डेड स्किन को खाना नहीं है लेकिन चूंकि इन्हें लंबे समय तक भूखा रखा जाता है इसलिए इन्हें मजबूरी में जीवित रहने के लिए डेड स्किन को खाना पड़ता है और ये मछलियों के लिए भी सही नहीं है.
मछलियों का रियूज
मछलियों को हर ग्राहक के बाद बदलना संभव नहीं होता है, इसलिए एक ही मछली कई अलगअलग लोगों के पैरों की मृत त्वचा खाती है. इस से एक व्यक्ति का संक्रमण दूसरे तक पहुंच सकता है.
स्पा करने के दौरान ध्यान रखें
-आपके पैर कटे हुए न हों.
-टब की साफसफाई का ध्यान रखा गया हो. फिश स्पा करवाने से पहले जांच लें कि पोंड या बेसिन में पानी ताजा व पूरी तरह से साफ हो.
-हमेशा ऐसे स्थान का चुनाव करें जहां स्पा के वातावरण की साफसफाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
-सुनिश्चित करें कि फिश स्पा में इस्तेमाल होने वाली मछलियां स्वस्थ हों.
-फिश पेडीक्योर करते समय पैरों से खून निकलने लगें तो पैरों को तुरंत पानी से बाहर निकालें और उसे डेटौल या ऐंटीसैप्टिक दवा से साफ करें.
-आप को पहले से ही कोई शारीरिक समस्या है या चोट लगी है तो ऐसे में फिश पेडीक्योर न करवाएं.
-कमजोर इम्यूनिटी और डायबिटीज के मरीज हैं, तो आप फिश पेडीक्योर कभी न करवाएं.
-अगर आप के पैरों में चोट लगी हो तो फिश स्पा करवाने से बचें, क्योंकि बाद में यह इन्फैक्शन की वजह बन सकता है.
