भारत में प्रदूषित हवा का मसला धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, बाल एवं माताओं में कुपोषण और डायबिटीज के लिए कारक तथ्यों से भी गंभीर मसला है. शहरों में उत्सर्जन की मात्रा की सबसे बड़ी वजह वाहन और उद्योग हैं जबकि ग्रामीण इलाकों में खाना बनाने और खुद को गर्म रखने के लिए  इस्तेमाल की जानेवाली प्राकृतिक वस्तुएं होती हैं. गर्मियों और सर्दियों के मौसम में खराब फसलों को मशीनी उपायों से हटाने की बजाय उन्हें जलाया जाता है जो किसानों के लिए किफायती विकल्प होता है। यही धुएं और स्मोक की बड़ी वजह साबित होती है. प्रदूषित हवा ह्रदयाघात, एलर्जी की वजह, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा जैसी बीमारियां सालाना 20 लाख लोगों को समय से पहले मौत के घाट उतार देती है. इससे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा होती है जिसमें डिप्रेशन का भी शुमार है. प्रदूषित हवा दुनिया की एक विकराल समस्या के रूप में सामने आयी है. जानवर भी इससे अछूते नहीं है. प्रदूषित हवाओं और जहरीली गैस को सांस के रूप में लेने से लाखों जानवर हर साल अपनी जान‌ गंवा देते है.

bhamla-foundation

भारत में विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम का आयोजन भामला फाउंडेशन ने पर्यावरण मंत्रालय और  संयुक्त राष्ट्र संगठन के सहयोग से आयोजित किया. इस साल आयोजित कार्यक्रम की थीम 'बीट द एयर' थी जिसके तहत पूरा देश हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करने का बीड़ा उठाया गया है.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...