महाराष्ट्रीयन पिता सतीश पेडनेकर और हरियाणवीं मां सुमित्रा हुड्डा की बेटी भूमि पेडनेकर ने 17 वर्ष की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था. पहले 6 वर्ष तक बतौर सहायक कास्टिंग डाइरैक्टर काम किया. फिर फिल्म ‘दम लगा के हाइसा’ से अभिनेत्री बन गईं. नारीप्रधान फिल्मों में अभिनय करते हुए भूमि पेडनेकर ने बौलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बना ली है. ‘दम लगा के हाइसा’ के बाद ‘टौयलेट एक प्रेम कथा’ व ‘शुभ मंगल सावधान’ जैसी फिल्में कर चुकी हैं. इन दिनों अभिषेक चौबे के निर्देशन में फिल्म ‘सोन चिरैया’ को ले कर चर्चा में हैं.
नारी पात्र की अहमियत नहीं
भूमि को ज्यादा नारीप्रधान फिल्में ही मिल रही हैं. इस बारे में वे कहती हैं, ‘‘मेरे कैरियर की पहली फिल्म ‘दम लगा के हाइसा’ के प्रदर्शन के बाद मेरे पास लगभग 2 दर्जन पटकथाएं आईं, जिन्हें मुझे ठुकराना पड़ा, क्योंकि इन सभी फिल्मों में नारी पात्र की अहमियत ही नहीं थी. सभी मेरी पहली फिल्म की सफलता को भुनाने के लिए मुझे अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाना चाहते थे. ‘‘अब आप स्वयं अंदाजा लगाइए कि एकसाथ इतने प्रस्ताव ठुकराना मेरे लिए कितना तकलीफदेह रहा होगा, क्योंकि हम सभी जानते हैं कि बौलीवुड में कैरियर को ले कर हमेशा असुरक्षित व अनिश्चितता का माहौल बना रहता है. अपनी पहली फिल्म में मोटी लड़की का किरदार निभा कर शोहरत पाने के बावजूद मैं खुद को स्टीरियो टाइप होने से बचाने में सफल रही.’’
