financial issues in movies : पिछले कुछ दिनों में अभिनेता राजपाल यादव की चेक बाउंस केस में जेल जाने और वहां से रिहा होने की खबरें चर्चा में रही, जिसे ले कर राजपाल यादव काफी चिंतित रहे। लेकिन अंत में वे उस रकम को चुका कर बाहर निकले, जिस में उन्हें सोनू सूद और तेज प्रताप यादव ने साथ दिया.

असल में कोर्ट की काररवाई के मुताबिक साल 2010 में निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजैक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने इस फिल्म के लिए करीब 5 करोड़ रुपए दिए थे, जो ब्याज के साथ करीब ₹9 करोड़ हो गए. इसे चुका न पाने के कारण चेक बाउंस मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में राजपाल यादव को जाना पड़ा था. यह फिल्म राजपाल यादव की पहली निर्देशित और निर्मित हिंदी फिल्म थी, जो फ्लौप रही.

राजपाल यादव ने फरवरी, 2026 में सरेंडर किया और 12 दिन जेल में रहने के बाद अंतरिम जमानत पर रिहा हुए. कोर्ट में हुई काररवाई के अनुसार फिल्म बौक्स औफिस पर सफल नहीं रही और कथित तौर पर अभिनेता को आर्थिक नुकसान हुआ, जिस से वे कंपनी को यह पैसा वापस नहीं कर पाए.

कई कलाकारों के हुए चेक बाउंस

दरअसल, बौलीवुड में चेक बाउंस होना कोई नई बात नहीं है। राजपाल यादव, अमीषा पटेल और राम गोपाल वर्मा जैसे कई सितारे इस में फंस चुके हैं. वर्ष 2017 में एक कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े कानूनी मामले में अमीषा पर भुगतान स्वीकार करने, लेकिन कार्यक्रम में शामिल न होने और बाद में ₹2 लाख का चेक बाउंस होने का आरोप लगा था. फिल्म मेकर राम गोपाल वर्मा को एक सप्लायर द्वारा दर्ज कराई गई चेक बाउंस की शिकायत में फिल्म निर्माता को दोषी पाया गया था.

‘घायल’ जैसी फिल्मों के निर्देशन के लिए मशहूर, राजमोहन संतोषी ने भी एक व्यवसायी को लिए कर्ज को वापस करने में विफल रहने के बाद कानूनी काररवाई का सामना करना पड़ा था. ‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म में नजर आ चुकीं अलका कौशल ने भी एक टेलीविजन परियोजना का निर्माण करने के लिए पंजाब के एक किसान से 50 लाख रुपए उधार लेने के बाद कानूनी समस्या का सामना किया क्योंकि किसान को दिया गया चेक बाउंस हो गया था.

वर्ष 2019 में अंधेरी मैट्रोपोलिटन कोर्ट ने लगभग 3 लाख रुपए के चेक बाउंस के वित्तीय विवाद में कोएना मित्रा को दोषी ठहराया था, जिसे बाद में उन्होंने चुकाया था.

चेक बाउंस है अपराध

भारत में चेक बाउंस होना एक आपराधिक अपराध है, जो परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 138 के तहत आता है. खाते में अपर्याप्त धनराशि (Insufficient Funds) होने के कारण चेक बाउंस होने पर 2 साल तक की जेल, चेक की राशि का दोगुना जुरमाना या दोनों हो सकते हैं. इस में चेक जारी करने के 3 महीने की वैधता अवधि के भीतर उसे बैंक में पेश किया जाना चाहिए. बैंक से बाउंस मैमो मिलने के 30 दिनों के भीतर चेक प्राप्तकर्ता को जारीकर्ता को कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य है. नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर भुगतान न करने पर यह एक गंभीर आपराधिक मामला बन जाता है. 15 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद, अगले 30 दिनों के भीतर मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज की जा सकती है. कंपनी द्वारा जारी चेक बाउंस होने पर उस के निदेशक (Director) भी दोषी माने जा सकते हैं.

क्या है राय

एड फिल्म की ड्रैस डिजाइनर प्रीति सिंह कहती हैं कि हर प्रोजैक्ट के पहले वे 70% पैसे एडवांस में ले लेती हैं, जिस से बाद में परेशानी न हो.

चेक बाउंस अधिकतर फिल्मों में काम करने वाले कलाकारों और टीम में अधिक होती है क्योंकि प्रोजैक्ट बड़ा होता है. अगर फिल्म फ्लौप हो, तो फिल्म मेकर पैसे देने से आनाकानी करते हैं, जिस से चेक बाउंस अधिक होता है.

ऐसे कई कलाकार हैं जिन्हे 75% पैसे ही मिल पाते हैं, फिल्म फ्लौप होने पर पूरा पैसा नहीं मिलता. इंडस्ट्री में कई बार लोग चेक बाउंस को अनदेखा करते हैं, ताकि इंडस्ट्री में उन की छवि खराब न हो और उन्हें काम मिलता रहे क्योंकि किसी कलाकार के पुलिस रिपोर्ट करने पर उन का नाम खराब होता है, इंडस्ट्री उन्हें प्रौब्लेमेटिक समझती है और उन्हें काम मिलना बंद हो जाता है.

टीवी धारावाहिक ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’ फेम अभिनेत्री मीनल वैष्णव कहती हैं कि मेरे चेक कभी बाउंस नहीं हुए क्योंकि मैं पैसे से अधिक काम करने वाली टीम और कहानी पर फोकस करती हूं, जिस से मुझे समय पर पारिश्रमिक मिलता रहे. यह शो कई सालों तक चला, लेकिन पैसे बराबर मिलते रहे. इस के अलावा किसी नए निर्माता, निर्देशक के साथ काम करने से पहले मैं उन के मनी पावर को देखना जरूरी समझती हूं. रिस्क लगने पर काम करने से मना कर देती हूं. फिल्में बड़ी बजट की होती हैं और उस में काम करने वाली टीम बड़ी होती है, ऐसे में बड़े कलाकार अधिकतर प्रौफिट शेयर करते हैं, मसलन अभिनेता अक्षय कुमार, सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान आदि.

फिल्मों में कलाकार भारी फीस के बजाय, फिल्म की कमाई में अपना हिस्सा लेते हैं.

अभिनेता आमिर खान ने फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के लिए अपना पारिश्रमिक माफ कर दिया था क्योंकि साल 2022 में रिलीज हुई यह फिल्म बौक्स औफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, जिस के बाद आमिर ने खुद को जिम्मेदार मानते हुए यह निर्णय लिया और उन्होंने अभिनेता के रूप में फिल्म के लिए कोई पैसा नहीं लिया. अभिनेता अक्षय कुमार को भी कई बार चेक बाउंस का सामना करना पड़ा था। एक बार उन्होंने चेक बाउंस होने पर निर्माता के औफिस से टेप रिकौर्डर उठा लाए थे.

कई बार नियत होती है खराब

कैमरामैन दिनेश बाबर कहते हैं कि उन्होंने एक प्रोडक्शन हाउस के लिए काम किया और आज 3 साल बाद उन की धारावाहिक एअर होने के बाद भी उन के चेक बाउंस हुए, जिसे बाद में वे कैश लेने की कोशिश में लगे हुए हैं.

उन का कहना है कि इंडस्ट्री में केवल कुछ प्रोडक्शन हाउस ही ऐसे हैं, जो समय पर मेहनताना देते हैं. अधिकतर देना नहीं चाहते ताकि कर्मचारी उन्हें छोड़ कर कहीं दूसरी जगह न चले जाएं. हमेशा हर शो की रिलीज के बाद वे घाटा शो करते हैं, बाहर से ताला लगा कर अंदर बैठे रहते हैं, ताकि कर्मचारी को समझ में न आए कि वे अंदर हैं। वे भागतेफिरते हैं और अंत में ऐडजस्टमैंट की बात पर राजी हो कर बचे हुए 25% फीस से 17 या 18% ही पैसा देते है और हमें चुप रहना पड़ता है, ताकि काम मिलता रहे.

औनलाइन पेमेंट का बढ़ा है दौर

इस बारें में शौर्ट फिल्म मेकर विकास मित्रा कहते हैं कि चेक बाउंस आजकल इंडस्ट्री में कम होता है क्योंकि आज सभी का पेमेंट औनलाइन या कैश में कर दिया जाता है, जिसे आर्टिस्ट या टीम वर्कर पहले से ही निर्धारित कर लेते हैं कि पेमेंट कैसे करना है. कुछ क्षेत्रों में आर्टिस्ट डिमांड ड्राफ्ट की सिफारिश करते हैं, ताकि पेमेंट में किसी प्रकार की असुविधा न हो. पोस्ट डैटेड चेक से हमेशा बचने की जरूरत होती है, जिसे अधिकतर फिल्म इंडस्ट्री वाले देते हैं, जो बाउंस हो जाया करती है. नए फिल्म मेकर या निर्देशक से हमेशा ही सावधान रहने की जरूरत होती है, ताकि आप का भुगतान सही समय पर हो सकें.

इंडस्ट्री में काम करने से पहले कुछ बातों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। मसलन :

-पोस्ट डैटेड चेक लेने से बचें

– स्टैब्लिश प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करें

-एग्रीमैंट को सही तरह से पढ़ने के बाद ही साइन करें

-नए फिल्म मेकर के साथ काम करने से पहले उन की मनी पावर को ध्यान में रखें

-चेक के बजाय डिजिटल पेमेंट पर अधिक ध्यान दें आदि.

इस प्रकार इंडस्ट्री में चेक बाउंस होना नई बात नहीं है, लेकिन आज के डिजिटल इंडिया की वजह से इस में कमी अवश्य आई है, लेकिन अभी भी इस में कुछ खामियां रह गई हैं, इसलिए जब भी आप किसी प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करें, उन के हर पहलू को संभावित जांच लें, ताकि आप एक अच्छी जर्नी इंडस्ट्री के साथ तय कर सकें.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...