Crime genre in Indian cinema : मुंबई में सिनेमा और कहानी कहने की दुनिया का एक प्रभावशाली संगम देखने को मिला, जब वरिष्ठ पत्रकार और लेखक एस. हुसैन ज़ैदी की नई पुस्तक Mafia Queens of India, जिसे उन्होंने वैली थेवर के साथ सह-लेखन किया है, का अनावरण रैडिसन ब्लू मुंबई, अंधेरी ईस्ट स्थित मैन्शन में किया गया. फिल्म और साहित्य जगत की कई प्रभावशाली लोग एक साथ जुड़े है , जिनमें राम गोपाल वर्मा, विशाल भारद्वाज, जयदीप अहलावत और कीर्ति कुल्हारी शामिल है. इन सभी ने लेखकों के साथ मिलकर एक रोचक चर्चा की, जिसमें अपराध, शक्ति और मानवीय भावनाओं की जटिल परतों को समझने की कोशिश की गई.
Mafia Queens of India के जरिए ज़ैदी और थेवर उन महिलाओं की अनकही, रोमांचक कहानियों को सामने लाते हैं, जिन्होंने अपने-अपने तरीके से अंडरवर्ल्ड को आकार दिया है. संगठित अपराध पर भारत की सबसे प्रामाणिक आवाज़ माने जाने वाले ज़ैदी ने दशकों तक मुंबई के अंधेरे पक्ष को गहराई और विश्वसनीयता के साथ दर्ज किया है, वहीं थेवर अपनी संवेदनशील और कहानी-प्रधान दृष्टि के साथ इसे और जीवंत बनाते हैं.
इन कहानियों के सार पर बात करते हुए ज़ैदी ने कहा, अपराध की कहानियां हमें इसलिए आकर्षित करती हैं क्योंकि वे गहराई से मानवीय होती हैं. हम केवल किए गए काम से नहीं, बल्कि उसके पीछे की मानसिकता से भी जुड़ते हैं. लेकिन एक कहानीकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी अपराध का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि उसे समझना और सच्चाई के साथ प्रस्तुत करना है.
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राम गोपाल वर्मा ने बात आगे बढ़ाते हुए अपनी बात रखते हुए कहा कि अपराध की दुनिया में महिलाएं अक्सर पुरुषों से अधिक निर्दयता दिखाती हैं, जिससे उनकी कहानियां और भी दिलचस्प बन जाती हैं. वहीं विशाल भारद्वाज ने कहा कि महिला डॉन का विचार अपने आप में कई परतों और दिलचस्प आयामों से भरा होता है, और ज़ैदी अपने अनुभव के कारण इसे गहराई और प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करते हैं.
हल्के-फुल्के लेकिन दिल से जुड़े एक पल में, जयदीप अहलावत ने कहा कि अगर इस किताब की किसी भी कहानी—खासतौर पर “क्लियोपेट्रा” जैसे किरदार—पर फिल्म बनती है, तो वे उसका हिस्सा बनना चाहेंगे और किसी मुख्य भूमिका को निभाने की इच्छा भी जताई.
अभिनय के नजरिए से जयदीप ने कहा, “एक अभिनेता के रूप में मुझे सबसे ज्यादा जो चीज़ आकर्षित करती है, वह है ‘जीवित रहने’ की भावना. शक्ति और प्रसिद्धि बाद में आती हैं, लेकिन इन किरदारों के पीछे सबसे मजबूत प्रेरणा survival ही होती है.”
विशाल भारद्वाज ने कहानी में गहराई के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “अगर आप केवल अपराध दिखाते हैं, तो कहानी एक-आयामी हो जाती है. जो चीज़ इसे दिलचस्प बनाती है, वह है इसका मानवीय पक्ष—मनोविज्ञान, सफर और वे परतें जो किरदार को वास्तविक बनाती हैं.
राम गोपाल वर्मा ने कहा, अपराध के प्रति आकर्षण इस बात को समझने की इच्छा से आता है कि इसके पीछे क्या छिपा है. यह महिमामंडन करने के बारे में नहीं, बल्कि मानसिकता और उस दुनिया को समझने के बारे में है जो हमें दिखाई नहीं देती.
आज के दर्शकों के बदलते नजरिए पर बात करते हुए कीर्ति कुल्हारी ने कहा, “आज के दर्शक अपराध के पीछे के इंसान को समझना चाहते हैं—उनकी प्रेरणाएं, संघर्ष और उनकी वास्तविकता.”
चर्चा में रचनाकारों की जिम्मेदारी का भी ज़िक्र हुआ। ज़ैदी ने दोहराया कि किरदारों को मानवीय बनाना ज़रूरी है, लेकिन उनका रोमांटिसाइज़ेशन नहीं.
“अपराध के परिणाम होते हैं—कभी बाहरी, तो कभी गहराई से मानसिक। वह मनोवैज्ञानिक यात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना स्वयं अपराध,” उन्होंने कहा यह पुस्तक, ज़ैदी की पिछली कृतियों जैसे Black Friday, Dongri to Dubai और Byculla to Bangkok की तरह, वास्तविक कहानियों को सामने लाने की उनकी परंपरा को आगे बढ़ाती है—ऐसी कहानियां जो सिनेमा में भी सफल रूपांतरण के जरिए दर्शकों तक पहुंच चुकी हैं.
कुल मिलाकर, एस. हुसैन ज़ैदी और वैली थेवर ने अपराध की दुनिया का एक प्रभावशाली, मानवीय चित्रण पेश किया है—जहां शक्ति, अस्तित्व और पहचान एक-दूसरे से टकराते हैं, और जहां सबसे दिलचस्प कहानियां अक्सर वही होती हैं जो सबसे कम कही गई हैं.
