Excessive sweating in summer : पसीना आना एक नेचुरल प्रक्रिया है, जो हमारे शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन कई बार जब पसीना ज्यादा आने लगता है, तो यह लोगों के सामने शर्मिंदगी का कारण तो बन ही जाता है. साथ ही यह कई बीमारियों का संकेत भी होता है. इसलिए ज्यादा पसीना आता है तो इसे हल्के में ना लें और इस समस्या को कैसे दूर करें आज हम इसी बारे में बात करेंगे.
क्यों आता है ज्यादा पसीना आना
हाइपरहाइड्रोसिस (Hyperhidrosis)
अत्यधिक पसीना आना, जिसे हाइपरहाइड्रोसिस (Hyperhidrosis) कहते हैं, एक आम स्थिति है जिसमें शरीर के तापमान या शारीरिक गतिविधि से कोई संबंध न होने पर भी हथेलियों, तलवों, बगलों या पूरे शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलता है. हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित लोगों में पसीने की ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं. इसी वजह से ज्यादा पसीना आने लगता है.

बैक्टीरियल इंफेक्शन भी वजह होती है
शरीर में किसी बैक्टैरिया का इंफेक्शन हो जाता है. इसमें हार्ट वॉल्व में सूजन, हडि्डयों से जुड़े इंफेक्शन या कोई अन्य बीमारी हो सकती है.
वजन का ज्यादा होना
ज्यादा वजन होने पर भी जयादा पसीना आता है.
मेनोपॉज
महिलाओं में मेनोपॉज की स्तिथि में हार्मोन चेंज होने के कारण जायदा पसीना आने लगता है.
नशे की लत का होना
जो लोग शराब या सिगरेट ज्यादा लेते है उन्हें भी पसीना ज्यादा आता है.
तला भुना ज्यादा खाने पर
ऑयली चीजों का अधिक सेवन करने से पसीना अधिक आता है.
तनाव और घबराहट
चिंता, घबराहट या तनाव होने पर शरीर का नर्वस सिस्टम अधिक एक्टिव हो जाता है, जिसकी वजह से पसीने का उत्पादन बढ़ जाता है.
पसीना रोकने के लिए क्या करें-
ज्यादा पसीना आने की समस्या को दूर करने के लिए नमक और शराब का सेवन कम कर देना चाहिए.
जिन लोगों को पसीना आने की समस्या है उन्हें हमेशा हल्के कॉटन के कपडे पहनने चाहिए ये पसीने को सोख लेते है.
ज्यादा तलाभुना और मसालेदार खाना खाने से बचाना चहिये इससे पसीना ज्यादा आता है.
नीम्बू पानी पीना चाहिए यह शरीर से टॉक्सिक चीजों को बाहर निकालता है और पसीने की बदबू को भी कम करता है.
बैलेंस्ड डाइट लें. बहुत ज्यादा मसाले वाला भोजन, कैफीन और ऐल्कोहॉल का सेवन करने से बचना चाहिए.

पसीने की बदबू को कैसे दूर करें-
अंडरआर्म्स पर बेकिंग सोडा का घोल अप्लाई करें और 10 से 15 मिनट के बाद पोंछ दें.
इसके अलावा फुल आर्म वैक्सिंग करवाएं, ताकि बालतोड़ की परेशानी से बचा जा सके.
हाइजीन का ख्याल रखें. गीले और पहने हुए कपड़ों को दोबारा पहनने से बचें. इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और दुर्गंध की समस्या बढ़ जाती है.
वर्कआउट के बाद ज़रूर नहाएं अन्यथा आप दिनभर उसी पसीने से जूझते रहेंगे. ये कई बार शरीर में बैक्टिरियल इंफे्क्शन का कारण भी बन सकता है.
इस समस्या से बचाव के लिए अच्छी क्वालिटी के डियो और टेल्कम पाउडर का इस्तेमाल करें.
हमेशा कॉटन के अंडरगारमेंट्स पहनें और दिन में दो बार जरूर नहाएं साथ ही साथ अंडरगारमेंट्स भी चेंज करें.
सफाई का भी विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि पसीने की अधिकता से सिर की त्वचा में दाने निकलने या रैशेज पड़ने की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए हर दूसरे दिन बालों को धोने के लिए माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें.
पसीने को दूर करने का क्लिनिकल सॉल्यूशन क्या है.-
पसीने की ग्रंथि को हटाने से लेकर एंडोस्कोपिक थोरेसिक सिम्पैथेक्टोमी सर्जरी का इस्तेमाल कर अधिक पसीने की समस्या को खत्म किया जाता है.
एंटीपरस्पिरेंट का इस्तेमाल करें
इसके नियमित इस्तेमाल से स्वेट ग्लैंड ब्लॉक होती हैं. रात में सोने से पहले इसे लगाना ज्यादा सही रहता है, जिससे पसीने में एंटीपरस्पिरेंट बह न जाए.
टॉ़पिकल प्रिस्क्रिप्शन (Prescription Topicals)
डॉक्टर सबसे पहले ऐसे एंटी-पर्स्पिरेंट्स लिखते हैं जिनमें Aluminum Chloride Hexahydrate की मात्रा अधिक होती है (जैसे 12% से 20%). इसे रात में सोते समय प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है.
टॉपिकल वाइप्स
अंडरआर्म में लगाने के लिए ऐसी वाइप्स भी आती हैं, जिनके इस्तेमाल से हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या से निपटा जा सकता है.
एंटीपर्सपिरेंट (Antiperspirants): एल्युमिनियम क्लोराइड युक्त क्रीम या स्प्रे का उपयोग, जो पसीने के छिद्रों को बंद करते हैं.
