Underwear hygiene : अंडरगार्मेंट्स का सीधा कॉन्टेक्ट आपकी स्किन से होता है, इसलिए स्टाइलिश होने से कहीं ज्यादा उनका कंफर्टेबल होना जरूरी है और साथ ही साथ साफ-सुथरा होना भी. वेजाइनल हाइजीन को नजरअंदाज करना आपकी सेहत को कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे खरीदने से लेकर सफाई तक पर खास ध्यान देें.

हालाँकि अंडर गारमेंट्स को धोना लोगों को सबसे आसान लगता है. उन्हें लगता है इन्हें धोने में तो कोई मेहनत भी नहीं है बाकि सभी कपड़ों के साथ इन्हें धो दो तो पता भी नहीं चलता कि कब धुल गएँ. लेकिन ऐसा नहीं है National library of medicine में पब्लिश रिसर्च Laundry and Textile Hygiene in Healthcare and Beyond के अनुसार, अंडरगारमेंट्स को सिर्फ धोना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उस से माइक्रोबियल ग्रोथ को हटाना जरूरी है. कई बार लोग सिर्फ अंडरवियर से दाग और गंदगी हटाने में ही रह जाते हैं, लेकिन वह असल में तभी साफ होंगे जब उनके अंदर से बैक्टीरियल ग्रोथ खत्म होगी.

अंडर गारमेंट्स धोने के लिए पानी का तापमान क्या होना चाहिए

जैसा कि ऊपर रिसर्च में बताया गया है कि कपड़ों से माइक्रोबियल ग्रोथ को हटाना बहुत जरुरी होता है और उसके लिए तापमान, केमेस्ट्री और मशीनी प्रोसेस सभी का ध्यान रखना जरूरी है. आपके कपड़ों से माइक्रोबियल ग्रोथ हटाने के लिए उन्हें ठंडे पानी से धोने की जगह ऐसे पानी से धोएं जिनका तापमान 60 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होना चाहिए. कलरफुल अंडरवियर को गुनगुने या गर्म पानी से ही धोएं.

किस तरह का डिटर्जेंट यूज करें

अक्सर घरों में अंडर गारमेंट्स अलग से नहीं धोएं जाते बल्कि उन्हें मशीन में बाकी कपड़ों के साथ डाल दिया जाता है. लेकिन यह सही नहीं है बाकि कपड़ों में आप खुशबूदार क्लीनिंग सोप का इस्तेमाल करते हैं जोकि गलत नहीं है लेकिन अंडरगार्मेंट्स में किसी भी तरह के खुशबूदार डिटर्जेंट का यूज़ ना करें. इससे आपके कपड़ों को नुकसान तो पहुंचता ही है साथ ही इससे आपकी स्किन को भी नुकसान पहुंच सकता है. अंडरगार्मेंट्स में आपको कम डिटर्जेंट यूज करना है और ब्लीच का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है.

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धोते समय धयान दें साबुन अच्छी तरह से निकल जाएँ

अंडर गारमेंट्स को धोते समय ध्यान दें इनको अच्छी तरह से पानी में निकला जाये ताकि उनमे से साबुन के झाग ठीक से निकल जाये. अगर साबुन रह जाएगा तो स्किन में इन्फेक्शन हो सकता है.

रात में अंडर गारमेंट्स पहन कर ना सोएं

माना आपको यह सुनने में अजीब लगेगा लेकिन ऐसा करना वाकई फायदेमंद होता है. इससे उस जगह को हवा मिलेगी और डॉयनेस से बैक्टीरिया भी मर जायेगा. रात को आपकी बॉडी के हर ह‍िस्‍से में हवा लगनी चाह‍िए इससे मॉइश्‍चर खत्‍म होगा और बैक्‍टीर‍िया नहीं बनेंगे. ‘जब हवा ठीक से आर-पार नहीं जा पाती है, तब उस हिस्‍से में गर्मी और नमी बढ़ जाती है. यह नमी और गर्मी बैक्टीरिया या यीस्ट को बढ़ने का मौका देती है, जिससे यूरिन के रास्ते में इन्फेक्शन (यूटीआई) या योनि में यीस्ट इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.”

डेली के लिए कॉटन अंडर गारमेंट्स ही सही रहते हैं

कॉटन पैंटी का चुनाव करना स्पेशली समर सीजन में बहुत अच्छा रहता है. यह किसी भी कपड़े की तुलना में नमी, पसीने या डिस्चार्ज को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में भी सहायता करता है.”जबकि नायलॉन या स्पैन्डेक्स जैसे सिंथेटिक फैब्रिक से बनने वाले अंडरगार्मेंट्स पहनने से वेजाइना की स्किन को नुकसान पहुंच सकता है.

अंडर गारमेंट्स को रिपीट ना करें

कई लोगों के आदत होती है अंडर गारमेंट्स को कई दिन तक चलाते हैं. यह बहुत बुरी आदत है. अपनी पैंटी और ब्रा को हर रोज चेंज करें. वर्ना पैंटी पर लगे पसीने और गंदगी से uti जैसे इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है.

अंडरवियर के लेबल पर सफाई के इंस्ट्रक्शन पढ़ें और फॉलो करें

किसी भी अंडरवियर को खरीदने के बाद उसका लेबल ध्यान से पढ़ें और उसकी साफ-सफाई और रखरखाव उससे जुड़ी जानकारियां के मुताबिक करें. उसी के अनुसार, साबुन या पानी (गर्म या ठंडा) से अंडरवियर की साफ- सफाई करें.

अंडर गारमेंट्स को धूप में सुखाएं

अंडर गारमेंट्स को अगर छाया में सुखाया जायें तो उसके जम्स नहीं मरते. इसलिए अंडर गारमेंट्स को हमेशा धूप में ही सुखाएं ताकि उसके सारे बैक्टीरिया धूप से मर जाएँ.

वर्कआउट करते समय अंडर गारमेंट्स को मॉइश्‍चर से बचाएं

वर्कआउट करते समय बॉडी से पसीना निकलता है जिससे प्राइवेट पार्ट पर रैशेज की समस्या हो जाती है. इसके अलावा आपको ये भी ध्‍यान रखना है क‍ि कपड़े ज्‍यादा टाइट न हो वरना रैशेज होने की समस्‍या जल्‍दी-जल्‍दी र‍िपीट होगी. आपको अपने ल‍िए बहुत ज्‍यादा फैंसी अंडर गारमेंट्स नहीं खरीदने चाह‍िए क्‍योंक‍ि इनमें अलग-अलग मटेर‍ियल इस्‍तेमाल क‍िया जाता है जो आपकी स्‍क‍िन को खराब कर सकता है.

अंडर गारमेंट्स का आरामदायक होना बहुत जरूरी है क्‍योंक‍ि आपको पूरे द‍िन ऑफ‍िस या फील्‍ड पर काम करना है ऐसे में आपको एलर्जी और इंफेक्‍शन से बचने के ल‍िए आराम का ध्‍यान रखना बहुत जरूरी है. अंडर गारमेंट्स ज्‍यादा टाइट नहीं होने चाह‍िए. बहुत से लोग हद से ज्‍यादा टाइट ब्रॉ या अंडरवेयर पहनते हैं. ये भी रैशेज होने का एक कारण है. इसलिए यह जरिऋ है कि वर्कआउट करने के बाद अपने अंडर गारमेंट्स को चेंज करें और धुला हुआ और साफ़ अंडर गारमेंट्स ही पहने. जिससे रैशेज न हो.

हर 6-8 महीने में अपने अंडर गारमेंट्स को बदल लें

अंडर गारमेंट्स की भी अपनी एक उम्र होती है आप उसे सालों साल नहीं चला सकते. इसलिए कुछ कुछ समय पर उसे बदलते रहें ताकि को परेशानी ना हो. अपनी वार्डरोब में हफ्ते के हिसाब से 6 या 7 अंडर गारमेंट्स जरूर रखें ताकि उन्हें अच्छी तरह से धोने और साफ़ करने के टाइम मिल सकें.

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