आजादी  का अर्थ होता है खुद को बंधन से मुक्त करना फिर चाहे वह बंधन डिजिटल आभासी दुनिया में रहने का हो या मोबाइल की स्क्रीन का. खुद को करे आजाद इस डिजिटल दुनिया के बंधन से और कुछ समय बिताएं असली दुनिया में खुले आसमान के नीचे अपनों के साथ और मनाएं अपनी खुशियों की आजादी…

मोबाइल एवं इंटरनैट की आभासी दुनिया से आजाद होने के लिए आवश्यकता है खुद को डिटिजल दुनिया से कुछ समय दूर रहने की. इस के लिए आप डिजिटल डिटौक्स, डिजिटल डाइटिंग कर सकते हैं. इस से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है.

डिजिटल डिटौक्स में आप को कुछ समय के लिए डिजिटल तकनीक जैसे मोबाइल, लैपटौप, सोशल मीडिया इंटरनैट आदि से दूर रहना या दूसरे शब्दों में कहें तो डिजिटल आभासी दुनिया से असली दुनिया में आना ही डिजिटल डिटौक्स है ताकि आसपास की असली दुनिया से जुड़े रहें.

बैठे रहने की लत

यदि हम बात करें कोरोनाकाल की जब कोरोना महामारी के कारण सबकुछ बंद हो गया था बच्चों के स्कूल, औफिस सबकुछ हमारे घर पर आ गए थे हमारा एकदूसरे से मिलनाजुलना, बच्चों का घर के बाहर खेलना बंद हो गया, जरूरत की सारी चीजे, बैंक से संबंधित सारे काम सबकुछ औनलाइन हो गया लेकिन इस का दूरगामी परिणाम यह हुआ कि हम घंटों मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठने को मजबूर हो गए क्योंकि तब हमें सारे काम फिर चाहे वे औनलाइन क्लासेज हों, बच्चों का होमवर्क, शौपिंग, खाना और्डर करना हो, वर्क फ्रौम औफिस हो, मनोरंजन करना हो, अपनों से बातचीत करनी हो, बच्चों को खलेना हो सबकुछ मोबाइल या लैपटौप से ही करने लगे थे जिस के कारण बच्चों और किशोरों में स्क्रीन के सामने बैठे रहने की लत हो गई और अब वे चाह कर भी मोबाइल की स्क्रीन से दूर नहीं रह पा रहे हैं.

वे अपना बहुत सारा समय इस पर व्यतीत कर रहे हैं और जब कुछ समय उन्हें फ्री मिलता है तो वे सोशल मीडिया से जुड़ जाते हैं और अपना मनोरंजन करने के लिए औनलाइन गेम्स खेलने में लग जाते हैं. अपनी खुशियां इस डिटिजल स्क्रीन में ढूंढ़ते हैं अपने आसपास नहीं.

मेरी करीबी दोस्त सुनीता ने बताया कि वह आजकल मोबाइल की लत से दूर रहने के लिए दिन में 3-4 घंटे और छुट्टी के दिन सोशल मीडिया प्लेटफौर्म  जैसे फेसबुक पर, व्हाट्सऐप और ट्विटर पर न ही किसी की पोस्ट देखती है और न ही कुछ पोस्ट करती है ताकि किसी भी तरह की पोस्ट, कमैंट्स, लाइक और शेयरिंग से बच सके क्योंकि उस का बहुत सारा समय उन को देखने और रिप्लाई करने में चला जाता था जिस से कुछ काम अधूरे ही छूट जाते थे क्योंकि दिनभर मोबाइल पर आते अलर्ट, मैसेजस, नोटिफिकेशंस और सोशल मीडिया पोस्ट्स उसे किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित नहीं करने देते थे. हर समय स्क्रीन से जुड़े रहने की लत उसे कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार बना रही थी इसलिए उस ने ऐसा करने का निर्णय लिया.

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उस ने यह भी बताया कि वह आजकल मोबाइल का उपयोग गेम्स खेलने और ऐंटरटेनमैंट के लिए नहीं करती. इन सब ऐक्टिविटीज के लिए वह आउटडोर गेम्स खेलती है. फ्री समय में वह अपनों से बातचीत एवं मिलतीजुलती है ताकि अपना कुछ समय खुले आसमान के नीचे अपनों के साथ बिता सके.

सुनीता के कहे अनुसार स्क्रीन से दूर रह कर वह पहले के मुकाबले ज्यादा स्वस्थ, खुश और बहुत अच्छा महसूस कर रही है मानो किसी बंधन से मुक्त हो गई हो.

गिरफत में युवा

इस छोटी सी स्क्रीन ने सुनीता को ही नहीं न जाने कितने बच्चों और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. अब इस डिजिटल दुनिया से दूरी बनाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो गया है इसलिए अब आवश्यकता है खुद को इस स्क्रीन की लत से आजाद करने की ताकि हम समय रहते अपनेआप को असमय होने वाली मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों जैसे अवसाद, तनाव, अनिद्रा, मोटापा, आंखों से संबंधित रोग, कमर में दर्द आदि से दूर रख सकें और स्क्रीन की लत को कुछ हद तक कम किया जा सके ताकि असली लाइफ और असली दोस्तों के टच में रह सकें, कुछ पल उन के साथ बिता सकें और अपनी खुशियां बांट सकें.

स्क्रीन की लत को कम करने के लिए अपनाएं ये नियम:

सोने से 1 घंटा पहले डिजिटल उपकरण बंद कर दें: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें रात के समय ही फ्री समय मिलता है और बस हम मोबाइल और टीवी के सामने कैद हो जाते हैं, स्क्रीन डिटौक्सिफिकेशन के लिए सोने से 1 घंटे पहले डिजिटल दुनिया जैसे मोबाइल, टीवी और इंटरनैट, सोशल मीडिया जैसे इंस्ट्राग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर से दूरी बना लें और अपनी पसंद की कोई किताब, पत्रिका पढ़ने की आदत डालें और अपने परिवार के साथ बैठ कर गपशप करें.

बाहर गेम्स खेलने जाएं: आजकल औनलाइन गेम खेलने का चलन काफी बढ़ गया है खासकर बच्चे घर के बाहर जाने के बजाय मोबाइल या कंप्यूटर पर गेम खेलना ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिस के कारण मोटापे का शिकार हो रहे हैं. इस से बचने के लिए बच्चे हों या बड़े मोबाइल, टीवी, और इंटरनैट पर गेम्स खेलने के बजाय घर के बाहर खेलने जाएं, दौड़भाग एवं साइक्लिंग करें ताकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके. इस से आप का आलस दूर होगा आप फिट रहेंगे, मोटापा दूर होगा और ऊर्जा से भरा हुआ भी महसूस करेंगे.

मातापिता बच्चों को औनलाइन गेम्स की लत से लाएं बाहर

आजकल बच्चे खेलने घर के बाहर जाने की बजाय औनलाइन गेम मोबाइल या कंप्यूटर पर खेलना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. बच्चों में औनलाइन गेम खेलने की लत बढ़ती जा रही है. कुछ बच्चे लेवल पार करने के लिए अपने मातापिता का पैसा लगा रहे हैं. उन के ऊपर गेम की लत हावी हो रही है और उस के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हैं. हारने पर अपने मातापिता से बात छिपा रहे हैं, शेयरिंग नहीं कर रहे हैं और फिर परेशान हो कर कुछ बच्चे आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं.

इसलिए मातापिता को बच्चों को औनलाइन गेम्स की लत से बाहर लाना होगा एवं उन को जागरूक करना होगा, औनलाइन गेम से दूर रखने के लिए मातापिता को बच्चों का दोस्त बनना होगा, बच्चों के लिए क्वालिटी समय निकालना होगा और उन की पसंद की गतिविधियों में व्यस्त रखना होगा एवं उन की इंटरनैंट की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी ताकि वे किसी भी तरह के साइबर अपराध या फ्रौड, बुलिंग आदि से बच सकें.

मातापिता बच्चों को मोबाइल से दूरी के लिए अपना सकते हैं ये बातें:

बच्चों को ज्यादा वक्त मोबाइल, सोशल मीडिया एवं इंटरनैट पर न गुजारने दें. उन पर नजर रखें. उन के स्मार्ट फोन का उपयोग करने का समय निश्चित करें एवं हफ्ते में 1 दिन डिजिटल फ्री डे का नियम बनाएं.

घर के सब लोग साथ बैठे बातचीत करें, हंसी के ठहाके लगाएं उन की पसंदनापसंद जानें.

उन के साथ बैठ कर कुछ इनडोर गेम्स खेलें, कहानियां सुनाएं एवं पुस्तकें पढ़े.

बच्चों को उन की पसंद की ऐक्टिविटीज में व्यस्त रखें.

बच्चों की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए उन्हें योग एवं मैडिटेशन की आदत को अपनाने को कहें ताकि वे मानसिक एवं शारीरिक रूप से खुद को स्वस्थ रख सकें.

स्क्रीन के सामने बैठ कर खाने से बचें

आजकल अकसर बड़े और बच्चें सभी खाना मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर के सामने बैठ कर या देख कर खाते हैं और कई बार हम आवश्यकता से अधिक खा रहे हैं, जंक  फूड खाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इस का शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है और मोटापे का शिकार हो

रहे हैं, इस से बचने के लिए दिन का एक खाना लंच या डिनर परिवार के साथ बैठ कर करें, आपस में बातचीत करें. कुछ अपनी सुनाएं कुछ उन की सुनें.

आपस में करें संवाद

हम ने अपनेआप को डिजिटल स्क्रीन के सामने कैद कर लिया है. आपस में मिलनाजुलना छोड़ दिया है जिस के कारण हम पास के लोगों से दूर हो गए हैं. आपस में बात करने के बजाय हम मैसेज, व्हाट्सऐप और फेसबुक का सहारा ले रहे हैं, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्दों के बजाय इमोजी का उपयोग कर रहे हैं. कोशिश करें अपने फ्री समय में आपस में बातचीत करें ताकि एकदूसरे से संवाद कर सकें, अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त कर सकें, अपनी मन की बातें एकदूसरे से शेयर कर सकें, यदि किसी को कोई समस्या है तो उसे सुल?ाने में एकदूसरे की मदद करें.

नोटिफिकेशंस बंद करें

सोशल मीडिया पर हर पल आते नोटिफिकेशंस हमें दिनभर व्यस्त रखते हैं क्योंकि जब भी कोई नोटिफिकेशन आता है हम काम बीच में ही छोड़ कर नोटिफिकेशंस देखने में लग जाते हैं, कुछ न करते हुए भी हम व्यस्त रहने लगे हैं और हम अपना बहुत सारा समय इमोजी, रिप्लाई एवं कमैंट देने में लगा देते हैं, इसलिए इस बंधन से मुक्त होने के लिए इस से दूरी बनाना अति आवश्यक है. जिस दिन आप इस दुनिया से दूरी बना लेंगे यकीन मानिए उस दिन आप खुद को आजाद महसूस करेंगे और आप के पास समय ही समय होगा और अधिक ऊर्जा होगी जिस का उपयोग आप अपनी पसंद के काम के लिए कर सकते हैं.

करें डिजिटल डाइटिंग

डिजिटल डाइटिंग में आप को सोशल मीडिया एवं इंटरनैट की दुनिया के इस्तेमाल से कुछ समय के लिए परहेज करना होता है ताकि स्क्रीन टाइम को कुछ हद तक कम किया जा सके  एवं मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को स्वस्थ रखा जा सके.

कुछ समय डिजिटल दुनिया से आजादी आप को अवश्य ही सुकून देगी और असमय होने वाली बीमारियों से मुक्त रखेगी तथा ऊर्जा से भरा हुआ महसूस कराएगी. टैक्नोलौजी से घिरे किशोरों एवं बच्चों के लिए डिटिजल डिटौक्स, डिजिटल डाइटिंग एक थेरैपी का काम करती है.

सब से बड़ी बात है कि आप निरंतर पढ़ने की आदत डालें. पढ़ना का हक बड़ी मुश्किल से मिला है. एक कौंसपिरेसी के जरीए आप से यह हक छीन कर आप के हाथ में मोबाइल पकड़ा दिया गया जिस में आप की चौरस बहुत कम हैं और इसी के साथ आप के बहुत से राइट्स, अब डेटा के समुद्र में खो रहे हैं. आप अपनी चाहत के हिसाब से क्या पढ़ना है नहीं चुनते टैक कंपनियों की चाहत के अनुसार चुनते हैं.

यह आप के हकों को छीन रहा है. मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी आप की इच्छानुसार चलें, आप इनकी सुविधानुसार न चलें. ये मंदिर की मूर्तियां हैं जहां आप गुलाम बन कर रह जाते हैं.

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